अनमोल की रिपोर्ट

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। ग्राम पंचायत बिक्रमपुर के प्राथमिक विद्यालय कोठा के ध्वस्तीकरण को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय भवन को गिराने से पहले न तो उन्हें इसकी स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही ग्राम प्रधान को इसकी सूचना दी गई। ध्वस्तीकरण के बाद भवन में लगी सरिया, ईंट, दरवाजे और खिड़कियां भी मौके से गायब होने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय भवन गिराने की प्रक्रिया में प्रधानाचार्या नूरजहां और डिप्टी कमिश्नर नीरज शुक्ला की भूमिका की जांच होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन का ध्वस्तीकरण नियमानुसार कराया गया था तो उससे संबंधित आदेश, अनुमति और सरकारी सामग्री के निस्तारण का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
ग्राम प्रधान को भी नहीं दी गई जानकारी?
ग्रामीणों के मुताबिक विद्यालय भवन को गिराए जाने से पहले ग्राम प्रधान को इसकी जानकारी नहीं दी गई। भवन ध्वस्त होने के बाद जब मौके पर पहुंचे लोगों ने स्थिति देखी तो वहां से निर्माण में इस्तेमाल हुई सरिया, ईंट, दरवाजे और खिड़कियां गायब होने की बात सामने आई।
इससे सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और ध्वस्तीकरण के बाद निकली सामग्री के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीण अब यह जानना चाहते हैं कि भवन से निकली सामग्री को कहां रखा गया और उसका सरकारी रिकॉर्ड किसके पास है।
“किसके आदेश पर गिराया गया विद्यालय?”
मामले को लेकर ग्राम प्रधान ने कथित तौर पर डिप्टी कमिश्नर से सवाल किया कि आखिर विद्यालय भवन को गिराने का आदेश किसने दिया था? ग्राम प्रधान के अनुसार, बातचीत के दौरान डिप्टी कमिश्नर की ओर से विद्यालय का ध्वस्तीकरण “आपसी प्रेम” के चलते कराए जाने की बात कही गई।
कथित तौर पर दिए गए इस जवाब के बाद ग्रामीणों के बीच मामले को लेकर और भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इस कथित बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि अथवा संबंधित अधिकारी का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
ध्वस्तीकरण के आदेश से लेकर सामग्री तक उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विद्यालय भवन को गिराने का कोई स्पष्ट प्रशासनिक आदेश था, तो वह आदेश कहां है? यदि आदेश था तो उसकी प्रति ग्राम पंचायत अथवा संबंधित विभाग के रिकॉर्ड में क्यों नहीं दिखाई जा रही है? वहीं, यदि ध्वस्तीकरण के बाद सरिया, ईंट, दरवाजे और खिड़कियां निकलीं तो उनके निस्तारण की प्रक्रिया क्या अपनाई गई?
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और विद्यालय भवन के ध्वस्तीकरण से संबंधित आदेश, अनुमति, सरकारी संपत्ति के मूल्यांकन तथा सामग्री के निस्तारण का रिकॉर्ड सामने लाया जाए। साथ ही, यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें जांच पर टिकी हैं। यदि विद्यालय का ध्वस्तीकरण नियमों के तहत हुआ है तो संबंधित दस्तावेज और सामग्री के निस्तारण का रिकॉर्ड पूरे मामले की तस्वीर साफ कर सकता है। वहीं, यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जांच के बाद जिम्मेदारी तय होना तय माना जा रहा है।