
पूर्वांचल में निवेश और रोजगार को रफ्तार देने की तैयारी, 2500 करोड़ की UP-एज परियोजना
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। पूर्वांचल की स्थानीय क्षमता, संसाधनों और कारोबारी संभावनाओं को बड़े आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। विश्व बैंक के सहयोग से प्रस्तावित UP-एज (Enabling District Led Economic Growth) परियोजना के जरिए निवेश, रोजगार, उद्यमिता और निर्यात को बढ़ावा देने की योजना है। पांच वर्ष की इस परियोजना पर करीब 2500 करोड़ रुपये खर्च होने का प्रस्ताव है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को विश्व बैंक के अधिकारियों के साथ परियोजना को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद इसकी प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (PPR) केंद्र सरकार को भेजने की तैयारी है।
35 जिलों तक हो सकता है परियोजना का विस्तार
फिलहाल UP-एज परियोजना पूर्वांचल के 28 जिलों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके दायरे में बुंदेलखंड के सात जिलों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। ऐसा होने पर कुल 35 जिले परियोजना का हिस्सा बन सकते हैं।
पूर्वांचल में प्रदेश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी रहती है, लेकिन राज्य की GDP में इस क्षेत्र का योगदान करीब 27.6 प्रतिशत है। वहीं, क्षेत्र की प्रति व्यक्ति आय राज्य के औसत से लगभग 45 प्रतिशत कम बताई गई है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य इसी आर्थिक अंतर को कम करने के लिए जिलावार विकास मॉडल तैयार करना है।
खेती के साथ उद्योग और सेवा क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
पूर्वांचल में बड़ी संख्या में लोग कृषि पर निर्भर हैं। इसलिए परियोजना के तहत कृषि के साथ उद्योग और सेवा क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करने पर जोर रहेगा। प्रत्येक जिले के स्थानीय संसाधनों, जरूरतों और कारोबारी क्षमता के आधार पर अलग-अलग विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी।
स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता, डिजाइन और पैकेजिंग में सुधार कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की योजना है। इससे निर्यात के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करने पर जोर रहेगा।
एक लाख नए कारोबार शुरू कराने का प्रस्ताव
UP-एज परियोजना में करीब एक लाख नए कारोबार शुरू कराने का प्रस्ताव रखा गया है। महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने के साथ छोटे और स्थानीय कारोबारों को नए बाजार उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत तैयार होने वाले उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके अलावा पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-कॉमर्स, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं विकसित करने का प्रस्ताव है।
10 हजार पॉलीहाउस और कौशल विकास पर जोर
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए करीब 10 हजार पॉलीहाउस स्थापित करने का प्रस्ताव है। कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए किसानों तथा स्थानीय कारोबारियों की आय बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज में कौशल विकास एवं प्रशिक्षण को मजबूत करने की योजना है। स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिसिटी और हेल्थ टूरिज्म की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।
जिलों की जरूरत के हिसाब से तैयार होंगे निवेश प्रस्ताव
परियोजना के तहत प्रत्येक जिले की स्थानीय क्षमता और जरूरत को ध्यान में रखते हुए बड़े निवेश प्रस्ताव तैयार करने की योजना है। साथ ही जिला स्तर के प्रशासनिक तंत्र की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि निवेश परियोजनाओं को जमीन पर उतारने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में बेहतर समन्वय हो सके।
यदि प्रस्तावित योजना को मंजूरी मिलती है तो आने वाले वर्षों में पूर्वांचल के जिलों में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के साथ उद्योग, सेवा, पर्यटन, डिजिटल कारोबार और निर्यात से जुड़े नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
