कविता

दादा जी का पोता

-डॉ. सत्यवान सौरभ पोता प्यारा दादा जी का,बैठे उनके पास।दिनभर उनसे बातें करता,हँसता बारह मास। दादा जी जब बाहर जाते,पीछे-पीछे…

3 days ago

छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार,अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥

✍️ डॉ. प्रियंका सौरभ सच की कीमत लग गई, बोली लगे बाज़ार,ख़बरों के भी दाम हैं, बिकता हर विचार।इश्तहारों के…

3 weeks ago

बन्द मुट्ठी सवा लाख की

✍️ डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र‘आदित्य’ बन्द मुट्ठी सवा लाख की,खुल गयी तो ख़ाक की,कहावत कितनी प्रसिद्ध है,अपने आप से यह…

4 weeks ago

जीवन का सत्य और आत्मबोध

चर्म औ अस्थि की देह को ही बनाया है घर।तो अपनी आत्मा को इसका मेहमान मानिए।। छल प्रपंचों में ही…

1 month ago

दिल हुए पत्थर (हिंदी कविता)

✍️ – संजय एम. तराणेकर जहाँ दिल ‘पत्थर’ के हो जाते हैं,वहाँ पे सोना भी पिघलता नहीं।आँखों का पानी सूख…

1 month ago

जीव अविनाशी — जीवन और मृत्यु का शाश्वत सत्य

सच है, सत्य मानो जैसे पाताल में खो गया हो,अब तो झूठ ही जगत पर छाया हुआ प्रतीत होता है।पुरानी…

1 month ago

विश्व धरोहर दिवस पर काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र गोरखपुर एवं गोरखपुर…

1 month ago

आदित्य सिया-राम मय भारत है

श्रीराम जय राम, जय जय राम,है अवध पुरी अति पावन धाम,रघुकुल रीति ही जहाँ की शान,प्राण जायँ पर वचन की…

1 month ago

राख से उठती लौ: आँसूओं से जन्मी हिम्मत की कहानी

उन दीवारों से पूछो वो 'रातें' कैसी थीं,जब 'रोटी' भी छुप-छुप के खाती थी।उनके आँसू भी 'आवाज़' न करें कहीं,इस…

1 month ago

प्रकृति की सुंदरता: एक सोच

गर्दन को झुकाकर मोबाइल में यदिअजनबी रिश्तों से हम जुड़ सकते हैं,हकीकत के रिश्तों में गर्दन झुकाकरएक दूसरे को भी…

2 months ago