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रक्षा बंधन: रिश्तों की डोर से राष्ट्र की परम्परा तक

रक्षा बंधन केवल कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी के उस रिश्ते का उत्सव है, जिसकी डोर समय के साथ…

गीता की दृष्टि में सात्त्विक विवेक: कर्तव्य, धर्म और मोक्ष का मार्ग

विवेक को बुद्धि, ज्ञान, प्रज्ञा, सूझबूझ अथवा समझदारी भी कहा जाता है। धरती के सभी प्राणियों में विवेक की सबसे अधिक मात्रा मनुष्य के पास है। श्रीमद्भगवद्गीता में विवेक, उसकी…

युद्ध विभीषिका

युद्ध की विभीषिका में युवा सैनिक,जिसे जानते नहीं उसे जान से मारते हैं,वे न उसे प्रेम करते हैं न घृणा करते हैं,बस किसी का बर्बर आदेश मानते हैं। और ऐसे…

श्री यदुधाम पीठ: आस्था के आवरण में सत्ता-साधना का नया प्रयोग

गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में की गई यह घोषणा जितनी ऊँची आवाज़ में समाज, पहचान और आत्मसम्मान की बात करती है, उतनी ही साफ़ तौर पर वह राजनीतिक रणनीति और…

महादेव गोविंद रानाडे: राष्ट्रसेवा और सामाजिक चेतना के अग्रदूत

पुनीत मिश्र महादेव गोविंद रानाडे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान चिंतकों और समाज सुधारकों में अग्रणी थे, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए अपने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग किया।…

मकर संक्रांति: सूर्य की गति, संस्कृति की चेतना

नवनीत मिश्र सूर्य की गति और उत्तरायण का वैज्ञानिक आधार मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण की यात्रा आरंभ…

विश्व हिंदी दिवस: माँ भारती के माथे पर सजी भाषा की अमिट आभा

हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना की धुरी है। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर यह अनुभूति और गहरी हो जाती है कि हिंदी माँ…

पश्चिम बंगाल से उठता सवाल: क्या सत्ता कानून से ऊपर हो सकती है?

नवनीत मिश्र पश्चिम बंगाल की घटना केवल एक क्षणिक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं और संस्थागत संतुलन पर गहराते संकट की ओर संकेत करती है। जब कोई केंद्रीय एजेंसी…

दूषित हवा, दूषित समाज और मोहन राकेश की चेतावनी

जयंती पर विशेष: पुनीत मिश्र “जिस हवा में फूल अपने पूरे सौन्दर्य के साथ नहीं खिल सकता, वह हवा अवश्य दूषित हवा है। जिस समाज में मनुष्य अपने व्यक्तित्व का…

पंचशील ध्वज के रंगों में समाया बुद्ध का जीवन दर्शन

नवनीत मिश्र आज का मानव समाज तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। भौतिक उपलब्धियाँ बढ़ी हैं, लेकिन मानसिक अशांति, असहिष्णुता और वैचारिक भ्रम भी उतनी ही तेजी से…

शहीद शेख भिखारी: गुमनाम नायक, ऐतिहासिक अन्याय और आज के भारत में सांप्रदायिक सद्भाव की ज़रूरत

रांची (राष्ट्र की परम्परा)8 जनवरी 1858 को चुटुपालु घाटी में फांसी पर चढ़ाए गए शहीद शेख भिखारी की पुण्यतिथि हर वर्ष आती है, लेकिन झारखंड में उनकी स्मृति वैसी नहीं…

श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया सकट चौथ, माताओं ने की संतान के दीर्घायु की कामना

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। माघ मास के कृष्ण पक्ष की पावन चतुर्थी तिथि को मंगलवार के दिन जनपद में सकट चौथ का पर्व गहरी श्रद्धा, आस्था और धार्मिक विधि-विधान…

कपिल देव: एक कप्तान, जिसने असंभव को संभव बनाया

पुनीत मिश्र भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो केवल रिकॉर्ड नहीं बनाते, बल्कि सोच की दिशा बदल देते हैं। कपिल देव उन्हीं विरले व्यक्तित्वों में से…

🕉️ आज का पंचांग | 05 जनवरी 2026, सोमवार

(माघ कृष्ण पक्ष द्वितीया | विक्रम संवत 2082 | शक संवत 1947)📅 आज का संपूर्ण हिन्दू पंचांग (05/01/2026)📌 तिथि- कृष्ण पक्ष द्वितीया – 09:56 AM तकउपरांत तृतीया – 06 जनवरी…

“इतिहास के पन्नों में अमर 5 जनवरी: वे विभूतियाँ जिनका जाना एक युग का अंत था”

5 जनवरी भारतीय एवं विश्व इतिहास में केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ऐसी महान विभूतियों की स्मृति का दिन है, जिनके योगदान ने समाज, संस्कृति, प्रशासन और कला को गहराई…