Friday, May 1, 2026
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रफ्तार बनी काल: पुलिस अधिकारी की दर्दनाक मौत, नम आंखों से विदाई

सड़क हादसे में घायल एसआई ताज अहमद खान का निधन, नम आंखों के बीच सुपुर्द-ए-खाक


बलिया (राष्ट्र की परम्परा) सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल बिहार पुलिस के उपनिरीक्षक (एसआई) ताज अहमद खान ने आखिरकार जिंदगी की जंग हार दी। उनके निधन से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। बुधवार की सुबह रेवती ब्लॉक के सामने स्थित कर्बगाह में नम आंखों और भारी भीड़ के बीच उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम विदाई के दौरान हर कोई गमगीन नजर आया और माहौल बेहद भावुक हो गया।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते शनिवार को ताज अहमद खान अपने थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्रिय थे। गंज गांव स्थित एक इंडेन गैस गोदाम पर कुछ युवकों द्वारा हंगामा किए जाने की सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचे थे। वहां वे युवकों को समझाने और स्थिति को शांत करने का प्रयास कर रहे थे, तभी अचानक तेज रफ्तार से आ रहे एक टोटो वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें एकमा के एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें पटना रेफर कर दिया। पटना के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराने के बाद भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बाद में उन्हें दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां चिकित्सकों की टीम ने लगातार प्रयास किया, लेकिन मंगलवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।
ताज अहमद खान के निधन की खबर जैसे ही उनके पैतृक निवास रेवती पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को पूरे सम्मान के साथ किया गया। कर्बगाह पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और सभी ने उन्हें अंतिम विदाई दी।

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बताया जाता है कि ताज अहमद खान वर्ष 1990 में बिहार पुलिस में भर्ती हुए थे। अपनी सेवा के दौरान वे एक ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और व्यवहार कुशल अधिकारी के रूप में पहचाने जाते थे। अपने शांत स्वभाव और जिम्मेदारी निभाने के तरीके के कारण वे सहकर्मियों और आम लोगों के बीच सम्मानित थे। वे वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही यह दुखद हादसा हो गया, जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया।
खान अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में पत्नी जमरूल खातून, तीन बेटे ताहीर खान, तय्यब खान, तौकीर खान और दो बेटियां रजिया परवीन व रूबी परवीन शामिल हैं। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरा गांव उनके दुख में सहभागी बना हुआ है।
अंतिम संस्कार के दौरान क्षेत्र के कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पुलिस विभाग के अधिकारियों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को ढांढस बंधाया। सभी ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए इसे समाज और प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी माना।

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यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार वाहनों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए और ऐसे लापरवाह चालकों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।
इस दुखद घटना ने यह भी साबित कर दिया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में जुटे पुलिसकर्मी कितनी जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करते हैं। ताज अहमद खान की मृत्यु न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे पुलिस विभाग और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

ईरान पर हमले से घिरी अमेरिका की छवि, क्या ट्रंप पर लगेगा युद्ध अपराध का ठप्पा?

ट्रंप की चेतावनी और ईरान पर हमले: क्या अमेरिका पर लग सकते हैं युद्ध अपराध के आरोप?


तेहरान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)मध्य पूर्व में जारी तनाव ने एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है—क्या एक लोकतांत्रिक महाशक्ति का राष्ट्रपति भी युद्ध अपराधों के दायरे में आ सकता है? अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की हालिया बयानबाजी और ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों ने इस सवाल को और तीखा बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ, मानवाधिकार संगठन और रणनीतिक विश्लेषक इस मुद्दे पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं।
ईरान के खिलाफ अमेरिका की आक्रामक नीति के बीच ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से देश को “पाषाण युग में भेजने” जैसी कड़ी चेतावनी दी। वहीं अमेरिकी रक्षा नेतृत्व, जिसमें Pete Hegseth शामिल हैं, ने भी ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले की बात कही है। इन बयानों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है कि कहीं यह संघर्ष अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून की सीमाओं को पार तो नहीं कर रहा।
ईरान में कई ऐसे ठिकानों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिन्हें नागरिक बुनियादी ढांचे का हिस्सा माना जाता है। तेहरान स्थित Sharif University of Technology, जिसे देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में गिना जाता है, कथित तौर पर हमले का निशाना बना। इसी तरह एक स्कूल पर हमले में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत की खबर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया है। अमेरिका ने इसे खुफिया चूक बताया, लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि लक्ष्य की पुष्टि किए बिना हमला करना गंभीर उल्लंघन हो सकता है।
इसके अलावा, तेहरान और करज को जोड़ने वाले पुल तथा बिजली संयंत्रों को निशाना बनाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत, ऐसे ढांचे जिनका सीधा सैन्य उपयोग न हो, उन्हें निशाना बनाना प्रतिबंधित माना जाता है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में एक अहम सवाल है—क्या अमेरिकी कार्रवाई युद्ध अपराध की श्रेणी में आती है? यदि हां, तो क्या राष्ट्रपति ट्रंप जैसे शीर्ष नेता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
युद्ध अपराधों की परिभाषा मुख्य रूप से International Criminal Court और जिनेवा कन्वेंशनों के तहत तय होती है। इसमें जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाना, अनुपातहीन बल प्रयोग और बिना सैन्य आवश्यकता के नागरिक ढांचे को नष्ट करना शामिल है। अगर किसी सैन्य अभियान में इन सिद्धांतों का उल्लंघन होता है, तो उसे युद्ध अपराध माना जा सकता है।
हालांकि, कानूनी प्रक्रिया इतनी सीधी नहीं है। अमेरिका International Criminal Court का सदस्य नहीं है, जिसका मतलब है कि वहां के नेताओं पर सीधे मुकदमा चलाना जटिल हो जाता है। फिर भी, अंतरराष्ट्रीय दबाव, संयुक्त राष्ट्र जांच और अन्य देशों के न्यायिक तंत्र के जरिए जवाबदेही तय करने के प्रयास किए जा सकते हैं।
ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। Islamic Revolutionary Guard Corps ने खाड़ी क्षेत्र के देशों को चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष बढ़ता है, तो इसका दायरा और फैल सकता है। इस बयान ने पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता की आशंका को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के दौरान भाषा और बयानबाजी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब कोई शीर्ष नेता किसी देश या उसकी “पूरी सभ्यता” को खत्म करने की बात करता है, तो यह न केवल नैतिक सवाल उठाता है बल्कि कानूनी जांच का आधार भी बन सकता है। ऐसे बयान भविष्य में किसी अंतरराष्ट्रीय जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
फिलहाल, यह स्पष्ट है कि मध्य पूर्व का यह संघर्ष सिर्फ सैन्य टकराव नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, नैतिकता और वैश्विक राजनीति की परीक्षा बन चुका है। क्या इस विवाद का समाधान कूटनीति से निकलेगा या यह और गहराएगा, यह आने वाले समय में तय होगा। लेकिन एक बात तय है—इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या कोई भी नेता कानून से ऊपर हो सकता है।

केरल में चुनावी रण: 9 अप्रैल को तय होगी 883 उम्मीदवारों की किस्मत

लोकतंत्र का महासंग्राम, 9 अप्रैल को वोटिंग—140 सीटों पर 883 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर

त्रिवेंतपुरम (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)केरल में लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। 9 अप्रैल 2026 को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राज्य पूरी तरह तैयार है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। राज्य की 140 विधानसभा सीटों पर कुल 883 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला करोड़ों मतदाता करेंगे।
राज्यभर में कुल 30,495 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 24 सहायक मतदान केंद्र भी शामिल हैं। ये अतिरिक्त केंद्र मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद जरूरत के अनुसार बनाए गए हैं। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि हर मतदाता को अपने अधिकार का उपयोग करने में किसी प्रकार की बाधा न हो। विशेष रूप से कासरगोड, कन्नूर, पलक्कड़, मलप्पुरम और एर्नाकुलम जिलों में नए मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिससे मतदान प्रक्रिया और अधिक सुलभ हो सके।
इस बार चुनाव में महिला सशक्तिकरण और समावेशिता की झलक भी देखने को मिल रही है। कुल 352 मतदान केंद्रों का संचालन पूरी तरह महिलाओं द्वारा किया जाएगा, जबकि 37 केंद्रों का प्रबंधन दिव्यांग कर्मियों के हाथों में होगा। यह पहल न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करती है, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी को भी सुनिश्चित करती है।
चुनाव प्रक्रिया के संचालन के लिए लगभग 1.46 लाख प्रशिक्षित चुनाव अधिकारियों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 76,000 पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान तैनात किए गए हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य है कि मतदान शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो।
इस चुनाव में एक और महत्वपूर्ण पहल ‘होम वोटिंग’ सुविधा रही है। 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए शुरू की गई इस व्यवस्था को व्यापक समर्थन मिला है। केलकर के अनुसार, इस श्रेणी के 96 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने पहले ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है। यह आंकड़ा लोकतंत्र में बढ़ती भागीदारी और जागरूकता का संकेत देता है।
राजनीतिक दृष्टि से इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय है। सत्तारूढ़ एलडीएफ, विपक्षी यूडीएफ और एनडीए के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का दावा कर रहा है। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ राज्य की परंपरागत सत्ता परिवर्तन की लय को दोहराने की उम्मीद में है। दूसरी ओर, एनडीए भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की रणनीति के साथ मैदान में है।
चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। मतदान के बाद सभी मतपत्रों और ईवीएम को 140 स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा जाएगा, जहां 4 मई 2026 को मतगणना की जाएगी और नतीजों की घोषणा होगी।
इस चुनाव को लेकर राज्य में उत्साह अपने चरम पर है। राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं मतदाता भी अपने अधिकार के प्रति जागरूक दिखाई दे रहे हैं। यह चुनाव न केवल सरकार के भविष्य का निर्धारण करेगा, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा को भी तय करेगा।
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अंधेरे में गौ सेवा: बिजली, पानी और चारे के बिना जूझता गौ सदन

आदर्श गौ सदन बना बदहाली का प्रतीक: 26 गोवंश संकट में, बीमार पशुओं को 10 दिन से नहीं मिला इलाज

डॉ सतीश मिश्र


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पनियरा विकास खंड के चन्दन चाफी गांव स्थित आदर्श जिला पंचायत गौ सदन आज अपनी दुर्दशा के कारण सवालों के घेरे में है। कागजों में “आदर्श” कहलाने वाला यह गौ सदन जमीनी हकीकत में अव्यवस्थाओं और लापरवाही का केंद्र बन चुका है। यहां रह रहे 26 गोवंशों का जीवन संकट में है, जबकि जिम्मेदार विभाग और प्रशासनिक तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है।
गौ सदन की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि यहां मौजूद दो गोवंश पिछले 10 दिनों से बीमार हैं, लेकिन बार-बार सूचना देने के बावजूद अब तक कोई पशु चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंचा। केयरटेकर भगवत पासवान और गीता देवी के अनुसार उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को फोन कर स्थिति से अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे पशुओं की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।
गौ सदन में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव साफ दिखाई देता है। बीते 12 वर्षों से यहां बिजली की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। जो सोलर सिस्टम लगाया गया था, वह भी लंबे समय से खराब पड़ा है। परिणामस्वरूप रात के समय अंधेरे में ही केयरटेकरों को पशुओं की देखभाल करनी पड़ती है, जो न केवल कठिन बल्कि जोखिम भरा भी है।
चारे की स्थिति भी अत्यंत चिंताजनक है। गोवंशों को न तो पर्याप्त हरा चारा मिल रहा है और न ही संतुलित पोषक आहार। केवल चोकर और सूखे भूसे के सहारे पशुओं का पालन किया जा रहा है, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार की कमी से पशु जल्दी बीमार पड़ सकते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।
पानी की व्यवस्था भी बदहाल है। गौ सदन में मौजूद पानी की टंकी दूषित हो चुकी है, जिससे पशुओं को नल के पानी से प्यास बुझानी पड़ रही है। यह स्थिति पशुओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है, क्योंकि दूषित पानी से संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है।
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यहां कार्यरत केयरटेकरों का है। भगवत पासवान और गीता देवी को पिछले तीन महीनों से मानदेय नहीं मिला है। आर्थिक तंगी के बावजूद वे किसी तरह अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन लगातार भुगतान न मिलने से उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
जिला पंचायत से जुड़े संदीप सिंह ने इस बदहाल व्यवस्था के पीछे बजट की कमी को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि विभाग को समय पर धनराशि उपलब्ध नहीं हो पाती और प्रति पशु 50 रुपये प्रतिदिन की दर मौजूदा महंगाई के हिसाब से बेहद कम है। ऐसे में गौ सदन का संचालन सुचारू रूप से करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
हालांकि ग्रामीण इस तर्क से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि 26 पशुओं के हिसाब से प्रतिदिन लगभग 1300 रुपये और महीने में करीब 39 हजार रुपये की राशि बनती है। इसके बावजूद गौ सदन की हालत दयनीय होना गंभीर अनियमितताओं और प्रबंधन की विफलता की ओर संकेत करता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गौ सदन की व्यवस्थाओं को तत्काल सुधारा जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यहां मौजूद गोवंशों की जान पर बन सकती है।
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि पशु संरक्षण के दावों पर भी सवाल खड़े करता है। “आदर्श” गौ सदन की यह स्थिति सिस्टम की सच्चाई को सामने लाती है, जहां योजनाएं कागजों में सफल दिखाई देती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी हालत बेहद चिंताजनक होती है।

डीडीयू में तैयार हो रहे आधुनिक दीक्षा भवन और संवाद भवन, अगले माह से शुरू होंगे कार्यक्रम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित दीक्षा भवन एवं संवाद भवन ऑडिटोरियम अपने अंतिम निर्माण चरण में पहुंच गए हैं। दोनों भवनों में शेष कार्य तीव्र गति से पूर्ण किया जा रहा है और संभावना है कि आगामी माह से इनमें शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों का आयोजन प्रारंभ हो जाएगा।
इन अत्याधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण से विश्वविद्यालय परिसर में अकादमिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों के आयोजन के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
दीक्षा भवन एक पूर्णतः वातानुकूलित अत्याधुनिक सभागार है, जिसमें 576 व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है। लगभग 7000 वर्गफुट क्षेत्रफल में निर्मित इस भवन में उच्च गुणवत्ता का फ्लोर कार्पेट और आधुनिक ऑडियो-विजुअल सिस्टम स्थापित किया गया है। पूरे भवन में 68 टन क्षमता का VRV एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे संतुलित तापमान और आरामदायक वातावरण सुनिश्चित होता है।
भवन में पुरुष एवं महिला के लिए पृथक ग्रीन रूम (एयर कंडीशनर सहित), सुसज्जित वीआईपी प्रतीक्षालय (स्प्लिट एसी सहित) तथा 100 से अधिक व्यक्तियों की क्षमता वाला एंट्रेंस हॉल (5 स्प्लिट एसी सहित) भी बनाया गया है। बाहरी परिसर का भी विकास किया गया है, जहां 80 स्ट्रीट लाइट पोल और 100 पत्थर की बेंचें स्थापित की गई हैं, जिससे आगंतुकों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
पीएम ऊषा योजना के अंतर्गत दीक्षा भवन के निर्माण पर लगभग 953.46 लाख रुपये तथा संवाद भवन पर लगभग 406.00 लाख रुपये की लागत व्यय की गई है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि दीक्षा भवन एवं संवाद भवन विश्वविद्यालय के अधोसंरचनात्मक विकास में मील का पत्थर साबित होंगे। इन सुविधाओं से शिक्षण और शोध गतिविधियों को नई गति मिलेगी और विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
इन भवनों के क्रियाशील होने से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा और संस्थान की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और अधिक सुदृढ़ होगी।

“6 साल बाद इंसाफ: सातानकुलम केस में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा”

सातानकुलम कस्टोडियल डेथ केस: मदुरै कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, मानवाधिकारों की रक्षा में न्याय की निर्णायक जीत


गोंदिया वैश्विक स्तर पर वर्ष 2020 में जब दुनिया कोविड-19 महामारी के अभूतपूर्व संकट से जूझ रही थी, तब भारत में लागू लॉकडाउन ने जहां एक ओर जनजीवन को थाम दिया, वहीं दूसरी ओर सत्ता के दुरुपयोग और मानवाधिकारों के उल्लंघन के कुछ गंभीर मामले भी सामने आए। इन्हीं में से एक था तमिलनाडु के सातानकुलम का चर्चित कस्टोडियल डेथ केस, जिसने पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया था।
19 जून 2020 को सातानकुलम में एक सामान्य घटना ने भयावह रूप ले लिया। मोबाइल दुकान चलाने वाले पी. जयराज (59) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) पर लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, लेकिन यह कार्रवाई कानून के दायरे से बाहर जाकर अमानवीय अत्याचार में बदल गई। परिजनों के अनुसार, दोनों को पूरी रात बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद 22 जून को बेनिक्स और 23 जून को जयराज की मौत हो गई।शुरुआत में पुलिस ने मौत का कारण स्वास्थ्य समस्याएं बताया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सच्चाई उजागर कर दी। शरीर पर गंभीर चोटों के निशान इस बात का प्रमाण थे कि यह महज हिरासत नहीं, बल्कि क्रूरता की पराकाष्ठा थी। एक महिला कांस्टेबल के बयान ने भी इस घटना की भयावहता को उजागर किया, जिसके बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया।

लेखक-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया


यह मामला छह वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया से गुजरा। सबूतों की सुरक्षा, गवाहों की रक्षा और कानूनी जटिलताओं के बीच लंबी लड़ाई के बाद 6 अप्रैल 2026 को मदुरै की फर्स्ट एडिशनल सेशंस कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मानते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि यह केवल हत्या नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग और मानवीय गरिमा का घोर उल्लंघन है।
भारतीय न्याय प्रणाली में “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” सिद्धांत, जिसकी नींव बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य जैसे ऐतिहासिक फैसले में रखी गई थी, केवल अत्यंत क्रूर और असाधारण मामलों में लागू होता है। इस केस में अदालत ने माना कि कानून के रक्षक ही अपराधी बन गए, जिससे समाज में भय और अन्याय की स्थिति उत्पन्न हुई।
अदालत ने दोषियों को सजा देने के साथ-साथ पीड़ित परिवार को 1 करोड़ 40 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह निर्णय न्याय के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें दंड और राहत दोनों शामिल हैं।
फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने संतोष और पीड़ा दोनों भावनाएं व्यक्त कीं। उनका कहना था कि न्याय मिला, लेकिन अपनों की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने इसे उन सभी पीड़ितों के लिए न्याय बताया, जो पुलिस अत्याचार का शिकार हुए हैं।
यह मामला न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना। मानवाधिकार संगठनों ने इसे पुलिस सुधार की आवश्यकता का स्पष्ट संकेत माना। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशीलता को और मजबूत करना अनिवार्य हो गया है।
सातानकुलम केस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब सत्ता का दुरुपयोग होता है, तो उसके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं। यह फैसला लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्ति का प्रतीक है, जो यह संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
अंततः यह कहना उचित होगा कि न्याय में देरी भले हो, लेकिन जब न्याय मिलता है, तो वह समाज के लिए एक मिसाल बनता है। सातानकुलम केस इसी सच्चाई का जीवंत उदाहरण है—जहां छह वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद “सत्यमेव जयते” की विजय हुई।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

डीडीयू का छात्रहित में बड़ा फैसला, SWAYAM से वंचित विद्यार्थियों को मिला अंतिम अवसर

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रहित में बड़ा निर्णय लेते हुए स्वयं (SWAYAM) पाठ्यक्रमों में पंजीकरण से वंचित विद्यार्थियों को एक बार का विशेष अवसर प्रदान किया है। ऐसे विद्यार्थियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित पाठ्यक्रमों की अध्ययन सामग्री SWAYAM प्लेटफॉर्म से पढ़ें और विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एंड सेमेस्टर परीक्षा में सम्मिलित हों। परीक्षा फॉर्म भरते समय संबंधित कोर्स का चयन करना अनिवार्य होगा।

विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार जनवरी सेमेस्टर में अब तक 1,08,683 से अधिक नामांकन दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 98,017 से अधिक यूनिक यूजर्स सक्रिय रूप से जुड़े हैं। इसके साथ ही 1,14,740 से अधिक असाइनमेंट सबमिशन विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाते हैं, जो डिजिटल शिक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

स्नातक स्तर पर सेमेस्टर-II में कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम (SEC) 3 क्रेडिट तथा सेमेस्टर-IV में क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम (AEC) 2 क्रेडिट के रूप में संचालित हैं। वहीं स्नातकोत्तर स्तर पर इंटर-डिपार्टमेंटल ओपन इलेक्टिव पाठ्यक्रम 4 क्रेडिट के अनुसार निर्धारित हैं। जिन विभागों में क्रेडिट निर्धारित मानक से कम हैं, वहां अतिरिक्त घटक जोड़कर क्रेडिट की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

कुलपति पूनम टंडन ने कहा कि SWAYAM जैसे राष्ट्रीय मंच से विद्यार्थियों को देश के शीर्ष संस्थानों के पाठ्यक्रमों से जोड़ना विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड स्तर पर हुआ पंजीकरण नई शिक्षा नीति के अनुरूप डिजिटल शिक्षण के प्रति विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अवसर केवल एक बार के लिए दिया जा रहा है और भविष्य में किसी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी।

स्वयं के नोडल अधिकारी अजय कुमार शुक्ल ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए परीक्षा में सम्मिलित हों।

पुरानी रंजिश में युवक की मौत के मामले में आरोपी को सजा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के धनघटा थाना क्षेत्र के सोनाड़ी गांव में वर्ष 2018 में हुई युवक की मौत के मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, घटना 31 जनवरी 2018 की है जब जगदम्वा प्रसाद चौरसिया का पुत्र अभय कुमार घर के सामने सब्जी लेने गया था। उसी दौरान बृजेश मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा और दोनों बातचीत करने लगे।
इसी बीच पड़ोसी सुधाकर साहनी पुरानी रंजिश के चलते स्कॉर्पियो वाहन से वहां आया और अभय व बृजेश की मोटरसाइकिल पर गाड़ी चढ़ा दी। हादसे में अभय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बृजेश गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने दोनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने अभय को मृत घोषित कर दिया।
मामले में थाना धनघटा में मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश किए गए, जिन्होंने घटना का समर्थन किया।
सत्र न्यायाधीश ने आरोपी सुधाकर साहनी को दोषी मानते हुए 3 वर्ष के कारावास और ₹10,000 के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर 6 माह के अतिरिक्त कारावास का आदेश भी दिया गया।

स्थाई लोक अदालत का फैसला: पीड़ित परिवार को मिला 15.70 लाख का मुआवजा, त्वरित न्याय से बढ़ा भरोसा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। स्थाई लोक अदालत, महराजगंज द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में मंगलवार को पीड़ित परिवार को एवार्ड राशि का चेक प्रदान किया गया। न्यायालय के इस निर्णय से पीड़ितों को न केवल आर्थिक राहत मिली, बल्कि त्वरित न्याय व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास भी और मजबूत हुआ।
जानकारी के अनुसार वाद संख्या 01/2024 खुशी व अन्य बनाम प्रबंधक गो-डिजिट जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में 9 जनवरी 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में बीमा कंपनी द्वारा एवार्ड की धनराशि जमा कराई गई थी। इसके उपरांत मंगलवार को विधिवत प्रक्रिया पूरी करते हुए चेक वितरित किया गया।
स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष राकेश मालवीय ने अपने न्यायालय कक्ष में आयोजित एक सादे कार्यक्रम के दौरान कुल 15 लाख 70 हजार रुपये की एवार्ड राशि का चेक याची खुशी पत्नी स्वर्गीय सचिन मणि, सरोज पत्नी रघुवंश मणि तथा रघुवंश मणि पुत्र स्वर्गीय बुद्धेश मणि को प्रदान किया।
अध्यक्ष राकेश मालवीय ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि स्थाई लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य सुलह-समझौते के आधार पर त्वरित एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है, ताकि आमजन को लंबी और जटिल न्यायिक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों का शीघ्र निस्तारण कर पीड़ितों को समय पर राहत दिलाई जा रही है।
इस अवसर पर स्थाई लोक अदालत की सदस्य गुंजा राय एवं प्रियंका तिवारी भी मौजूद रहीं। वहीं याचियों की ओर से विद्वान अधिवक्ता राम भवन यादव ने न्यायालय की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे निर्णय आम जनता के लिए बेहद लाभकारी हैं।
कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। उपस्थित लोगों ने स्थाई लोक अदालत की त्वरित और प्रभावी न्याय व्यवस्था की सराहना की तथा इसे आमजन के लिए एक सशक्त विकल्प बताया।

स्वास्थ्य के प्रति सजगता ही सशक्त समाज की नींव: कुलपति प्रो. पूनम टंडन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा एम्स गोरखपुर एवं जिला स्वास्थ्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य परीक्षण शिविर एवं स्वास्थ्य कार्ड अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा तथा कुलपति प्रो. पूनम टंडन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस वर्ष की थीम “टुगेदर फॉर हेल्थ: स्टैंड विथ साइंस” रही।
विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की व्यापक सहभागिता रही। यह आयोजन निवारक स्वास्थ्य और जन-जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व स्वास्थ्य दिवस स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक वैश्विक अभियान है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रोकथाम और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं पर बल देता है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति सजगता और नियमित जांच को अपनाकर ही सशक्त एवं स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने विज्ञान आधारित स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया।
जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। उन्होंने जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों और रोगों की रोकथाम पर बल देते हुए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की।
एम्स गोरखपुर एवं जिला स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा शिविर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। डॉ. प्रियंका शिशोदिया के नेतृत्व में टीम ने मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एनीमिया, स्त्री रोग संबंधी जांच और नेत्र परीक्षण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराईं। साथ ही छात्राओं को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए सैनिटरी पैड वितरित किए गए।
राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम (RBSK) की नोडल अधिकारी डॉ. अर्चना सिंह की भी सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम के समन्वय में श्रद्धा सिकरिया का योगदान महत्वपूर्ण रहा, जबकि व्यवस्थापन में नेहा गुप्ता, विपिन कुमार यादव, ओंकार निषाद, ए. हजारी लाल और डॉ. एस.पी. कुमार ने सहयोग किया।
कार्यक्रम के दौरान गृह विज्ञान विभाग की प्रो. दिव्या रानी सिंह और उनकी शोधार्थी काजोल आर्यन द्वारा एनीमिया जागरूकता से संबंधित पोषण कैलेंडर, पोषण पुस्तिका और जागरूकता फोल्डर का अनावरण किया गया। इन सामग्रियों का उद्देश्य सही खान-पान और पोषण के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
शिविर में तीन सौ से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया और सभी प्रतिभागियों को स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए गए। संयोजक प्रो. दिव्या रानी सिंह ने बताया कि महिला अध्ययन केंद्र द्वारा ऐसे कार्यक्रम आगे भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में प्रो. अनुभूति दुबे, डॉ. विस्मिता पालीवाल, डॉ. प्रीति गुप्ता, डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. नीता सिंह, डॉ. गार्गी पांडे, डॉ. गरिमा यादव सहित विभाग के शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम अंत में आभार ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ।

स्कूली वाहनों की सघन जांच शुरू, सुरक्षा मानकों पर सख्ती

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रियंवदा सिंह के निर्देशन में स्कूली बच्चों का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मॉनिटरिंग पोर्टल (UPISVMP) तैयार किया गया है, जिस पर सभी स्कूलों को ऑनबोर्ड कर उनके वाहनों का निरीक्षण किया जा रहा है।
इसी क्रम में नगरीय क्षेत्र स्थित राज ग्लोबल एवं ब्लूमिंग बर्ड स्कूल का निरीक्षण किया गया, जहां स्कूली वाहनों में सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान सीसीटीवी, जीपीएस, अग्निशमन यंत्र, स्पीड गवर्नर, फर्स्ट एड बॉक्स, आपातकालीन निकास द्वार, स्कूल का नाम, परिवहन विभाग का हेल्पलाइन नंबर और रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप जैसे आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच की गई।
जिन वाहनों में कमियां पाई गईं, उनके सुधार के लिए संबंधित स्कूल प्रबंधन को निर्देशित किया गया। साथ ही वाहन चालकों से संवाद कर उन्हें सतर्कता से वाहन संचालन करने और बच्चों को सुरक्षित घर से स्कूल व वापस पहुंचाने के प्रति जागरूक किया गया।
अधिकारी ने सभी स्कूली वाहन संचालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों को पोर्टल पर शीघ्र ऑनबोर्ड कराएं और सुरक्षा मानकों की सभी कमियों को समय रहते पूरा कर लें, ताकि निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की समस्या न हो। इस दौरान हिमांशु मणि त्रिपाठी, कनिष्ठ सहायक भी उपस्थित रहे।

विदाई केवल अंत नहीं, एक नए जीवन की शुरुआत: प्रो. ओम प्रकाश सिंह

सपनों की उड़ान के साथ नई शुरुआत का संदेश देता विदाई समारोह

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखपुर के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा परास्नातक विद्यार्थियों के सम्मान में आयोजित विदाई समारोह भावनात्मक और प्रेरणादायक माहौल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विदाई केवल अंत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है और समय के साथ इसका स्वरूप बदलता रहता है। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति को समता मूलक बताते हुए उन्होंने कहा कि उसमें समानता, नैतिकता और सार्वभौमिक ज्ञान को विशेष महत्व दिया जाता था, जबकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली अधिकतर रोजगार उन्मुख हो गई है, जहाँ ज्ञान को व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि वे अर्जुन की तरह अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहें और उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करें। साथ ही यह भी कहा कि विद्यार्थी राष्ट्र के भावी निर्माता हैं और उन्हें अपनी शिक्षा का उपयोग समाज के व्यापक हित में करना चाहिए।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रोफेसर अर्चना सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता उन्हीं को मिलती है जो अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन की चुनौतियाँ हमें मजबूत बनाती हैं और आगे बढ़ने की दिशा दिखाती हैं।
विभाग की प्रभारी डॉ. निधि राय ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
इस अवसर पर शिक्षाशास्त्र विभाग के डॉ. श्याम सिंह, डॉ. त्रिभुवन मिश्रा, डॉ. अखंड प्रताप सिंह, डॉ. जागृति विश्वकर्मा, डॉ. सुजीत शर्मा सहित अन्य विभागों के मुख्य नियंता डॉ. आर. पी. यादव, डॉ. जितेंद्र पांडेय, डॉ. विभा सिंह, डॉ. अनुपमा मिश्रा, डॉ. अदिति दुबे, डॉ. शाश्वत चंदेल, डॉ. विवेकानंद शुक्ला, डॉ. सुनील सिंह, डॉ. अंशुमान सिंह समेत महाविद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित रहे।

नई किताबों संग खिले नन्हे चेहरे मौना गढ़वा विद्यालय में ज्ञान का उत्सव

भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
उच्च प्राथमिक विद्यालय मौना गढ़वा में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत पुस्तक वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षा समिति के अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान डॉ. जनार्दन कुशवाहा, विद्यालय के प्रधानाचार्य रुदल प्रसाद तथा सहायक अध्यापक प्रदीप कुमार तिवारी, अवधेश प्रसाद, सच्चितानंद शुक्ला, अनवर अली, सुधा विश्वकर्मा सहित अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को नई पाठ्य पुस्तकें वितरित की गईं। किताबें हाथ में मिलते ही बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलकने लगी। विद्यार्थियों ने नई किताबें पाकर उत्साह व्यक्त किया और नियमित रूप से पढ़ाई करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान डॉ. जनार्दन कुशवाहा ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा ही आगे चलकर उच्च शिक्षा की मजबूत नींव बनती है और यही जीवन में सफलता की कुंजी है।
वहीं प्रधानाचार्य रुदल प्रसाद एवं अन्य शिक्षकों ने भी छात्रों को उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर मेहनत और अनुशासन का संदेश दिया।
इस पहल के तहत सभी विद्यार्थियों को समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं, जिससे उनकी पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा न आए। विद्यालय परिवार के सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

बेटी विवाह शगुन योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थी का स्थलीय सत्यापन पूर्ण

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
एफआरसीटी (FRCT) द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रम में “बेटी विवाह शगुन योजना” के तहत पात्र लाभार्थी का भौतिक सत्यापन किया गया।
देवरिया जनपद के ग्राम बादीपुर, ठाकुर देवरिया (भलुअनी )निवासी रीता देवी की सुपुत्री रंजना भारती का विवाह, आगामी 23 अप्रैल 2026 को सौरभ कुमार के साथ निर्धारित है।
योजना के अंतर्गत सहायता प्रदान किए जाने से पूर्व प्रदेश व जिला/ब्लाक टीम द्वारा लाभार्थी के निवास पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई।
सत्यापन के दौरान प्रदेश मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश कुशवाहा,भलुअनी ब्लाक अध्यक्ष जितेन्द्र कुशवाहा, ब्लाक महामंत्री लक्ष्मण प्रजापति,ब्लाक उपाध्यक्ष महेश प्रजापति,ब्लाक आईटी सेल प्रभारी शैलेन्द्र कुशवाहा, परिवार के सदस्य व गांव के सभी सदस्य जगतनारायण, रविशंकर व अन्य ग्रामवासी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश कुशवाहा ने योजना के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि संस्था के माध्यम से मार्च 2025 से मार्च 2026 तक बेटी विवाह शगुन योजना में 72 बेटियों की शादी में लगभग एक करोड़ रुपये व आकस्मिक निधन योजना अन्तर्गत 6 परिवारों को लगभग 75 लाख रूपये कुल एक करोड़ 75 लाख रूपए का सहयोग सदस्यों द्वारा मात्र 50/रुपये माह सीधे लाभार्थी के खाते में भेजा गया।
इस माह बेटी विवाह शगुन योजना के अंतर्गत प्रति लाभार्थी 2 लाख रूपये से अधिक धनराशि के सहयोग का अनुमान है।

एमजीयूजी: पोस्टरों के जरिए गूंजा स्वस्थ जीवन का संदे

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में मंगलवार को ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ के अवसर पर पोस्टर प्रस्तुति का आयोजन किया गया। नर्सिंग एवं एलाइड हेल्थ केयर संकाय के इमरजेंसी एंड ट्रामा केयर के विद्यार्थियों ने “स्वास्थ्य के लिए एक साथ-विज्ञान के साथ खड़े हों” विषय पर आकर्षक और जागरूकता आधारित प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ जीवनशैली और रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूक करना रहा। विद्यार्थियों ने अपने पोस्टरों के माध्यम से बताया कि सभी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए तथा संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। साथ ही स्वच्छता, संतुलित पोषण, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को भी सरल भाषा में समझाया गया।
प्रस्तुति के दौरान विद्यार्थियों ने बताया कि स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद जरूरी है। साफ-सफाई बनाए रखना, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना तथा नशे से दूर रहना भी आवश्यक है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में इमरजेंसी एंड ट्रामा केयर की छात्राएं सुप्रिया, रागिनी, नेहा यादव, नेहा गुप्ता और श्रेया सिंह ने सक्रिय सहभागिता निभाई। आयोजन नर्सिंग एवं पैरामेडिकल सभागार में संपन्न हुआ, जिसमें नर्सिंग एवं पैरामेडिकल की अधिष्ठाता डॉ. डी.एस. अजीथा, प्राचार्य रोहित कुमार श्रीवास्तव, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।