Friday, May 1, 2026
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शराब के नशे ने ली युवक की जान, परिवार में मचा कोहराम

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

शराब की लत एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। नशे की हालत में घर लौटे एक युवक की दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। इस घटना से पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है, वहीं गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के निवासी 25 वर्षीय गोलू शनिवार की रात नशे की हालत में घर पहुंचे थे। इसी दौरान असंतुलित होकर वह घर में रखे हंसिए (धारदार कृषि उपकरण) पर गिर पड़े, जिससे उनकी गर्दन में गंभीर चोट लग गई। परिजनों ने आनन-फानन में उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बघूड़ पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
परिजन युवक को जिला अस्पताल ले जाने के बजाय मऊ के एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां उसका इलाज चल रहा था। कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद सोमवार की रात उसने दम तोड़ दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।मृतक की पत्नी, जो सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के उमेदा गांव की रहने वाली है, एक साल के मासूम बच्चे के साथ अपने मायके में रह रही थी। पति की मौत की सूचना मिलते ही वह अपने बच्चे के साथ ससुराल पहुंची। पत्नी और मां मीना देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।मृतक की मां मीना देवी ने बिलखते हुए बताया कि वह और बहू रोज गोलू को शराब की लत छोड़ने के लिए समझाते थे, लेकिन उसने उनकी बात नहीं मानी। उन्होंने कहा कि पहले ही उनके पति का निधन हो चुका था और अब बड़ा बेटा भी चला गया। गोलू ही उनका आखिरी सहारा था, जो अब उनसे छिन गया। परिवार के सामने अब जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।ग्रामीणों के सहयोग से युवक का अंतिम संस्कार मुक्तिधाम हल्दीरामपुर में किया जाएगा। इस दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

युवा वर्ग इस घटना से सिख ले

यह घटना समाज, विशेषकर नई पीढ़ी के लिए एक गंभीर चेतावनी है। मादक पदार्थों और शराब का सेवन न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों को भी बर्बाद कर सकता है। नशा इंसान की सोचने-समझने की क्षमता को खत्म कर देता है और कई बार ऐसे हादसों को जन्म देता है, जिनका परिणाम जानलेवा होता है। इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे नशे से दूर रहें, अपने जीवन और परिवार की जिम्मेदारियों को समझें तथा एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण में योगदान दें।

नपा के वरिष्ठ लिपिक की असामयिक निधन से परिजनों मे शोक की लहर

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
नगरपालिका गौरा बरहज के वरिष्ठ लिपिक जोखन प्रसाद की मंगलवार को असामयिक निधन से समस्त नपा परिवार एवं उनके परिजनों मे शोक की लहर व्याप्त है। इस दुःख की घड़ी मे नगरपालिका कार्यालय परिसर मे सभी अधिकारीयों, कर्मचारियों एवं वार्ड सदस्यों की उपस्थिति मे उनकी पुण्य स्मृति मे 2मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। इस दौरान सभी लोगो ने दिवंगत आत्मा की शन्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
इस अधिशासी अधिकारी निरुपमा प्रताप एवं सभासद रतन सोनकर, वरिष्ठ लिपिक मनोज गुप्ता, सहित अन्य गणमान्य लोगो ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि जोखन प्रसाद एक कर्मठ, ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी थे, उनके अ असामयिक निधन से नगरपालिका बरहज को अपूरणीय हानि हुई है।
नपा अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने इस दुःख कि घड़ी मे शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जोखन प्रसाद एक सरल स्वभाव धनी व्यक्तित्व थे, उनकी कार्य कुशलता सदैव हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे तथा परिजनों को इस कठिन घड़ी मे धर्य एवं संबल प्रदान करे।

बेटी विवाह शगुन योजना के तहत लाभार्थी का हुआ भौतिक सत्यापन, 21 अप्रैल को होगा विवाह

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा):
एफआरसीटी (FRCT) द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत “बेटी विवाह शगुन योजना” के तहत पात्र लाभार्थी का स्थलीय (भौतिक) सत्यापन किया गया।
देवरिया जनपद के ग्राम भीमपुर, पोस्ट डुमवलिया निवासी संधू चौहान की सुपुत्री खुशबू का विवाह आगामी 21 अप्रैल 2026 को विनय के साथ निर्धारित है। योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने से पूर्व जिला टीम द्वारा लाभार्थी के घर पहुंचकर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई।
सत्यापन के दौरान जिलाध्यक्ष शुभम शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष भालचंद्र मिश्रा, महामंत्री दुर्गावती गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष विजयलक्ष्मी यादव, सलेमपुर ब्लाक अध्यक्ष पवन गुप्ता, सलेमपुर के प्रधानाचार्य एवं FRCT के सक्रिय कार्यकर्ता मोहन द्विवेदी सहित परिवार के सदस्य व ग्रामवासी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष शुभम शर्मा ने योजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्था पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि मार्च 2025 से मार्च 2026 तक “बेटी विवाह शगुन योजना” के माध्यम से 72 बेटियों के विवाह में लगभग एक करोड़ रुपये का सहयोग दिया गया, जो सदस्यों द्वारा मात्र 50 रुपये की सहभागिता से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजा गया।

जबरन विवाह के प्रयास से युवती सहमी, पुलिस से सुरक्षा की गुहार

सुखपुरा /बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

जनपद के सुखपुरा थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने गांव के ही एक युवक पर जबरन विवाह का दबाव बनाने और उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद से पीड़िता और उसका परिवार भय के साए में जीने को मजबूर है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुखपुरा क्षेत्र की रहने वाली एक युवती ने आरोप लगाया है कि गांव शेरखा भला निवासी पंकज भारती नामक युवक पिछले कुछ समय से उस पर प्रेम संबंध बनाने का दबाव डाल रहा था। युवती के अनुसार, उसने कई बार इस प्रस्ताव को ठुकराया, लेकिन युवक अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। पीड़िता का कहना है कि 5 अप्रैल की रात लगभग 1 बजे आरोपी युवक उसके घर में घुस आया और उसे जबरदस्ती पकड़कर विवाह करने का प्रयास करने लगा। इस दौरान युवती ने किसी तरह स्वयं को बचाया और शोर मचाया, जिससे परिवार के अन्य सदस्य जाग गए। परिवार के लोगों के पहुंचने पर आरोपी मौके से फरार हो गया।युवती ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी लगातार उसे धमकी दे रहा है कि यदि उसने उसकी बात नहीं मानी तो वह उसे और उसके परिवार को बदनाम कर देगा तथा जबरन विवाह करेगा। इन धमकियों के कारण पीड़िता और उसका परिवार मानसिक तनाव में है।घटना के तुरंत बाद परिजनों ने डायल 112 पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। हालांकि, अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई न होने से परिजन असंतुष्ट हैं।पीड़िता ने थाना सुखपुरा में लिखित प्रार्थना पत्र देकर आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।इस संबंध में थाना पुलिस का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है और जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।गांव में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग इस प्रकार की घटनाओं पर चिंता जता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।फिलहाल पीड़िता न्याय की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रही वही जब उसकी सुनवाई नही हुई तो युवती टावर पर चढ़ कर जान देने की मन बना लिया और गाव पर स्थित टावर पर चढ़ गयी समाचार लिखे जाने तक वह टावर पर थी

होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से भारत की गैस सप्लाई पर बड़ा असर

ईरान युद्ध का असर: भारत में LPG के बाद अब PNG-CNG संकट की आहट, सप्लाई चेन पर बढ़ा खतरा


ईरान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी तनाव अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गहरा असर डाल रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष ने न केवल मध्य-पूर्व बल्कि भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया की गैस आपूर्ति व्यवस्था को झकझोर दिया है। ताजा संकेत बताते हैं कि देश में पहले से चल रहे एलपीजी संकट के बाद अब पीएनजी (PNG) और सीएनजी (CNG) की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
दरअसल, यह पूरा संकट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले कतर के दो एलएनजी जहाजों को रोक दिया, जिससे सप्लाई चेन बाधित हो गई है।
सूत्रों के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक, कतर के ‘अल दायेन’ और ‘राशिदा’ नाम के एलएनजी टैंकर एशिया की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन उन्हें रास्ता नहीं मिला और वापस लौटना पड़ा। ये जहाज चीन और पाकिस्तान की दिशा में जा रहे थे, जिससे यह साफ है कि इसका असर पूरे एशियाई बाजार पर पड़ेगा।

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भारत की स्थिति इस मामले में काफी संवेदनशील है। देश अपनी कुल गैस जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान कतर से आने वाली एलएनजी का होता है। इसी एलएनजी से पीएनजी और सीएनजी का उत्पादन किया जाता है, जो शहरी घरों और वाहनों के लिए बेहद जरूरी है।
यदि कतर से आने वाली गैस सप्लाई में इसी तरह रुकावट बनी रही, तो आने वाले दिनों में भारत के कई शहरों में पीएनजी और सीएनजी की कमी देखने को मिल सकती है। इसका सीधा असर घरेलू रसोई गैस, उद्योगों और परिवहन क्षेत्र पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल आपूर्ति का नहीं, बल्कि कीमतों का भी हो सकता है। जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर गैस की उपलब्धता कम होगी, वैसे-वैसे कीमतों में तेजी आ सकती है। इससे आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।

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भारत सरकार पहले ही एलपीजी संकट को देखते हुए पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा देने की योजना बना रही थी, ताकि गैस आपूर्ति को संतुलित किया जा सके। लेकिन मौजूदा हालात इस रणनीति को भी चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को इस संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी होगी और घरेलू उत्पादन को बढ़ाना होगा। इसके अलावा, रणनीतिक भंडारण और दीर्घकालिक आयात समझौते भी इस तरह की स्थिति से निपटने में मददगार साबित हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, ईरान युद्ध का असर अब सीधे भारत की रसोई और सड़कों तक पहुंचता दिख रहा है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो देश को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।

पत्रकार हितों के लिए बड़ा कदम, गोरखपुर से उठा मजबूत मुद्दा

गोरखपुर प्रेस क्लब ने मुख्यमंत्री को सौंपा मांग पत्र, पत्रकारों की समस्याओं के समाधान का मिला आश्वासन


गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। शहर के प्रतिष्ठित गोरखपुर क्लब में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह के बाद गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्रकारों के हितों और सुविधाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मांग पत्र सौंपा। इस अवसर पर प्रेस क्लब के अध्यक्ष, महामंत्री और अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे तथा उन्होंने पत्रकारों की जमीनी समस्याओं को विस्तार से मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।
प्रेस क्लब की ओर से प्रस्तुत मांग पत्र में पत्रकारों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को प्रमुखता दी गई। पदाधिकारियों ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में समाज और शासन के बीच एक मजबूत सूचना सेतु का कार्य करते हैं। ऐसे में उनके कार्यों को सुरक्षित, सुगम और सम्मानजनक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।
पत्रकारों ने मुख्यमंत्री को बताया कि फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों को कई बार जोखिमपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिल पातीं। इसी को ध्यान में रखते हुए मांग पत्र में पत्रकारों के लिए न्यूनतम लागत पर आवासीय भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई, ताकि वे आर्थिक दबाव से मुक्त होकर अपने कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

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इसके अलावा, सूचना संकुल भवन की छत पर एक आधुनिक गेस्ट हाउस के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया। इससे बाहर से आने वाले पत्रकारों को ठहरने की सुविधा मिल सकेगी और पत्रकारिता से जुड़े आयोजनों को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी प्रेस क्लब ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। मांग पत्र में सक्रिय पत्रकारों को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने की मांग की गई, ताकि आकस्मिक परिस्थितियों में उन्हें बेहतर इलाज मिल सके। इसके साथ ही अन्य राज्यों की तर्ज पर पत्रकारों के लिए पेंशन योजना लागू करने का भी प्रस्ताव रखा गया, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने पत्रकारों की सभी मांगों को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि इन मुद्दों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देने का भरोसा दिलाया, ताकि पत्रकारों के हितों से जुड़े मामलों में उचित और शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इस सकारात्मक आश्वासन से प्रेस क्लब के पदाधिकारियों में संतोष और उम्मीद की भावना देखने को मिली। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इन मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाता है, तो यह पत्रकारों के लिए एक बड़ी राहत होगी और उनके कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

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कार्यक्रम के दौरान प्रेस क्लब और शासन के बीच संवाद का यह प्रयास पत्रकारों के हितों को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि सरकार पत्रकारों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
आने वाले समय में इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखने वाली बात होगी, लेकिन फिलहाल मुख्यमंत्री के आश्वासन ने पत्रकारों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है। यदि इन प्रस्तावों को अमल में लाया जाता है, तो निश्चित रूप से यह प्रदेश में पत्रकारिता के क्षेत्र को और सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

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पाकिस्तान में ऊर्जा संकट से सख्ती: रात 8 बजे के बाद बाजार बंद, 10 बजे के बाद शादियों पर रोक


लाहौर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)ऊर्जा संकट और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के बीच Shehbaz Sharif की सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए देशभर में एक तरह का “मिनी लॉकडाउन” लागू करने का फैसला किया है। यह निर्णय पेट्रोलियम उत्पादों की कमी, ऊर्जा संरक्षण और सरकारी खर्च में कटौती के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, Pakistan के पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी, गिलगित-बाल्टिस्तान और आजाद जम्मू-कश्मीर में 7 अप्रैल से नए नियम लागू हो गए हैं। इन नियमों के तहत बाजार, मंडियां और शॉपिंग मॉल रात 8 बजे बंद कर दिए जाएंगे।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक स्तर पर तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से ऊर्जा खपत में कमी आएगी और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
खैबर पख्तूनख्वा के डिविजनल मुख्यालयों को थोड़ी राहत दी गई है, जहां बाजार और मॉल रात 9 बजे तक खुले रह सकेंगे। हालांकि रोजमर्रा की जरूरतों की दुकानें और डिपार्टमेंटल स्टोर भी अधिकतर स्थानों पर रात 8 बजे तक ही संचालित होंगे।
सरकार ने शादी समारोहों पर भी कड़ा नियंत्रण लागू किया है। बेकरी, रेस्तरां, तंदूर और अन्य खानपान से जुड़े प्रतिष्ठान रात 10 बजे तक ही खुले रहेंगे। इसके बाद सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी। मैरिज हॉल, मार्की और अन्य व्यावसायिक स्थलों पर रात 10 बजे के बाद शादी समारोह आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। इतना ही नहीं, निजी घरों और संपत्तियों में भी देर रात शादियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
हालांकि, आम जनता की जरूरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ सेवाओं को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है। मेडिकल स्टोर और फार्मेसियों को सामान्य रूप से खुले रहने की अनुमति दी गई है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई असर न पड़े।
सरकार ने नागरिकों को राहत देने के लिए कुछ सकारात्मक कदम भी उठाए हैं। गिलगित और मुजफ्फराबाद में अंतर-शहरी सार्वजनिक परिवहन (बस सेवा) को एक महीने के लिए मुफ्त कर दिया गया है। इसका पूरा खर्च संघीय सरकार उठाएगी, जिससे आम लोगों को आर्थिक राहत मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय अल्पकालिक राहत तो दे सकता है, लेकिन दीर्घकाल में पाकिस्तान को ऊर्जा उत्पादन, वैकल्पिक स्रोतों और आर्थिक सुधारों पर गंभीरता से काम करना होगा।
ऊर्जा संकट केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कई देश इससे प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में यह कदम संकट प्रबंधन का एक हिस्सा है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इन प्रतिबंधों का असर व्यापारियों, छोटे दुकानदारों और शादी उद्योग से जुड़े लोगों पर पड़ना तय है। हालांकि सरकार का कहना है कि देश की आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा बचत के लिए यह जरूरी कदम है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये प्रतिबंध कितने प्रभावी साबित होते हैं और क्या इससे देश के ऊर्जा संकट में वास्तविक सुधार देखने को मिलता है या नहीं।

महराजगंज: सूचना छुपाने पर कार्रवाई: ठूठीबारी थानाध्यक्ष निलंबित, एसपी का सख्त संदेश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने ठूठीबारी थानाध्यक्ष नवनीत नागर को गंभीर लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित मामले में समय से उच्चाधिकारियों को सूचना नहीं दी गई और घटना के वास्तविक तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया गया।मामला सामने आने पर एसपी ने तुरंत जांच कराई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि किसी भी घटना की सही और समय पर जानकारी देना बेहद जरूरी है। इसमें लापरवाही से न केवल विभाग की छवि प्रभावित होती है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी कमजोर होता है।

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इस कार्रवाई के जरिए एसपी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ड्यूटी में लापरवाही, सूचना छुपाना या तथ्यों से छेड़छाड़ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी थाना प्रभारियों और पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें।

इस घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और इसे अनुशासनात्मक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल निलंबित थानाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और आगे कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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झपकी बनी जानलेवा: बाबा धाम से लौट रही स्कॉर्पियो पेड़ से टकराई, चालक की मौत

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भिटौली थाना क्षेत्र के भैंसा पुल के पास मंगलवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। बाबा धाम से दर्शन कर लौट रहे एक परिवार की स्कॉर्पियो कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। हादसे में चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र के शिवनगर वार्ड नंबर-7 निवासी रामदयाल वर्मा अपने परिवार के साथ बाबा धाम से लौट रहे थे। स्कॉर्पियो (UP56 K 0099) को सतभरिया निवासी संतोष कुमार वर्मा चला रहे थे। वाहन में कुल 8 लोग सवार थे, जिनमें 4 वयस्क और 4 बच्चे शामिल थे।

बताया जा रहा है कि सुबह करीब 6:30 बजे भैंसा पुल के पास चालक को अचानक झपकी आ गई, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गया और पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी तेज थी कि गाड़ी के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए।

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हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परतावल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने चालक संतोष कुमार वर्मा को मृत घोषित कर दिया।

गंभीर रूप से घायल रामदयाल वर्मा और उनकी पत्नी को बेहतर इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया है। अन्य बच्चों समेत परिवार के बाकी सदस्य सुरक्षित हैं या उन्हें मामूली चोटें आई हैं।

घटना की सूचना मिलते ही मृतक के परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण चालक को आई झपकी बताया जा रहा है।

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कानपुर में शादी के बाद किडनी के लिए दबाव, पत्नी से 30 लाख की मांग; FIR दर्ज

कानपुर (राष्ट्र की परम्परा)। कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर शादी से पहले गंभीर किडनी की बीमारी छिपाने और बाद में किडनी या 30 लाख रुपये की मांग कर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है।

पीड़िता के अनुसार, उसकी शादी 22 जून 2023 को लखनऊ निवासी निशांत कुमार से हुई थी। शादी के बाद पति का व्यवहार असामान्य लगा। जब महिला ने इस बारे में पूछताछ की, तो उसे टाल दिया गया और कथित तौर पर दूसरी शादी की बात तक कही गई।

महिला ने बताया कि पति लगातार दवाइयां लेता था, जिससे शक होने पर उसने मेडिकल रिपोर्ट देखी। रिपोर्ट में सामने आया कि पति की दोनों किडनी पहले से खराब थीं और वह लंबे समय से इलाज करा रहा था।

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पीड़िता का आरोप है कि ससुराल पक्ष ने यह बात जानबूझकर शादी से पहले छिपाई। शादी के बाद उस पर 30 लाख रुपये लाने या किडनी दान करने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर उसे गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति का किसी अन्य महिला से संबंध था और परिवार ने उसकी शिकायतों को नजरअंदाज किया। अक्टूबर 2024 में मायके जाते समय उसके गहने भी छीन लिए गए।

पीड़िता की शिकायत पर चकेरी थाने में पति, ससुर और अन्य ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, धोखाधड़ी और धमकी सहित विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई है।

थाना प्रभारी अजय प्रकाश मिश्र ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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तीन दिवसीय एयरोमॉडलिंग वर्कशॉप का आयोजन, कुलपति ने की सराहना

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में 6 से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय एयरोमॉडलिंग वर्कशॉप के अंतर्गत टेकस्फीयर टीम ने कुलपति प्रो. पूनम टंडन से भेंट कर उन्हें वर्कशॉप में आमंत्रित किया। इस अवसर पर प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी, आईईटी डीन प्रो. हिमांशु पांडेय तथा निदेशक एस. एन. तिवारी के मार्गदर्शन में आईटी विभाग की एचओडी डॉ. शिवांगी श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की।

वर्कशॉप का शुभारंभ मंगलवार को हुआ, जो तीन दिनों तक चलेगा। इसमें छात्रों को एयरोमॉडलिंग के क्षेत्र में व्यावहारिक एवं तकनीकी ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। आज आयोजित सत्र में इंस्ट्रक्टर चंदन विश्वकर्मा ने थ्योरी लेक्चर के माध्यम से मूलभूत अवधारणाओं को स्पष्ट किया।

इस अवसर पर टेकस्फीयर की प्रेसिडेंट अपलक गुप्ता, वाइस प्रेसिडेंट अर्यमा श्रीवास्तव, हेड्स स्वस्तिक पांडेय, ऋतुराज राजपूत एवं अभिजीत गुप्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समन्वय में कोऑर्डिनेटर विकास विश्वकर्मा का विशेष योगदान रहा।

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कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने टेकस्फीयर टीम के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ छात्रों को वास्तविक तकनीकी अनुभव प्रदान करती हैं तथा उनके आत्मविश्वास को सुदृढ़ करती हैं। उन्होंने इस पहल को अत्यंत उपयोगी बताते हुए वर्कशॉप के समापन दिवस पर उपस्थित रहने की सहमति भी प्रदान की।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में टेकस्फीयर टीम के समर्पित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्कशॉप का समापन 8 अप्रैल 2026 को होगा, जिसमें प्रतिभागियों द्वारा तैयार मॉडल्स का प्रदर्शन एवं उत्कृष्ट प्रतिभागियों का सम्मान किया जाएगा।

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ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की तबीयत पर सस्पेंस, बेहोशी की खबरों से हलचल

तेहरान/मिडिल ईस्ट (राष्ट्र की परम्परा)। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की सेहत को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई बेहोश बताए जा रहे हैं और उनका इलाज ईरान के कोम शहर के एक अस्पताल में चल रहा है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 56 वर्षीय मुज्तबा खामेनेई फिलहाल देश चलाने की स्थिति में नहीं हैं। यह जानकारी कथित तौर पर डिप्लोमैटिक मेमो और अमेरिका-इजरायल के इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर सामने आई है। हालांकि, इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मुज्तबा खामेनेई को देश की कमान सौंपी गई थी। बताया जाता है कि उसी हमले में वह भी घायल हुए थे।

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सत्ता संभालने के बाद से मुज्तबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे उनकी सेहत और लोकेशन को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। इससे पहले उनके रूस में इलाज की खबरें भी आई थीं, जिन्हें बाद में खारिज कर दिया गया था।

हाल ही में उन्होंने फारसी नववर्ष नवरोज और ईद-उल-फितर के मौके पर लिखित संदेश जारी कर लोगों को बधाई दी थी। लेकिन अब उनकी हालत को लेकर आई नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

ट्रंप की धमकी पर ईरान का बड़ा दांव, परमाणु ठिकानों के चारों ओर मानव ढाल

ईरान में बढ़ा तनाव: अमेरिकी चेतावनी के बीच युवाओं की ‘मानव श्रृंखला’ से जवाब, दुनिया की नजरें तेहरान पर


तेहरान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। Donald Trump की ओर से दी गई सख्त समय सीमा और बुनियादी ढांचों पर हमले की चेतावनी के बाद Iran ने एक असाधारण रणनीतिक कदम उठाया है। ईरानी सरकार ने देश के युवाओं, खिलाड़ियों और कलाकारों से ऊर्जा केंद्रों और परमाणु संयंत्रों के आसपास एक विशाल ‘मानव श्रृंखला’ बनाने का आह्वान किया है। इस पहल को “उज्ज्वल भविष्य के लिए ईरान के युवाओं की मानव श्रृंखला” नाम दिया गया है।
यह कदम केवल सुरक्षा का प्रयास नहीं, बल्कि एक मजबूत कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश भी है। Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खेल और युवा मंत्रालय ने युवाओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर देश के प्रमुख ऊर्जा और परमाणु स्थलों के आसपास एकजुट होकर खड़े हों। इस आयोजन के जरिए ईरान दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर युद्ध अपराध माना जाता है।
ईरान के युवा मामलों के उप मंत्री अलीरेज़ा रहीमी ने एक वीडियो संदेश में कहा कि यह विचार खुद युवाओं की ओर से आया है। उन्होंने कहा, “हम एक-दूसरे का हाथ थामकर खड़े होंगे और दुनिया को बताएंगे कि हमारे संसाधनों पर हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा।” यह बयान दर्शाता है कि ईरान अपनी जनता को इस संकट में सीधे शामिल कर एकजुटता का प्रदर्शन करना चाहता है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब White House में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ को खोलने पर सहमत नहीं होता, तो अमेरिका उसके पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बना सकता है। उन्होंने मंगलवार रात 8 बजे (ईटी) तक की डेडलाइन तय की थी, जबकि एक व्यापक समझौते के लिए आधी रात तक का समय भी दिया गया।
ट्रंप के बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने यहां तक कहा कि “पूरे देश को एक ही रात में खत्म किया जा सकता है,” जो कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद गंभीर संकेत माना जा रहा है। इन बयानों ने संभावित युद्ध अपराधों को लेकर बहस भी तेज कर दी है, क्योंकि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना जिनेवा कन्वेंशन के तहत प्रतिबंधित है।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान की सरकारी एजेंसी Islamic Republic News Agency के अनुसार, तेहरान ने 45 दिन के संघर्षविराम प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि वह केवल स्थायी समाधान चाहता है। ईरान ने अपना जवाब Pakistan के माध्यम से भेजा है, जो इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
काहिरा में ईरानी मिशन के प्रमुख मोजतबा फ़िरदौसी पौर ने कहा कि ईरान तभी किसी समझौते के लिए तैयार होगा, जब उसे भविष्य में किसी भी हमले से सुरक्षा की गारंटी मिलेगी। यह रुख दर्शाता है कि तेहरान अस्थायी समाधान के बजाय दीर्घकालिक सुरक्षा चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा मानव श्रृंखला बनाना एक प्रतीकात्मक कदम जरूर है, लेकिन इसके पीछे गहरी रणनीति छिपी है। इससे एक ओर जहां अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति हासिल करने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर संभावित हमलों को नैतिक रूप से चुनौती देना भी शामिल है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि नागरिकों को इस तरह संवेदनशील स्थलों के आसपास इकट्ठा करना जोखिम भरा हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है। Strait of Hormuz, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, पहले ही तनाव का केंद्र बना हुआ है। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल दुनिया की निगाहें तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी हैं। क्या यह टकराव खुली जंग में बदलेगा या कूटनीति से कोई रास्ता निकलेगा, यह आने वाले घंटों में स्पष्ट हो जाएगा।

बाढ़ राहत में भ्रष्टाचार का भंडाफोड़: तहसील से तंत्र तक हिल गया सिस्टम

भ्रष्टाचार कोविड महामारी या कैंसर से भी अधिक खतरनाक बीमारी है, क्योंकि यह धीरे-धीरे पूरे तंत्र को अंदर से खोखला कर देता है

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में शासन- प्रशासन की विश्वसनीयता का सबसे महत्वपूर्ण आधार जनता का विश्वास होता है।जब यह विश्वास कमजोर पड़ता है,तब केवल व्यवस्था ही नहीं,बल्कि लोकतंत्र की आत्मा भी आहत होती है। हाल ही में संसद के दोनों सदनों द्वारा इसी पृष्ठभूमि में पारित जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 एक ऐतिहासिक और संरचनात्मक सुधार के रूप में सामने आया है।यह केवल एक विधायी परिवर्तन नहीं,बल्कि शासन की सोच में बदलाव का प्रतीक है,जहां दंड आधारित नियंत्रण से हटकर विश्वास आधारित अनुपालन की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।परंतु मेरे 45 साल के मीडिया अनुभव व 15 साल के अधिवक्ता अनुभव में शायद पहली बार हाल ही में मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला में सामने आया बाढ़ राहत घोटाला इसी विश्वास पर एक गंभीर प्रहार था,लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इस मामले में जिस प्रकार की कठोर और व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई की गई,उसने पूरे देश में एक नई उम्मीद जगाई है। यह घटना केवल एक सटीक घोटाले की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस निर्णायक मोड़ का संकेत है जहां से भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध वास्तविक और प्रभावी लड़ाई की शुरुआत हो सकती है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि इस पूरे मामले में सबसे सराहनीय भूमिका जिला कलेक्टर की रही, विशेष रूप से उनके द्वारा दिखाई गई दृढ़ इच्छाशक्ति की। कलेक्टर ने न केवल इस घोटाले की गहन जांच करवाई,बल्कि 18 पटवारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देकर एक स्पष्ट संदेश दिया कि भ्रष्टाचार के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक नैतिक घोषणा थी कि अब व्यवस्था में ईमानदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही विभागीय जांच के आदेश और नौकरी से बर्खास्तगी की सिफारिश ने यह सुनिश्चित किया कि दोषियों को हर स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा। पूरे भारतवर्ष में अनेकों सरकारी कर्मचारियों पर कुछ अपवाद छोड़कर अगर हम संज्ञान लें तो एक सामाजिक पहलू भी है, जिस पर ध्यान देना आवश्यक है।अक्सर देखा जाता है कि सरकारी कर्मचारियों की जीवनशैली उनके आधिकारिक वेतन से कहीं अधिक उच्च होती है, जिससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि अतिरिक्त आय के स्रोत क्या हैं। यदि इस दिशा में नियमित निगरानी और संपत्ति का ऑडिट किया जाए, तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है। श्योपुर की घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब केवल सतही सुधारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि गहराई में जाकर व्यवस्था को बदलना होगा। मेरा यह आर्टिकल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर लिखा गया है। 

अगर हम भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की इस ऐतिहासिक घटना को समझने की करें तो, वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में आई भीषण बाढ़ ने हजारों किसानों और ग्रामीणों को प्रभावित किया। प्राकृतिक आपदा के बाद राज्य सरकार द्वारा राहत के रूप में करोड़ों रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई थी। इस राहत पैकेज में चार प्रमुख श्रेणियां थीं-फसल नुकसान, मकान क्षति, मवेशियों की हानि और अन्य सामान्य सहायता। यह राशि उन लोगों के लिए जीवनरेखा थी, जिनकी आजीविका पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी। लेकिन दुर्भाग्यवश, इसी संवेदनशील व्यवस्था में भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बुना गया, जिसने न केवल पीड़ितों को उनके अधिकार से वंचित किया,बल्कि प्रशासनिक तंत्र की साख पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया।जांच में सामने आया कि लगभग 960 किसानों के लिए स्वीकृत राहत राशि में से 794 वास्तविक लाभार्थियों को दरकिनार कर दिया गया और उनकी जगह 87 अपात्र व्यक्तियों के 127 बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया गया।यह पूरा घोटाला करीब 5 करोड़ रुपये का था। इस संगठित भ्रष्टाचार में निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर उच्च अधिकारियों तक की संलिप्तता स्पष्ट रूप से सामने आई। इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिनपर आरोप है कि उन्होंने बिना समुचित जांच के फर्जी लाभार्थियों को मंजूरी दी। परिणामस्वरूप उन्हें निलंबित किया गया और बाद में जेल भी भेजा गया।  पूरे देश में शायद पहली बार कलेक्टर की हिम्मत और चौंकाने वाली कार्रवाई को समझने की करें तो, इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब यह स्पष्ट हुआ कि फर्जी लाभार्थियों की सूची तैयार करने में 18 पटवारियों की सीधी भूमिका थी।पटवारी,जो ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाते हैं और जिनका सीधा संपर्क किसानों से होता है,उन्हीं के द्वारा इस प्रकार की धोखाधड़ी ने पूरे सिस्टम की जड़ों को हिला दिया। इन पटवारियों ने न केवल फर्जी सर्वे तैयार किए, बल्कि अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में सरकारी धन ट्रांसफर करवा दिया। यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सामाजिक नैतिकता और सरकारी जिम्मेदारी का खुला उल्लंघन था। 

अगर हम इस प्रकरण की पूरे भारत ही नहीं वैश्विक स्तरपर गूँज की करें तो, इस कार्रवाई का प्रभाव केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहा,बल्कि पूरे देश के प्रशासनिक तंत्र में एक हलचल पैदा कर दी। पहली बार ऐसा देखने को मिला कि एक ही तहसील के इतने बड़े पैमाने पर पटवारियों के खिलाफ एक साथ कार्रवाई की गई हो। यह घटना उन लाखों ईमानदार सरकारी कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा है, जो व्यवस्था में सुधार लाना चाहते हैं, लेकिन अक्सर दबाव और भय के कारण चुप रहते हैं।भ्रष्टाचार को यदि एक बीमारी माना जाए, तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह कोविड महामारी या कैंसर से भी अधिक खतरनाक है, क्योंकि यह धीरे-धीरे पूरे तंत्र को अंदर से खोखला कर देता है इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण केवल व्यक्तिगत लालच नहीं, बल्कि सामूहिक मिलीभगत है, जिसमें निचले स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक एक श्रृंखला बन जाती है। श्योपुर का मामला इसी सच्चाई को उजागर करता है कि जब तक इस पूरी श्रृंखला को तोड़ा नहीं जाएगा, तब तक भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। 

साथियों बात अगर हम पूरे भारत में कलेक्टरों द्वारा स्वत संज्ञान लेकर इस प्रकार की कार्रवाई को प्राथमिकता देने की करें तो, इस संदर्भ में सभी राज्यों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे इस मामले से सबक लें और अपने-अपने क्षेत्रों में इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई करें। सबसे पहला कदम डिजिटल सत्यापन की दिशा में होना चाहिए। राहत राशि और अन्य सरकारी योजनाओं के वितरण में आधार-लिंक्ड बैंक खातों का उपयोगअनिवार्य किया जाना चाहिए और लाभार्थियों की सूची को सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी।दूसरा महत्वपूर्ण उपाय स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा थर्ड पार्टी ऑडिट है। जब तक जांच पूरी तरह निष्पक्ष और बाहरी एजेंसी द्वारा नहीं की जाएगी, तब तक आंतरिक मिलीभगत के कारण सच्चाई सामने आना कठिन रहेगा। श्योपुर मामले में भी जब ऑडिट हुआ, तभी यह घोटाला उजागर हो पाया।तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है कठोर जवाबदेही। केवल निलंबन या स्थानांतरण से भ्रष्टाचार नहीं रुकता, बल्कि इसके लिए सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। श्योपुर में जिस प्रकार से अभियोजन की मंजूरी दी गई और गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हुई, वह एक आदर्श उदाहरण है। इससे यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार करने वालों को केवल प्रशासनिक दंड ही नहीं, बल्कि कानूनी परिणाम भी भुगतने होंगे। इसके अतिरिक्त ग्राम सभाओं के माध्यम से लाभार्थियों की सूची का सत्यापन भी एक प्रभावी उपाय हो सकता है। स्थानीय स्तर पर लोगों को शामिल करने सेपारदर्शिता बढ़ती है और गलत लाभार्थियों की पहचान आसानी से हो सकती है। यह लोकतंत्र के विकेंद्रीकरण की भावना के अनुरूप भी है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला और उस पर हुई कार्रवाई भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह केवल एक जिले की घटना नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी और एक अवसर दोनों है। चेतावनी इसलिए कि यदि भ्रष्टाचार को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह व्यवस्था को पूरी तरह खोखला कर देगा, और अवसर इसलिए कि यदि इसी प्रकार की सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई देशभर में की जाए,तो एक स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन की स्थापना संभव है।आज आवश्यकता इस बात की है कि हर राज्य, हर जिला और हर तहसील इस घटना से प्रेरणा ले और अपने स्तर पर सुधार की प्रक्रिया शुरू करे। यदि ऐसा होता है, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत वास्तव में एक भ्रष्टाचार-मुक्त राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

भागवत कथा में शुकदेव-परीक्षित संवाद और भक्ति का महत्व बताया गया

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नगर के रुद्रपुर स्टैंड पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथा व्यास आचार्य राघवेंद्र ने शुकदेव द्वारा परीक्षित को दिए गए उपदेशों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने आसन, श्वास, संग और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखते हुए बुद्धि के माध्यम से मन को भगवान के स्थूल रूप में लगाने की महत्ता बताई।

कथा के दौरान सृष्टि क्रम का वर्णन करते हुए ब्रह्मा की संकल्प सृष्टि, चार ऋषियों की उत्पत्ति, दस ऋषियों का प्राकट्य, छाया से कर्दम, वाणी से सरस्वती, वाम भाग से सतरूपा और दक्षिण भाग से मनु की उत्पत्ति का प्रसंग सुनाया गया। मनु की संतानों में देवहूति, आकूति, प्रसूति, उतानपाद और प्रियव्रत का उल्लेख करते हुए उनके जीवन प्रसंगों को विस्तार से बताया गया।

देवहूति और कर्दम के विवाह तथा कपिल भगवान के जन्म, सांख्य दर्शन के उपदेश, आकूति और रुचि प्रजापति, प्रसूति और दक्ष प्रजापति के विवाह, सती और शिव विवाह तथा दक्ष यज्ञ विध्वंस जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इसके साथ ही ध्रुव चरित्र, अंग, वेन, पृथु, प्राचीनबरही, प्रियव्रत, ऋषभ और जड़भरत की कथाओं के माध्यम से जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला गया।

कथा में अजामिल, वृत्रासुर और प्रह्लाद के प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया गया कि हर परिस्थिति में भक्ति और समभाव बनाए रखना चाहिए। भगवान के दरबार में जाति-पाति या पद का कोई भेदभाव नहीं होता, सभी समान हैं।

कार्यक्रम में यजमान विवेकानंद तिवारी, उषा तिवारी, डॉ अजय मिश्र, डॉ प्रदीप मिश्र, रामेश्वर यादव, सोनकर, बलभद्र तिवारी, राजेन्द्र सिंह, हृदयेश तिवारी, श्रीराम वर्मा, शिवशंकर जायसवाल, अशोक सोनकर, विजयकांत मिश्र, रमेश तिवारी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजक अभयानंद तिवारी ने सभी कथा प्रेमियों का आभार व्यक्त किया।