लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में भारतीय भाषाओं को शिक्षा और ज्ञान के माध्यम के रूप में मजबूत करने की दिशा में दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में भारतीय भाषा पुस्तक योजना के राज्य स्तरीय क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों के विकास और भारतीय भाषाओं में ज्ञान सामग्री के प्रसार को लेकर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
विश्वविद्यालय और शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने की। कार्यक्रम में भारतीय भाषा समिति के शैक्षणिक समन्वयक डॉ. चंदन श्रीवास्तव, प्रो. शैलेश मिश्रा और कार्यक्रम संयोजक डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे।

दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद मां सरस्वती और बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में प्रो. उदयन मिश्र ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी। कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार और पुनरुत्थान के लिए इसे केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। दैनिक जीवन, कार्यालयीन कार्य और संवाद में हिंदी के सहज प्रयोग को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाषा के प्रति अपनत्व मजबूत करने के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
भारतीय भाषा समिति के शैक्षणिक समन्वयक डॉ. चंदन श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी भारतीय भाषाओं के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को मातृभाषा व क्षेत्रीय भाषाओं में सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न भारतीय भाषाओं में परीक्षाओं के आयोजन जैसी पहल भाषाई विविधता को सम्मान देने के साथ भारतीय भाषाओं को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं।
प्रो. शैलेश मिश्रा ने कहा कि भारतीय भाषा पुस्तक योजना भाषा के संरक्षण और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। भारतीय भाषाओं, खासकर हिंदी को ज्ञान और शिक्षा का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए पाठ्यक्रमों में अधिक स्थान देने के साथ विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और विचारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
कार्यशाला में ‘भारतीय भाषा पुस्तक योजना : एक परिचय’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित हुआ। इसमें भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों के विकास, प्रकाशन और प्रसार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। विभिन्न राज्यों की प्रोफाइल प्रस्तुति के साथ राज्य कार्यान्वयन योजना और उससे जुड़े प्रारूपों पर भी विचार-विमर्श हुआ। समूह कार्य के माध्यम से प्रतिभागियों ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर व्यावहारिक सुझाव साझा किए।
आयोजकों ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में पुस्तक प्रकाशन को गति देना और राज्य स्तर पर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना है। अंत में डॉ. लता बाजपेयी सिंह ने आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से आए शिक्षक, प्रतिभागी, बीबीएयू के शिक्षक और गैर-शिक्षण अधिकारी मौजूद रहे।