
36 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों की संयुक्त रणनीति से तस्करी, कार्टेल, सिंथेटिक ड्रग्स, गुप्त प्रयोगशालाओं और डिजिटल नेटवर्क पर निगरानी
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)
संयुक्त संकल्प और साझा जिम्मेदारी से नशे के खिलाफ व्यापक मोर्चा
गोंदिया। वैश्विक स्तर पर मादक पदार्थों की समस्या अब किसी एक देश, राज्य या समाज तक सीमित नहीं रही है। ड्रग तस्करी सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ-साथ युवा शक्ति, सामाजिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी बहुआयामी चुनौती बन चुकी है। अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क लगातार नए मार्गों, तकनीकों और वित्तीय माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में इस चुनौती से निपटने के लिए केवल गिरफ्तारी और जब्ती तक सीमित कार्रवाई के बजाय समन्वित और बहुस्तरीय रणनीति की आवश्यकता है।
इसी व्यापक रणनीति के तहत नई दिल्ली में 22 सितंबर 2026 से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) प्रमुखों का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। दो दिवसीय सम्मेलन में 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ANTF प्रमुखों के साथ संबंधित सरकारी विभागों तथा अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन की थीम “संयुक्त संकल्प, साझा जिम्मेदारी” रखी गई है।
2026-2029 के विजन डॉक्यूमेंट पर विशेष जोर
सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 में निर्धारित लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा करना है। इस दस्तावेज में मादक पदार्थ नियंत्रण के लिए चार प्रमुख रणनीतिक स्तंभ निर्धारित किए गए हैं—प्रवर्तन, आसूचना एवं ऑपरेशंस; प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण; डिमांड एवं हार्म रिडक्शन; तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय।
इसका अर्थ है कि नशे के विरुद्ध रणनीति में अब केवल आपूर्ति रोकने पर ही नहीं, बल्कि मांग कम करने, नशे से होने वाली क्षति को घटाने, उपचार एवं पुनर्वास तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को भी समान महत्व दिया जा रहा है।
कार्टेल से लेकर डार्कनेट तक निगरानी
सम्मेलन में ड्रग नेटवर्क और कार्टेल की कड़ियां तोड़ने, प्रवर्तन को अधिक प्रभावी बनाने, सिंथेटिक ड्रग्स और गुप्त प्रयोगशालाओं पर कार्रवाई, अवैध खेती एवं वैकल्पिक फसलों तथा डार्कनेट और क्रिप्टो से जुड़ी जांच जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र रखे गए हैं। इससे स्पष्ट है कि ड्रग तस्करी के बदलते तौर-तरीकों के साथ कानून-प्रवर्तन की क्षमता को भी आधुनिक बनाना आवश्यक माना जा रहा है।
विशेष रूप से सिंथेटिक ड्रग्स का मुद्दा महत्वपूर्ण है। इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक प्रीकर्सर की निगरानी और वैध औद्योगिक उपयोग तथा अवैध गतिविधियों के बीच अंतर करना प्रवर्तन एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है। प्रभावी निगरानी से अवैध उत्पादन की श्रृंखला को शुरुआती स्तर पर बाधित करने में मदद मिल सकती है।
अवैध खेती के साथ वैकल्पिक आजीविका भी जरूरी
मादक पदार्थों की अवैध खेती के खिलाफ कार्रवाई केवल फसल नष्ट करने तक सीमित नहीं रह सकती। यदि प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक और टिकाऊ आजीविका के अवसर उपलब्ध नहीं होंगे, तो अवैध खेती दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित होने का जोखिम बना रह सकता है।
इसलिए अवैध खेती रोकने के साथ वैकल्पिक फसलों, रोजगार और स्थानीय आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने की रणनीति भी आवश्यक है। राष्ट्रीय सम्मेलन के तकनीकी विमर्श में “इल्लीगल कल्टीवेशन एंड अल्टरनेट क्रॉपिंग” को शामिल किया जाना इसी व्यापक दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
ड्रग मनी पर आर्थिक प्रहार
ड्रग तस्करी की ताकत केवल उसके नेटवर्क में नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाली अवैध अर्थव्यवस्था में भी होती है। तस्करी से अर्जित धन यदि संपत्ति, कारोबार, हवाला अथवा अन्य वित्तीय माध्यमों में प्रवेश करता है तो वह आपराधिक नेटवर्क को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक शक्ति उपलब्ध करा सकता है।
इसलिए तस्करों की गिरफ्तारी के साथ अवैध आय के स्रोत, धन के प्रवाह और अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान भी महत्वपूर्ण है। वित्तीय जांच और संबंधित एजेंसियों के बीच सूचना-साझाकरण इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।
तकनीक बनेगी नई लड़ाई का महत्वपूर्ण हथियार
ड्रग नेटवर्क अब डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन संचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञता, डिजिटल फोरेंसिक और वित्तीय डेटा विश्लेषण की आवश्यकता बढ़ रही है।
भारत में सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ANTF की व्यवस्था स्थापित की जा चुकी है। इसके साथ NCB ने देशभर में अपनी क्षेत्रीय मौजूदगी भी बढ़ाई है। सरकारी जानकारी के अनुसार NCB के 30 जोनल कार्यालय अब परिचालन में हैं।
इससे स्पष्ट है कि ड्रग नियंत्रण व्यवस्था में संस्थागत विस्तार के साथ तकनीकी और मानव संसाधन क्षमता को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
मांग में कमी के बिना आपूर्ति रोकना अधूरा
नशे के विरुद्ध अभियान का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष मांग में कमी है। यदि समाज में नशीले पदार्थों की मांग बनी रहती है तो आपूर्ति करने वाले नेटवर्क नए रास्ते तलाशते रहेंगे।
इसलिए स्कूलों और महाविद्यालयों में जागरूकता, परिवारों की भागीदारी, युवाओं के लिए परामर्श, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना और समय रहते जोखिम की पहचान करना महत्वपूर्ण है। 2026-2029 के राष्ट्रीय विजन डॉक्यूमेंट में जागरूकता, रोकथाम, परामर्श और पुनर्वास से संबंधित उपायों को भी स्थान दिया गया है।
उपचार और पुनर्वास भी रणनीति का हिस्सा
नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के लिए उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधाओं को मजबूत करना भी आवश्यक है। परिवार का सहयोग, मानसिक-सामाजिक सहायता, पुनर्वास के बाद रोजगार और समाज में सम्मानजनक पुनर्वापसी जैसे प्रयास दीर्घकाल में मांग को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
इसलिए नशामुक्त समाज का लक्ष्य केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है। यह स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार से भी जुड़ा हुआ विषय है।
सीमा से डिजिटल नेटवर्क तक समन्वय जरूरी
मादक पदार्थों की तस्करी अक्सर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और विभिन्न परिवहन माध्यमों से जुड़ी होती है। ऐसे में सीमा सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस, NCB, वित्तीय जांच एजेंसियों, खुफिया तंत्र और राज्य ANTF के बीच प्रभावी सूचना-साझाकरण आवश्यक है।
सरकारी व्यवस्था में ANTF, NCORD और अन्य समन्वय तंत्र इसी उद्देश्य से विकसित किए गए हैं। डार्कनेट और क्रिप्टो से जुड़े संदिग्ध लेन-देन की निगरानी के लिए भी विशेष व्यवस्था का उल्लेख सरकारी दस्तावेजों में किया गया है।
संस्थागत क्षमता का विस्तार
नई दिल्ली सम्मेलन के दौरान लखनऊ और देहरादून में NCB के नए जोनल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी जा रही है। इसके साथ NCB की पुनर्गठित वेबसाइट का शुभारंभ और बेहतर प्रदर्शन करने वाले ANTF को सम्मानित करने का कार्यक्रम भी रखा गया है।
ये कदम मादक पदार्थ नियंत्रण व्यवस्था में संस्थागत क्षमता, सार्वजनिक पहुंच और राज्यों के साथ समन्वय को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखे जा सकते हैं।
नशामुक्त समाज का निर्माण केवल गिरफ्तारी, जब्ती और दंड से संभव नहीं है। इसके लिए परिवार की जागरूकता, विद्यालयों की भूमिका, समाज की संवेदनशीलता, प्रशासन की जवाबदेही, पुलिस की दक्षता, सीमा निगरानी, वित्तीय जांच, आधुनिक तकनीक, उपचार और पुनर्वास—सभी क्षेत्रों को एक साथ काम करना होगा।
भारत के नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 में निर्धारित चार रणनीतिक स्तंभ इसी समग्र दृष्टिकोण को सामने रखते हैं। अब चुनौती इन नीतिगत लक्ष्यों को जमीन पर प्रभावी, वैज्ञानिक और जवाबदेह कार्रवाई में बदलने की है।
यदि आपूर्ति के स्रोतों पर कार्रवाई, अवैध वित्तीय नेटवर्क की पहचान, डिजिटल तस्करी पर निगरानी, युवाओं में जागरूकता, उपचार और पुनर्वास तथा राज्यों-केंद्र के बीच बेहतर समन्वय एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो मादक पदार्थों के खिलाफ भारत की रणनीति अधिक व्यापक रूप ले सकती है।
नशे के खिलाफ लड़ाई किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षण संस्थानों, परिवारों और समाज की साझा जिम्मेदारी है। इसी साझा प्रयास से युवा पीढ़ी को सुरक्षित रखने और दीर्घकालीन सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सकता है।
— एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
विशेषज्ञ स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि एवं संगीत माध्यमा, सीए (एटीसी), एडवोकेट
गोंदिया, महाराष्ट्र
