Category: कविता

मन बसत मेरो वृंदावन में

मन बसत मेरो वृंदावन में,मन बसत मेरो वृंदावन में,रंग रंगीली होली आयी,सारे जग की ख़ुशियाँ लायी,रंग गुलाल अबीर फ़िज़ायें,फागुन की मदमस्त हवायें॥ होली आयी होली आयी,सरसों फूल बहारें लायी,राधा खोजें…

छोटी सी भलाई: बड़ा काम

एक नाविक ने एक पेंटर को बुलायाऔर अपनी नाव पेंट करने को कहा,पेंटर ने नाव को लाल पेंट कर दिया,जैसा नाव का मालिक चाहता था। पेंटर अपने पैसे लेकर चला…

वक्त ज़रूरत पर जब अकेला पाया

कुछ लोग आगे पीछे रहते हैं,हँसते खेलते समय बिताते हैं,इसका तात्पर्य यह नहीं होता है,कि ऐसे सब लोग सच्चे मित्र हैं। इस बात का ध्यान रखना होगा,कि लोग मीठा मीठा…

विचारों की ख़ूबसूरती

जिस प्रकार छोटी छोटी आंखे साराआसमान देखने की ताक़त रखतीं हैं,वैसे ही जीवन में विषमतायें होने पर,भी ज़िन्दगी ख़ुशनुमा बन सकती है। जिसमें जीवन जीने की चाहत होती है,उसके सारे…

मित्रता और राजनीतिक मनभेद

मेरी कविताओं में मित्रों किसी तरहकी कोई राजनीति तो मत खोजो,जिनक़ा नहीं दूर तक मुझसे कोईनाता है, उन अपवादों को मत खोजो। इन वादों और वादा करने वालों परअब कोई…

एक विनय असंभव संभव कर देता है

एक गीत वक्त में परिवर्तन लाता है,एक विचार दुनिया ही बदल देता है,एक कदम यात्रा की शुरू कर देता है,एक विनय असंभव संभव कर देता है। निराशा कुछ ऐसे घर…

नया भारत

पलप्रतीपल बदला भारत पल–पल में बदल रहा है परिवेश, व्यवस्था बदल रहा जब खुद को अब हमें भी बदलना होगा, विकृत मानसिकता त्याग दो प्यारे अब तुमको देश के संग–संग…

प्रेम की पहचान

कबीर लहरि समंद की,मोती बिखरे आई।बगुला भेद न जानई,हंसा चुनि-चुनि खाई॥ समुद्र की उफनती लहरो में क़ीमतीमोती आ आ करके बिखरते रहते हैं,बगुले को मोती की परख नहीं होती है,इसलिए…

भव सागर के नाविक हो

केवट बोला हे अवधपुरी के श्रीराम,तुम तो हो राजाओं के राजा राम,गंगा पार कराऊँगा बस शर्त एक है,चरण पखारूँगा मैं पहले यही टेक है। तुम तो भव सागर के नाविक…

कुसूर

भरे बसन्त मेँ हुआपतझड़ का अहसास,गमगीन मौसम हुआगया हास-परिहास।टोने-टोटके,बिधि-बिधानसभी हो गये फेल,देवी-देवताओं के माथे सेउठा अन्धविश्वास।घर-आँगन, देहरी-दीवारेंसभी हो गये सूने,पल भर मेँ ही टूट गयीकई माह से बँधी जो आस।घिग्घी…

एक व्यंग है, मुस्कुराना नि:शुल्क है

बातें शानदार हों न हों व्यंग्य तो है,बहुत शानदार हो या थोड़ा कम हो,लिखा है कि आप हँसे और ख़ूब हँसे,क्योंकि हँसना मुस्कुराना नि:शुल्क है। भारत वर्ष नदियों का मुल्क…

किस्मत में परदेश

ग़रीबी में पला था सूखी रोटियाँ खाकर,बचपन से जवानी तक रहा था औरों का चाकर,क़िस्मत में लिखा था मेहनत मज़दूरी करना,ज़िन्दगी बीतती है ग़रीबों की झोपड़ी में रहकर। कहाँ से…

पवित्र शिवरात्रि: शिवोपासना

अध्यात्म की महिमा में शिव है,जगत चराचार में भी शिव है,जीव-जन्तु की आत्मा शिव है,आत्मा और जीवात्मा शिव है। पार्वती हैं बुद्धि की देवी शिव,विवेक के दाता श्री गणेश शिव,रिद्धि-…

युद्ध-विभीषिका

युद्ध विभीषिका में जहाँ जवान सैनिक,जिसे जानते नहीं उसे जान से मारते हैं,वे न उनसे प्रेम करते, न घृणा करते हैं,बस किसी का बर्बर आदेश मानते हैं। ऐसे बर्बर आदेश…

श्रीराम चंद्र के रामेश्वर हो

हे शिवशंकर भोलेनाथ तुमअजर अमर अविनाशी हो,महाकाल उज्जैन विराजत,बाबा विश्वनाथ काशी में हो। हम भक्तों के संकटहर्ता हो,तुम हम सबके मंगल कर्ता हो।रचनाकार सारे जगत् के हो,हे महादेव तुम प्रलयंकर्ता…