Categories: कविता

दिल हुए पत्थर (हिंदी कविता)

✍️ – संजय एम. तराणेकर

जहाँ दिल ‘पत्थर’ के हो जाते हैं,
वहाँ पे सोना भी पिघलता नहीं।
आँखों का पानी सूख जाता है,
दर्द फिर बाहर निकलता नहीं।

जब शब्दों में कड़वाहट भर जाए,
तब रिश्ते धीरे-धीरे टूटने लगते हैं।
जिस मन में जमा हो सन्नाटा,
वो आँसू बनकर भी छूटते नहीं।

सुनिए—थोड़ा प्रेम, थोड़ी करुणा,
जीवन को सहज बना देती है।
मीठी बोली, शांत विचार,
हर एक पीड़ा भुला देती है।

जो क्रोध, घृणा और अहंकार से,
मन का दीपक बुझ जाता है।
मौन, धैर्य और स्नेह से ही,
जीवन सच्चा होकर संवर जाता है।

Karan Pandey

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