Tuesday, June 16, 2026
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सक्रिय अंतरजनपदीय चोरी गिरोह का भंडाफोड़ 7 आरोपी गिरफ्तार

बस-रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को बनाते थे निशाना, नकदी व सामान बरामद

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l थाना कैण्ट पुलिस ने अंतरजनपदीय चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 7 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से चोरी का सामान, नकदी व घटना में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए हैं। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
पुलिस के अनुसार, थाना कैण्ट पर दर्ज मु0अ0सं0 180/2026 धारा 303(2) बीएनएस से संबंधित मामले में कार्रवाई करते हुए विवेक कुमार, ललितेश, नरेंद्र, अमन, अर्जुन, मुकेश कुमार और नीरज कुमार को गिरफ्तार किया गया। बरामदगी में 4000 रुपये नकद, एक साड़ी, 15 सेफ्टी पिन, 10 फोल्डिंग चाकू और 10 छोटी कैंची शामिल हैं। इसके आधार पर मुकदमे में धारा 317(2) और 112 बीएनएस की बढ़ोत्तरी की गई है।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग शहरों में जाकर होटलों में ठहरते थे। तड़के सुबह व्हाट्सएप कॉल के जरिए गैंग लीडर सभी को निर्देश देता था। इसके बाद बस स्टेशन या रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पहुंचकर यात्रियों को निशाना बनाया जाता था। गिरोह के सदस्य मदद के बहाने यात्री के आसपास इकट्ठा होते और मौका पाकर बैग काटकर उसमें रखे जेवर, नकदी व अन्य कीमती सामान पार कर देते थे। वारदात के बाद सभी सदस्य अलग-अलग स्थानों पर उतरकर फरार हो जाते थे।
17 अप्रैल 2026 को एक यात्री अपनी पत्नी के साथ गोरखपुर बस स्टेशन से फाजिलनगर जा रहा था। यात्रा के दौरान उसका ट्रॉली बैग बस में रखा था। गंतव्य पर पहुंचने के बाद जांच करने पर बैग से आभूषण, करीब 7 हजार रुपये नकद और एक साड़ी चोरी मिली। पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की थी।
अंतरजनपदीय नेटवर्क, कई पर दर्ज हैं गंभीर मुकदमे
गिरफ्तार अभियुक्तों में से कुछ के खिलाफ विभिन्न जनपदों में पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। विशेष रूप से अर्जुन और मुकेश कुमार पर लूट, चोरी, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह “मुकेश गैंग” और “बिच्छू गैंग” के नाम से सक्रिय था।
इस सफलता में प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार सिंह के नेतृत्व में कैण्ट थाना पुलिस व सर्विलांस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

महाराणा प्रताप जयंती की पूर्व संध्या पर ऑनलाइन संगोष्ठी 08 मई को

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। महाराणा प्रताप जयंती की पूर्व संध्या पर भारत तिब्बत समन्वय संघ द्वारा 08 मई 2026 को रात्रि 9:00 बजे से 10:00 बजे तक “आदर्श राष्ट्रभक्ति के देवपुरुष महाराणा प्रताप” विषयक ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।
कार्यक्रम में मार्गदर्शक के रूप में प्रो. परमेंद्र कुमार दशोरा उपस्थित रहेंगे, जो प्रताप गौरव केंद्र, उदयपुर से जुड़े हैं तथा पूर्व कुलपति के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज कुमार अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अखिलेश पाठक (शिमला), राष्ट्रीय संयोजक, प्रचार प्रमुख, भारत तिब्बत समन्वय संघ द्वारा किया जाएगा। वहीं कार्यक्रम के संयोजक के रूप में मदन कुमार आंबेकर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (युवा विभाग) की भूमिका रहेगी।
आयोजकों के अनुसार संगोष्ठी का उद्देश्य महाराणा प्रताप के राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और त्याग के आदर्शों को समाज तक पहुंचाना है, ताकि युवाओं में प्रेरणा और राष्ट्रीय चेतना का संचार हो सके।

फर्जी नेटवर्क मार्केटिंग ट्रेनिंग सेंटर का भंडाफोड़ 3 आरोपी गिरफ्तार

नौकरी और जल्दी पैसे कमाने का लालच देकर करते थे ठगी

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l थाना गुलरिहा पुलिस ने अवैध नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर चल रहे फर्जी ट्रेनिंग सेंटर का पर्दाफाश करते हुए तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर संगठित अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई।
पुलिस के अनुसार, मु0अ0सं0 361/26 धारा 318(4) बीएनएस से संबंधित मामले में सिराजुद्दीन, अतेन्द्र राजपूत और कृष्ण मोहन सिंह को गिरफ्तार किया गया। ये सभी आरोपी गोरखपुर में किराए के स्थानों पर रहकर फर्जी नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी के नाम पर लोगों को ठग रहे थे।
ऐसे चलता था ठगी का खेल
जांच में सामने आया कि आरोपी मैरेज लॉन में ट्रेनिंग सेंटर संचालित कर रहे थे, जहां युवाओं को नौकरी दिलाने और कम समय में अधिक पैसा कमाने का झांसा दिया जाता था। इसके लिए उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी। साथ ही, उन्हें अपने नीचे नए लोगों को जोड़ने पर कमीशन मिलने का लालच देकर नेटवर्क बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता था।
इस तरह आरोपी एक चेन सिस्टम के जरिए अधिक से अधिक लोगों को जोड़कर अवैध तरीके से धन अर्जित कर रहे थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर छापेमारी कर कार्रवाई की।
गिरफ्तार अभियुक्तों में कृष्ण मोहन सिंह के खिलाफ पहले से ही धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं, जिससे उसके इस तरह के गिरोह से जुड़े होने की पुष्टि होती है।
इस पूरे ऑपरेशन को उपनिरीक्षक अभिषेक कुशवाहा के नेतृत्व में टीम ने अंजाम दिया, जिसमें उपनिरीक्षक विवेक अवस्थी और हेड कांस्टेबल धनेश कुमार शामिल रहे।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। साथ ही, ठगी के शिकार लोगों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

07 मई को दिव्यांगजन मोबाइल कोर्ट, मौके पर होगा समाधान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में दिव्यांगजन से जुड़ी समस्याओं के त्वरित, प्रभावी एवं पारदर्शी निस्तारण के उद्देश्य से 07 मई 2026 को प्रातः 10:00 बजे से अपराह्न 04:00 बजे तक हुई कलेक्ट्रेट सभागार में मोबाइल कोर्ट का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन उत्तर प्रदेश के निर्देशन में संपन्न होगा।
जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी ने बताया कि मोबाइल कोर्ट में भूमि एवं राजस्व विवाद, उत्पीड़न और प्रताड़ना से जुड़े मामले, आवास संबंधी समस्याएं, पेंशन, दिव्यांगता प्रमाण पत्र सहित अन्य विभागीय प्रकरणों की सुनवाई की जाएगी। सभी मामलों का मौके पर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने का प्रयास रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा परीक्षण एवं दिव्यांगता प्रमाणन की भी व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जनपद स्तरीय अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था, शिकायत पंजीकरण, अभिलेख परीक्षण, तकनीकी संसाधनों और दिव्यांगजन के लिए सुगम वातावरण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। यह पहल दिव्यांगजन को एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध कराकर उनकी समस्याओं के शीघ्र समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
जनपद के सभी दिव्यांगजन से अपील की गई है कि वे अपने आवश्यक अभिलेखों के साथ निर्धारित तिथि और समय पर कलेक्ट्रेट सभागार पहुंचकर इस सुविधा का लाभ उठाएं।

पत्रकारिता में संवाद एवं सूचनाओं का सशक्त माध्यम है फोटोग्राफी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर में आयोजित ‘‘फोटोग्राफी अभिव्यक्ति का माध्यम’’ विषयक चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के तृतीय दिवस पर विशेषज्ञों ने फोटोग्राफी को पत्रकारिता में संवाद और सूचना प्रसारण का प्रभावी माध्यम बताया। कार्यक्रम में तकनीकी, रचनात्मक और व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
प्रथम सत्र में इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के वरिष्ठ शिक्षक एवं प्रसिद्ध फोटोग्राफर सुरेंद्र कुमार यादव ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि फोटोग्राफी केवल कला नहीं, बल्कि समय और समाज का दस्तावेज भी है। उन्होंने अपने फोटोग्राफी सफर के दौरान खींचे गए चित्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रकाश, कंपोजीशन, एंगल और विषय चयन की बारीकियों से अवगत कराया। साथ ही प्रयागराज कुंभ और वर्ष 1993 के प्रयागराज के परिवर्तित स्वरूप से जुड़ी तस्वीरों को दिखाकर ऐतिहासिक और आधुनिक परिप्रेक्ष्य का तुलनात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
द्वितीय सत्र में युवा फोटो-पत्रकार संगम दुबे ने “पत्रकारिता के परिप्रेक्ष्य में फोटोग्राफी का महत्व एवं प्रभाव” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि एक छायाचित्र समाज की वास्तविकताओं और संवेदनाओं को सीधे जनमानस तक पहुंचाने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि समाचार फोटोग्राफी में केवल दृश्य कैद करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके पीछे की कहानी, परिस्थितियां और सटीक समय का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित छायाचित्रों के उदाहरण देकर उनके पीछे की चुनौतियों और निर्णय प्रक्रिया को समझाया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि एक प्रभावशाली फोटो-पत्रकारिता के लिए समयबद्धता, सटीकता, संवेदनशीलता और नैतिकता अत्यंत आवश्यक हैं। किसी भी घटना के दौरान सही क्षण को पहचानना और उसे प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना ही एक सफल फोटो-पत्रकार की पहचान है। साथ ही प्रकाश, फ्रेमिंग, एंगल और विषय-वस्तु का संतुलन एक चित्र को जीवंत और प्रभावी बनाता है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि फोटोग्राफी के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है और जन-जागरूकता को बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. यशवन्त सिंह राठौर, उप निदेशक, संग्रहालय ने बताया कि फोटोग्राफी इतिहास और वर्तमान को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके जरिए किसी क्षेत्र, प्रदेश या देश की विकास यात्रा को समझा जा सकता है। प्राचीन फोटोग्राफ पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
धरोहर संग्रह प्रदर्शनी के संग्रहकर्ता हिमांशु कुमार सिंह ने बताया कि प्रदर्शनी को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और सराहा। इस दौरान ए.डी. अग्रवाल, राकेश धर द्विवेदी, डॉ. विपिन बिहारी शर्मा, प्रवीण शास्त्री, बाबा गुरुदेव सिंह, तरनतार सिंह, सीमा सोनी, सिद्धनाथ चतुर्वेदी, डॉ. अमरनाथ जायसवाल और मंजीत सिंह सहित कई लोगों ने प्रदर्शनी की सराहना की।
कार्यशाला का चतुर्थ दिवस 04 मई 2026 को आयोजित होगा, जिसमें वरिष्ठ फोटोग्राफर अनिल रिसाल सिंह द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। समापन अवसर पर विधायक विपिन सिंह की उपस्थिति में प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे।

लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती जल्द शुरू करने के निर्देश

बलिया (राष्ट्र क़ी परम्परा )

उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लंबे समय से रिक्त पड़े लाइब्रेरियन पदों को लेकर उठी मांग पर राजभवन ने संज्ञान लिया है। सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रमाशंकर राजभर द्वारा 16 मार्च 2026 को भेजे गए पत्र के क्रम में राजभवन सचिवालय ने उच्च शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।जारी निर्देशों में प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं अन्य संबद्ध संस्थानों में खाली पड़े लाइब्रेरियन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू कराई जाए। साथ ही पूर्व में इस विषय पर आयोजित बैठकों में लिए गए निर्णयों के अनुरूप समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।राजभवन ने अपने आदेश में विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कहा है कि लाइब्रेरियन जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक पदों का लंबे समय तक खाली रहना शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करता है। इन पदों पर शीघ्र नियुक्ति से न केवल पुस्तकालय व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि छात्रों को बेहतर अध्ययन संसाधन भी उपलब्ध हो सकेंगे।इस संबंध में आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ सांसद को भी सूचनार्थ भेज दी गई है। सांसद के मीडिया प्रभारी जितेश कुमार वर्मा ने इस पहल को छात्रों के हित में एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे उच्च शिक्षण संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

लुटेरी दुल्हन गिरोह का पर्दाफाश: फर्जी दुल्हन बनाकर लूटता था गिरोह, चार महिलाएं गिरफ्तार

अविवाहित बताकर रचाई जा रही थी नकली शादी: ₹1 लाख से अधिक की ठगी के बाद मार-पीट, 24 घंटे में पुलिस ने किया पर्दाफाश, मुख्य आरोपी फरार

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के थाना सिंदुरिया क्षेत्र में शादी के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गिरोह की चार महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है। इनके कब्जे से ₹39,500 नगद, एक जोड़ी पायल और एक मंगल सूत्र बरामद किया गया है, जबकि गिरोह का मुख्य आरोपी जितेन्द्र अभी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
यह कार्रवाई उच्चाधिकारियों के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई। थाना सिंदुरिया के थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह व उपनिरीक्षक मिथलेश कुमार की टीम ने 3 मई 2026 को चिंउटहा बाजार के पास से चारों आरोपियों—लालती, सुमित्रा, काजल और अंजलिका—को गिरफ्तार किया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से एक बड़े ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
घटना की शुरुआत 2 मई 2026 को हुई, जब एटा जनपद निवासी रंजीत चौहान ने थाना सिंदुरिया में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि चार महिलाओं और एक व्यक्ति जितेन्द्र ने मिलकर उसे शादी कराने का झांसा दिया। आरोपियों ने अंजलिका को ‘पूजा’ नाम से अविवाहित बताकर विवाह तय कराया, जबकि वह पहले से विवाहित और एक बच्चे की मां है। योजना के तहत पीड़ित को थाना क्षेत्र के एक मंदिर के पास बुलाया गया, जहां शादी की रस्में कराई जाने लगीं। इसी दौरान आरोपियों ने खाने-पीने के नाम पर ₹10,000, शादी कराने के नाम पर ₹90,000 और करीब ₹26,000 मूल्य के आभूषण धोखे से ले लिए। जब पीड़ित को शक हुआ तो आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए उसके और उसके परिजनों के साथ मार- पीट शुरू कर दी, जिससे कई लोग घायल हो गए।
घटना के दौरान मुख्य आरोपी जितेन्द्र अंजलिका को लेकर मौके से फरार हो गया, जबकि अन्य महिलाएं भी जान- माल की धमकी देते हुए भाग निकलीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और महज 24 घंटे के भीतर चारों महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया।
पूछ-ताछ में खुलासा हुआ कि सभी आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं और योजनाबद्ध तरीके से लोगों को शादी के नाम पर ठगते थे। गिरोह में प्रत्येक सदस्य की अलग-अलग भूमिका थी—कोई दुल्हन बनता, कोई परिवार का सदस्य बनकर भरोसा दिलाता और कोई पूरी साजिश को अंजाम देता।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह की एक सदस्य के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिससे इनके संगठित अपराध में लिप्त होने की पुष्टि होती है। पुलिस ने बरामदगी के आधार पर मुकदमे में अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ दी हैं।फिलहाल पुलिस फरार आरोपी जितेन्द्र की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस की सतर्कता और तेजी से की गई कार्रवाई ने एक संगठित ठगी गिरोह का पर्दाफाश कर दिया है। यह घटना समाज को सतर्क रहने का संदेश देती है कि शादी जैसे संवेदनशील मामलों में भी पूरी जांच-पड़ताल करना आवश्यक है।

छोटी काशी रुद्रपुर में गूंजेगा सनातन का स्वर,5 मई को आएंगे जगद्गुरु शंकराचार्य

छोटी काशी रुद्रपुर में होगा जगद्गुरु शंकराचार्य का भव्य आगमन, गो रक्षार्थ यात्रा को लेकर भक्तों में उत्साह


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। श्रीश्री 1008 ज्योतिर्मठ के जगद्गुरु भगवान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज अपनी गविष्टी गो रक्षार्थ यात्रा के तीसरे दिन 5 मई 2026 को छोटी काशी रुद्रपुर पहुंचेंगे। उनके आगमन को लेकर श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार जगद्गुरु शंकराचार्य 5 मई की शाम लगभग 4 बजे प्रसिद्ध दुग्धेश्वर नाथ मंदिर प्रांगण में पधारेंगे, जहां उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। मंदिर परिसर में संत समाज, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
बताया गया है कि 6 मई 2026 को प्रातः 5 बजे पूजा-अर्चना एवं आरती के बाद जगद्गुरु महाराज अपने अगले पड़ाव के लिए प्रस्थान करेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन और आयोजन समिति द्वारा तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
गौरक्षा, सनातन संस्कृति और धार्मिक जागरण के संदेश को लेकर निकाली जा रही यह यात्रा विभिन्न जिलों में चर्चा का विषय बनी हुई है। रुद्रपुर आगमन को लेकर स्थानीय लोगों में भी काफी उत्साह और श्रद्धा का वातावरण है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर दुग्धेश्वर नाथ मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाने की तैयारी की जा रही है। श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की गई है।

बारात संस्कार और बदलता समाज

एक समय था जब बारात का आना केवल एक परिवार का दूसरे परिवार तक पहुँचना नहीं, बल्कि पूरे गाँव का उत्सव माना जाता था। घर-आँगन सजते थे, पंगत लगती थी, गीत गाए जाते थे, बुज़ुर्ग आशीर्वाद देते थे और मेहमानों की आवभगत को सम्मान का प्रश्न समझा जाता था। आज वही बारात कई जगहों पर समय की घड़ी में इतनी सिमट गई है कि पूरा आयोजन “फटाफट जाओ, गटागट खाओ, सटासट लिफाफा पकड़ाओ और झटाझट वापस आओ” की शैली में बदलता दिखता है।

यह बदलाव केवल खानपान या आयोजन की शैली का नहीं है; यह सामाजिक संबंधों, सामूहिकता और भारतीय विवाह-संस्कृति की आत्मा में आए परिवर्तन का संकेत है। पहले विवाह एक लंबी सामाजिक प्रक्रिया हुआ करती थी, जिसमें रिश्ते बनते थे, पड़ोस जुड़ता था और संस्कार पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होते थे। अब बहुत-सी शादियाँ एक दिन के कार्यक्रम, होटल या गेस्ट हाउस और सीमित औपचारिकताओं में पूरी हो जाती हैं, जिससे परंपरा का विस्तार सिकुड़कर रस्म-अदायगी में बदलने लगा है।

भारतीय विवाह केवल दो व्यक्तियों का निजी समझौता नहीं रहा है; वह हमेशा से परिवार, समुदाय और संस्कृति का साझा आयोजन रहा है। ग्रामीण समाज में बारात का अर्थ था मेहमानों का खुला स्वागत, सामूहिक भोजन, लोकगीत, हँसी-मज़ाक और रिश्तों की गरिमा का सार्वजनिक प्रदर्शन। भोजन का पंगत में परोसा जाना, दूल्हे का पारंपरिक वेश, समधी की पगड़ी, घर के आँगन में बनी अस्थायी सजावट और रात भर का ठहराव—ये सब विवाह को संस्कार बनाते थे, साधारण समारोह नहीं।

इसी सामाजिक ढाँचे में मेहमान का मान बढ़ाना, उसे ठहराना, उसकी देखभाल करना और उसके साथ अपनापन बाँटना एक नैतिक कर्तव्य समझा जाता था। बाराती केवल खाने वाले आगंतुक नहीं थे; वे आने वाले नए रिश्ते के प्रतिनिधि थे। इसलिए उनका स्वागत भी उतना ही आत्मीय और विस्तृत होता था जितना स्वयं विवाह का अर्थ। यही कारण है कि पुराने लोग आज की जल्दी-जल्दी निपटने वाली शादियों को देखकर अक्सर कहते हैं—“अब शादी रही कहाँ, बस कार्यक्रम रह गया।” इस भावना में केवल शिकायत नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक सच भी छिपा है।

समय बदला है, जीवन-शैली बदली है और विवाहों पर भी उसका असर पड़ा है। शहरीकरण, महँगाई, नौकरीपेशा जीवन, सीमित अवकाश, यातायात और आयोजन-व्यवस्था की नई सुविधाओं ने शादियों को छोटा और नियंत्रित बनाया है। आज कई परिवार बड़े आयोजन के बजाय कम समय में सब कुछ निपटाना चाहते हैं, ताकि मेहमानों पर बोझ न पड़े और मेज़बान पर आर्थिक दबाव भी कम रहे। यह व्यावहारिक दृष्टि है, लेकिन इसके साथ परंपरागत आत्मीयता का कुछ हिस्सा खो भी जाता है।

गेस्ट हाउस, बैंक्वेट हॉल, कैटरिंग और तयशुदा टाइम-स्लॉट ने विवाह को अधिक व्यवस्थित तो बनाया है, पर अधिक औपचारिक भी। पहले जहाँ बाराती रुकते थे, अब वे भोजन करके लौट जाते हैं। पहले जहाँ रस्मों के साथ गीत और सामूहिक सहभागिता होती थी, अब कई जगह DJ, फोटो-सत्र और स्टेज-इवेंट मुख्य आकर्षण बन गए हैं। विवाह की जीवंतता बनी रहती है, लेकिन उसकी आत्मीयता कम होने लगती है।

आज की शादी पर सबसे बड़ा दबाव खर्च और प्रदर्शन का है। बहुत-से परिवार संस्कारों से अधिक “लोग क्या कहेंगे” की चिंता में रहते हैं। सजावट, कपड़े, मंच, खाने का मेन्यू, गाड़ियों का काफिला और सोशल मीडिया पर छपने वाली छवि—इन सबके बीच विवाह का मूल संदेश पीछे छूट जाता है। जहाँ पहले सादगी में गरिमा थी, वहाँ अब कई बार भव्यता में खोखलापन दिखाई देता है।

यह प्रवृत्ति केवल शहरी नहीं है; गाँवों में भी इसका असर दिख रहा है। पालकी की जगह लग्जरी कार, पारंपरिक गीतों की जगह तेज़ संगीत और सामूहिक बैठकी की जगह अलग-अलग टेबलों पर भोजन—ये बदलाव अपने-आप में बुरे नहीं हैं। समस्या तब होती है जब सुविधा-संस्कृति, संस्कार-संस्कृति को पूरी तरह विस्थापित कर देती है। तब शादी एक पवित्र मिलन की जगह सामाजिक प्रदर्शन बन जाती है। यही वह बिंदु है जहाँ आधुनिकता उपयोगी होने के बजाय विघटनकारी हो सकती है।

विवाह भारतीय परंपरा में केवल उत्सव नहीं, एक संस्कार है। संस्कार का अर्थ है ऐसा आयोजन जो व्यक्ति को नैतिक, पारिवारिक और सामाजिक जीवन से जोड़ता है। जब विवाह केवल मनोरंजन, खानपान और फोटो के लिए रह जाए, तो वह संस्कार की जगह उत्सवी उपभोग में बदल जाता है। इससे नई पीढ़ी को यह संदेश मिलता है कि रिश्तों की गहराई नहीं, उनके आयोजन की चमक अधिक महत्वपूर्ण है।

इसी कारण बुज़ुर्ग पीढ़ी को आज की शादियाँ अक्सर अपरिचित लगती हैं। वे कहते हैं कि पहले मेहमान परिवार का हिस्सा बनता था, अब वह सूची में दर्ज एक नाम भर है। पहले शादी में समय लगता था, इसलिए रिश्तों को समझने और निभाने का अवसर मिलता था। अब सब कुछ जल्दी हो जाता है, और जल्दी होने के साथ गहराई भी कम हो जाती है। समाज अगर अपने अनुष्ठानों को केवल औपचारिकता मानने लगे, तो धीरे-धीरे वे अर्थहीन होने लगते हैं।

फिर भी इस बदलाव को पूरी तरह नकारना सही नहीं होगा। हर परंपरा को ज्यों-का-त्यों बचाना न संभव है, न हमेशा आवश्यक। समय के साथ कुछ परिवर्तन स्वाभाविक होते हैं। सवाल यह नहीं है कि शादी पहले जैसी ही हो; सवाल यह है कि क्या हम उसमें अपनापन, मर्यादा और सामाजिक संवेदना बचाए रख पा रहे हैं या नहीं। यदि विवाह छोटा हो, लेकिन आत्मीय हो; सरल हो, लेकिन सम्मानपूर्ण हो; आधुनिक हो, लेकिन संस्कारयुक्त हो—तो वही बेहतर संतुलन होगा।

समाज को यह समझना होगा कि शादियों का उद्देश्य केवल रस्म पूरी करना नहीं, बल्कि रिश्तों को जोड़ना, संस्कृति को आगे बढ़ाना और पीढ़ियों के बीच संवाद बनाना है। बच्चों को यह दिखना चाहिए कि विवाह एक सामूहिक मूल्य है, न कि केवल खर्च का आयोजन। घर-आँगन, पंगत, लोकगीत, आशीर्वाद और मेहमाननवाज़ी—ये सब केवल पुरानी बातें नहीं, बल्कि सामाजिक स्मृति के जीवित सूत्र हैं।

इसलिए आज की सबसे बड़ी चुनौती शादी को आधुनिक सुविधा और पारंपरिक गरिमा के बीच संतुलित रखना है। न तो हर बारात को पहले की तरह तीन दिन चलाना अनिवार्य है, न ही हर रस्म को भागदौड़ में निपटाना उचित है। विवाह को इतना संक्षिप्त न बनाया जाए कि वह केवल रस्म लगे, और इतना दिखावटी भी न बनाया जाए कि वह संस्कार ही न रहे। असली बात यह है कि बारात आए तो केवल पेट भरकर न जाए, बल्कि रिश्तों में कुछ गर्माहट, कुछ स्मृति और कुछ मानवीयता छोड़ जाए।

आज की दुनिया में यही सबसे कठिन, लेकिन सबसे ज़रूरी काम है—आधुनिकता को अपनाते हुए परंपरा की आत्मा को बचाए रखना। जब शादी में मेहमान केवल भोजन-ग्राहक नहीं, बल्कि परिवार के सम्मानित सहभागी बने रहेंगे, तभी हम कह सकेंगे कि बदलते समय में भी हमारी संस्कृति जीवित है।

डॉ. प्रियंका सौरभ कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक

बरखास्त शिक्षिका को हाईकोर्ट से बड़ी राहत सवेतन बहाली का आदेश

तत्काल कार्यभार ग्रहण कराने व सेवा समाप्ति अवधि का पूरा वेतन देने के निर्देश

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
विकास खण्ड भटहट अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय डुमरी में तैनात सहायक अध्यापिका प्रीति जायसवाल को सेवा समाप्ति के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने अपने आदेश 20 अप्रैल 2026 में सेवा समाप्ति को निरस्त करते हुए शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से सवेतन बहाल करने तथा सेवा समाप्ति की अवधि का समस्त वेतन भुगतान करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया है।
गौरतलब है कि वीएसए (जिला बेसिक शिक्षा प्राधिकरण) द्वारा 28 जुलाई 2025 को प्रीति जायसवाल की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। आरोप था कि उनके खिलाफ कुछ अनियमितताओं एवं तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई। इसके बाद शिक्षिका ने इस कार्रवाई को गलत और एकपक्षीय बताते हुए उच्च न्यायालय की शरण ली और न्याय की गुहार लगाई।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई तथ्यों के विपरीत एवं प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई है। वहीं, प्रतिवादी पक्ष ने अपने निर्णय को उचित ठहराने का प्रयास किया। सभी तथ्यों एवं अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि सेवा समाप्ति की कार्रवाई में पर्याप्त आधार एवं विधिक प्रक्रिया का अभाव था, जिसके चलते उक्त आदेश को निरस्त कर दिया गया।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि शिक्षिका को तत्काल कार्यभार ग्रहण कराया जाए और जिस अवधि में वे सेवा से बाहर रहीं, उस पूरी अवधि का वेतन भी भुगतान किया जाए। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में शिक्षिका के खिलाफ कथित रूप से कुछ लोगों द्वारा सुनियोजित तरीके से शिकायतें कर कार्रवाई कराई गई थी। यहां तक कि स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई के बाद कुछ लोगों द्वारा जश्न मनाने की भी चर्चाएं रहीं। हालांकि, न्यायालय के फैसले के बाद अब वही पक्ष बैकफुट पर नजर आ रहा है और विभागीय हलकों में इस आदेश को लेकर खासी हलचल देखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस मामले में कुछ बाहरी तत्वों एवं विभागीय कर्मियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं रही हैं, जिन पर शिक्षिका को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन न्यायालय के निर्णय ने पूरे प्रकरण की दिशा बदल दी है।
पीड़ित शिक्षिका प्रीति जायसवाल ने न्यायालय के आदेश की प्रति वीएसए गोरखपुर को प्रेषित करते हुए शीघ्र कार्यभार ग्रहण कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी अपेक्षा जताई है कि आदेश का समयबद्ध तरीके से अनुपालन किया जाएगा।
इस फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जहां पहले सेवा समाप्ति को लेकर एक पक्ष में उत्साह का माहौल था, वहीं अब न्यायालय के निर्णय के बाद वही लोग मायूस नजर आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग उच्च न्यायालय के आदेश का पालन कितनी शीघ्रता से करता है और शिक्षिका को कब तक पुनः कार्यभार ग्रहण कराया जाता है तथा बकाया वेतन का भुगतान किया जाता है।

धार्मिक माहौल में संपन्न हुई भागवत कथा, शिक्षकों ने किया अतिथि सम्मान

भागवत कथा समापन पर डॉ. संजयन त्रिपाठी का भव्य सम्मान, शिक्षकों व श्रद्धालुओं में उत्साह


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। रामरूप इंटर कॉलेज सोन्दा में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा का समापन श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। समापन अवसर पर पहुंचे विद्वान एवं समाजसेवी डॉ. संजयन त्रिपाठी का विद्यालय परिवार एवं क्षेत्रीय गणमान्य लोगों द्वारा सम्मान किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिली।
विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं माध्यमिक शिक्षक संघ देवरिया के पूर्व अध्यक्ष प्रेम चन्द्र मिश्र ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भागवत कथा जैसे आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं। उन्होंने युवाओं को भारतीय संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया।
इस अवसर पर सुरेन्द्र मिश्र, मिथिलेश मिश्र, विपिन श्रीवास्तव, दिनेश त्रिपाठी सहित कई शिक्षक, बुद्धिजीवी एवं क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे। सभी ने डॉ. संजयन त्रिपाठी को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और कथा प्रवचन का आनंद लिया।
समापन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक आयोजन समाज में आपसी सद्भाव, संस्कार और सामाजिक एकता को बढ़ावा देते हैं। आयोजन के सफल संचालन के लिए विद्यालय परिवार एवं सहयोगियों की सराहना की गई।
कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह भक्तिमय रहा और अंत में प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ।

देवरिया: हल्की बारिश में सड़क पर जलभराव, राहगीर परेशान

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जिले के बरहज क्षेत्र में हल्की बारिश के बाद सड़क पर जलभराव की समस्या सामने आई है, जिससे राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार सुबह करीब 10 बजे हुई बारिश के बाद पलिया से दानवीर बाबा होते हुए पचौहा मार्ग तक सड़क पर पानी भर गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह सड़क रामजानकी मार्ग से जुड़ती है और दानवीर बाबा मंदिर के सामने सबसे ज्यादा जलभराव हो जाता है। हल्की बारिश में ही सड़क पर पानी भर जाने से आवागमन प्रभावित हो रहा है और लोगों को कीचड़ भरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।

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ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। हर बार बारिश के दौरान सड़क पर जलभराव हो जाता है, जिससे आमजन को दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। स्थानीय निवासी रमेश, महेश, तारकेश्वर और दिलीप ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि बरसात के मौसम में इस तरह की परेशानी से राहत मिल सके।

बलिया: गंगा घाट पर मुंडन संस्कार के दौरान दर्दनाक हादसा, 4 लोग डूबे, 2 बचाए गए

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया जिले में रविवार सुबह गंगा नदी के शिवरामपुर संगम घाट (ब्यासी) पर एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसने खुशी के माहौल को मातम में बदल दिया। मुंडन संस्कार के दौरान स्नान करते समय दो किशोरियों समेत चार लोग नदी में डूब गए, जिससे घाट पर अफरा-तफरी मच गई और परिजनों में चीख-पुकार शुरू हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, फेफना थाना क्षेत्र के कल्याणीपुर निवासी वशिष्ठ चौहान अपने परिवार के साथ मुंडन संस्कार के लिए शिवरामपुर घाट पहुंचे थे। सुबह के समय घाट पर भारी भीड़ थी और धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। इसी दौरान परिवार की कुछ किशोरियां स्नान के लिए गंगा नदी में उतरीं।

बताया जा रहा है कि स्नान करते समय चार किशोरियां अचानक गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं। उन्हें बचाने के लिए आसपास मौजूद लोग तुरंत नदी में कूद पड़े। इस दौरान दो युवक भी साहस दिखाते हुए बचाव के लिए पानी में उतरे, लेकिन तेज धारा के कारण वे भी बहने लगे।

स्थानीय लोगों की मदद से चार में से दो किशोरियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि चार लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों की पहचान हर्षिता चौहान (17), नंदिता चौहान (12), अरुण चौहान (20) और अर्जुन चौहान (19) के रूप में हुई है।

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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया। स्थानीय गोताखोरों को बुलाकर नदी में तलाश अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही एसडीआरएफ टीम को भी मौके पर तैनात किया गया है, जो आधुनिक उपकरणों के साथ सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गंगा नदी में पानी का स्तर और धारा दोनों तेज हैं, जिससे बचाव कार्य में कठिनाई हो रही है। बावजूद इसके, टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं और लापता लोगों को जल्द खोजने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस हादसे ने एक बार फिर नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और चेतावनी संकेत होने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और परिजन अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। प्रशासन पूरी गंभीरता से बचाव कार्य में जुटा हुआ है।

देवरिया: पति से विवाद के बाद महिला ने खाया जहरीला पदार्थ, हालत गंभीर

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जिले के बरहज थाना क्षेत्र में घरेलू विवाद के बाद एक महिला द्वारा जहरीला पदार्थ खाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने महिला को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है।

जानकारी के अनुसार, बरहज थाना क्षेत्र के ग्राम महुई कुंवर निवासी 40 वर्षीय धनवंतर देवी, पत्नी तारकेश्वर, ने रविवार सुबह जहरीला पदार्थ खा लिया। बताया जा रहा है कि महिला अपने पति की प्रताड़ना से परेशान थी।
परिजनों के मुताबिक, महिला के पति ने शराब के लिए पैसों को लेकर विवाद के दौरान उसके साथ मारपीट की और गले से मंगलसूत्र छीनकर चला गया।

इसी घटना से आहत होकर महिला ने गुस्से में घर में रखी सब्जियों पर छिड़कने वाली कीटनाशक दवा का सेवन कर लिया।

जहरीला पदार्थ खाने के बाद महिला की हालत बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजनों ने उसे आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बरहज में भर्ती कराया। डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है और फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
पुलिस मामले की जानकारी में है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

पहलवान से संत बने ज्ञान गिरी, 35 साल से कर रहे शिव आराधना

परिवार का मोह त्याग बने संत: पहलवानी और खेती छोड़ 35 वर्षों से शिव भक्ति में लीन हैं ज्ञान गिरी महाराज

संवाददाता : भगवान्त यादव, कुशीनगर


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जीवन में संघर्ष और जिम्मेदारियां हर व्यक्ति के हिस्से आती हैं, लेकिन कुछ लोग सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर अध्यात्म का मार्ग चुन लेते हैं। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण कुशीनगर जिले के कसया तहसील क्षेत्र स्थित टेकुआटार गांव में देखने को मिलता है, जहां भगवान शिव और हनुमान जी के प्राचीन मंदिर में वर्षों से सेवा कर रहे संत ज्ञान गिरी महाराज श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केंद्र बने हुए हैं।
ज्ञान गिरी महाराज ने बताया कि उनका पूर्व नाम रामजीत था। युवावस्था में वह पहलवानी और खेती-किसानी से जुड़े रहे, लेकिन गुरु विभूति गिरी जी के सानिध्य और आशीर्वाद ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। करीब 35 वर्ष पहले उन्होंने परिवार, पत्नी, पुत्र, बहू, पौत्र-पौत्री सहित सांसारिक मोह-माया का त्याग कर संत जीवन अपना लिया। गुरु ने ही उनका नाम बदलकर ज्ञान गिरी रखा।
उन्होंने कहा कि माता-पिता के संस्कार और भगवान शिव की कृपा से उन्हें अध्यात्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली। आज वह टेकुआटार स्थित प्राचीन मंदिर में पुजारी के रूप में सेवा कर रहे हैं। मंदिर में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदिर परिसर में वर्षों पुराना समाधि स्थल भी मौजूद है, जिसे स्थानीय लोग श्रद्धा के साथ देखते हैं। हर वर्ष यहां संत-सन्यासियों का समागम, भजन-कीर्तन और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ज्ञान गिरी महाराज का जीवन त्याग, तपस्या और भक्ति की मिसाल है। उनका सादा जीवन और आध्यात्मिक विचार लोगों को धर्म और मानवता की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं।