Tuesday, June 16, 2026
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देवरिया: जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने स्कूलों का किया औचक निरीक्षण, बच्चों से पूछे सवाल

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया के जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने शनिवार सुबह प्राथमिक विद्यालय दानोपुर और उच्च प्राथमिक विद्यालय परासिया मिश्र का औचक निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पठन-पाठन, शिक्षण गुणवत्ता और विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर की समीक्षा की।

जिलाधिकारी ने विद्यालय पहुंचकर बच्चों से सीधे संवाद किया और अंग्रेजी, गणित सहित विभिन्न विषयों से जुड़े सवाल पूछकर उनकी शैक्षणिक क्षमता को परखा। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उनमें मेहनत और अनुशासन की भावना भी विकसित की जाए।

प्राथमिक विद्यालय दानोपुर में डीएम ने कक्षा दो के विद्यार्थियों से अंग्रेजी पढ़वाई, जबकि कक्षा पांच के छात्रों से ब्लैकबोर्ड पर गणित के सवाल हल कराए। बच्चों द्वारा सही उत्तर दिए जाने पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया और शिक्षकों की सराहना की।

इसके बाद जिलाधिकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय परासिया मिश्र पहुंचे, जहां उन्होंने नामांकन की स्थिति और शिक्षण व्यवस्था की जानकारी ली। यहां कक्षा सात के विद्यार्थियों से गणित और अंग्रेजी विषय से संबंधित प्रश्न पूछे गए। छात्रों के संतोषजनक प्रदर्शन पर उन्होंने प्रसन्नता जताई और शिक्षकों को इसी समर्पण के साथ अध्यापन कार्य जारी रखने के लिए प्रेरित किया।

निरीक्षण के दौरान प्राथमिक विद्यालय दानोपुर में एक ओर बाउंड्रीवाल नहीं होने की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी से फोन पर बात कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इस दौरान विद्यालयों के शिक्षक और शिक्षामित्र भी मौजूद रहे। प्रशासन की इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जनगणना 2027 के तहत जनप्रतिनिधियों की स्वगणना प्रक्रिया पूर्ण

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0)/जिला जनगणना अधिकारी जयप्रकाश द्वारा भारत की जनगणना-2027 के अंतर्गत जनप्रतिनिधियों की स्वगणना प्रक्रिया पूर्ण कराई गई। नामित अधिकारी के रूप में उन्होंने सांसद लक्ष्मीकांत पप्पू निषाद के बेलहर कला स्थित आवास पर पहुंचकर उनकी अनुपस्थिति में उनके भाई आनन्द कुमार की स्वगणना प्रक्रिया पूरी कराई।
इसी क्रम में तहसीलदार खलीलाबाद आनन्द ओझा द्वारा विधान परिषद सदस्य संतोष सिंह, तहसीलदार मेंहदावल अल्पिका वर्मा द्वारा पूर्व विधायक राकेश सिंह बघेल एवं प्रेमनरायन तथा नायब तहसीलदार खलीलाबाद द्वारा पूर्व विधायक भगवानदास के आवास पर जाकर स्वगणना की प्रक्रिया पूर्ण कराई गई।
जिलाधिकारी श्री कुमार ने जनपदवासियों से अपील की है कि 7 मई से 21 मई 2026 तक चल रही स्वगणना अवधि में प्रत्येक व्यक्ति ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी स्वगणना स्वयं कर सकता है। प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद प्राप्त SEID को सुरक्षित रखें। 22 मई से 20 जून 2026 के बीच प्रगणक के पहुंचने पर यह एसईआईडी उपलब्ध कराने से संबंधित परिवार की जनगणना प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी।

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता व शोध सुदृढ़ीकरण पर मंथन

डॉ. शशि बाला सिंह ने किया शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों का मूल्यांकन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन मुख्यालय, नई दिल्ली की विशिष्ट वैज्ञानिक एवं पूर्व महानिदेशक (जीवन विज्ञान) तथा राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद की पूर्व निदेशक डॉ. शशि बाला सिंह ने 7 एवं 8 मई 2026 को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर का शैक्षणिक एवं शोध संबंधी रणनीतिक विचार-विमर्श हेतु भ्रमण किया।
डॉ. शशि बाला सिंह के संस्थापक-निदेशक कार्यकाल में NIPER हैदराबाद ने शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) 2023 में फार्मेसी श्रेणी में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उनके व्यापक अनुभव को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के अधिष्ठाताओं, प्राचार्यों एवं संकाय सदस्यों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध पारिस्थितिकी तंत्र, नवाचार संस्कृति तथा संस्थागत विकास को सुदृढ़ करने के लिए आमंत्रित किया गया।
7 मई को डॉ. सिंह ने कुलपति डॉ. सुरिन्दर सिंह के साथ प्रारंभिक बैठक की तथा विश्वविद्यालय परिसर के शैक्षणिक एवं अधोसंरचनात्मक संसाधनों का निरीक्षण किया। उन्होंने शैक्षणिक भवनों, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, चिकित्सालय सुविधाओं एवं पंचकर्म केंद्र का अवलोकन किया।
8 मई को कुलपति डॉ. सुरिन्दर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ. शशि बाला सिंह विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल हुईं। बैठक में विभिन्न संकायों की प्रगति, गतिविधियों और संभावनाओं की समीक्षा की गई। नर्सिंग एवं पैरामेडिकल विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, आयुर्वेद, स्वास्थ्य एवं जीवन विज्ञान, फार्मास्यूटिकल साइंसेज़, कृषि तथा वाणिज्य संकायों के प्रतिनिधियों ने अपने प्रतिवेदन प्रस्तुत किए और भावी योजनाओं पर चर्चा की।
विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, अधोसंरचना एवं सुविधाओं की सराहना करते हुए डॉ. सिंह ने शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए रणनीतिक पहल, अंतर्विषयी सहयोग, उद्योग-अकादमिक सहभागिता तथा वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करने के सुझाव दिए।
इस अवसर पर डॉ. वर्षा मोकासी, डॉ. डी.एस. अजैथा, रोहित कुमार श्रीवास्तव, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. गिरिधर वेदांतम, डॉ. शशि कांत सिंह, डॉ. विमल कुमार दुबे, डॉ. तरुण श्याम, डॉ. प्रशांत एस., डॉ. हरि ओम शरण, डॉ. रघु राम आचार सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

माँ तुझे प्रणाममातृ दिवस पर विशेष -हरवंश डांगे

“मां का सम्मान उसकी ममता की पहचान है मातृ दिवस पर दिल यह कहे मां ईश्वर के समान है”
मातृ दिवस,मां के अपार प्रेम ममता भावना और त्याग को सम्मान देने का दिन है मां जन्म देती है दर्द सहकर खुद को मौत के मुंह में डालकर बच्चे को इस दुनिया में लाती है उसका पालन पोषण करती है मां वात्सल्य की मूर्ति है बिना शर्त प्यार करती है। जो अपने बच्चों के लिए बिना स्वार्थ सब कुछ न्योछावर कर देती है। बच्चा बीमार हो तो अपनी रातों की नींद का त्याग कर जागती है। मां एक ऐसा शब्द है जो दिल को छू जाता है मां शब्द ऐसा जादू है जो मन में समा जाता है मां अपने मुस्कान प्यार लोरी से बच्चे के हर दुख को दूर करती है। मांगने पर जहां सारी मन्नत पूरी होती है मां के पैरों में ही तो जन्नत होती है मां का महत्व जीवन में अनमोल है क्योंकि वह पहली गुरु है सबसे अच्छी दोस्त है एक रक्षक होती है मां पूरे घर की नींव होती है परिवार एवं समाज की रीढ़ की हड्डी होती है।मां सबसे पहले उठती है पति को नाश्ता बच्चों को टिफिन सास ससुर की दवाई कपड़े धोना बच्चों को स्कूल छोड़ने एवं लेने जाना रात को सबसे बाद में सोना आजकल मां घर और नौकरी दोनों संभालती है क्या कभी बच्चों ने मां के चेहरे की उदासी देखी? क्या कभी बच्चों ने पूछा मां खाना खाया कि नहीं?
माँ अपने बच्चों परिवार के लिये अपनी इच्छाएं, स्वास्थ्य को अनदेखा करती है।बच्चों के पूरे काम खुद करती है जिससे बच्चे अपने दायित्वों से दूर हो जाते है। बाद में जब माँ तकलीफ मे होती है बच्चे उसकी परवाह नही करते। बड़े होकर बच्चे अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाते है। इसलिये मैं पूजनीय सम्माननीय माताओं से कहना चाहूंगी कि Health is Wealth बचपन में आपके जो शौक रहे हो उसे कभी मत छोड़िए छोटे-मोटे कामों में बच्चों की सहायता लीजिए।उनको आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बनाये। बच्चों के साथ समय बिताए।उनको अपने साथ काम कराए। जिससे वो आपके एक अच्छे दोस्त बनेंगे।और भविष्य के एक अच्छे जिम्मेदार इंसान भी।
“उम्र बढ़ने की बजाय घट जाती तो क्या बात थी
जिंदगी मां की गोद में कट जाती तो क्या बात थी।”
सरकार ने मातायों के लिए अनेक कदम उठाए हैं मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह अर्थात 6:30 महीने का दिया गया है मातृ वंदना योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को प्रोत्साहन राशि दी गई है मां महिम भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने कहा है “हर मां में नेतृत्व एवं मातृत्व दोनों विशेषताएं होती हैं मातृत्व एवं नेतृत्व दोनों एक ही ताल में चलती हैं क्योंकि नेतृत्व मां की सहृदय प्रवृत्ति है” मां वह है जो हर किसी का स्थान ले सकती है लेकिन मां का स्थान कोई नहीं ले सकता मां का नाम प्रथम लिया जाता है क्योंकि वह जन्मदातरी है पालन हारी है पूजनीय है, सहनशीलता की मूर्ति है।यदि संसार में मां ना होती तो मनुष्य नाम की कोई चीज नहीं होती इसलिये वाल्मीकि रामायण में भी महाऋषि बाल्मीकि जी के भी माँ को स्वर्ग से महान बताया है “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”
“माँ शक्ति माँ काशी है माँ कवच है माँ चारों धाम है माँ चिंता है याद है जिंदगी का सार है।”

शिक्षा जगत में क्रांति ला रहा ‘टीचर्स ऑफ बिहार

प्रदेश की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी बनी मिसाल

पटना(राष्ट्र की परम्परा)
बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव और शिक्षकों के कौशल विकास को लेकर ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ एक सशक्त मंच के रूप में उभरा है। वर्तमान में यह प्रदेश की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी बन चुकी है, जहाँ हजारों शिक्षक तकनीक और नवाचार के माध्यम से एक-दूसरे से सीख रहे हैं।
तकनीक से सुदृढ़ हो रही शिक्षा संस्थापक व तकनीकी टीम
समूह के संस्थापक शिव कुमार एवं टेक्निकल टीम लीडर ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने संयुक्त रूप से कहा कि, “हमारा मुख्य उद्देश्य बिहार के शिक्षकों को डिजिटल युग की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ केवल एक समूह नहीं, बल्कि एक विजन है जहाँ हर शिक्षक को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और नई शिक्षण विधियों को सीखने का समान अवसर मिल रहा है। हम तकनीक के माध्यम से शिक्षा को अंतिम पायदान पर खड़े छात्र तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

मीडिया और सूचना का सशक्त माध्यम

संगठन की पहुँच और इसके कार्यों को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार एवं प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने कहा, “आज के समय में सूचनाओं का सही और त्वरित आदान-प्रदान बहुत आवश्यक है। ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ न केवल शिक्षकों की समस्याओं को रचनात्मक मंच प्रदान करता है, बल्कि बिहार के सरकारी स्कूलों में हो रहे बेहतरीन कार्यों को दुनिया के सामने ‘सकारात्मक बिहार’ के रूप में पेश भी कर रहा है। हमारी टीम निरंतर धरातल पर शिक्षकों की आवाज़ बन रही है।”

आयोजन और नवाचार की नई राह

संगठन द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर प्रकाश डालते हुए इवेंट लीडर केशव कुमार ने बताया कि, “हम समय-समय पर राज्य स्तरीय वेबिनार, कार्यशालाएं और नवाचारी गतिविधियों का आयोजन करते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य शिक्षकों के भीतर छिपे नेतृत्व गुणों को उभारना और उन्हें शिक्षण के आधुनिक तौर-तरीकों से परिचित कराना है। आने वाले दिनों में हम कई और बड़े शैक्षणिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।”

‘टीचर्स ऑफ बिहार’ की मुख्य विशेषताएं:

प्रोफेशनल नेटवर्किंग: बिहार के 38 जिलों के शिक्षकों का एक मंच पर जुड़ाव।

स्किल डेवलपमेंट: आईसीटी और टीएलएम निर्माण में शिक्षकों को दक्ष बनाना

सकारात्मक पत्रकारिता: स्कूलों की सफलता की कहानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार।

डिजिटल लाइब्रेरी: शिक्षकों के लिए ई-कंटेंट और शिक्षण सामग्री की उपलब्धता।

आज ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ अपनी सक्रियता और रचनात्मकता के कारण न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। इस मंच ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षक ठान लें, तो सरकारी विद्यालयों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती है।

कामर्शियल गैैस सिलेंडर के दाम बढ़ाये जाने के विरोध में सपा ने किया प्रदर्शन

गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि से महंगाई बड़ेगी-विजय रावत

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) शुक्रवार को नगर में स्थित काली मंदिर के पास सपा कार्यकर्ताओं व जनता ने कामर्सियल गैस सिलेंडर मुल्य बेतहासा बढ़ाए जाने के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए इस दौरान सपा नेता विजय रावत ने कहा की उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार में महंगाई चरम पर है, एक ओर जहां पुरे प्रदेश मे गैस सिलेंडर की क़िल्लत का सामना जनता कर रही हैं वहीं कामर्सियल गैस सिलेंडर के दामों को बढ़ाकर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार व्पारियो व दुकानदारों की रोज़ी रोटी छीनने का काम कर रही हैं। पिछले दस सालों में जिस तरह से महंगाई व गैस सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी हुई है उससे यह साबित हो रहा हैं की यह सरकार महंगाई की जननी हैं और आम जनता व ग़रीब दुकानदारों से कुछ लेना देना नहीं हैं। जिस तरह से भाजपा सरकार में गैस सिलेंडर की दिक़्क़त का सामना करना पड़ रहा हैं इससे जनता अभी उबर ही नहीं पाई थी तब तक कामर्सियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए, कामर्सियल गैस सिलेंडर के दामों बढ़ने से महंगाई भी बढ़ेगी इस लिए हम आप सभी प्रदेश की जनता व यहाँ उपस्थित लोगों से अपील करते हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में इस भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का काम करें और नयी सरकार बनाएं जो महंगाई कम कर सके। आप सभी लोगों को याद होगा की जब भाजपा की सरकार नहीं थी तब यही गैस सिलेंडर का दाम चार सौ रुपये थे और भाजपा की सरकार पुरे प्रदेश में आन्दोलन करती थी की अगर हमारी सरकार बनी तो हम महंगाई कम करेंगे और जनता को महंगाई के नाम पर गुमराह कर सरकार बना ली और जब भाजपा की सरकार बन गई तो जो गैस सिलेंडर अन्य सरकारों में चार सौ रुपये में मिलता था आज एक हज़ार में मिल रहा है। इस लिए आप सभी से अपील है आने वाले विधानसभा चुनाव में महंगाई की जननी और जनता को गुमराह कर सरकार बनाने वाली भाजपा सरकार हटाने का काम करें। इस दौरान मुख्य रूप से अमित प्रधान, विकास कुमार, राहुल सिंह, संजय तिवारी, राजू मिश्रा, अजय गुप्ता, विमलेश तिवारी, राकेश सिंह, संजय चौहान, अखिलेश कुमार, महावीर प्रसाद, आदित्य यादव, विरेंद्र कुमार, अखिलेश मिश्रा इत्यादि लोग मौजूद थे।

युद्धग्रस्त अरब देशों के पुनर्निर्माण में जुटेंगे यूपी के कुशल हाथ

खाड़ी देशों में रोजगार के नए अवसर, पूर्वांचल के युवाओं में बढ़ा उत्साह

घनश्याम तिवारी

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।

युद्ध और संघर्ष से प्रभावित अरब देशों में अब पुनर्निर्माण का कार्य तेजी से शुरू होने जा रहा है। खाड़ी देशों में बड़े स्तर पर भवन, सड़क, आवासीय परियोजनाओं तथा औद्योगिक ढांचे को दोबारा विकसित करने की तैयारी चल रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए विदेश में रोजगार के नए अवसर खुल गए हैं। विदेश मंत्रालय और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) के सहयोग से प्रदेश के कुशल एवं अर्धकुशल श्रमिकों को खाड़ी देशों में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सरकारी स्तर पर रोजगार सेवायोजन पोर्टल के माध्यम से अभ्यर्थियों का पंजीकरण कराया जा रहा है। इसमें मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, वेल्डिंग, प्लंबर, टेक्निशियन, मशीन ऑपरेटर, केटरिंग फोरमैन और निर्माण कार्य से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार चयनित युवाओं की तैनाती औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अलग-अलग देशों में की जाएगी।बताया जा रहा है कि इन नौकरियों में प्रतिमाह 45 हजार रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक वेतन मिलने की संभावना है। इसके साथ ही रहने, खाने और अन्य सुविधाएं भी कई कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार की ओर से दस्तावेज सत्यापन और चयन प्रक्रिया को भी पारदर्शी एवं निःशुल्क रखा गया है, जिससे युवाओं को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।पूर्वांचल, खासकर बलिया, गाजीपुर, मऊ और आजमगढ़ के युवाओं में विदेश रोजगार को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। पहले भी बड़ी संख्या में पूर्वांचल के युवा खाड़ी देशों में काम कर चुके हैं। अब युद्ध प्रभावित देशों में पुनर्निर्माण कार्य शुरू होने से रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़े हैं।जिला रोजगार कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं का चयन उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर किया जाएगा। चयन प्रक्रिया लखनऊ में आयोजित होने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि विदेशों में रोजगार पाने वाले युवाओं के लिए यह सुनहरा अवसर साबित हो सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि विदेशी मुद्रा के रूप में देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

मार्डन सिटी मांटेसरी कॉलेज में प्रतिभा सम्मान समारोह बना प्रेरणा का केंद्र

देवरिया में प्रतिभा का सम्मान: मार्डन सिटी मांटेसरी इंटरमीडिएट कॉलेज में मेधावियों को मिला सम्मान


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करने के उद्देश्य से शुक्रवार 8 मई 2026 को मार्डन सिटी मांटेसरी इंटरमीडिएट कॉलेज, देवरिया में प्रतिभा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देवरिया सांसद शशांक मणि त्रिपाठी थे। हालांकि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण वे देवरिया से बाहर रहे, लेकिन उन्होंने अपने प्रतिनिधि केशव शर्मा के मोबाइल फोन के माध्यम से विद्यालय में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। सांसद ने विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा ही सफलता का सबसे मजबूत आधार है।
विद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में मेधावी छात्रों को प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान देकर उनका उत्साह बढ़ाया गया। कक्षा 12 के जिन छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया उनमें शिवांगी वर्मा, अनन्या बर्नवाल, दिव्या गुप्ता, साक्षी गुप्ता, शिवांगी दुबे एवं सक्षम पाण्डेय शामिल रहे।
इसी प्रकार कक्षा 10 के अनुराग गुप्ता, आदर्श बरनवाल, रागनी गुप्ता, अंकिता यादव, शान सिंह, अक्षत पाण्डेय, जावेद अंसारी, संस्कृति तिवारी तथा प्रतीक राय को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
विद्यालय प्रबंधन ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों में प्रतिस्पर्धा की सकारात्मक भावना विकसित करते हैं और उन्हें भविष्य में बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं। समारोह के दौरान अभिभावकों और शिक्षकों में भी उत्साह का माहौल देखने को मिला।

गोरखपुर: महिला हत्या मामले में एक और आरोपी गिरफ्तार, धारदार हथियार से किया गया था हमला

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरखपुर जिले के गगहा थाना क्षेत्र में आपसी विवाद के दौरान महिला की हत्या के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की इस कार्रवाई को मामले में अहम सफलता माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को आपसी कहासुनी के दौरान पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति ने वादी की भाभी पर धारदार हथियार से हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद परिजनों की तहरीर पर थाना गगहा में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपी गब्बर उर्फ हेमन्त पुत्र स्वर्गीय हरिश्चन्द्र, निवासी हाटा बाजार थाना गगहा को गिरफ्तार कर लिया है।

इससे पहले 4 अप्रैल 2026 को मामले के एक अन्य आरोपी सीताराम को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा जा चुका है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही जनपद में अपराध और अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

गोरखपुर: गैंगस्टर एक्ट में वांछित अभियुक्त संदीप यादव गिरफ्तार, धोखाधड़ी समेत कई मामलों में था आरोपी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरखपुर जिले के बड़हलगंज थाना क्षेत्र में गैंगस्टर एक्ट के तहत वांछित एक अभियुक्त को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। संगठित अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस की इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, थाना बड़हलगंज में दर्ज मुकदमा संख्या 725/2025 में गैंगस्टर एक्ट की धाराओं में वांछित अभियुक्त संदीप यादव पुत्र राजेन्द्र यादव, निवासी पकड़ी तिवारी थाना मदनपुर जनपद देवरिया को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था।

पुलिस जांच में सामने आया है कि अभियुक्त का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत तथा आपराधिक साजिश से जुड़े कई मामले पहले से दर्ज हैं। वर्ष 2024 में भी थाना बड़हलगंज में उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420, 506 और 120बी के तहत मुकदमे दर्ज किए गए थे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही जिले में संगठित अपराधों और अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार,अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥

✍️ डॉ. प्रियंका सौरभ

सच की कीमत लग गई, बोली लगे बाज़ार,
ख़बरों के भी दाम हैं, बिकता हर विचार।
इश्तहारों के तले, दबे जन सरोकार—
छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार॥

मालिक की मर्ज़ी चले, लिखे वह समाचार,
जो दिखना है वह दिखे, बाकी सब बेकार।
शीर्षक में तूफ़ान है, भीतर खोखला सार—
छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार॥

चंद दलालों के हुए, अब सारे अख़बार,
सच की कश्ती डूबती, बीच भँवर मझधार॥
झूठों के उत्सव में, सच होता लाचार—
छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार॥

सत्ता की छाया तले, झुकती हर दरकार,
कलमों की नीलामियां, बिके हुए अख़बार।
लोकतंत्र के नाम पर, होता अब व्यापार—
छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार॥

जागो अब पाठक सभी, खोलो अपनी आँख,
सच को पहचानो स्वयं, तोड़े झूठी शाख।
जनमत जागेगा तभी, बदलेगा व्यवहार—
छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार॥

गुजरात में ट्रेन से गिरकर गोरखपुर के युवक की मौत, इकलौते बेटे को खोकर परिवार सदमे में

कौड़ीराम/गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरखपुर जिले के गगहा थाना क्षेत्र अंतर्गत गजपुर गांव निवासी एक युवक की गुजरात में चलती ट्रेन से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

मृतक की पहचान अभिषेक त्रिपाठी (25) पुत्र संतोष त्रिपाठी के रूप में हुई है। वह गुजरात की एक निजी कंपनी में प्रोसेस इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। परिजनों के अनुसार, 2 मई को अभिषेक भरूच स्टेशन से ट्रेन द्वारा यात्रा कर रहा था। इसी दौरान पालेज स्टेशन के पास चलती ट्रेन से गिरने से उसकी मौत हो गई।

परिवार लगातार उसके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश करता रहा, लेकिन दुर्घटना में मोबाइल क्षतिग्रस्त होने के कारण फोन बंद बता रहा था। बाद में एक पुलिसकर्मी ने मोबाइल से सिम निकालकर अपने फोन में लगाया, तभी मृतक के पिता संतोष त्रिपाठी का कॉल आया और हादसे की जानकारी परिवार को मिली।

ये भी पढ़े – मरीजों की सुविधाओं पर डीएम गंभीर, देवरिया मेडिकल कॉलेज का किया औचक निरीक्षण

सूचना मिलने के बाद पिता गुजरात पहुंचे, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। जब युवक का शव गांव पहुंचा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

बुधवार को बड़हलगंज स्थित मुक्ति पथ पर युवक का अंतिम संस्कार किया गया, जहां पिता ने नम आंखों से अपने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार शामिल हुए।

परिजनों ने बताया कि अभिषेक अपनी मां से रोज दिन में दो बार फोन पर बात करता था। घटना वाले दिन उसका फोन न आने पर मां को अनहोनी की आशंका होने लगी थी। बताया जा रहा है कि 18 अप्रैल को ही उसकी सगाई हुई थी और अगले वर्ष फरवरी में शादी तय थी।
युवक की अचानक मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में गमगीन माहौल बना हुआ है।

मरीजों की सुविधाओं पर डीएम गंभीर, देवरिया मेडिकल कॉलेज का किया औचक निरीक्षण

देवरिया मेडिकल कॉलेज में डीएम का औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं की परखी हकीकत; बिना एप्रन मिले दो डॉक्टरों को फटकार


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को जिलाधिकारी ने औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों का दौरा किया और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, साफ-सफाई, दवा वितरण, डॉक्टरों की उपस्थिति तथा अस्पताल की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की।


निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने वार्डों, ओपीडी, इमरजेंसी तथा अन्य महत्वपूर्ण विभागों में पहुंचकर मरीजों और तीमारदारों से बातचीत भी की। उन्होंने अस्पताल में उपचार व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता और कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। डीएम ने स्पष्ट कहा कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
औचक निरीक्षण के दौरान ड्यूटी पर मौजूद दो डॉक्टर बिना एप्रन के कार्य करते मिले। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए दोनों डॉक्टरों को फटकार लगाई और भविष्य में निर्धारित ड्रेस कोड तथा अनुशासन का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि मेडिकल संस्थानों में अनुशासन और पेशेवर व्यवहार मरीजों के भरोसे से जुड़ा विषय है, इसलिए सभी चिकित्सक और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करें।
निरीक्षण के दौरान मेडिकल कॉलेज प्रशासन को अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार, मरीजों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण तथा साफ-सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए। डीएम के औचक निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में पूरे दिन हलचल बनी रही।

करोड़ों खर्च, फिर भी सूखे नल; कोपागंज में जल योजना बनी मजाक

उद्घाटन हुआ, पानी नहीं आया; दो साल से कर रहे इंतजार दस हजार लोग

धीरेन्द्र त्रिपाठी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)जनपद की कोपागंज नगर पंचायत में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई पेयजल योजना लोगों के लिए राहत की जगह परेशानी का कारण बन गई है। नगर पंचायत क्षेत्र में शामिल छह मुहल्लों और आसपास की करीब दस हजार आबादी आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए जूझ रही है। स्थिति यह है कि नलकूप बन गए, पाइपलाइन बिछ गई, उद्घाटन भी हो गया, लेकिन दो साल बाद भी घरों तक पानी नहीं पहुंच सका।
विस्तारीकरण योजना के तहत वर्ष 2019 में कोपा कोहना, हिकमा, काछीकला, रजपुरा, भदसा मानोपुर और लाडनपुर को नगर पंचायत में शामिल किया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि शहरी सुविधाएं मिलेंगी और पेयजल संकट दूर होगा, लेकिन हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
करीब पांच वर्ष बाद नगर पंचायत प्रशासन ने पेयजल योजना पर काम शुरू कराया। कोपा कोहना पूर्वी, रामलीला मैदान, राजभर बस्ती, कोपा कोहना दक्षिणी, जूनियर हाईस्कूल परिसर, अंबेडकर प्रतिमा स्थल, वार्ड संख्या 12, वार्ड संख्या 9 और वार्ड संख्या 3 काछीकला समेत नौ स्थानों पर एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से नलकूप स्थापित किए गए। साथ ही घरों तक जलापूर्ति पहुंचाने के लिए पाइपलाइन भी बिछाई गई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने और उद्घाटन के बाद भी नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं कराई गई। बीते 24 महीनों में कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
गर्मी बढ़ने के साथ संकट और गहरा गया है। सरकारी हैंडपंप खराब पड़े हैं, जिससे लोग निजी समरसेबल लगाने को मजबूर हो रहे हैं। कई मोहल्लों में पानी के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं।
पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़कों को जगह-जगह खोद दिया गया, लेकिन मरम्मत अधूरी छोड़ दी गई। इससे जलभराव, कीचड़ और गंदगी की समस्या ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
स्थानीय निवासी परवेश पटवा का कहना है कि गांव को नगर पंचायत में शामिल किए जाने के बाद भी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि इससे बेहतर होता कि गांव ग्रामीण क्षेत्र में ही रहता। वहीं अजय शर्मा ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को पानी न मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
रूद्रदत्त त्रिपाठी ने नगर पंचायत की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि दो साल से तैयार नलकूपों के बावजूद जलापूर्ति शुरू न होना गंभीर लापरवाही है और जल्द समाधान होना चाहिए।
मामले पर अपर जिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे प्रकरण की जांच कराकर संबंधित क्षेत्रों में पेयजल समस्या का समाधान कराया जाएगा।

अमेरिका-ईरान समझौते की दहलीज पर दुनिया: क्या 48 घंटे बदल देंगे वैश्विक भू-राजनीति?

अमेरिका-ईरान तनाव में ऐतिहासिक मोड़: युद्धविराम से समझौते की दहलीज तक बदलती वैश्विक भू-राजनीति का नया अध्याय

होर्मुज से व्हाइट हाउस तक: अमेरिका-ईरान एमओयू से बदल सकता है वैश्विक शक्ति संतुलन

✍️एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र


पश्चिम एशिया की भू-राजनीति इस समय एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहाँ अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों से चला आ रहा तनाव अब संभावित कूटनीतिक समाधान की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। पिछले लगभग 40 दिनों तक चले सैन्य संघर्ष ने केवल मध्य पूर्व को ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया। ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाएँ बाधित हुईं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर खतरा बढ़ा और तेल की कीमतों में अस्थिरता ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को झकझोर दिया।
विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य इस संघर्ष का सबसे संवेदनशील केंद्र बनकर उभरा। विश्व के समुद्री तेल परिवहन का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बन गया। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह संकट और अधिक गंभीर साबित हुआ, क्योंकि तेल कीमतों में उछाल का सीधा असर महंगाई, व्यापार संतुलन और आर्थिक विकास पर पड़ता है।
इसी पृष्ठभूमि में 8 अप्रैल 2026 को लागू किया गया दो सप्ताह का अस्थायी युद्धविराम एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक हस्तक्षेप के रूप में सामने आया। इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता से शुरू हुई बातचीत ने यह संकेत दिया कि अब दोनों देश युद्ध की बजाय संवाद को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसके बाद 21 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने का निर्णय वैश्विक कूटनीति के लिए सकारात्मक संकेत माना गया।
अब 6 मई 2026 की रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब पहुँच चुके हैं। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह केवल युद्धविराम नहीं होगा, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास, प्रतिबंधों और सैन्य टकराव के दौर को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
इस प्रस्तावित समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें केवल तत्काल संघर्ष विराम ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक स्थिरता के संकेत भी मौजूद हैं। दोनों देश मध्य पूर्व में चल रहे सैन्य अभियानों को समाप्त करने की दिशा में सहमत होते दिखाई दे रहे हैं। पिछले दो महीनों में ड्रोन हमले, समुद्री मार्गों पर हमले और रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई जैसी घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया था। ऐसे में युद्धविराम की संभावना अपने आप में वैश्विक राहत का संदेश है।
समझौते का दूसरा बड़ा पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा हुआ है। संघर्ष के दौरान इस समुद्री मार्ग पर हमलों और संभावित नाकाबंदी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भय और अनिश्चितता पैदा कर दी थी। अब दोनों देशों के बीच जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और चरणबद्ध तरीके से समुद्री मार्गों को सामान्य बनाने पर सहमति बनने की खबरें वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
सबसे संवेदनशील मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम का है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान 15 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन सीमित रखने और परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता जताने के लिए तैयार दिखाई दे रहा है। यह प्रस्ताव 2015 के परमाणु समझौते की याद दिलाता है, जिसे बाद में अमेरिका ने छोड़ दिया था। हालांकि इस बार दोनों पक्ष अधिक सतर्कता और संतुलन के साथ आगे बढ़ते दिख रहे हैं।
अमेरिका की ओर से संकेत मिले हैं कि यदि समझौता सफल होता है तो ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जा सकती है और उसकी फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को वापस करने पर भी विचार संभव है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से प्रतिबंधों के दबाव में संघर्ष कर रही है।
हालांकि समझौते की राह अभी पूरी तरह आसान नहीं है। जानकारी के अनुसार दोनों देशों के बीच लगभग 14 प्रमुख मुद्दों पर चर्चा जारी है, जिनमें से केवल कुछ पर ही सहमति बन पाई है। मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव, निरीक्षण प्रणाली और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दे अभी भी जटिल बने हुए हैं। यही कारण है कि प्रारंभिक समझौते के बावजूद स्थायी शांति की राह अभी लंबी मानी जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। एक ओर उन्होंने ईरान के खिलाफ सख्त आर्थिक और सैन्य दबाव बनाए रखा, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान के लिए वार्ता का रास्ता भी खुला रखा। प्रोजेक्ट फ्रीडम जैसे नौसैनिक अभियानों को अस्थायी रूप से रोकना इसी रणनीतिक संतुलन का हिस्सा माना जा रहा है।
दूसरी ओर ईरान भी आर्थिक संकट और लंबे संघर्ष से बचना चाहता है। प्रतिबंधों ने उसकी अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसलिए वह कुछ शर्तों पर लचीलापन दिखाने के लिए तैयार दिखाई देता है, हालांकि अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय प्रभाव को बनाए रखना उसके लिए अब भी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
यदि यह समझौता सफल होता है तो इसका वैश्विक प्रभाव अत्यंत व्यापक होगा। सबसे पहले ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लौट सकती है और तेल-गैस की कीमतों में कमी संभव है। इससे भारत, जापान और यूरोपीय देशों जैसे ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलेगी। वैश्विक शेयर बाजारों में भी सकारात्मक माहौल बन सकता है, क्योंकि युद्ध की अनिश्चितता निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम मानी जाती है।
भारत के लिए यह संभावित समझौता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है। इसके अलावा लाखों भारतीय प्रवासी इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसलिए क्षेत्रीय स्थिरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा दोनों के लिए आवश्यक है।
हालांकि इतिहास यह भी सिखाता है कि ऐसे समझौते बेहद नाजुक होते हैं। 2015 का परमाणु समझौता भी उम्मीदों के साथ शुरू हुआ था, लेकिन राजनीतिक बदलाव और आपसी अविश्वास के कारण वह टिक नहीं पाया। इस बार भी समझौते की सफलता दोनों पक्षों की पारदर्शिता, राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगी।
यह कहा जा सकता है कि मई 2026 का यह दौर केवल अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते का नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और नई भू-राजनीतिक व्यवस्था के निर्माण का अवसर भी है। यदि दोनों देश इस अवसर का सही उपयोग करते हैं, तो यह पूरे विश्व के लिए स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन का नया अध्याय साबित हो सकता है। लेकिन यदि यह अवसर चूक गया, तो इसके परिणाम केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को गंभीर अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले 48 घंटे इसलिए वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।