Category: संपादकीय

जनसंघर्ष से सत्ता के शिखर तक : सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक यात्रा

नव नियुक्त मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का नाम आज पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक प्रभावशाली और निर्णायक नेता के रूप में लिया जाता है। जमीनी राजनीति, संगठन क्षमता और आक्रामक…

विश्व हिंदी दिवस: माँ भारती के माथे पर सजी भाषा की अमिट आभा

हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना की धुरी है। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर यह अनुभूति और गहरी हो जाती है कि हिंदी माँ…

अदालत के आदेश पर बुलडोजर, जवाब में पत्थर-यह विरोध नहीं, खुली बगावत है

तुर्कमान गेट की घटना कोई अचानक उभरा गुस्सा नहीं, बल्कि कानून और संविधान को ठेंगा दिखाने की सोची-समझी मानसिकता का आईना है। अदालत के आदेश से जब अवैध निर्माण हटाया…

योगी-मोदी मुलाक़ात: मुस्कान, आत्मविश्वास और राजनीतिक संकेत

दिल्ली में हुई योगी-मोदी मुलाक़ात को केवल औपचारिक शिष्टाचार के रूप में देखना इसके राजनीतिक निहितार्थों को सीमित कर देना होगा। तस्वीरों में दिखाई देती मुस्कान, चेहरे की सहज चमक…

उच्च शिक्षा में नई इबारत लिखती पूर्वांचल की बेटियाँ

डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय और उसके 355 संबद्ध महाविद्यालयों के सत्र 2025–26 के प्रवेश आँकड़े यह साबित करते हैं कि पूर्वांचल, गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर में उच्च शिक्षा अब सामाजिक परिवर्तन…

समकालीन भारत और विश्व: संक्रमण काल की तस्वीर

भारत और विश्व इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहाँ पुराने ढाँचे तेजी से बदल रही वास्तविकताओं से टकरा रहे हैं। यह केवल नए वर्ष का आरंभ…

2026 का संकल्प: बात सीधी है, पेट से जुड़ी है

नया साल आया है, तो फिर वही बातें शुरू हो गई हैं। संकल्प, वादे और बड़े-बड़े दावे। लेकिन गाँव, कस्बे और शहर की गली में खड़ा आदमी आज भी एक…

हर जनवरी में नई तारीखें, वही पुराने धोखे

फोकस:नया साल, पुरानी व्यवस्थाटैग:संपादकीय नया साल व्यवस्था धोखे राजनीति समाज आत्ममंथन साल बदला है, सच नहीं। दीवार पर नया कैलेंडर टंग गया है, तारीखें चमक रही हैं, पर देश-समाज की…

परमानंद की प्राप्ति का मार्ग: ‘अहम्’ का विसर्जन और आत्मविचार, रमण महर्षि का आध्यात्मिक संदेश

आधुनिक युग के महान ऋषि और संत रमण महर्षि का सम्पूर्ण आध्यात्मिक चिंतन एक अत्यंत सूक्ष्म किंतु क्रांतिकारी सत्य पर केंद्रित है। ‘अहम्’ का लय और आत्मविचार द्वारा आत्मसाक्षात्कार। उन्होंने…

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर लगातार हमले: लोकतंत्र और मानवाधिकारों की अग्निपरीक्षा

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय पर हो रहे लगातार हमले केवल एक देश की आंतरिक समस्या नहीं हैं, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक मूल्यों, धार्मिक सहिष्णुता और मानवाधिकारों…

यूं ही कोई जेटली नहीं बन जाता

भारतीय राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल पद से नहीं, बल्कि प्रभाव से होती है। अरुण जेटली ऐसे ही नेता थे। राजनीति, कानून और नीति निर्माण,…

जलियांवाला बाग से लंदन तक: स्वाभिमान का अमर प्रतीक क्रांतिवीर उधम सिंह

जलियांवाला बाग से लंदन तक: स्वाभिमान का अमर प्रतीक क्रांतिवीर उधम सिंहअदम्य साहस, अटूट संकल्प और राष्ट्र के स्वाभिमान के लिए सर्वस्व अर्पित कर देने का नाम है- क्रांतिवीर उधम…

सड़क सुरक्षा: प्रशासनिक आदेश से सामाजिक जिम्मेदारी तक

सड़क सुरक्षा आज महज़ यातायात नियमों का विषय नहीं रही, बल्कि यह समाज की संवेदनशीलता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की असली परीक्षा बन चुकी है। हर दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाएं…

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस: अधिकार जानना ही सच्ची जागरूकता है

24 दिसंबर को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि हम केवल उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि बाज़ार व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ भी…