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जीवन का सत्य और आत्मबोध

चर्म औ अस्थि की देह को ही बनाया है घर।तो अपनी आत्मा को इसका मेहमान मानिए।। छल प्रपंचों में ही नित लगे हो सदा।फिर भी मां औ पिता को वरदान…