त्याग, तपस्या और समर्पण से ही भगवान की प्राप्ति संभव: किशोरी शरण जी महाराज
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। भगवान स्वयं साक्षात यज्ञ हैं और समिधा भी। संसार का कोई भी कार्य ईश्वर की कृपा और भूमिका के बिना पूर्ण नहीं हो सकता। इसलिए मनुष्य…
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जब हनुमान ने स्वयं को पहचाना: लंका-गमन से पूर्व आत्मबोध की दिव्य लीला रामकथा का प्रत्येक प्रसंग केवल इतिहास नहीं, बल्कि आत्मबोध, भक्ति और कर्तव्य का जीवंत दर्शन है। एपिसोड–11…
जब-जब धर्म पर संकट आया, तब-तब भगवान हनुमान ने अपनी अद्भुत शक्ति, असीम भक्ति और अटूट निष्ठा से संसार को दिखाया कि सच्ची श्रद्धा क्या होती है। श्रीराम के प्रति…