निंदा: आत्म निरीक्षण
मानव जनित स्वभाव विचित्र है,जो व्यक्ति उसे अच्छा लगता है,उसकी सब बुराइयाँ भूल जाता है,बुरा बर्ताव अच्छा लगने लगता है। और जो व्यक्ति उसे बुरा लगता है,उसकी अच्छाइयाँ भी भूल…
निष्पक्ष खबर, सशक्त विचार
मानव जनित स्वभाव विचित्र है,जो व्यक्ति उसे अच्छा लगता है,उसकी सब बुराइयाँ भूल जाता है,बुरा बर्ताव अच्छा लगने लगता है। और जो व्यक्ति उसे बुरा लगता है,उसकी अच्छाइयाँ भी भूल…
“हे परशुराम, अब कब तक इंतजार करें?” आज के दौर में परशुराम की शिक्षा और आदर्श हमें सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके संघर्ष, न्याय के…
बिश्नोई समाज राजस्थान का एक अनूठा समुदाय है जो सदियों से पेड़-पौधों और वन्य जीवों की रक्षा में अपना जीवन समर्पित करता आया है। यहां की महिलाएं घायल हिरणों को…
अक्षय तृतीया का दिन दान-पुण्य,गरीबों, जरूरतमंदों को दान करने,सोना खरीदने, शुभ कार्य के लिएअत्यंत शुभ मुहूर्त माना जाता है। श्रद्धापूर्वक पूजा, दान पुण्य करना,भौतिक सुख-समृद्धि प्राप्त करना,भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी…
विश्व पशु चिकित्सा दिवस हर साल अप्रैल के अंतिम शनिवार को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पशु चिकित्सकों की भूमिका को सम्मान देना और पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण…
नेताओं की मोहब्बत और जनता की नादानी कभी किरण चौधरी और शशि थरूर मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ़ खड़े होते हैं, कभी हिंदू-मुस्लिम के नाम पर पार्टियों की नीतियाँ बँटती…
पुरे देश एवं दुनिया में पहलगाम में हुए 26 पर्यटकों की हत्या की निंदा हो रही है,पुरे देश के हिन्दुओं में आक्रोश की भावना है तथा मरने वालों के प्रति…
आलेख-बादल सरोज इन दिनों अब मुसलमानों पर हेज उमड़ रहा है। आजादी के बाद का सबसे बड़ा “क़ानून बनाकर संपत्ति हड़पो” घोटाला वक्फ कब्जा कांड करने के साथ ही देश…
तेज़ होती गर्मी, घटते जलस्रोत और बढ़ती कंक्रीट संरचनाओं के कारण पक्षियों के लिए पानी और छांव जैसी बुनियादी ज़रूरतें भी दुर्लभ होती जा रही हैं। परिंदे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र…
मीडिया में लोक कल्याण और लोक मंगल की भावना आज के वर्तमान परिदृश्य में मेरा और ज्यादातर निर्विवादित, निष्पक्ष और निर्भीक सोच के भारतीयों का यह मानना है कि लोकतन्त्र…
आजकल लोग निजी झगड़ों और रिश्तों की परेशानियों को सोशल मीडिया पर लाइव आकर सार्वजनिक करने लगे हैं, जहां आधी-अधूरी सच्चाई दिखाकर सहानुभूति बटोरी जाती है। ‘सुट्टा आली’ और ‘मुक्का…
“डिग्री से दक्षता तक: शिक्षा प्रणाली को उद्योग से जोड़ने की चुनौती” “डिग्री नहीं, दक्षता चाहिए: नई अर्थव्यवस्था की नई ज़रूरतें” “कुशल भारत की कुंजी: उद्योग अनुरूप विश्वविद्यालय शिक्षा”वर्तमान में,…
जलवायु संकट की चुप्पी में दबी औरतों की पुकार 2025 बीजिंग इंडिया रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन भारत की ग्रामीण महिलाओं को असमान रूप से प्रभावित कर रहा है। सीमित…
वट-वृक्ष की शीतल छाया में,बैठे थे दो प्राणी चुपचाप—एक चंचला चपल गिलहरी,दूजा हरा-पीला तोता आप। थाली में कुछ दाने गिरे थे,ना पूछी जात, ना वंश, ना गोत्र।नहीं कोई मंत्र, न…
कला का काम समाज को जागरूक करना है, उसकी विविधताओं को सम्मान देना है, और उस आईने की तरह बनना है जिसमें हर वर्ग खुद को देख सके। लेकिन जब…