अस्सी का वह दौर
था, रिश्तों में था प्यार।अब रिश्ते हैं फोन में, सूना है घर-द्वार॥थोड़ा था पर बाँटकर, खाते थे परिवार।अब थाली भरपूर है, फिर भी मन बीमार॥कच्चे घर में प्रेम था, पक्के…
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था, रिश्तों में था प्यार।अब रिश्ते हैं फोन में, सूना है घर-द्वार॥थोड़ा था पर बाँटकर, खाते थे परिवार।अब थाली भरपूर है, फिर भी मन बीमार॥कच्चे घर में प्रेम था, पक्के…
जर्जर इमारतें गिरती रहीं, तंत्र सोता रहा,दीवारों की दरारें खूब चीखती रहीं,हमेशा शहर खामोश होता रहा।किसी छत ने पहले ही कहा था—“अब मुझमें दम नहीं है,”किसी खंभे ने भी काँपकर…
ज़नाब, जूते न गंदे हो जाएँ युवा साहब के,देखो इंसानियत को कीचड़ में बहा दिया।इस उम्र में उन्हें लाठी का सहारा देना था,उस उम्र में बुजुर्ग को ही घोड़ा बना…
सागर की धरती रो पड़ी, आँखों में है नमी,किसने घोला ज़हर, बाँटी हैं मौत की ग़मी?जाम समझ बढ़े, “ज़िंदगी” हाथ से छूट गई,घर की चौखट सूनी, लाखों उम्मीदें टूट गईं।वो…
नदियाँ अपना रौद्र रूप धरती हैं, तो सिर्फ़ घर नहीं बहते- बह जाते हैं सपने भी, किसी माँ की उम्मीद, किसी पिता की प्रतीक्षा, बच्चों की आँखों में पलता कल…
✍️ विजय गुंजन स्नेह है, अनुराग है, पवित्रता का बंधन है,ममता भरे एक धागे का हृदय से वंदन है।अंतरिक्ष-सा विस्तार लिए, प्रकाशमय विश्वास का,राखी का यह पर्व तो समता का…
✍️ संजय एम. तराणेकर कलाई पर बंधता धागा है,पर बंधता है उससे विश्वास,बहन की आँखों में सपने,भाई के मन में उसका आकाश। न रेशम की चाहत इसमें,न सोने का कोई…
सुन कर मन की व्यथा धरा की ,आकाश को रोना पड़ेगाएक दिन ऐसा आएगाजब क्षितिज को खोना पड़ेगा सूर्य को मनोरोग हुआ हैउसका धूप से वियोग हुआ हैछल करके उजाले…
✍️ सोनम सोनी आज मन का सागर शांतहो गया — क्यों ।वो उथल-पुथल, हलचल हलचल,उलझन सब शांत हो गया … क्योंमन की लहरें जो बार-बार इच्छा केबड़े पत्थरों से टकरा…
एनसीसी शिविर में 500 कैडेट्स ने ली नशा मुक्ति की शपथ गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित एनसीसी वार्षिक प्रशिक्षण शिविर के दौरान गुरुवार को नशा…
✍️ विजय गुंजन मानवता है संकट मेंअब ईश्वर तेरी परीक्षा हैह्रदय भरें हैं दुःख पीड़ा सेक्या ये ही तेरी इच्छा है ? धनिकों को आशीष दियादरिद्र जनों को शापबिना वसन…
✍️ विजय गुंजन जीवन के कुरुक्षेत्र में हर मोड़ पर चक्रव्यूह रचे हैंचाहे जितना प्रयत्न कर लो युद्ध तो करना ही पड़ेगाअर्जुन का गांडीव है ये मनऔर विचार गदा भीम…
✍️ विजय गुंजन भारत की भाग्यरेखा से भ्रष्टाचार का अंधकार मिटे,जन-जन की चेतना से नवक्रांति का बिगुल फूटे।उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक,सही अर्थों में तभी होगी जय भारत…
पेड़ लगाना ही नहीं, रखना भी है ध्यान।जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।। पाँच जून के दिन सभी, लें ऐसा संकल्प।सूखे पौधों को मिले, जीवन का फिर विकल्प।।सेवा का…
-डॉ. सत्यवान सौरभ पोता प्यारा दादा जी का,बैठे उनके पास।दिनभर उनसे बातें करता,हँसता बारह मास। दादा जी जब बाहर जाते,पीछे-पीछे जाता।छोटी-छोटी प्यारी बातें,सबको खूब सुनाता। दादा जी की लाठी लेकर,चलता…