Category: कविता

देवी स्तुति

हे मातु दया कर दे, वर दे,तन स्वस्थ सुखी रखिये रखिये,रोटी कपड़ा रहने को घर,भूषित वैभव रखिये रखिये।हे मातु… जीवन साथी का प्रेम मिला,संतानों से आदर सद्भाव मिला,एहसान नहीं कोई…

काश मै चरित्रहीन होती

सुनो!मुझे कुछ सुनाई दिया,देखो!मुझे कुछ दिखाई दिया।पर तुम्हें नहीं?इसलिए कहती हूँ सामान्यनहीं हूँ मैं,विशेष भी नहींइन दोनों परिचयो से मुक्त हूँ।जानने के इच्छुक हो मुझेमेरे अंतःकरण को तो?आओ चिर परिचित…

दुर्भाव सुभाव उनके कबहूँ न बनैं

लहसुन, प्याज़ गुण धर्म से जैसे,बेस्वाद, तीक्ष्ण गंध वाले होते हैं,उनको कपूर जल से धोकर रखियेअपने गुण धर्म वह नहीं बदलते हैं। चाहे केसर इत्र लगाकर रखिये,उनमें चंदन लेप लगाकर…

करें मतदान!

रखिए सुरक्षित लोकतंत्र, भर समता का भाव।तज कर जाति भेद भाव, करें सटीक चुनाव। नेता चुने सही आप, करे सदा हित काज।रख हृदय पूर्ण विश्वास, करिए मतदान आप। रख राष्ट्र…

सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन संपन्न

विभिन्न क्षेत्र मे उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैशिष्ट्जनों का किया गया सम्मान मुम्बई(राष्ट्र की परम्परा) सांताक्रुज रेलवे कॉलोनी मे निर्मला फाउंडेशन की ओर से आयोजित सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी…

कोरोना के रचनात्मक पहलू

कोरोना वाइरस की महामारी से दोवर्षों के अनुभव से विश्व जनमत कोसदा सदा के लिए अनेक महत्व पूर्णसीखें मिली हैं व अब भी मिल रही हैं। ज़्यादातर लोग घर से…

मानस प्रसंग

“तृण धरि ओट क़हति वैदेही।सुमिरि अवधपति परम सनेही ॥” दशरथ के राजमहल के भोजनकक्षमें रानियाँ भोजन परोस रही थीं,माता कौशल्या सहित सभी रानियाँबड़े प्रेम से भोजन खिला रही थीं। सीता…

तन–मन में बसे मेरे श्रीराम

जीवन में जो कुछ है प्राप्त हुआ,श्रीराम कृपा मान स्वीकार करूँ,भोजन न पचे तो अपच रोक सकूँ,ऐश्वर्य बढ़े तो दिखावा न करूँ । वैसे ही बात न पचने पर शिकवा,शिकायत…

ईश्वर एक है

कबीर कुआं एक है पानी भरें अनेक,बर्तन में ही भेद है, पानी सबमें एक। जब हिंदू मुस्लिम सहित सभी धर्मोंको मानने वाले अपनी अपनी जाति,व धर्म को बढ़ावा देने में…

होली आई रे कन्हाई…

होली आई रे, कन्हाई होली आई,राधा के संग खेलत कृष्ण कन्हाई,गोपी ग्वाले मिल मस्ती मनाई,गोकुल, बरसाने वृंदावन जाई,होली आई रे, कन्हाई होली आई। रंगों, खुशियों का आया त्योहार,गिले, शिकवे दूर…

कर्म की गति नियत होती है

थोड़ा सा मुस्कराने में क्या जाता है,तारीफ़ खुल कर करिये जमाने की,कुछ नहीं जाता है क्षमा कर देने में,मदद भरपूर करिये ज़रूरत मंद की। गलती मानने से मान कम नहीं…

परिवर्तन तो संसार का नियम

परंपरायें जो रूढ़ियाँ बन चुकी हैं,उनमें समुचित सुधार आवश्यक है,मानव जीवन के स्वर्ग नर्क यहीं हैं,जो आता है निश्चय ही वह जाता है। मरने के बाद न मरने वाले को,और…