Category: कविता

मनुष्य के गुण चीनी से होने चाहिए

एक पत्थर को ख़ूब तराश करदेवता-मूर्ति का रूप दिया जाता है,दूसरे बदनसीब पत्थर पर नारियलफोड़ कर मूर्ति को चढ़ाया जाता है। पहले वाले पत्थर ने मूर्तिकार कीहथौड़ी से कुछ चोटें…

सावन की महिमा न्यारी है

नभ अच्छादित मेघों सेयह विनय मैं करता हूँ,भाग भाग कर थकते हो,ठहरो, बरसो, हल्के हो। माना कावंड ले चले सभी,शिव – अर्पण हेतु सुजल,हों प्रसन्न शिव भोलेबाबा,धरती अम्बर काले बादल।…

सुनो भाई पीने वालो

जगह जगह ठेके खुले,लगा रहे हैं जाम,पी पीकर गिरते फिरें,क्या सुबह क्या शाम,अंग्रेज़ी देशी पियेंपियें विस्की और रम,बियर बार हैं खुल गये,रातों दिन हे राम। महंगाई की रो रहे,रोटी मिले…

आप भी बेवजह मुस्कुरा दीजिए-बिंदु चौहान

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)आइये आके महफिल जमा दीजिए,आप भी बेवजह मुस्कुरा दीजिए।पास उजड़े हुए इस चमन के कभी,बैठ के खुद ब खुद मशवरा कीजिए।आंसुओ के समंदर से बाहर लिकल,साज दिल का…

कल तक प्रकृति नाराज़ थी

कल तक प्रकृति नाराज़ थी,मानसून अब तक नासाज़ था,आज यहाँ भी अति वृष्टि है,बरसात का अब आगाज है। आधा सावन बीत गया था,पावन मास शिव जी का यह,काले मेघ गगन…

अकेले ही मंज़िल तय करनी होती है

हम और आप दोनो महज यादबनकर के एक दिन रह जायेंगे,और दोनो कोशिश करके दुनियामें अच्छी यादें छोड़ कर भी जायेंगें। सबकी नकल करी जा सकती है,पर चरित्र, व्यवहार, संस्कार…

अस्तित्व क्या है

इंदौर/मध्यप्रदेश(राष्ट्र की परम्परा)दैहिक रुप में मौजूदगी ,टिका रहता है मात्र कुछ ही सांसों परइतने विराट शरीर का अस्तित्व ।एक स्वप्न सा प्रतीत होता हैमृत्यु के पश्चात, अस्तित्व ।जीवन पर्यंत करता…

मेहनत का फल

‘बीर भोग्या वसुंधरा’ का अबशायद विचार बदल चुका है,मेहनत का फल तो मिलता है,धरती से सब उसको मिलता है। मेहनत का फल मिलता है,यह सत्य वचन सनातन है,बीर वही होता…

नाथ बिन हर पल सुन

भावनायें पुलकित पुलकित,आशायें भी कम्पित कम्पित,तेरी धुंधली छाया से चित्रित,भूल गया तन रज मंजु मृदुल,तुम बिन जीवन सूना सूना है,नाथ तुम्हारे बिन हर पल सूना है। हृदय हिलोरें ले रहा…

“”बूंद बारिश की””

प्राण का संचार करने,चेतना का राग भरने।सुप्त जीवन आश बनकर,सर ,नदी सैलाब बन कर।।दे रही सुख ,शांति,बूंद बारिश की।।1।। मलिन पत्ते धो रही,प्रकृति आतप खो रही।भावना के पंख फहरे,जीवन्त होने…

सुबह शाम का इंतज़ार

यह प्रतिक्रिया सुनी सुबह आज,घर कितना सूना सूना है अब यह,बच्चे चले गये फिर से विदेश को,बाय बाय टिल नेक्स्ट टाइम कह। वेयर आर यू गोइंग बेबी ईशान,आई एम नाऊ…

सत्य धर्म

सत क़र्म करो, सत धर्म धरो,जग जीवन में उपकार करो।सत क़र्म करो, सत धर्म धरो,जन जीवन पर उपकार करो,युग निर्माण, प्रगति पथ पर,उत्सर्ग रहित, उत्कर्ष करो,धरती से लेकर, अम्बर तक,निर्भय…

आदित्य – बिल्वाष्टक

बेल पत्र प्रिय शिव जी को, यह शिव पुराण है कहता,बिल्वपत्र में शिव की चाहत, बिल्वाष्टक भी कहता। बेलपत्र की तीन पत्तियाँ,एक पत्र मानी जाती,स्वच्छ, समूचे बेलपत्रों से,शिवलिंग पूजा की…

प्रदर्शन

खरा उतरना पड़ता हैमनुष्य को औरों के मापदंड पर ,करना पड़ता हैस्वयं को सिद्ध दूसरों के लिए ।कहा जाता है कि रंगमंच हैयह दुनिया ,प्रदर्शन करता है मनुष्य अपनी भूमिका…

राही चलना धीरे धीरे

अंतिम यात्रा आने वाली,राही चलना धीरे धीरे।यात्रा करना छोड़ अगर दें,पढ़ना-लिखना छोड़ अगर दें,पैरों की ध्वनि ना सुन पायें,दिल की सुनना छोड़ अगर दें,हँसी दिल्लगी सदा भुलाकर,कभी न जीवन चर्या…