Category: कविता

घमंडी का सिर नीचा

कहा जाता है घमंडी का सिर नीचाइसका अर्थ हैं घमंडी कभी न कभीमुँह के बल गिरता ही है क्योंकिघमंड की उम्र बहुत कम होती है। इंसान यदि अपने पर घमंड…

कविताधर्मिता माँ सरस्वती ने दी है

विद्यार्थी जीवन की यह शिक्षा विद्वानशिक्षकों की आज याद दिलाती है,अगर कोई एक पुस्तक लिख लेता है,तो उसे पुत्ररत्न जैसी प्राप्ति होती है। कितना सत्य कथन वह अब लगता है,जब…

कर्तव्य करिए, फल की इच्छा नहीं

आस्था और विश्वास की ताक़त सेटूटते हुये सम्बंध बार बार जुड़ जाते हैं,लोगों की उजड़ी अंधियारी दुनिया मेंयही हरियाली प्रकाश फैलाते हैं। आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम,ईमानदारी के साथ साथ आस्था,विश्वास…

ज़िन्दगी

किसी अनन्य मित्र ने सुझाव भेजा है,ओमिक्रान के बढ़ने के साथ साथ हीदुनिया में सर्दी का प्रकोप बढ़ रहा है,केवल भाप नहीं हाफ़ भी ज़रूरी है। वैसे उन्होंने हास्य रूप…

हमै का हानि

बचपन से विकासशील विचारधाराका पोषक होने की वजह यह रही है,मैंने गांव व ग़रीबी सिर्फ़ करीब सेदेखा ही नहीं बल्कि इसे जिया भी है। मैंने गरीबी और भुखमरी देखी है,गरीबों…

आचरण ही श्रेष्ठ

बात त्रेता युग की है जब भगवानश्रीराम चौदह वर्षों के वनवास केदौरान चित्रकूट में थे, श्रीराम, मातासीता कुटिया के बाहर बैठे हुए थे। लक्ष्मण उनके पास चरणों में बैठे थे,श्रीराम…

सच्ची मित्रता

आज एक मित्र ने कहा आदित्य क्योंन आज सभी बेशक़ीमती दोस्तों कीदोस्ती को इस छोटी सी बात पर भीआप अपनी एक कविता समर्पित करें! मित्रता का घमंड एक बेटे को…

झोपड़ी में टाट की गुदड़ीं नहीं

जी हाँ, चाय का समय हो गया है,संगीत साधना,गीत लिख गया है,आराध्य सरगम है, तार सुगम हैं,टंकार मधुर है और स्वर संगम हैं। तापमान निरा नीचे गिर रहा है,हाड़ कँपाती…

स्वस्थ विचारों का आदान–प्रदान

स्वस्थ विचारों का आदान प्रदान,ज्ञान और बुद्धि से आगे बढ़ता है,तर्कहीन वार्तालाप अज्ञानता एवंअहंकार जैसे दुर्गुण पैदा करता है। किसी की सरलता व सीधापन कोलोग उसकी कमजोरी मान लेते हैं,पर…

एक वर्ष जीवन कम हुआ आज

आज मुझे नव स्फूर्ति मिल रही है,नव जन्म वर्ष में प्रवेश कर रहा हूँ,उम्र का एक वर्ष गिनती में बढ़ा आज,एक वर्ष जीवन मेरा कम हुआ आज। जीवन पथ पर…

दुआएं

कहते हैं कि दुवाओं मेंबहुत ताक़त होती है,दवा काम नहीं करतीतो दुआ काम आती है। अक्सर दवा का काम,दुआ ही करती है,दुवायें हों अगर साथ तोदिल खुश कर जाती हैं।…

प्रभु ने इंसान बनाने की सोची

परमात्मा ने मत्स्य बनाने की सोची,तब उसने सागर से बात किया,जब उसने वृक्ष उगाने की सोची,तब उसने पृथ्वी से राय लिया। जब प्रभु ने इंसान बनाने की सोची,तब प्रभु ने…

राम आएंगे

खत्म हुआ वनवास आजअब राम हमारे आएंगेराजतिलक अब फिर से होगाहम सब खुशी मनाएंगे..।। सूनी पड़ी अयोध्या फिर सेआज पुनः खुशियों से झूमीफिर से आज दिवाली होगीहम सब दीप जलाएंगे..।।…

अप्रतिम संदेश का देश भारत

उत्तुंग हिमालय शीश बन खड़ा,सागर वंदन करे चरण रज धोकर,पर्वतराज ऊँचा उठने को कहता है,सागर दिखलाता गहरे लहराकर। सोच समझ अति ऊँची गहरी,भाव समर्पण का पावन आदर,शिखर शिखर पर सूर्य…

शीतऋतु

डाक हिमालय की बर्फीलीलेकर चलीं हवाएं,सुबह-शाम मैदानों कीसांकल चढ़कर खाकाएं। क्रूर-निर्दयी से मर्माहतबार-बार पिस-पिस केअंधियारे की बांहों मेंचांदनी कसमसा सिसकेकुहरे की चादर ओढ़ेअंसुआई आंखों भोरेंअनुभूति को कंपकंपी कीदावत बांटती दिशाएं।…