Category: संपादकीय

जलियांवाला बाग से लंदन तक: स्वाभिमान का अमर प्रतीक क्रांतिवीर उधम सिंह

जलियांवाला बाग से लंदन तक: स्वाभिमान का अमर प्रतीक क्रांतिवीर उधम सिंहअदम्य साहस, अटूट संकल्प और राष्ट्र के स्वाभिमान के लिए सर्वस्व अर्पित कर देने का नाम है- क्रांतिवीर उधम…

सड़क सुरक्षा: प्रशासनिक आदेश से सामाजिक जिम्मेदारी तक

सड़क सुरक्षा आज महज़ यातायात नियमों का विषय नहीं रही, बल्कि यह समाज की संवेदनशीलता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की असली परीक्षा बन चुकी है। हर दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाएं…

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस: अधिकार जानना ही सच्ची जागरूकता है

24 दिसंबर को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम केवल उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि बाज़ार व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ भी…

नरसिम्हा राव की नीतियों से भारत बना आर्थिक महाशक्ति

भारत के आर्थिक इतिहास में 1991 का वर्ष एक युगांतकारी मोड़ है। यह वही दौर था जब देश गहरे वित्तीय संकट से गुजर रहा था। विदेशी मुद्रा भंडार समाप्ति की…

“मैं मर नहीं रहा हूँ, बल्कि स्वतंत्र भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूँ”: राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी का अमर संदेश

काकोरी ट्रेन एक्शन अमर शहीद राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को स्मरण करते हुए नवनीत मिश्र का आलेख भारतीय स्वाधीनता संग्राम का इतिहास केवल तिथियों और घटनाओं का क्रम नहीं है, वह उन…

रहीमदास: नीति, भक्ति और मानवीय करुणा का शाश्वत स्वर

पुनीत मिश्र “जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग। चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥”यह दोहा केवल काव्य-सौंदर्य नहीं, बल्कि मनुष्य के चरित्र का दार्शनिक उद्घोष है। चन्दन…

अंकों की दौड़ से आगे- शिक्षा में संस्कारों की कमी और समाज पर उसका असर

आज के भारत में शिक्षा को सफलता की कुंजी माना जाता है, जहाँ अच्छे अंक, नामी संस्थान और ऊँचा वेतन ही उपलब्धि का पैमाना बन चुके हैं। स्कूल से लेकर…

विजय दिवस: शौर्य, संकल्प और राष्ट्रगौरव का अमर अध्याय

नवनीत मिश्र 16 दिसंबर भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है, जब पराक्रम ने अत्याचार को परास्त किया और न्याय ने इतिहास की धारा मोड़ दी। 1971 में ढाका के…

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस: ऊर्जा बचत से ही सुरक्षित होगा भविष्य

नवनीत मिश्र भारत में प्रत्येक वर्ष 14 दिसम्बर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य देशवासियों को ऊर्जा की सीमित उपलब्धता, उसके विवेकपूर्ण उपयोग और…

आवारा कुत्तों की गिनती से क्लासरूम तक: शिक्षक बोझ का सच

सरकारी स्कूलों में गिरते शिक्षा स्तर के लिए कौन जिम्मेदार? शिक्षक या सरकार: ‘शिक्षक पर बढ़ता गैर-शैक्षणिक बोझ’ बना राष्ट्रीय बहस भारत में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता लगातार सवालों के…

बाबा राघव दास: जनसेवा और करुणा के शिखर पुरुष ‘पूर्वांचल के गांधी’

जयन्ती पर विशेष नवनीत मिश्र बाबा राघव दास आधुनिक भारत के उन दुर्लभ महापुरुषों में शामिल किए जाते हैं, जिन्होंने साधु जीवन को केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित न रखकर…

गरिमामय जीवन और मानवता का धर्म: मानवाधिकारों का इतिहास और वर्तमान संदर्भ

विश्व मानवाधिकार दिवस का संदेश स्पष्ट है कि प्रत्येक मनुष्य को मर्यादापूर्वक एवं गौरवपूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। यह अधिकार केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का मूल…

बदलते भारत की सैन्य सोच के शिल्पकार: जनरल बिपिन रावत

पुनीत मिश्र भारत के आधुनिक सैन्य इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल अपनी पदस्थापना से नहीं, बल्कि अपने दृष्टिकोण और निर्णायक नेतृत्व से एक युग को प्रभावित…

तेज बहादुर सप्रू: न्यायपरक विचारधारा और राष्ट्रनिर्माण का उज्ज्वल स्वर

नवनीत मिश्र भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल उन वीर सेनानियों का स्मरण नहीं करता जिन्होंने बंदूकों और नारों के साथ लड़ाई लड़ी, बल्कि उन विद्वान चिंतकों, समाज सुधारकों…

बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ : राष्ट्रीय चेतना के प्रखर कवि और बहुआयामी साहित्यकार

हिंदी साहित्य के स्वर्णिम इतिहास में बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन’ उन रचनाकारों में प्रमुख हैं, जिन्होंने अपनी कविता, पत्रकारिता और चिंतन के माध्यम से स्वाधीनता आंदोलन को वैचारिक धार प्रदान…