Category: अन्य खबरे

प्रधानमंत्री बोले तो बोले क्या?-संजय पराते

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पीड़ितों के आंसू पोंछने कश्मीर जाने के बजाए सीधे बिहार के मधुबनी में चुनावी सभा में जाकर आतंकवादियों को अंग्रेजी में ललकारने और उन्हें…

फिर आएगा गौरी इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक का सबक

क्या पाकिस्तान के साथ भी हम वही भूल दोहरा रहे हैं? आज़ादी के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई बार समझौते और संघर्षविराम की कोशिशें की हैं, लेकिन पाकिस्तान…

माचो राष्ट्रवाद-अरुण माहेश्वरी

सीमा पर जब गोलियाँ चलती हैं, बंकर ध्वस्त होते हैं या कुछ सैनिक शहीद होते हैं, कुछ नागरिकों की भी जानें जाती है तो यह सब सीमा पर होने वाली…

“माँ का आँचल – प्रेम की छाँव, बलिदान का गीत”

माँ केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन की पहली गुरु, मार्गदर्शिका और सबसे करीबी मित्र है। उसकी ममता जीवनभर हमें सुरक्षा, सुकून और संस्कार देती है। माँ का आशीर्वाद…

माँ तुझे सलाम’-हरवंश डांगे

आलेख माँ संवेदना हैं, भावना हैं, एहसास हैं, माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है। माँ सिर्फ एक शब्द नहीं जीवन की वह भावना होती है जिसमें स्नेह,…

संकट का व्यापार महंगाई मुनाफाखोरी और सरकारी चेतावनी

राशन कालाबाजारी पर सरकारी सख्ती जमीनी हकीकत और खोखले वादे राशन की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के दावे एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या…

एक था पाकिस्तान इतिहास के पन्नों में सिमटता सच

सिंदूर की सौगंध ‘एक था पाकिस्तान’ की गूंज “एक था पाकिस्तान” – ये केवल तीन शब्द नहीं, बल्कि इतिहास की एक गहरी दास्तां है। यह उस विभाजन का प्रतीक है,…

असम्भव को सम्भव

भूकम्प के झटके आये, नेपाल हिला,भारत, लंका, पाकिस्तान हिल गये,प्रभू मसीह, अल्लाह व भगवान कहाँ,हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, भी गये। प्रकृति के आगे है बेवश हर इंसान,हैं समान सब उसकी…

उर्दू: साझी विरासत का प्रतीक

भारत सांस्कृतिक، धार्मिक और भाषाई विविधता एवं समरसता का देश है। यहाँ हज़ारों किस्म की जबानें और बोलियां प्रचलित हैं। हमारी परंपराओं में विभिन्न प्रकार के धर्म-संप्रदाय, रंग-नस्ल, रीति-रिवाज, वेश-भूषा…

क्या किसी की भूख की तस्वीर लेना जरूरी है?

“सोशल मीडिया युग में करुणा की कैद” सोशल मीडिया के युग में भलाई और करुणा अब मौन संवेदनाएँ नहीं रहीं, वे कैमरे के फ्रेम में क़ैद होती जा रही हैं।…

भूल जाइए पहलगाम आइए बद्रीधाम-राकेश अचल

रायपुर/छत्तीसगढ़ (राष्ट्र की परम्परा)। घटनाएं-दुर्घटनाएं भूलने के लिए ज्यादा, याद रखने के लिए कम होती हैं। आपको भी सरकार की तरह 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हत्याकांड को भूलकर अपने…

अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवसइंसान का इंसान से हो भाईचारा

शिकागो के अमर शहीदों के संघर्ष और त्याग के कारण आठ घंटे काम का अधिकार हम मेहनतकशों और सर्वहारा वर्ग ने प्राप्त किया है। इस अधिकार पर अब हमले हो…

मजदूर दिवस- एक दिन सम्मान साल भर अपमान

विशेष———मजदूर दिवस केवल एक तारीख नहीं, श्रमिकों की मेहनत, संघर्ष और हक की पहचान है। 1 मई को मनाया जाने वाला यह दिन उस आंदोलन की याद है जिसने काम…

नेताओं की देशभक्ति की अग्निपरीक्षा सेना में बेटा भेजो पेंशन लो

भारत में एक बार विधायक या सांसद बन जाना आजीवन पेंशन की गारंटी बन चुका है, चाहे उनका संसदीय रिकॉर्ड शून्य क्यों न हो। वहीं, सीमाओं पर तैनात सैनिक हर…