बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Deoria जनपद में गुरुवार को समाजवादी पार्टी द्वारा प्रस्तावित बरहज तहसील घेराव को प्रशासन ने सख्ती के साथ विफल कर दिया। पुलिस ने Samajwadi Party के जिलाध्यक्ष व्यास यादव समेत कई नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर लिया।
लक्ष्मीपुर कांड को लेकर था प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, 5 अप्रैल को ग्राम लक्ष्मीपुर में चकनाली पर सड़क निर्माण को लेकर हुए विवाद में अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र सिंह की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में लक्ष्मीपुर प्रधान राजेश यादव, दुबौली प्रधान गामा यादव सहित पांच नामजद और आठ अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
घटना के बाद तत्कालीन उपजिलाधिकारी विपिन कुमार द्विवेदी को निलंबित किया जा चुका है, जबकि अधिवक्ता समुदाय लगातार न्याय की मांग को लेकर आंदोलनरत है।
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प्रशासन ने नहीं दी अनुमति
सपा ने इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बरहज तहसील घेराव की घोषणा की थी, लेकिन प्रशासन ने धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। इसके मद्देनजर पूरे तहसील परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।
हर प्रमुख चौराहे और मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

कई बड़े नेता किए गए हाउस अरेस्ट
पुलिस ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए कई प्रमुख नेताओं को उनके घरों में ही रोक दिया। इनमें शामिल हैं:
• जिलाध्यक्ष व्यास यादव
• पूर्व राज्यसभा सांसद कनकलता सिंह
• पूर्व जिलाध्यक्ष गेना लाल यादव
• विजय रावत
• बेचू लाल यादव
• वीरेंद्र चौधरी
• संतोष यादव
• मनोज यादव
• रणवीर यादव
भारी पुलिस बल की तैनाती
अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी Sunil Kumar Singh और क्षेत्राधिकारी Rajesh Chaturvedi के नेतृत्व में जिले के कई थानों—बरहज, भलुअनी, सलेमपुर, मदनपुर, भाटपाररानी, मइल, गौरीबाजार, खुखुंदू—की पुलिस के साथ दो प्लाटून पीएसी भी तैनात की गई।
राजनीतिक माहौल गरमाया
इस कार्रवाई के बाद जिले में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। सपा कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है, जबकि प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया कदम बता रहा है।
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