Category: कविता

आस्था, विश्वास व सूर्यदेव कीउपासना का वृतपर्व छठपूजा

छठिमैया मोरी विनती बारम्बार,स्वीकारौ अर्ध्य हमार।छठिमैया बड़का परब बरत पूजा बा,यामे कौनो पंडित नाहीं,कोउ नाहीं पूजारी,सूरज देवता अर्ध्य लेवत हैं,डूबत उगत तैयारी,डूबत सूरजन का पूजत बासब भोले नर नारी।छठिमैया मोरी…

शयन के सनातन नियम

सूने घर में अकेले सोना वर्जित है,मन्दिर, श्मशान में सोना वर्जित है,सोए को अचानक जगाना ठीक नहीं,विद्यार्थी, कर्मचारी, संतरी व सैनिक,ये अधिक समयतक सोए हों, तो इन्हें,ज़्यादा देर तक सोने…

मैं कौन हूँ, आप कौन हैं

एक लोटा पानी, सिकंदर की कहानी,किसी एक समझदार शख़्स ने,कह कर सुनाई अपनी ज़ुबानी,जिसने सुना उसको हुई हैरानी,जीवन क्षणभंगुर, न बचती निशानी,एक लोटा पानी, सिकंदर की कहानी। प्यासे सिकंदर को…

हमारी वंदना करुणहस्त उठे तुम्हारा

मैं कैसे कहूँ प्रभु कि मैं हूँ तुम्हारा,बिना बात की बात का है सहारा,दिन रात स्मरण करता हूँ तुम्हारा,दिन रात जपता हूँ नाम मैं तुम्हारा। शपथ की शपथ हूँ तुम्हें…

‘आदित्य’ की दो कविताएं

१- हर मनोकामना आपकी पूर्ण हो शुभ पर्व प्रकाश है दीपावली का,सभी प्रियजनो को हार्दिक बधाई,व अनन्त शुभकामनायें प्रस्तुत हैं,खील, लाई ,शुद्ध घी की मिठाई।दीपमालिका किरणें रोशन हो,आपके जीवन में…

नैना श्रीराम दरस को प्यासे हैं

श्रीराम आइये अवधपुरी में अब, ज्योत्सना जली है लाखों दीपों की, रोशन अवधपुरी का हर कोना है, हमको इंतज़ार है आपके आने की। चौदह बरस बीत गये हैं तुम बिन,नैना…

धनतेरस की बधाई

दीवाली के दो दिन पहले धनतेरसका पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष कीत्रयोदशी को अति धूम धाम केसाथ हर वर्ष मनाया जाता है । समृद्धि की देवी लक्ष्मी माता,आयुर्वेद के भगवान धन्वंतरि,जो…

दिवाली की रात लक्ष्मी गणेश सबको आशीष, उपहार दे आते है

दीवाली का हम सब इंतज़ार करते हैं,प्रथम पूज्य श्रीगणेश की पूजा कर,माता श्री लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं,श्रद्धापूर्वक दीवाली का पर्व मनाते हैं। त्रेता में सीता जी को लेकर…

बोया पेंड़ बबूल का आम कहाँ से होय

करता था सो क्यों किया,अब करि क्यों पछताय।बोया पेड़ बबूल काआम कहां से खाये॥ बुरा मत सोचो, बुरा मतकहो और बुरा मत देखो,गांधी जी के तीनों बानरों,जैसा सबका जीवन होय,किसी…

श्री कृष्ण महिमा

बुझा दीपक कैसे जलेगाबाती भी सुलग चुकी है,चिकनाई ही कहाँ बची हैरोशनी भी बुझ चुकी है,निर्झर झर पवन बहतीझकझोर लव को गई है,बुझा दीपक कैसे जलेगाबाती भी सुलग चुकी है…

त्योहार परम पुण्य पुरुषार्थ यह

त्योहार परम पुण्य पुरुषार्थ यह,दीपावली शुभ दिव्यार्थ मय यह,द्वार द्वार दीप ज्योति जलती रहे,तिमिर नाशक द्वंद्व युद्ध चलता रहे। जीत जायेगी प्रकाश पुंज लालिमा,होगी पराजित ये घनघोर कालिमा,दीप ज्योति पर्व…

मेरी छत पर ये तिरंगा रहने दो

मेरा दीपक हवा के खिलाफकैसे और क्यों कर जलता है,क्योंकि मैं तो अमन पसंद हूँ,मेरे शहर में शोर मत मचाओ,जाति धर्म के रंग में मत बाँटोमेरी छत पर ये तिरंगा…

विदुर का साग प्रभू को स्वीकृत है

दोस्त की खोज तो सभी करते हैं,अच्छे दोस्त की खोज जो करते हैं,छोटे दिल के होते हैं बड़े दिल वालेतो हर दोस्त को अच्छा बना लेते हैं। किसी के लिए…