Friday, May 1, 2026
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विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का हुआ शुभारंभ, 10 से 30 अप्रैल तक चलेगा दस्तक अभियान

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

जनपद में संचारी रोगों की रोकथाम के लिए विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ जिला अस्पताल से किया गया। इस अभियान का उद्घाटन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनन्द कुमार सिंह एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुजीत कुमार यादव द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर जनजागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया तथा उपस्थित लोगों को संचारी रोगों से बचाव हेतु शपथ दिलाई गई।कार्यक्रम के दौरान वेक्टर जनित बीमारियों के नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि अभियान के अंतर्गत डेंगू, मलेरिया, दिमागी बुखार जैसे रोगों के लक्षण वाले मरीजों की पहचान पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही 10 से 30 अप्रैल तक चलने वाले ‘दस्तक अभियान’ के माध्यम से आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगी।उन्होंने बताया कि कार्यकर्ता डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई), एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस), इनफ्लुएंजा लाइक इलनेस (आईएलआई) तथा हीट वेव से बचाव के बारे में जानकारी देंगी। साथ ही बुखार, क्षय रोग, फाइलेरिया, कालाजार, कुष्ठ रोग के लक्षण वाले मरीजों की सूची तैयार कर उनका विवरण ई-कवच पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
जिला मलेरिया अधिकारी राजीव त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे वेक्टर जनित और जलजनित रोगों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसे देखते हुए भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, हीट वेव से बचाव के लिए शेल्टर, तथा मौसम की जानकारी का सार्वजनिक प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाएगा।अभियान के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर विकास, पंचायती राज, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, कृषि एवं अन्य विभागों का समन्वय रहेगा। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने व शव छिपाने के मामले में सास गिरफ्तार

बांसडीह /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

जनपद बलिया के थाना बांसडीह क्षेत्र में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने तथा मृतका के शव को छिपाने के गंभीर मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थाना बांसडीह पुलिस ने इस प्रकरण में नामजद एक अभियुक्ता को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया है।पुलिस अधीक्षक बलिया ओमवीर सिंह के निर्देशन में अपराधियों और वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई। अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) दिनेश कुमार शुक्ला के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी बांसडीह जयशंकर मिश्र के नेतृत्व में थाना बांसडीह की पुलिस टीम ने यह सफलता हासिल की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 02 फरवरी को वादी ने थाना बांसडीह में तहरीर देकर बताया कि उसकी बहन रिंकू सिंह की शादी लगभग 10 वर्ष पूर्व थाना क्षेत्र के टोलापुर सुल्तानपुर निवासी चन्दन सिंह के साथ हुई थी। विवाह के बाद से ही रिंकू सिंह को उसके ससुराल पक्ष द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जनता था। आए दिन मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर रिंकू सिंह ने 01 फरवरी की शाम करीब 4:30 बजे अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।वादी का आरोप है कि घटना के बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से मृतका के सास-ससुर एवं ननदों ने कुछ अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर शव को घाघरा नदी में प्रवाहित कर दिया, ताकि मामला दबाया जा सके। इस गंभीर प्रकरण में पुलिस ने प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना बांसडीह में मु0अ0सं0 21/2026, धारा 108/238 (बी) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।मामले की विवेचना के दौरान अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही थी। 31 को थाना बांसडीह के उपनिरीक्षक एवं विवेचक सूरज पटेल अपनी टीम के साथ क्षेत्र में गश्त पर थे। तभी मुखबिर की सूचना पर सुल्तानपुर-मनियर मार्ग पर स्थित एक ईंट भट्ठे के पास से अभियुक्ता कालपति (कलपति) देवी, पत्नी विजय शंकर सिंह, निवासी टोलापुर सुल्तानपुर थाना बांसडीह, उम्र लगभग 58 वर्ष को गिरफ्तार कर लिया गया।पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्ता मृतका की सास है और उस पर आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने तथा साक्ष्य छिपाने में संलिप्त होने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद अभियुक्ता के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी कर उसे न्यायालय भेज दिया गया है।इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक सूरज पटेल, कांस्टेबल मुकेश प्रजापति एवं महिला कांस्टेबल अर्चना पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं और जल्द ही सभी को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

Ballia News: सिकंदरपुर में ‘स्कूल चलो अभियान’ रैली, नामांकन के लिए किया गया जागरूक

सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को ब्लॉक स्तरीय ‘स्कूल चलो अभियान’ के अंतर्गत भव्य रैली का आयोजन किया गया।

एसडीएम ने दिखाई हरी झंडी

रैली का शुभारंभ उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सुनील कुमार ने फीता काटकर और हरी झंडी दिखाकर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करे।

बच्चों ने दिए जागरूकता संदेश

रैली में शामिल छात्र-छात्राओं ने हाथों में बैनर, पोस्टर और तख्तियां लेकर नगर क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान “सब पढ़ें, सब बढ़ें” और “हर बच्चा स्कूल जाए” जैसे नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया।

नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी रैली

यह रैली कम्पोजिट विद्यालय से शुरू होकर सिकंदरपुर नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए पुनः विद्यालय परिसर में समाप्त हुई।

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अभियान का उद्देश्य

खंड शिक्षा अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि ‘स्कूल चलो अभियान’ का उद्देश्य हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके तहत घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा।

शिक्षकों और अधिकारियों का योगदान

कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षक और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा। प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों और एआरपी भूपेन्द्र, दीनबंधु गुप्ता, अरुण, गौहर हुसैन सहित कई शिक्षकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

पुलिस प्रशासन का सहयोग

रैली के दौरान पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया।

सकारात्मक संदेश

यह रैली न केवल शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में सफल रही, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश देने में भी कारगर साबित हुई। स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना की।

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सहायक दयाबाबू व वरिष्ठ सहायक मुन्ना बाबू के ट्रांसफर पर लगी रोक


बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में कार्यरत सहायक दयाबाबू एवं वरिष्ठ सहायक मुन्ना बाबू के स्थानांतरण पर फिलहाल रोक लग गई है। दोनों कर्मचारियों ने अपने ट्रांसफर को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद न्यायालय ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए स्थानांतरण पर स्थगन आदेश जारी कर दिया है।बताया जा रहा है कि सीएमओ बलिया द्वारा किया गया यह स्थानांतरण नियमों के विपरीत था। आरोप है कि जिन कर्मचारियों का एक वर्ष के भीतर ही ट्रांसफर कर दिया गया, वहीं कई ऐसे कर्मचारी हैं जो पिछले चार वर्षों से अधिक समय से एक ही पटल (डेस्क) पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन उनका स्थानांतरण नहीं किया गया। इसको लेकर विभाग के अंदर भी असंतोष की स्थिति बनी हुई है।सूत्रों के अनुसार, दयाबाबू और मुन्ना बाबू का ट्रांसफर एक साल के भीतर ही कर दिया गया था, जबकि शासन के नियमों के अनुसार सामान्यतः एक निर्धारित अवधि के बाद ही स्थानांतरण किया जाना चाहिए। इसी को आधार बनाते हुए दोनों कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए ट्रांसफर आदेश पर रोक लगा दी है।
इस मामले में एक और गंभीर आरोप यह भी है कि सीएमओ कार्यालय में पटल वितरण वरिष्ठता के आधार पर नहीं किया गया है। कई वरिष्ठ कर्मचारियों को नजरअंदाज कर जूनियर कर्मचारियों को महत्वपूर्ण पटल सौंप दिए गए हैं, जिससे कार्य प्रणाली पर भी प्रभाव पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि वरिष्ठता का सही ढंग से पालन किया जाए तो कार्यों का निष्पादन अधिक पारदर्शी और सुचारु रूप से हो सकता है।इसके अलावा महिला अस्पताल में भी लंबे समय से जमे कर्मचारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ बाबू करीब 8 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं, लेकिन उनका ट्रांसफर नहीं किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानांतरण नीति का पालन समान रूप से नहीं हो रहा है।वरिष्ठ सहायक मुन्ना बाबू ने बताया कि उन्होंने न्यायालय की शरण इसलिए ली क्योंकि उनके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि विभाग में पारदर्शिता और नियमों का पालन होता, तो उन्हें कोर्ट जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी कहा कि सभी कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और स्थानांतरण नीति का पालन निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए।फिलहाल न्यायालय के आदेश के बाद दोनों कर्मचारियों को राहत मिली है, लेकिन इस पूरे मामले ने सीएमओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि विभाग आगे क्या कदम उठाता है और क्या स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाती है या नहीं।

Entrepreneurship Program: बिछुआ कॉलेज में उद्यमिता कार्यक्रम, छात्रों को मिली नई दिशा

बिछुआ/मध्य प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में विद्यार्थियों को स्वरोजगार और व्यवसाय की दिशा में प्रेरित करने के लिए एक दिवसीय उद्यमिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

कार्यक्रम में जिला समन्वयक सेडमेप छिंदवाड़ा उमेश तिवारी, बिजनेस कंसल्टेंट नितेश त्रिपाठी, सीबीआई बिछुआ के असिस्टेंट मैनेजर भगत सराठे और जिला उद्योग केंद्र छिंदवाड़ा के सहायक प्रबंधक सत्यम देशमुख ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिया।

स्टार्टअप और सरकारी योजनाओं पर चर्चा

वक्ताओं ने छात्रों को व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया, स्टार्टअप के अवसर, सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस दौरान छात्रों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।

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शिक्षकों का रहा सहयोग

कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्वामी विवेकानंद मार्गदर्शन प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. फरहत मंसूरी, डॉ. मनीषा आमटे, डॉ. नसरीन अंजुम खान, डॉ. माधुरी पुसे, डॉ. नमिता चोबे और डॉ. कीर्ति डेहरिया का विशेष योगदान रहा।

छात्रों को मिली नई दिशा

यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि उन्हें भविष्य में स्वरोजगार और व्यवसायिक अवसरों की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली।

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Gorakhpur Workshop: फोटोग्राफी से संस्कृति समझने की पहल, 1 मई से राष्ट्रीय कार्यशाला

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राजकीय बौद्ध संग्रहालय द्वारा फोटोग्राफी के माध्यम से संस्कृति, इतिहास और विरासत को समझने के उद्देश्य से चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

1 मई से शुरू होगी कार्यशाला

संग्रहालय के उप निदेशक डॉ. यशवंत सिंह राठौर के अनुसार यह कार्यशाला 01 मई से 04 मई 2026 तक आयोजित होगी, जिसमें प्रतिभागियों को फोटोग्राफी के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।

100 प्रतिभागियों को मिलेगा मौका

इस कार्यशाला में अधिकतम 100 प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा। चयन “प्रथम आगत, प्रथम स्वागत” के आधार पर किया जाएगा।

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कौन कर सकता है आवेदन?

इसमें स्नातक, परास्नातक, शोधार्थी, छात्र-छात्राओं के साथ-साथ फोटोग्राफी और संस्कृति में रुचि रखने वाले अन्य लोग भी भाग ले सकते हैं।

  • न्यूनतम आयु: 18 वर्ष
  • अधिकतम आयु: कोई सीमा नहीं

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि

इच्छुक अभ्यर्थी 01 अप्रैल से 28 अप्रैल 2026 तक आवेदन फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं।
फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 28 अप्रैल 2026 शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है।

क्या मिलेगा इस कार्यशाला में?

इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को:

  • फोटोग्राफी की तकनीकी जानकारी
  • संस्कृति और विरासत को समझने का नया दृष्टिकोण
  • प्रैक्टिकल अनुभव

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Atal Residential School: गोरखपुर में अभिनव का चयन, क्षेत्र में खुशी की लहर

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के घुघली विकासखंड के रामपुर बलडीहा निवासी अभिनव कुमार गुप्ता ने अटल आवासीय विद्यालय गोरखपुर में चयनित होकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

मेहनत और लगन का मिला फल

अभिनव, संतोष कुमार गुप्ता के सुपुत्र हैं और शुरू से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा जेके मोंटेसरी स्कूल, घुघली से हुई, जहां उन्होंने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

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विद्यालय ने दी बधाई

विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय मिश्रा ने अभिनव की सफलता पर खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

प्रशासनिक सेवा में जाना है लक्ष्य

अभिनव ने बताया कि उनका सपना आगे चलकर प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की सेवा करना है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया।

क्षेत्र में खुशी का माहौल

अभिनव की इस उपलब्धि से उनके परिवार, विद्यालय और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल-डीजल महंगा, प्रीमियम पेट्रोल 11 रुपये तक बढ़ा

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, जिससे आम लोगों की जेब पर असर पड़ना तय है।

कितना महंगा हुआ ईंधन

तेल कंपनियों के अनुसार:

  • एक्सपी100 पेट्रोल: 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर (करीब ₹11 की बढ़ोतरी)
  • प्रीमियम डीजल: 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर (करीब ₹1.50 की बढ़ोतरी)

नई कीमतें सोमवार रात 12 बजे से लागू कर दी गई हैं।

क्यों बढ़े दाम?

तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की कमजोरी के चलते यह फैसला लिया गया है। वैश्विक बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का असर सीधे ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है।

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आम आदमी पर असर

इस बढ़ोतरी का असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा।

  • पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी
  • खाने-पीने और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं
  • किसानों की लागत भी बढ़ेगी

पहले भी बढ़ चुके हैं दाम

इससे पहले 20 मार्च को भी प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2 से 2.35 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। हालांकि, सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है।

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Iran-US Tension: 18 अमेरिकी कंपनियों को ईरान की धमकी, गूगल-एप्पल भी निशाने पर

वॉशिंगटन/तेहरान (राष्ट्र की परम्परा)। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अमेरिका की 18 बड़ी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है, जिस पर अमेरिका ने कड़ा जवाब दिया है।

टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी

IRGC ने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी नेताओं की हत्या जारी रहती है, तो वह अमेरिकी टेक कंपनियों पर हमला कर सकता है। इस सूची में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, मेटा, इंटेल और टेस्ला जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।

कर्मचारियों को भी चेतावनी

ईरान ने इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी चेतावनी देते हुए कहा है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए कार्यस्थल छोड़ दें। IRGC ने आरोप लगाया कि ये कंपनियां अमेरिकी और इजरायली एजेंसियों की मदद कर रही हैं।

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अमेरिका का कड़ा जवाब

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी सेना पहले भी ईरान के हमलों को रोकने में सक्षम रही है और आगे भी तैयार है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की प्रभावशीलता में कमी आई है।

कॉर्पोरेट जगत में बढ़ी चिंता

ईरान की इस धमकी के बाद वैश्विक कॉर्पोरेट सेक्टर में चिंता बढ़ गई है। इससे साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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विकसित भारत 2047 के सपने पर भिक्षावृत्ति का साया: क्या योजनाओं की विफलता है असली वजह?

विस्तृत होता भिक्षावृत्ति क्षेत्र- क़्या भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और जागरूकता की कमी के कारण सरकारी सहायता वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाती?

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत आज विकसित भारत 2047 के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। विश्व की चौथी बड़े सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के साथ आर्थिक वृद्धि, डिजिटल क्रांति, वैश्विक कूटनीति और बुनियादी ढांचे के विस्तार के बीच एक ऐसा सामाजिक यथार्थ भी मौजूद है,जो इस विकास यात्रा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है और वह है भिक्षावृत्ति की व्यापक समस्या। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन,बाजार, धार्मिक स्थलों और यहां तक कि कॉर्पोरेट ऑफिसों के बाहर भी महिलाओं, बुजुर्गों युवाओं और बच्चों को भीख मांगते देखना एक आम दृश्य बन चुका है।यह केवल एक सामाजिकसमस्या नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव,शासन की प्रभावशीलता और विकास के वास्तविक स्वरूप पर गहन प्रश्न उठाने वाला मुद्दा है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह बताना चाहता हूं कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब केंद्र और राज्य सरकारें महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और युवाओं के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं, तो फिर यह वर्ग भीख मांगने के लिए क्यों मजबूर है? क्या यह योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी का संकेत है? या फिर यह समस्या कहीं अधिक जटिल है,जिसमें आर्थिक असमानता सामाजिक बहिष्कार मानसिक स्वास्थ्य,शिक्षा की कमी और संगठित अपराध जैसे कारक भी शामिल हैं?यह स्पष्ट है कि भिक्षावृत्ति को केवल गरीबी से जोड़कर देखना एक सरलीकरण होगा; यह एक बहुआयामी समस्या है,जिसके समाधान के लिए बहुस्तरीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
साथियों बात अगर हम यदि हम गहराई से विश्लेषण कर इस मुद्दे को समझने की करें तो, भिक्षावृत्ति के पीछे तीन प्रमुख कारण उभरकर सामने आते हैं,मजबूरी, पेशा और आदत। मजबूरी के अंतर्गत वे लोग आते हैं, जो वास्तव में आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर हैं, जिनके पास कोई स्थायी आय का स्रोत नहीं है, और जो सामाजिक सुरक्षा तंत्र से वंचित रह गए हैं। पेशा के रूप में भिक्षावृत्ति उन संगठित गिरोहों से जुड़ी होती है, जो बच्चों और महिलाओं को जबरन भीख मंगवाते हैं। वहीं, आदत के रूप में भिक्षावृत्ति उन लोगों में देखी जाती है, जिन्होंने इसे एक आसान आय का साधन मान लिया है। इन तीनों श्रेणियों के लिए एक समान समाधान संभव नहीं है; प्रत्येक के लिए अलग-अलग नीति और रणनीति की सटीक आवश्यकता है।
साथियों बात अगर मेरे द्वारा की गई प्रस्तुत ग्राउंड रिपोर्टिंग को समझने की करें तो,महाराष्ट्र के अंतिम शोर पर बसी राइस सिटी गोंदिया में हर मंगलवार को एक विशेष दिन के रूप में भिक्षावृत्ति का मेला लगा रहता है यहां केवल लोकल ही नहीं है बाहर से भी महिलाओं बुजुर्गों बच्चों युवाओं के रूप में अनेक भिक्षुक भिक्षा मांगने आते हैं जो मैंने इस मंगलवार 31 मार्च 2026 को दिन भर ग्राउंड रिपोर्टिंग करके दिखा ज़ो यह दर्शाता है कि यह समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी बन चुकी है। जब समाज में कुछ दिन या अवसर विशेष रूप से भिक्षा दान के लिए निर्धारित हो जाते हैं,तो अनजाने में हम भिक्षावृत्ति को प्रोत्साहित भी कर देते हैं। यह स्थिति एक दुष्चक्र को जन्म देती है, जहां दान देने वाला स्वयं को पुण्य प्राप्त करने वाला मानता है और लेने वाला इसे एक स्थायी आय का स्रोत बना लेता है।
साथियों अब यदि हम सरकारी योजनाओं और वित्तीय प्रावधानों की बात करें, तो दिनांक 31 मार्च 2026 को सरकारी रेडियो व संचार के अनेक माध्यमों से यह समाचार बताए जा रहे थे कि 15वें वित्त आयोग द्वारा स्थानीय निकायों को दी जाने वाली राशि,जैसे कि अभी 2 दिन पूर्व लगभग 2 करोड़ 36 लाख 805 रुपए का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना,रोजगार के अवसर बढ़ाना और सामाजिक कल्याण को सुनिश्चित करना है। यह राशि पंचायतों और नगर निकायों के माध्यम से स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों पर खर्च की जाती है। लेकिन यहां मूल समस्या आवंटन नहीं, बल्कि कार्यान्वयन है। यदि यह धन सही तरीके से लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचे, तो भिक्षावृत्ति जैसी समस्याओं में निश्चित रूप से कमी आ सकती है। परंतु अक्सर देखा जाता है कि भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और जागरूकता की कमी के कारण यह सहायता वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाती। इसके अतिरिक्त, कई बार योजनाएं इतनी जटिल होती हैं कि आम व्यक्ति उनके लाभ तक पहुंच ही नहीं पाता। डिजिटल प्रक्रियाएं, दस्तावेजों की आवश्यकता और सरकारी दफ्तरों के चक्कर ये सब उन लोगों के लिए बड़ी बाधाएं बन जाती हैं, जो पहले से ही हाशिए पर हैं। परिणाम स्वरूप, वे आसान रास्ता चुनते हैं भीख मांगना। इस संदर्भ में यह भी आवश्यक है कि हम भिक्षावृत्ति को केवल कानून और व्यवस्था का मुद्दा न मानें, बल्कि इसे मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से भी देखें। यदि कोई बुजुर्ग सड़क पर भीख मांग रहा है, तो यह केवल उसकी व्यक्तिगत विफलता नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राज्य तीनों की सामूहिक विफलता है। यदि कोई बच्चा भीख मांग रहा है, तो यह सीधे-सीधे उसके शिक्षा और संरक्षण के अधिकार का उल्लंघन है।
साथियों बात अगर हम भिक्षावृत्ति को कानूनी एंगल से समाप्त करने को समझने की करें तो भीख मांगने की समस्या केवल कानून से नहीं,बल्कि सामाजिक-आर्थिक सुधार, पुनर्वास और मानवीय दृष्टिकोण से ही प्रभावी रूप से हल हो सकती है। फिर भी, मेरे द्वारा बनाए गए इन 10 कानूनी ढांचों क़ो यदि सरकार एक सख्त और समग्र ढांचा बनाना चाहे, तो निम्नलिखित 10 संभावित कानून (या विधेयक) बनाए जा सकते हैं: (1) भिक्षावृत्ति निषेध एवं पुनर्वास अधिनियम-यह कानून सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने पर रोक लगाएगा और साथ ही भिक्षुकों के लिए अनिवार्य पुनर्वास केंद्रों की व्यवस्था करेगा।(2) बाल भिक्षावृत्ति संरक्षण अधिनियम- इस कानून के तहत बच्चों से भीख मंगवाने वालों पर कठोर दंड (जेल + भारी जुर्माना) लगाया जाएगा तथा बच्चों को शिक्षा और संरक्षण दिया जाएगा।(3)वरिष्ठ नागरिक संरक्षण एवं पुनर्वास कानून- बुजुर्गों को भीख मांगने की स्थिति में पहुंचाने वाले परिजनों या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई और बुजुर्गों के लिए आश्रय व पेंशन की व्यवस्था। (4) महिला भिक्षावृत्ति उन्मूलन अधिनियम-महिलाओं को भीख मांगने के लिए मजबूर करने वाले गिरोहों या व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और महिलाओं के लिए सुरक्षित पुनर्वास योजनाएं।(5)संगठित भिक्षावृत्ति गिरोह नियंत्रण कानून-भीख मंगवाने वाले माफिया/गिरोहों के खिलाफ विशेष कानून, जिसमें मानव तस्करी और जबरन भिक्षावृत्ति को गंभीर अपराध माना जाए।(6) अनिवार्य कौशल विकास एवं रोजगार अधिनियम-पुनर्वास के दौरान भिक्षुकों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य बनाया जाए।(7) सार्वजनिक स्थानों पर भीख निषेध कानून-रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, धार्मिक स्थल, बाजार आदि में भीख मांगने परप्रतिबंध और उल्लंघन पर दंड। (8) सामाजिक सुरक्षा एवं न्यूनतम आय गारंटी कानून- गरीब और बेघर लोगों के लिए न्यूनतम आय, भोजन, आवास और स्वास्थ्य सुविधाओं की कानूनी गारंटी ताकि वे भीख मांगने के लिए मजबूर न हों।(9) दान विनियमन एवं पारदर्शिता कानून- सार्वजनिक स्थानों पर सीधे भीख देने पर रोक और दान को अधिकृत संस्थाओं/एनजीओ के माध्यम से देने की व्यवस्था। (10) पुनर्वास केंद्र नियमन एवं निगरानी अधिनियम- सभी पुनर्वास केंद्रों के लिए मानक तय करना, नियमित निरीक्षण और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना।यह 10 संभावित कानून इस समस्या के समाधान के लिए एक मजबूत ढांचा प्रस्तुत करते हैं। भिक्षावृत्ति निषेध एवं पुनर्वास अधिनियम, बाल भिक्षावृत्ति संरक्षण अधिनियम, महिला और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष कानून ये सभी आवश्यक कदम हैं। विशेष रूप से संगठित भिक्षावृत्ति गिरोहों पर कठोर कार्रवाई अत्यंत जरूरी है, क्योंकि यह केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि मानव तस्करी का भी एक रूप है।परंतु भीख मांगने पर केवल प्रतिबंध लगाना पर्याप्त नहीं होगा। यदि कानून के साथ,शिक्षा,रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और पुनर्वास को जोड़ा जाए, तभी यहसमस्या जड़ से खत्म हो सकती है अन्यथा सख्त कानून केवल समस्या को छिपाएंगे,खत्म नहीं करेंगे।हालांकि, केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। भारत में पहले से ही कई राज्यों में भिक्षावृत्ति विरोधी कानून मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभाव सीमित रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि कानून अक्सर दंड पर केंद्रित होते हैं,जबकि समस्या का समाधान पुनर्वास और “सशक्तिकरण” में निहित है। यदि किसी व्यक्ति को भीख मांगने के लिए गिरफ्तार कर लिया जाए, लेकिन उसके लिए कोई वैकल्पिक आजीविका का साधन न हो, तो वह रिहा होने के बाद फिर उसी स्थिति में लौट आएगा।इसलिए, आवश्यक है कि पुनर्वास केंद्रों को केवल आश्रय स्थल न बनाकर, उन्हें कौशल विकास और रोजगार सृजन के केंद्रों में परिवर्तित किया जाए। अनिवार्य कौशल विकास एवं रोजगार अधिनियम जैसे प्रावधान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि भिक्षुकों को प्रशिक्षण देकर उन्हें छोटे व्यवसाय, हस्तशिल्प, सेवा क्षेत्र या अन्य क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराया जाए, तो वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं।साथ ही, सामाजिक सुरक्षा एवं न्यूनतम आय गारंटी जैसे उपाय भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि प्रत्येक नागरिक को न्यूनतम जीवन स्तर की गारंटी मिले जिसमें भोजन, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा शामिल हो तो भिक्षावृत्ति की आवश्यकता स्वतः कम हो जाएगी। इसके अलावा, दान की संस्कृति को भी पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकता है। सीधे भीख देने के बजाय, लोगों को अधिकृत संस्थाओं और एनजीओ के माध्यम से सहायता प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।यहां मीडिया और समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अक्सर हम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अन्य देशों की आर्थिक स्थिति पर व्यंग्य करते हैं, लेकिन अपने देश की जमीनी हकीकत को नजर अंदाज कर देते हैं। यदि हमें वास्तव में विकसित भारत बनना है, तो हमें अपने भीतर की समस्याओं का ईमानदारी से सामना करना होगा।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि भिक्षावृत्ति की समस्या का समाधान एक समग्र दृष्टिकोण में निहित है जहां कानून, सामाजिक सुधार, आर्थिक सशक्तिकरण और मानवीय संवेदनाएं एक साथ काम करें। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज, परिवार और प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है। हमें यह समझना होगा कि भिक्षावृत्ति को समाप्त करना केवल “देश की छवि” सुधारने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों को गरिमापूर्ण जीवन देने का संकल्प है।यदि हम इस समस्या को गंभीरता से लेते हैं और समन्वित प्रयास करते हैं, तो न केवल भिक्षावृत्ति में कमी लाई जा सकती है, बल्कि हम वास्तव में एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकते हैं, जहां किसी को भी अपनी जीविका के लिए हाथ फैलाने की आवश्यकता न पड़े। यही सच्चे अर्थों में विकसित भारत 2047 का मार्ग है जहां विकास केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन में परिलक्षित हो।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

ED Transfer List: प्रवर्तन निदेशालय में बड़े तबादले

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। इस बदलाव को विभागीय रणनीति और कार्यक्षमता बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है।

किसे कहां मिली नई जिम्मेदारी

  • अवनीश तिवारी → गोवा (पनाजी) से चंडीगढ़
  • राकेश सुमन → कोच्चि से लखनऊ
  • मयंक पांडेय → गुवाहाटी से मुंबई
  • प्रभाकर प्रभात → रायपुर से रांची
  • अजय लुहाच → रांची से रायपुर
  • मधुर सिंह → मुख्यालय (HQ) से गुरुग्राम
  • राज कुमार → लखनऊ से मुख्यालय (HQ)

प्रशासनिक स्तर पर बदलाव जारी

सूत्रों के अनुसार, यह तबादले विभागीय कामकाज को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं। आने वाले समय में और भी अधिकारियों के ट्रांसफर होने की संभावना जताई जा रही है।

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PBKS vs GT: आखिरी ओवर में पंजाब की रोमांचक जीत, कूपर कोनोली बने हीरो

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PBKS vs GT: आईपीएल 2026 का चौथा मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जहां पंजाब किंग्स ने गुजरात टाइटंस को आखिरी ओवर में हराकर शानदार जीत दर्ज की।

कूपर कोनोली ने दिलाई जीत

कूपर कोनोली ने 44 गेंदों में 72 रनों की नाबाद पारी खेली, जिसमें 5 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। उनकी इस मैच विनिंग पारी की बदौलत पंजाब ने 163 रनों का लक्ष्य हासिल कर लिया।

मैच में आया बड़ा ट्विस्ट

एक समय पंजाब का स्कोर 110/2 था और जीत आसान लग रही थी, लेकिन गुजरात ने शानदार वापसी करते हुए 8 रन के भीतर 4 विकेट गिरा दिए। स्कोर 118/6 हो गया और मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया।

अंतिम ओवर में पलटी बाजी

144/7 के स्कोर पर पंजाब दबाव में दिख रहा था, लेकिन कोनोली ने एक छोर संभाले रखा। अंत में जेवियर बार्टलेट (11* रन) ने उनका साथ दिया और टीम को जीत दिला दी।

पंजाब की शानदार शुरुआत

प्रभसिमरन सिंह (37 रन) और कूपर कोनोली ने दूसरे विकेट के लिए 76 रनों की साझेदारी की, जिससे टीम को मजबूत शुरुआत मिली। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी 18 रन का योगदान दिया।

गुजरात की गेंदबाजी

गुजरात टाइटंस के लिए प्रसिद्ध कृष्णा ने 3 विकेट लेकर मैच में जान डाली। उनके अलावा राशिद खान, कगिसो रबाडा, वाशिंगटन सुंदर और अशोक शर्मा को 1-1 विकेट मिला।

स्थानांतरण पर एसपी इलामारन को भावभीनी विदाई, यादगार रहा कार्यकाल

मऊ (राष्ट्र की परम्परा) पुलिस लाइन में आयोजित एक भावुक एवं गरिमामयी समारोह में पुलिस अधीक्षक इलामारन को उनके जनपद एटा स्थानांतरण पर जनपदीय पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा भावभीनी विदाई दी गई।

इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों ने इलामारन के मऊ में रहे सराहनीय कार्यकाल, प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन की प्रशंसा करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। सभी ने उन्हें फूलमालाएं पहनाकर शुभकामनाएं दीं तथा मऊ पुलिस परिवार की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार प्रकट किया।

अपने संबोधन में पुलिस अधीक्षक इलामारन ने यहां बिताए समय को अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि इस जनपद में सेवा करना उनके लिए गौरव की बात रही। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग, समर्पण और आत्मीयता के बिना कोई भी लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं था। उन्होंने अधिकारियों व कर्मचारियों के निरंतर प्रयास, परिश्रम और प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

उन्होंने विशेष रूप से त्योहारों एवं संवेदनशील अवसरों पर पुलिस विभाग की सतर्कता, अनुशासन और सौहार्दपूर्ण सहयोग की प्रशंसा करते हुए कहा कि हर चुनौती का सामना सभी ने मिलकर सफलतापूर्वक किया। अंत में उन्होंने सभी को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मऊ जनपद उनके हृदय में सदैव विशेष स्थान बनाए रखेगा।

इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार, सभी क्षेत्राधिकारी तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

दिव्य हॉस्पिटल की लापरवाही से नवजात की मौत, इंसानियत शर्मसार

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के मेंहदावल क्षेत्र स्थित टड़वरिया चौराहे के पास एक निजी अस्पताल में कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। दिव्य देव अस्पताल में इलाज के दौरान नवजात की मौत हो जाने से परिजनों में कोहराम मच गया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ आक्रोश फूट पड़ा।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती मरीज के इलाज और देखभाल में लगातार लापरवाही बरती जा रही थी। स्थिति बिगड़ने के बावजूद समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया, जिससे नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है।
इसी बीच पीड़िता अनुराधा पत्नी बुद्धिराम निवासी ग्राम भटवा, थाना मेंहदावल ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इलाज में लापरवाही की शिकायत की तो अस्पताल के कर्मचारी और डॉक्टर अर्चना त्रिपाठी ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। इस घटना में उन्हें अंदरूनी चोटें आईं और उनका सोने का मंगलसूत्र भी गायब हो गया।
घटना मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे की बताई जा रही है। पीड़िता ने थाना मेंहदावल में तहरीर देकर मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई के अभाव में ऐसे अस्पतालों के हौसले बुलंद हैं। लोगों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

बसंतकालीन गन्ना बुवाई लक्ष्य हर हाल में पूरा करें: वी. के. शुक्ला

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश में गन्ना उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से बसंतकालीन गन्ना बुवाई की प्रगति की समीक्षा परिक्षेत्र गोरखपुर के नोडल अधिकारी एवं अपर गन्ना आयुक्त (विकास) वी. के. शुक्ला द्वारा चीनी मिल पिपराइच के सभागार में की गई। बैठक में गन्ना बुवाई के शत-प्रतिशत लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने तथा रोग एवं कीटों के प्रति संवेदनशील प्रजातियों के विस्थापन के लिए व्यापक अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
समीक्षा के दौरान वर्ष 2025-26 की बसंतकालीन बुवाई तथा वर्ष 2026-27 की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा हुई। माइक्रोप्लान की प्रगति, बीज आरक्षण एवं वितरण, अभिजनक बीज का उठान, क्षेत्रीय भ्रमण, गोष्ठियों की स्थिति, जनपदवार लक्ष्य और उनकी पूर्ति, साथ ही मिश्रित एवं रिजेक्ट प्लॉट की पहचान जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की गहन समीक्षा की गई।
अपर गन्ना आयुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर गन्ना खेती को नई दिशा दी जा रही है। उन्नत किस्मों के बीज, ड्रिप सिंचाई, मृदा परीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन और कृषि यंत्रीकरण के माध्यम से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। किसानों को नई तकनीकों के प्रति जागरूक कर टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
उन्होंने निर्देश दिया कि गन्ना बीज परिवर्तन कार्यक्रम की प्रतिदिन फील्ड स्तर पर मॉनिटरिंग की जाए। सभी चीनी मिलों के प्रतिनिधियों को उन्नत प्रजातियों के विस्तार, गुणवत्तायुक्त बीज की समयबद्ध उपलब्धता और वैज्ञानिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में उप गन्ना आयुक्त गोरखपुर यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी गोरखपुर जगदीश चन्द्र यादव, महराजगंज के ओम प्रकाश यादव, कुशीनगर की हुदा सिद्दीकी सहित चीनी मिल पिपराइच के प्रधान प्रबंधक गन्ना नवनीत शुक्ला, मुख्य गन्ना प्रबंधक, गन्ना विकास निरीक्षक, गन्ना समिति सचिव एवं पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त सिसवा बाजार और गड़ौरा क्षेत्र की भी समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत बुवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इससे पूर्व बस्ती जनपद के दौरे में मुण्डेरवा, बभनान और रुधौली चीनी मिलों के माइक्रोप्लान की समीक्षा की गई और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार बुवाई पूर्ण करने पर जोर दिया गया।
निरीक्षण के दौरान ग्राम कुसम्हा में प्रगतिशील कृषकों के खेतों का भी जायजा लिया गया। ट्रेंच विधि से बोई गई गन्ना फसल का निरीक्षण करते हुए सिंचाई, निराई-गुड़ाई तथा प्रजाति परिवर्तन के संबंध में आवश्यक सुझाव दिए गए।