
PWD की ई-टेंडरिंग व्यवस्था पर ठेकेदारों ने उठाए सवाल, जिम्मेदारी तय करने की मांग
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया में कथित तकनीकी और प्रक्रियागत खामियों को लेकर प्रमुख अभियंता विकास एवं विभागाध्यक्ष को पत्र भेजकर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। समिति के अध्यक्ष शरद कुमार सिंह ने 23 सितंबर 2026 को भेजे पत्र में कहा है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बावजूद कई स्तरों पर ऐसी दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिससे ठेकेदारों को निविदा प्रक्रिया में भाग लेने में परेशानी हो रही है।
समिति का कहना है कि विभाग में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। लेकिन बिलों का समय पर ऑनलाइन अपडेट नहीं होना, निविदा अपलोड करने में तकनीकी दिक्कत और ऑनलाइन सिस्टम में गलत जानकारी दर्ज होने जैसी समस्याओं के कारण ठेकेदारों की बिड क्षमता प्रभावित हो रही है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में निविदा आमंत्रित करने वाले अधिकारियों द्वारा ऐसी मशीनरी की मांग की जा रही है, जिसे समिति के अनुसार संबंधित शासनादेशों के अनुरूप निविदा शर्तों में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा निविदा में कार्य की समयसीमा अथवा अन्य शर्तें गलत दर्ज होने से भी कई ठेकेदारों के लिए परेशानी पैदा होने का दावा किया गया है।
समिति ने कहा कि इन समस्याओं के संबंध में विभागीय अधिकारियों को पूर्व में मौखिक रूप से भी अवगत कराया गया, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। समिति ने मांग की है कि यदि बिलों को समय पर ऑनलाइन अपडेट न करने अथवा निविदा प्रक्रिया में गलत जानकारी दर्ज करने के कारण कोई ठेकेदार निविदा से वंचित होता है, तो संबंधित ऑपरेटर और निविदा आमंत्रित करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।
समिति के अनुसार, इससे ऑनलाइन व्यवस्था के कथित दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के साथ निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी। पत्र की प्रतिलिपि लोक निर्माण विभाग के सलाहकार को भी भेजी गई है।
उत्तर प्रदेश का सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल ऑनलाइन निविदाओं के प्रकाशन और बोली जमा करने की व्यवस्था उपलब्ध कराता है।
