Category: कविता

फ़िल्मों की संस्कारहीनता

क्या क्या दिखलाया जाता भोलीभाली भारतवर्ष की हमारी जनता को,हिंसा खुलेआम नंगापन, छल कपट,नीचा दिखलाना भाई का भाई को। जो सिखलाया था हमारे पुरखों ने,पैसों की लिये भूल रहे संस्कार…

इंसान के गुन और गुनाह

इंसान के गुनों और गुनाहों दोनों कीही कीमत होती है, फ़र्क़ यह होता है,कि गुनों की कीमत तो मिलती है,गुनाह की कीमत चुकानी पड़ती है। क्या फ़र्क़ पड़ता है, कि…

दुनिया का दस्तूर

पिता तो साक्षात वट वृक्ष होते हैं,अंदर से नर्म प्रत्यक्ष सख़्त होते हैं,अब जब नहीं हैं वह इस संसार में,बस स्मृतियाँ आती हैं मेरे ज़ेहन में। ज़िंदगी का जोड़ घटाना…

अशोक वाटिका में हनुमान

मेरे राम को भजने वाले,क्यों न सामने आते हो।प्रभू मुद्रिका लाने वाले,तुम छिपके कहाँ बैठे हो।माता मैं बजरंगबली हूँ,प्रभू राम का सेवक हूँ,हनूमान है नाम हमारा,अशोक वाटिका में आया हूँ।श्रीराम…

गीता ज्ञान व मित्रता

चाहे अच्छा करो या बुरा, जो व्यक्तिआपकी निंदा करते हैं वह करते रहेंगे,निंदा से अविचलित हुये बिना शान्तिव धैर्य से सत्कर्म हम करते रहेंगे। श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान कहता हैजीवन है…

सत्य की राह सुनसान

भाग्य जब चमकता है,तभी तो काम करता है,कर्म पर ही सब निर्भर है,भाग्य भी कर्म पर निर्भर है। वक्त कब बदल जाता है,कोई नहीं जान सकता है, भाग्य कब साथ…

पक्ष-विपक्ष दुश्मन बन बैठे

जल में रहकर मगरमच्छ से बैर,उन शैतानों के भी होते हैं दो पैर,बिना किसी प्रतिबंध वे घूम रहे हैं,छोटी बड़ी मछलियाँ निगल रहे हैं। कोई गली मोहल्ले में तो कोईपूरे…

स्वार्थलिप्त सब

न्यायालय, पुलिस और अस्पताललोकतंत्र में जनता के सेवक होते हैं,यह तथ्य मगर दीगर है कि यही सबधन बल से अधिक प्रभावित होते हैं। न्यायपालिका, विधायिका औरभारत की कार्यपालिका तीनों ही,लोकतंत्र…

अति कोमल रघुबीर सुभाऊ

सत्य, अहिंसा, कोमलता, त्याग,दया इंसान के सद्गुण कहलाते हैं,गीता में वर्णित गुणों में यह सभीमानव के दिव्य गुण माने जाते हैं। ये दीर्घ जीवन के आधार प्रबल हैं,इनका असर अन्य…

शांतिप्रियता सुख संतोष देती है

आशा व निराशा दोनों ही की सोचमानव जीवन में कभी न कभी छूटती है,आशा की ज्योति अंधेरी राहों में भीजीवन को प्रकाशित कर देती है। निराशा भी आशा बढ़ने पर…

अच्छी संगति :: अच्छे विचार

जमीन अच्छी हो व खाद अच्छी हो,पानी खारा हो तो फूल नहीं खिलते,भाव अच्छे हों और कर्म भी अच्छे हों,वाणी खराब हो तो रिश्ते नहीं टिकते। इंसान के विचारों का…

कलियुग में सतयुग लाये कहते हैं

ईश्वर के द्रोही सतयुग से लेकरत्रेता, द्वापर, कलियुग में भी हैं,सत्य-असत्य, अच्छाई-बुराई,पहले भी थीं और आज भी हैं। वाद-विवाद, तर्क-वितर्क भी थे,आज भी हैं, परंतु कुछ ज़्यादा हैं,शास्त्रार्थ नहीं अब…

अमीरी का दिखावा: ग़रीबी का छलावा

वास्तव में मेहनत करने वाले को,दो जून रोटी मुश्किल से मिलती है,भीख माँगने वालों को तो बेशुमारदौलत बिना मेहनत किए मिलती है। अमीरी का दिखावा तो ग़रीबों केलिए हो जाता…

मजदूर दिवस

मज़दूर दिवस की है शुभकामना,श्रमिकों का होता यह दिन आज,मेहनत मज़दूरी करें जो जीवन भररहें वह भरपेट भोजन के मोहताज। निज श्रम करके ही सींच कर,कृषक सभी उपजाते हैं अन्न,फिर…