Category: कविता

संस्कार से चरित्र

उत्तम शिक्षा और अच्छे संस्कारजीवन में विकास के मूल मंत्र हैं,शिक्षा से ज्ञान विज्ञान बढ़ते हैं,संस्कारों से चरित्र श्रेष्ठ बनते हैं। जो शिक्षित है उसे अज्ञानी की तरहकिसी से झुकने…

पर इंसान, इंसान नहीं रह पाते हैं

चुनाव का दौर, जाति धर्म के नारे,जनता को भी क्या लगते हैं प्यारे,वोट माँगते हैं दोनो हाथ जोड़कर,मालामाल करेंगे चुनाव जीतकर। फ़क़ीर बनकर जो वोट माँगता है,माननीय बनता है, जीत…

संस्कारशीलता व संस्कारहीनता

हमारी मानसिकता यह दर्शाती है,हम किसी तथ्य को कैसे समझते हैं,कोई अपना परोसा भोजन भी किसीकी ज़रूरत देख समर्पित करते हैं। स्वार्थ में कोई किसी के पेट पर पैरकी ठोकर…

ज्ञानार्जन की अद्भुत बातें

जिसके शब्दों में ऐसा प्रेम भरा,उसमे ख़ुद कितना प्रेम भरा होगा,जिसकी बातें ही इतनी सुंदर हैं,उसके भावों में कैसा प्रेम भरा होगा। जो अपना नहीं हो सका कभी,वह किसी और…

उपवन जैसे झाड़ झंखाड़ न हों

हाथ की अंगूठी उँगली में हमारेरिश्तों की तरह सुंदर लगती है,उँगली से निकालते ही अपनानिशान उँगली पर छोड़ देती है। रिश्ते भी जब टूटने लगते हैं तोउँगली के निशान जैसा…

वट सावित्री

स्त्री तो माता लक्ष्मी है,पार्वती व सरस्वती है,दुर्गा काली भी वह है,सत्यवान की सावित्री है। झाँसी की रानी है,स्त्री इंदिरा गांधी है,कल्पना चावला है,नीरजा भनोट भी है। स्मृति ईरानी भी…

नेता नगरी

हाथ जोड़कर ये वोट माँगते नेता,विजयी होकर माननीय बन जाते हैं,इनकी अपनी डफली बजती फिर,ये केवल अपना ही राग सुनाते हैं । भक्तों को प्रसाद मिला न मिला,चमचों की बात…

सीप्ज की 51वीं वर्षगांठ पर भव्य रक्तदान शिविर संपन्न 2637 बोतल रक्त जमा

मुंबई(राष्ट्र की परम्परा)भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के सहयोग से विश्व प्रसिद्ध आभूषण केंद्र, सीप्ज-सेज, के 51वीं वर्षगांठ पर महा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। भारत रत्नम…

अर्थ–अनर्थ

किसी का पद उसकी श्रेष्ठतानिश्चित नहीं कर सकता है,पर उसका आचार व्यवहार हीउसकी श्रेष्ठता तय करता है। प्रशंसा सभी को प्रिय होती है,पर कोई नहीं समझ पाता है,कि यह महान…

रोज़ थोड़ी ज़िंदगी बेंची

ग़ैरों के ख़यालात की लेते हैं ख़बरखुद के गिरेबान में झांका नहीं जाता!बस्ती में ख़ूब सियासत की जाती है,उनकी आवाज़ को कोई नहीं उठाता। ग़ैरों की बुराई न देखूँ वो…

विचारों पर नियंत्रण

अगर हमें यह साधारण सा एहसासहो जाय कि गुज़रा हुआ वक्त दुबाराफिर नहीं आता है तो हमारा आपकासारा भावी जीवन सार्थक हो जाता है. अहंकार भारी भरकम होना पड़ता है,पर…

जीवन का सत्कर्म पुण्य देता है

समय, सत्ता, संपत्ति और शरीरकभी हमारा साथ दें या नहीं दें,अच्छा स्वभाव, समझ, सत्संग,संबंध व सत्कर्म सदा साथ देते हैं। कर्म फल से तो स्वयं ईश्वर भी,अपने को मुक्त नहीं…

नादानों से रिश्ता रखो

जो दिल से दूसरों का सम्मान करते हैं,वह अपने सम्मान का ख़याल रखते हैं,जो झुक कर किसी का मान करते हैं,वो उसे झुकाकर खुद इज़्ज़त पाते हैं। जो किसी से…

बुद्धम् शरणम् गच्छामि

बुद्धं शरणम् गच्छामि,मैं बुद्ध की शरण लेता हूँ,धम्मं शरणम् गच्छामि,मैं धर्म की शरण लेता हूँ,संघं शरणम् गच्छामि,मैं संघ की शरण लेता हूँ,एस धम्मो सनातनो,अर्थात यही सनातन धर्म है। प्रबुद्ध बुद्ध…