Category: कहानी

‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ से हरियाणवी साहित्य को नई उड़ान

हरियाणवी लघुकथा का नया अध्याय: ‘म्हारी माट्टी, म्हारे आखर’ बना साहित्यिक मील का पत्थर पंजाब/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा) हरियाणवी साहित्य को नई पहचान देने वाला लघुकथा संकलन ‘म्हारी माट्टी,…

मेकअप नहीं, मानवता ही असली आभूषण

अंधेरी खदान से प्रशासनिक शिखर तक ♥️ कहानी – एपिसोड 1 ♥️ जीवन का असली रंग: वह कलेक्टर जो मेकअप नहीं करती ✦ हम जीवन को बाहर से सुंदर बनाने…

हिन्दी साहित्य के मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार: विचार, संघर्ष और रचना-दृष्टि

पुनीत मिश्र हिन्दी साहित्य के इतिहास में जैनेन्द्र कुमार का नाम एक ऐसे रचनाकार के रूप में स्थापित है, जिन्होंने कथा-साहित्य को बाह्य घटनाओं की दुनिया से निकालकर मनुष्य के…

राजनैतिक व्यंग्य और सत्ता का डर: फिल्म, आस्था और कानून की कहानी

मूर्खता और अड़ियलपन से भरी नकटी सरकार -विष्णु नागर तो मोदी सरकार ने अपनी नाक केरल में कटवा ली। यही इन्हें पसंद भी है। संसद हो या सड़क, सब जगह…

जब लालच आस्था पर भारी पड़ जाए: इंसान की बदलती फितरत की सच्ची तस्वीर

इंसान की फितरत का सच: जब पैसा गिनते हैं तो ध्यान एकाग्र, और जब माला फेरते हैं तो बिखर जाता है मन अक्सर जीवन की छोटी-सी सच्चाई हमारे पूरे व्यक्तित्व…

जीवन में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र – धैर्य और संयम

धैर्य की जीत: क्रोध, बदले और अहंकार के बोझ से डूबता इंसान कहते हैं धैर्य कड़वा होता है, लेकिन उसका फल अत्यंत मीठा होता है। यह केवल एक कहावत नहीं,…

राजनीति नहीं, परिवार पहली प्राथमिकता – विधायक की भावुक कहानी

अमरेंद्र पाण्डेय ने जब कहा भतीजा के साथ लौटूंगा गाँव बन गया मिशाल “एक रिश्ता, जो राजनीति से ऊपर है – समाज के लिए मिसाल बने प्यार और कर्तव्य का…

ताकतवर होकर भी झुक जाना श्रेष्ठ गुण—एक कहानी जो मन को छू जाए

(राष्ट्र की परम्परा | कहानी डेस्क | शशांक भूषण मिश्र) ताकतवर होकर भी झुक जाना श्रेष्ठ गुण है, और श्रेष्ठ होकर भी सामान्य बने रहना सर्वश्रेष्ठ गुण। जीवन में कई…

भेष के अनुरूप आचरण क्यों ज़रूरी? नाम से नहीं, कर्म से बनती है पहचान

राष्ट्र की परम्परा डेस्क दिलीप पाण्डेय– एक प्रेरक कहानी समाज में अक्सर कहा जाता है कि “जैसा भेष, वैसा आचरण होना चाहिए।” लेकिन कई बार नाम और पहनावा तो ताक़तवर…

“आख़िरी स्टेशन” – गाँव लौटे रघुवीर की जीवन यात्रा ने बदल दी माधवपुर की तस्वीर

माधवपुर/बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। यह कहानी है रघुवीर नाम के एक मजदूर की, जो ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव झेलकर अपने गाँव लौट आया। कभी दिल्ली की इमारतों में पसीना बहाने…

किस्सा कुर्सी का

लघुकथा सुनीता कुमारीपूर्णियां बिहार छोटे से राज्य जनविकासपुर में चुनाव का मौसम था। हर गली में पोस्टर, हर चौराहे पर भाषण, और हर घर में बहस—कौन आएगा इस बार सत्ता…

पति की लंबी आयु और सौभाग्य के लिए पवित्र व्रत की अनूठी कथा

पति की रक्षा और सौभाग्य के लिए करवा चौथ व्रत का रहस्य प्रस्तुति-अनुराधा भारत में पारंपरिक त्यौहारों और व्रतों की संस्कृति सदियों पुरानी है। इनमें से एक महत्वपूर्ण व्रत है…

बचपन के त्योहारों की छुट्टियाँ: रिश्तों का संगम और मामा के घर की रौनक

(वशिष्ठ सिंह) 🎉 त्योहार आते ही सिर्फ छुट्टियाँ और मेले का आनंद नहीं मिलता था, बल्कि पूरा परिवार एकजुट होकर रिश्तों की मिठास का उत्सव मनाता था। उस दौर में…

1980-90 के दशक का दशमी का मेला: संस्कृति, श्रद्धा और लोकजीवन की जीवंत झलक

भारत की सांस्कृतिक परंपरा में दशहरा और दुर्गा पूजन का पर्व सदियों से विशेष स्थान रखता है। 1980 से 1990 के दशक का दौर ग्रामीण और कस्बाई जीवन में मेलों…