
वॉशिंगटन/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास एक नया ‘एक्सक्लूजन ज़ोन’ यानी वर्जित क्षेत्र बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के नए प्रमुख मोहसेन रेज़ाई ने रविवार को सरकारी टेलीविजन पर इसकी पुष्टि की। उन्होंने संकेत दिया कि इस क्षेत्र की घोषणा आने वाले दिनों या हफ्तों में की जा सकती है।
रेज़ाई के मुताबिक प्रस्तावित क्षेत्र अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी वाले इलाके से शुरू होकर होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में जाएगा और फारस की खाड़ी तक फैलेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले और होर्मुज से गुजरने के इरादे से आगे बढ़ने वाले जहाजों की पहचान होने पर उन्हें ईरान की प्रतिबंध सूची में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, ईरान जिस स्थान को अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की शुरुआत मान रहा है, उसकी सटीक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अमेरिका की ओर से की जा रही नाकेबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात पर दबाव बढ़ाना बताया गया है। अमेरिकी सेना के अनुसार इस अभियान में 20 से अधिक युद्धपोत लगाए गए हैं। रविवार तक 92 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदले जाने और तीन जहाजों को निष्क्रिय किए जाने की जानकारी भी अमेरिकी पक्ष ने दी।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव ऐसे समय बढ़ रहा है जब दोनों देशों के बीच बातचीत विफल हो चुकी है और सैन्य कार्रवाई का नया दौर शुरू हो गया है। ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करने वाले कुछ जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी है। रविवार को तेहरान ने दावा किया कि उसने होर्मुज में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक अमेरिकी मानवरहित जहाज को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया।
करीब एक महीने की शांति के बाद पिछले सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से हमले शुरू हुए। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के दक्षिणी तटीय इलाके संघर्ष के प्रमुख केंद्र बन गए हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी बमबारी में कम से कम पांच लोगों के मारे जाने की भी खबर सामने आई थी।
अमेरिका ने सैन्य दबाव के साथ आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान को घेरने की रणनीति अपनाई है। ट्रंप प्रशासन ईरानी फंड से जुड़े विदेशी वित्तीय संस्थानों पर भी दबाव बढ़ा रहा है। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि वर्षों से प्रतिबंधों का सामना करने के कारण उसने तेल कारोबार और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाए रखने के वैकल्पिक रास्ते विकसित कर लिए हैं।
रेज़ाई ने अमेरिका के साथ बातचीत टूटने के बाद मध्यस्थ देशों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार पाकिस्तान, कतर और ओमान जैसे देशों से ईरान को उम्मीद थी कि वे मध्यस्थ के तौर पर किसी भी पक्ष द्वारा समझौते का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में हस्तक्षेप करेंगे। अब तेहरान ने संकेत दिया है कि वह भविष्य की कूटनीति में अधिक ठोस गारंटी चाहता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। फारस की खाड़ी और इसके आसपास का यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के मुताबिक संघर्ष से पहले इस मार्ग से प्रतिदिन औसतन करीब 90 लाख बैरल तेल गुजरता था। उनका कहना है कि क्षेत्रीय पाइपलाइनों को भी शामिल करने पर मौजूदा तेल प्रवाह संघर्ष से पहले के स्तर का लगभग दो-तिहाई या उससे अधिक हो सकता है।
यदि ईरान वास्तव में होर्मुज के आसपास वर्जित क्षेत्र लागू करता है और जहाजों की आवाजाही पर सख्ती बढ़ाता है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। तेल टैंकरों की आवाजाही में बाधा आने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री बीमा, परिवहन लागत और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में हर नई सैन्य या नौसैनिक गतिविधि पर दुनिया की नजर टिकी हुई है।