अमावस्या की पावन रात्रि में दीप प्रज्वलित कर मां लक्ष्मी का करें स्वागत, गणपति पूजन से मिले सुख-समृद्धि और मंगल का आशीर्वाद

लेखक: पंडित सुधीर तिवारी ‘अंतिम बाबा’
दीपावली केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति में आस्था, अध्यात्म, धर्म, मर्यादा और समृद्धि का अनुपम महापर्व है। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, अधर्म पर धर्म और निराशा पर आशा की विजय का संदेश देता है। इस दिन प्रत्येक सनातनी परिवार अपने घर को दीपों, रंगोली और सजावट से आलोकित कर मां लक्ष्मी तथा प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना करता है।
भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन से जुड़ी है दीपावली की परंपरा
पौराणिक एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर 14 वर्षों का वनवास पूर्ण किया और माता सीता तथा अनुज लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे। प्रभु श्रीराम के आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप प्रज्वलित कर पूरी नगरी को प्रकाश से जगमगा दिया। तभी से दीपावली का पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की प्रदोष बेला और रात्रि में मां महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। जो भक्त अपने घर को स्वच्छ, पवित्र और प्रकाशमय रखकर श्रद्धा एवं विधि-विधान से मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश का पूजन करते हैं, उन्हें सुख, शांति, ऐश्वर्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दीपावली 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग में दिए गए विवरण के अनुसार, वर्ष 2026 में कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 8 नवंबर की सुबह 11 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ होकर 9 नवंबर की रात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। अमावस्या के प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन की परंपरा के अनुसार 8 नवंबर 2026, रविवार को दीपावली मनाई जाएगी।
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे।
अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2026, रात्रि 12:31 बजे।
प्रदोष काल: शाम 5:31 से रात 8:09 बजे तक।
लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: शाम 5:54 से 7:50 बजे तक।
ध्यान दें: ये समय दिए गए पंचांग विवरण पर आधारित हैं। पूजा का सटीक मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और नगर के पंचांग के अनुसार कुछ अलग हो सकता है।
शास्त्रोक्त विधि से करें मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन
दीपावली की पूजा में बाहरी स्वच्छता के साथ मन की पवित्रता, श्रद्धा और सात्विक भाव का विशेष महत्व है। पूजा के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती है।

  1. पूजा स्थल की शुद्धि एवं स्थापना
    सबसे पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा के लिए ईशान कोण अथवा घर के स्वच्छ एवं पवित्र स्थान का चयन करें। लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर अक्षत रखें। चौकी पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान गणेश को मां लक्ष्मी के साथ उचित स्थान पर विराजमान करें।
  2. कलश स्थापना एवं संकल्प
    चौकी के समीप तांबे अथवा पीतल का कलश स्थापित करें। उसमें शुद्ध जल, गंगाजल, सुपारी, अक्षत और एक सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और नारियल स्थापित करें। दीपक को कलश के ऊपर रखने के बजाय अलग सुरक्षित स्थान पर प्रज्वलित करें।
    इसके बाद हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर अपने परिवार की सुख-शांति, आरोग्यता, समृद्धि और मंगल की कामना करते हुए पूजा का संकल्प लें।
  3. पूजन सामग्री का शुद्धिकरण
    पूजन सामग्री और स्वयं पर जल का छिड़काव करते हुए इस पवित्र मंत्र का उच्चारण करें—
    ‘ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥’
    इसके बाद आचमन कर भगवान का ध्यान करें।
  4. सर्वप्रथम करें भगवान गणेश की पूजा
    सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना की जाती है। भगवान गणेश को रोली, अक्षत, दूर्वा, पुष्प, धूप, दीप और मोदक अथवा मिठाई अर्पित करें।
    उनसे परिवार के सभी कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और बुद्धि, विवेक एवं मंगल प्रदान करने की प्रार्थना करें।
  5. मां महालक्ष्मी का विधिवत पूजन
    अब मां महालक्ष्मी का ध्यान करते हुए उन्हें कुमकुम, रोली, अक्षत, लाल पुष्प, कमल पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, मिठाई, खील और बताशे अर्पित करें।
    मां लक्ष्मी के समक्ष श्रद्धापूर्वक बैठकर लक्ष्मी मंत्र का जाप करें—
    ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।’
    इसके अतिरिक्त श्रीसूक्त अथवा कनकधारा स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है। मां लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि परिवार में धन के साथ धर्म, सद्बुद्धि, सदाचार और संतोष का भी वास बना रहे।
  6. कुबेर देव और धन-संपदा का पूजन
    दीपावली पर धन के अधिष्ठाता भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है। तिजोरी, बही-खाते और धन रखने के स्थान को स्वच्छ करके उनका पूजन करें। पीली कौड़ियां, कमलगट्टे, गोमती चक्र और सिक्के मां लक्ष्मी के समक्ष श्रद्धापूर्वक अर्पित कर सकते हैं। पूजन के बाद इन्हें परंपरा के अनुसार सुरक्षित स्थान पर रखें।
  7. आरती, क्षमायाचना और दीपदान
    पूजा के अंत में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की आरती करें। परिवार के सभी सदस्य श्रद्धापूर्वक आरती में शामिल हों। पूजा में अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें।
    इसके बाद घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, तुलसी चौरा, आंगन, छत और अन्य उचित स्थानों पर दीपक प्रज्वलित करें। दीपदान करते समय इस बात का ध्यान रखें कि दीपक सुरक्षित स्थान पर हों और उनसे आग लगने का कोई खतरा न हो।
    दीपावली पर इन धार्मिक बातों का रखें विशेष ध्यान
    घर में स्वच्छता और सात्विकता बनाए रखें।
    पूजा के समय क्रोध, कटु वचन और विवाद से बचें।
    अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और मिठाई का दान करें।
    घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
    मिट्टी के दीपक जलाकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
    पूजा में दिखावे के बजाय श्रद्धा, भक्ति और सद्भाव को प्राथमिकता दें।
    दीपावली का वास्तविक संदेश: धन के साथ धर्म और प्रकाश के साथ सद्बुद्धि
    दीपावली का वास्तविक अर्थ केवल घरों में दीप जलाना या धन-संपत्ति की कामना करना नहीं है। इसका आध्यात्मिक संदेश यह है कि मनुष्य अपने भीतर के अज्ञान, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और नकारात्मकता को समाप्त कर ज्ञान, प्रेम, करुणा तथा सदाचार का प्रकाश फैलाए।
    मां लक्ष्मी की कृपा वहीं सार्थक है, जहां धन के साथ धर्म, समृद्धि के साथ संतोष और वैभव के साथ विनम्रता हो। भगवान गणेश की आराधना हमें विवेक और बुद्धि का मार्ग दिखाती है।
    आइए, इस दीपावली पर संकल्प लें कि हम अपने घर के साथ-साथ अपने मन को भी प्रकाशित करेंगे। जरूरतमंदों के जीवन में खुशियों का दीप जलाएंगे और सनातन संस्कृति की इस महान परंपरा को श्रद्धा, सद्भाव तथा सामाजिक समरसता के साथ आगे बढ़ाएंगे।
    शुभ दीपावली! मां महालक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश सभी के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य, ज्ञान और समृद्धि का प्रकाश फैलाएं।
    दीपावली पर विशेष भक्तिमय कविता
    आओ मिलकर दीप जलाएं, मन का अंधियारा दूर भगाएं।
    मां लक्ष्मी का स्वागत करके, घर-आंगन खुशियों से सजाएं।
    राम नाम की ज्योति जले, हर मन में विश्वास रहे,
    गणपति की कृपा बनी रहे, जीवन में मधुमास रहे।
    न धन का केवल मोह रहे, न वैभव का अभिमान रहे,
    सेवा, श्रद्धा और सद्भाव का, हर दिल में सम्मान रहे।
    मिट जाएं मन के सारे द्वेष, प्रेम का नया उजास हो,
    हर घर में सुख-शांति बसे, हर चेहरे पर उल्लास हो।
    मां लक्ष्मी भर दें अन्न-धन से, हर आंगन और द्वार,
    गणपति दें सद्बुद्धि सबको, मंगलमय हो संसार।
    दीप जले तो ज्ञान जले, हर हृदय में संस्कार जले,
    दीपावली का यही संदेश, मानवता का संसार खिले।
    लेखक: पंडित सुधीर तिवारी ‘अंतिम बाबा’