कविता

प्रकृति की सुंदरता: एक सोच

गर्दन को झुकाकर मोबाइल में यदिअजनबी रिश्तों से हम जुड़ सकते हैं,हकीकत के रिश्तों में गर्दन झुकाकरएक दूसरे को भी…

2 days ago

साइकिल

-डॉ. प्रियंका सौरभ नन्हा बच्चा साइकिल चलाए,धीरे-धीरे आगे जाए। पीले-पीले फूल खिले,देख उन्हें वो खुश हो मिले। छोटी-छोटी आँखें हँसती,मस्ती…

1 week ago

माँ दुर्गा स्तुति

✍️ डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ मैया शैलसुता ब्रह्मचारिणी माँ,चंद्रघंटा देवी कुशमांडा माता,स्कन्दमाता कात्यायिनी माता,कालरात्रि, महागौरी सिद्धिदात्रीमाता का आवाहन करिये…

4 weeks ago

🟧 विडंबना नहीं तो और क्या

परिचय अपने ही देश में बेघर दर्द झेलना और शरणार्थी जैसा जीवन जीना आज की सबसे बड़ी विडंबना बनता जा…

4 weeks ago

कविन लिखि गाथा सुनावतो

— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ आदित्य मति खोजि-खोजि,गूगल-ऊगल में सर्च करत,झूठ और साँच का भेद सबै,कवित्त रचना लिखावतो। सीता-राम,…

4 weeks ago

परधानी कै चुनाव फिर से नियरान है

सीट सामान्य भई जब सेदस-पंद्रह सोच भई है सयानीभौजिक पांव गहे महतारीतुंही अब लाज बचाओ भवानीकेहुक है रुपया परदेसिककेहुक जेवर…

1 month ago

ख़ुद अच्छे बनो सब अच्छे दिखेंगे

डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र‘आदित्य’ शतरंज के खिलाड़ी हों या प्यादे,अच्छे लोग सदा ही सस्ते होते हैं,बस मीठा बोल बना लो…

1 month ago

ज्ञान

चरित्र की महिमा शांत स्थिर होती हैआचरण जैसे भी हों अनुसरण होते हैंज्ञान व पैसा बहती धारा के किनारे हैंएक…

1 month ago

जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी

जो भी कहूँ जितना भी कहूँ,बेहतर से बेहतर शब्द चुनू,महिला शक्ति की महिमा में,श्रद्धारूपिणी की गरिमा में। जन्म के समय…

1 month ago

प्रयास हमें बहुत कुछ सिखा जाते हैं

— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ छोटी-छोटी बूंदें जब निरंतर बरसती हैं,तो तालाब और पोखरे सब भर जाते हैं।नदियों का…

1 month ago