Tag: विजय कनौजिया कविता

नया साल, पुरानी पीड़ा और नया हौसला: नूतन वर्ष मनाएंगे

नूतन वर्ष मनाएंगे साल नया और हाल पुरानाकुछ सुनना कुछ उन्हें सुनानाकुछ पाया कुछ खोया सबनेजैसा था अपनाया हमनेशिकवे और गिले थे सारेउनमें भी सब रहे हमारेजद्दोजहद रही रोटी कीबात…