-डॉ. सत्यवान सौरभ
पोता प्यारा दादा जी का,
बैठे उनके पास।
दिनभर उनसे बातें करता,
हँसता बारह मास।
दादा जी जब बाहर जाते,
पीछे-पीछे जाता।
छोटी-छोटी प्यारी बातें,
सबको खूब सुनाता।
दादा जी की लाठी लेकर,
चलता बनकर राजा।
ऐनक पहन इतराता फिरता,
जैसे कोई ताजा।
कभी घोड़ा दादा बन जाते,
वह पीठी पर चढ़ता।
“चलो-चलो अब तेज़ दौड़ो”,
कहकर खूब उछलता।
दादा-पोते का यह रिश्ता,
सबसे बड़ा खजाना।
प्यार भरा यह सुंदर बंधन,
सबको लगे सुहाना।
✍️ संजय एम. तराणेकर कलाई पर बंधता धागा है,पर बंधता है उससे विश्वास,बहन की आँखों…
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत खोराबार…
भारत में स्वाइन फ्लू वायरस (एच1एन1) फिर सुर्खियों में :दिल्ली से कर्नाटक- महाराष्ट्र तक बढ़ते…
शामली (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के शामली में लोकप्रिय हरियाणवी गायक अंकित बालियान की…
गोरखपुर गोरक्ष प्रांत योजना बैठक—कार्ययोजना 2026 यह बैठक विश्व हिंदू परिषद, गोरक्ष प्रांत, गोरखपुर, योजना…