आठ माह से मानदेय बकाया, ग्राम रोजगार सेवकों का फूटा गुस्सा—हड़ताल से ठप पड़े विकास कार्य, उग्र आंदोलन की चेतावनी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में ग्राम रोजगार सेवकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहे इन कर्मियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। पिछले आठ महीनों से मानदेय और ईपीएफ भुगतान लंबित होने के कारण उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। नाराज रोजगार सेवकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
मंगलवार को उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष ब्रह्मानंद के नेतृत्व में जिले के सभी 12 ब्लॉकों के रोजगार सेवक एकजुट होकर उपायुक्त श्रम रोजगार गौरवेंद्र सिंह से मिले। इस दौरान उन्होंने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखते हुए तत्काल समाधान की मांग की। कर्मियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
ग्राम रोजगार सेवकों ने बताया कि आठ महीने से मानदेय न मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चुनौती बन चुका है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें गहरी नाराजगी है।
ईपीएफ कटौती को लेकर भी कर्मियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके वेतन से नियमित रूप से ईपीएफ की कटौती की जाती है, लेकिन यह राशि उनके खातों में जमा नहीं हो रही है। इससे उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। रोजगार सेवकों ने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताते हुए तत्काल जांच और भुगतान की मांग की है।
वहीं, जिला प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए डीसी मनरेगा ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार प्राथमिकता के आधार पर पहले मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान कराया जा रहा है। इसके बाद ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ईपीएफ से जुड़े मामलों की जांच के लिए शासन स्तर पर तीन उपायुक्त श्रम की एक लीगल कमेटी गठित की गई है, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच रोजगार सेवकों ने मुख्य विकास अधिकारी को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया, लेकिन उनके अनुपस्थित रहने के कारण ज्ञापन कार्यालय में ही जमा कर दिया गया। ज्ञापन में मानदेय भुगतान, ईपीएफ जमा, सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण सहित कई महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है।
हड़ताल का असर अब मनरेगा से जुड़े कार्यों पर साफ दिखाई देने लगा है। कई विकास योजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर महसूस किया जा रहा है। इसके बावजूद रोजगार सेवकों का कहना है कि अब वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
कर्मियों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और घेराव करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
इस मौके पर जिला महासचिव इन्द्र मणि विश्वकर्मा, इन्द्र विजय यादव, सर्वेश, अमित पटेल, राम आशीष, रमेश, प्रवीण मणि, बंधु मद्धेशिया, वीरेंद्र गुप्ता, ए.के. चन्द्रा, राजेश, धर्मेन्द्र, मक्खन, सत्य नारायण प्रजापति सहित बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक मौजूद रहे।
