पुलिस अधिकारियों पर अभद्रता व धमकी देने का आरोप, आश्वासन के बाद भी कार्रवाई न होने से नाराज पत्रकार ने फिर सौंपा शिकायती पत्र

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से नाराज पत्रकार दिनेश रौनियार ने अब सपरिवार आत्मदाह की चेतावनी देकर पुलिस-प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पत्रकार ने रविवार को अधिकारियों को दोबारा शिकायती पत्र सौंपते हुए कहा है कि यदि सात सितंबर की शाम तक उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह ठूठीबारी थाने के गेट पर सपरिवार आत्मदाह करेंगे। चेतावनी के बाद पुलिस-प्रशासन में हलचल तेज हो गई है।
पत्रकार ने ठूठीबारी कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक अमित कुमार सिंह और दरोगा अनूप तिवारी पर कथित रूप से अभद्रता, गाली- गलौज और धमकी देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बीते दो सितंबर को पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचे थे। आरोप है कि इस दौरान उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की गई और मारपीट की धमकी दी गई। पत्रकार ने पुलिसिया पूछ-ताछ के नाम पर मानसिक रूप से परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया है।
पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दिनेश रौनियार ने चार सितंबर की सुबह करीब 11 बजे ठूठीबारी में आमरण अनशन शुरू किया था। करीब नौ घंटे बाद निचलौल क्षेत्राधिकारी रविंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और पत्रकार को समझाने का प्रयास किया।
पत्रकार के अनुसार, क्षेत्राधिकारी ने संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद उन्होंने अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया था। उनका आरोप है कि अनशन समाप्त कराने के बाद भी अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।कार्रवाई नहीं होने से नाराज पत्रकार ने छह सितंबर को दोपहर करीब 12:30 बजे अधिकारियों को दोबारा लिखित शिकायत दी। शिकायती पत्र में उन्होंने अपनी पूर्व शिकायत और आमरण अनशन के दौरान मिले आश्वासन का उल्लेख करते हुए मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सात सितंबर की शाम तक उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह ठूठीबारी थाने के गेट पर सपरिवार आत्मदाह करेंगे। साथ ही उन्होंने किसी भी अप्रिय घटना के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।
पत्रकार की इस चेतावनी के बाद मामला गंभीर हो गया है। अब पुलिस- प्रशासन के सामने शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और नियमानुसार कार्रवाई करने की चुनौती है। वहीं, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज है। पत्रकार का कहना है कि वह न्याय और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि अधिकारियों की ओर से शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है और सात सितंबर की तय समय-सीमा से पहले प्रशासन मामले को किस तरह सुलझाता है।