
योगी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा! आपदा में मौत पर अब ₹8 लाख, फसल से लेकर पशुओं तक के मुआवजे में बढ़ोतरी
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों के लिए उत्तर प्रदेश से बड़ी राहत की खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने आपदा राहत के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता की दरों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। प्रस्तुत विवरण के मुताबिक, प्राकृतिक आपदा में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को मिलने वाली सहायता राशि 4 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं, फसल बर्बाद होने, पशुधन की मौत और मकानों व शिक्षण संस्थानों को नुकसान पहुंचने पर भी सहायता राशि बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। क्रॉसर: मौत पर दोगुना मुआवजा, पशुपालकों को भी राहत
फसल से लेकर पशुधन तक, जानिए कितना मिलेगा मुआवजा
संशोधित दरों के अनुसार, बड़े पशुओं की मौत पर सहायता 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं के लिए अब 5,500 रुपये मिलेंगे, जबकि पहले यह राशि 4,000 रुपये थी। घोड़े और खच्चर की मौत पर सहायता 20,000 रुपये से बढ़ाकर 25,400 रुपये कर दी गई है। वहीं, मुर्गीपालकों को प्रति मुर्गी 100 रुपये के बजाय 130 रुपये की सहायता का प्रावधान बताया गया है। फसल नुकसान की भरपाई के लिए भी राहत राशि बढ़ाई गई है। सिंचित कृषि भूमि पर नुकसान के लिए सहायता 17,000 रुपये से बढ़ाकर 22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और असिंचित भूमि के लिए 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है। बारहमासी फसलों और कृषि-वानिकी के नुकसान पर अब 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता का प्रावधान है, जो पहले 22,500 रुपये थी। रेशम उत्पादन करने वाले किसानों को भी राहत मिलेगी। एरी, शहतूत और टसर रेशम के नुकसान पर सहायता 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर तथा मूंगा रेशम के लिए 7,500 रुपये से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर बताई गई है। क्रॉसर: क्षतिग्रस्त जमीन और मकानों के लिए भी बढ़ी मदद
घर उजड़ने पर लाखों की सहायता, स्कूलों को भी राहत
प्राकृतिक आपदा से खेतों में गाद जमा होने पर उसे हटाने के लिए सहायता 18,000 रुपये से बढ़ाकर 23,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है। भूस्खलन और हिमस्खलन से क्षतिग्रस्त भूमि के लिए यह राशि 47,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर बताई गई है। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मैदानी क्षेत्रों में 1.85 लाख रुपये और पहाड़ी इलाकों में 2.06 लाख रुपये की सहायता का उल्लेख है। मैदानी क्षेत्र में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान के लिए 93,000 रुपये की सहायता तय बताई गई है। प्राथमिक विद्यालयों की मरम्मत के लिए 15.50 लाख रुपये तक और माध्यमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेजों तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों के लिए 26 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान भी विवरण में शामिल है। आपदा के कारण विस्थापित परिवारों को राहत शिविरों में 30 दिनों तक सहायता और सूखे की स्थिति में 90 दिनों तक पेयजल सहायता देने की व्यवस्था भी बताई गई है। सड़कों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की बहाली के लिए भी सहायता का प्रावधान है।
किन तारीखों के नुकसान पर लागू होंगे नियम?
उपलब्ध विवरण के अनुसार, संशोधित दरें 1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 के बीच हुई आपदाओं और नुकसान पर लागू बताई गई हैं। सहायता राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के नियमों के तहत दी जाएगी। हालांकि, लाभार्थियों को सलाह है कि वे अपने जिले के प्रशासन, तहसील या कृषि विभाग से लागू शासनादेश, पात्रता, नुकसान के सत्यापन और आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि अवश्य करें। अलग-अलग मदों में सहायता निर्धारित शर्तों और आधिकारिक नियमों के अनुसार ही मिलती है।
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