Category: कविता

दर्पण नहीं मुखौटे बदलते रहते हैं

दर्पण नहीं मुखौटे बदलते रहते हैं,लोकतंत्र में संविधान नहीं साँसद,विधायक व मंत्री बदलते रहते हैं,संत्री से लेकर सचिव वही रहते हैं। दर्पण टूटकर कई टुकड़े हो जाते हैं,जितने टुकड़े उतने…

सच्चे मन से सच्चा मन मिलता है

भाषाई शब्द ऐसे परिधान होते हैंजिन्हें शालीनता से पहना जाता है,शालीनता त्याग देते ही इंसान कासारा व्यक्तित्व निर्वस्त्र हो जाता है। शिक्षा एवं उससे मिले संस्कारमानव जीवन के मूल मंत्र…

जीवनसाथी

हमारे माता-पिता, पति-पत्नी,पुत्र-पुत्री, मित्र, सगे सम्बन्धी,क्या वास्तव में ये जीवनसाथी हैं,नहीं, जीवनसाथी तो शरीर है । शरीर साँसे लेना बंद कर देता है,तब कहाँ कोई भी साथ देता है,हमारा शरीर…

बड़ा घर और वृद्घ माँ-पिता

सुनिए एक मेहनतकश की कहानी,अब तक की उसकी ही ज़ुबानी,जब मैं छोटा था, हम केवल एककमरे वाले छोटे से घर में रहते थे। मेरे माता- पिता और मैं रात मेंइस…

आया बसन्त

आया बसन्त आया बसन्त,दिवदिगन्त में छाया बसन्त।तरु पल्लव किसलय झूम रहे,खेतों में सरसों फूल रहे,नवकलिका आँखे खोल रहीं,वासंती छटा निहार रहीं,कोमल लतिका भी डोल रही,उद्यान की शोभा बढ़ा रही,बहुरंगी पुष्प…

बाल धूप सफेद!

मैंने बाल धूप में नहीं सफ़ेद किए हैं,बुजुर्गों के अनुभव अनमोल होते हैं,यह अनुभव उनकी उम्र के बितायेहुए बेशक़ीमती वक्त से मिलते हैं। वक्त की धूप में कोई चीज़ पकी…

आबे मोर खेत म मयार

रद्दा देखत रइहौंव तोर, गियां रे मंझनिया के पहाती।आबे मोर खेत म मयारू, टोरे ल तिवरा, चना भाजी।। केंवची-केंवची पाना ल, खोंट के रखबे ओली भर के।साध बुतावत ले खाबो,…

आया वसंत

अम्बर से उड़ उड़कर भँवराजब धरती पर आता है,देख देख सुनहरे बाग को,भ्रमर वहीं मँडराता है,कुसुमित पुष्पों की सुरभित,कलियों पर जा जाकर,प्रेमगीत गुनगुनाता है, हृदय सेनिकला मधुर गीत गाकर,छुप जाता…

धरा पर पाप ना छूटे

सोचता हूँ कवि बनूकविता लिखूकवि कर्म की रक्षा करू,पर अकेले अन्धकार मे खड़ाकब तक प्रकाश की प्रतीक्षा करू।हे प्रभु मेरा धनुष ना रूठेधरा पर पाप ना छूटे,नहीं तो लघु बृक्ष…

जीने की तमन्ना

आज फिर जीने की तमन्ना है,और न मरने का कोई इरादा है,यह दुनिया ही इतनी खूबसूरत है,जहाँ स्वर्ग व नर्क की फ़ितरत है। कहना बहुत आसान है कि जीने की,असली…

क्रोध में पराजय

आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्रके बीच सोलह दिन तक होने वालेशास्त्रार्थ की निर्णायक मंडन मिश्रकी धर्म पत्नी देवी भारती ही थीं। हार जीत का निर्णय होना बाक़ी था,इसी बीच निर्णायक…

आत्मविश्वास

आत्मविश्वास से ही विचारोंकी स्वाधीनता प्राप्त होती है,इसके कारण महान कार्यों केसम्पादन में सफलता मिलती है। इसी के द्वारा आत्मरक्षा होती है,जो आत्मविश्वास से ओत प्रोत है,उसे अपने भविष्य के…

हे राम!, पुकारा था गांधी जी ने

वारि मथे बरु होई घृत,सिकता ते बरु तेल।बिनु हरि भजन न भव तरिययह सिद्धांत अपेल॥ एक शिष्य ने अपने गुरुदेव से पूछा,वजन बढ़े तो क्या करना चाहिये,उत्तर था तन का…

आत्मविश्वास व परोपकार

दर्पण का काम ही है सबको सबकीसूरत दिखाना चाहे अच्छी हो या नहीं,कितना निरपेक्ष है दर्पण का सिद्धांत,कितना लाजवाब दर्पण का किरदार। दर्पण स्वागत तो सभी का करता है,परंतु किसी…

हे राम!

महात्मा गांधी को ईसा मसीह औरमहात्मा बुद्ध जैसा सम्मान मिलता है,लार्ड माउन्ट बेटन ने गांधी जी कीहत्या पर यही लिखा व यही कहा है। महात्मा गांधी ब्रिटिश हुकुमत अपनेकाल पर्यन्त…