कविता

विशेष कविता | न्याय की मशाल: नवी पिल्लई को नमन!

मानवाधिकार, समानता और न्याय की अलख जगाने वाली शख्सियत को काव्यात्मक नमन नवी पिल्लई जिसने अन्याय के आगे झुकना नहीं…

2 days ago

पर्दा गिर गया, नाना अमर हो गए…!

नाना पाटेकर के अभिनय, संवेदनाओं और अद्भुत संवाद अदायगी को समर्पित भावपूर्ण कविताजिस आवाज़ में था सच का साहस,जिस आँखों…

4 days ago

हरमन, तुमने क्यों छोड़ी कमान?

हरमन, तुमने क्यों छोड़ी कमान,आज यह पूछ रहा है हिंदुस्तान।जीत की राहों की तुम सरताज,तुमसे रोशन हुआ देश का मान।तुमने…

6 days ago

चंदेल मायका, गोंड ससुराल—दुर्गावती हमारी ढाल

फोटो goo रानी दुर्गावती के शौर्य, स्वाभिमान और मातृभूमि के लिए बलिदान को समर्पित वीर रस की कविता हाँ, वह…

7 days ago

छिपा हुआ दुःख-दर्द…!

Go हरेक चेहरे पर मुस्कान सजाकर,दिल में वो दर्द छिपाकर बैठे हैं।दुनिया समझे सब कुछ अच्छा,हम खामोशी को अपना बैठे…

1 week ago

मेज़ों पर पानी का राज़…!

जनता प्यासी, व्यवस्थाओं पर सवाल और पानी की एक-एक बूंद की कीमत पर सवाल उठाती कविता गरीब देश की ऊँची…

2 weeks ago

संजा – मिट्टी की खुशबू का पर्व

हाँ, कच्ची दीवारों पर जब, संजा मुस्कुराती थी,मिट्टी-गोबर-फूलों से बेटियाँ दुनिया सजाती थीं।नन्ही-सी उँगलियों में पूरा "गाँव" उतर आता था,हर…

3 weeks ago

अस्सी का वह दौर

था, रिश्तों में था प्यार।अब रिश्ते हैं फोन में, सूना है घर-द्वार॥थोड़ा था पर बाँटकर, खाते थे परिवार।अब थाली भरपूर…

1 month ago

तंत्र सोता रहा…!

जर्जर इमारतें गिरती रहीं, तंत्र सोता रहा,दीवारों की दरारें खूब चीखती रहीं,हमेशा शहर खामोश होता रहा।किसी छत ने पहले ही…

1 month ago

सिस्टम का बोझ और बुजुर्ग की पीठ…!

ज़नाब, जूते न गंदे हो जाएँ युवा साहब के,देखो इंसानियत को कीचड़ में बहा दिया।इस उम्र में उन्हें लाठी का…

1 month ago