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धनतेरस 2026: धन, आरोग्य और दीर्घायु का महापर्व! जानिए भगवान धन्वंतरि की पूजा, यमदीपदान और खरीदारी की संपूर्ण शास्त्रोक्त विधि

पंडित सुधीर मिश्र (अंतिम बाबा)
विशेष धार्मिक लेख | राष्ट्र की परम्परा

धनतेरस केवल सोना-चांदी खरीदने या घर में नए बर्तन लाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में आरोग्य, सुख-समृद्धि, दीर्घायु और सकारात्मकता का स्वागत करने का पावन अवसर है। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का शुभारंभ इसी दिन से होता है। भारतीय सनातन परंपरा में इस तिथि का संबंध भगवान धन्वंतरि, माता महालक्ष्मी, भगवान कुबेर और यमराज की आराधना से जुड़ा है। जहां भगवान धन्वंतरि निरोगी जीवन का संदेश देते हैं, वहीं माता लक्ष्मी सुख-समृद्धि और भगवान कुबेर धन-संपदा के प्रतीक माने जाते हैं। संध्याकाल में किया जाने वाला यमदीपदान परिवार की मंगलकामना और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना का प्रतीक है।
धनतेरस कब है?
वर्ष 2026 में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे प्रारंभ होकर 7 नवंबर को सुबह 10:48 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए प्रदोषकाल और शुभ मुहूर्त को प्राथमिकता दें, क्योंकि पूजा के मुहूर्त स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
धनतेरस का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
धनतेरस को धनत्रयोदशी तथा धन्वंतरि त्रयोदशी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। इसी कारण इस दिन उनकी पूजा करके परिवार के सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य, निरोगी काया और दीर्घायु की कामना की जाती है।
धनतेरस का संदेश स्पष्ट है—धन तभी सार्थक है, जब उसके साथ स्वास्थ्य, शांति और संतोष भी हो। धन-संपत्ति का वास्तविक सुख तभी मिलता है, जब परिवार स्वस्थ हो और जीवन में परस्पर प्रेम बना रहे।
समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी के प्राकट्य की मान्यता भी इस पर्व से जुड़ी है। इसी कारण धनतेरस पर लक्ष्मी पूजन, दीप प्रज्वलन और नई वस्तुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है। हालांकि, खरीदारी को लेकर प्रचलित मान्यताएं धार्मिक विश्वास का विषय हैं; किसी वस्तु को खरीदने से धन तेरह गुना बढ़ने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।
धनतेरस की पूजा सामग्री
पूजा आरंभ करने से पहले निम्न सामग्री अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार एकत्र कर लें—
भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर के चित्र या प्रतिमा।
स्वच्छ चौकी, लाल या पीला वस्त्र और पूजा का आसन।
जल से भरा कलश, आम्रपल्लव उपलब्ध होने पर, पुष्प और माला।
रोली, अक्षत, चंदन, हल्दी और कुमकुम।
धूप, दीपक, रुई की बत्ती और घी अथवा तिल का तेल।
फल, मिठाई, खील-बताशे और नैवेद्य।
साबुत धनिया, सुपारी और पान, यदि परिवार की पूजा परंपरा में प्रचलित हों।
यमदीपदान के लिए अलग मिट्टी का दीपक और तेल।
भगवान धन्वंतरि की आराधना के लिए औषधीय परंपरा के प्रति श्रद्धा का भाव।
पूजा सामग्री में किसी वस्तु की कमी हो जाए तो चिंता न करें। श्रद्धा, स्वच्छता और सद्भाव ही पूजा के मूल आधार हैं।
धनतेरस पर पूजा की संपूर्ण विधि
पहला चरण: घर और पूजा स्थल की स्वच्छता
धनतेरस के दिन सुबह घर, पूजा स्थल और मुख्य द्वार की अच्छी तरह सफाई करें। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और शाम को दीपों से घर को सजाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सकारात्मकता का संचार होता है।
दूसरा चरण: संकल्प और दीप प्रज्वलन
प्रदोषकाल में स्नान अथवा हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर चौकी बिछाकर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। दीप प्रज्वलित करें और परिवार के कल्याण, आरोग्य, सद्बुद्धि तथा परिश्रम से अर्जित समृद्धि की कामना करते हुए संकल्प लें।
तीसरा चरण: भगवान गणेश की पूजा
किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। उन्हें पुष्प, अक्षत, दूर्वा और उपलब्ध नैवेद्य अर्पित करें। प्रार्थना करें कि परिवार के कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर हों और सभी को विवेकपूर्ण निर्णय लेने की शक्ति मिले।
चौथा चरण: भगवान धन्वंतरि की आराधना
भगवान धन्वंतरि को पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें। उनके समक्ष स्वास्थ्य, संयम और सेवा भाव का संकल्प लें। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार इस मंत्र का जप कर सकते हैं—
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वामयविनाशनाय त्रैलोक्यनाथाय श्रीमहाविष्णवे नमः॥”
मंत्र के उच्चारण में कठिनाई हो तो सरल भाव से भगवान धन्वंतरि का नाम लेकर भी प्रार्थना की जा सकती है।
पांचवां चरण: माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का पूजन
माता लक्ष्मी को पुष्प, अक्षत, मिठाई और खील-बताशे अर्पित करें। भगवान कुबेर का स्मरण करते हुए धन के सदुपयोग, ईमानदार कमाई और परिवार की आर्थिक उन्नति की प्रार्थना करें।
माता लक्ष्मी के समक्ष यह प्रार्थना करें कि घर में धन के साथ विवेक, विनम्रता, संतोष और परस्पर प्रेम भी बना रहे। ध्यान रखें कि धार्मिक मान्यताओं में समृद्धि का अर्थ केवल धन संग्रह नहीं, बल्कि सदाचार और लोककल्याण भी है।
छठा चरण: आरती और प्रसाद वितरण
पूजा पूरी होने पर भगवान गणेश, भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की आरती करें। परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें। सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी शुभ कार्य माना जाता है।
यमदीपदान: अकाल मृत्यु से रक्षा की मंगलकामना
धनतेरस की शाम यमदीपदान की विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर यमराज के निमित्त दीपक जलाया जाता है। इसे यमदीप अथवा यमदीपदान कहते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हेम के पुत्र की विवाह के कुछ दिनों बाद मृत्यु होने की भविष्यवाणी की गई थी। विवाह के बाद जब यमदूत राजकुमार के प्राण लेने पहुंचे तो उसकी पत्नी का विलाप सुनकर वे भी दुखी हो गए। कथा के एक प्रचलित रूप में यमराज ने बताया कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की संध्या को श्रद्धापूर्वक दीपदान करने से अकाल मृत्यु के भय से रक्षा की मंगलकामना की जाती है।
यह कथा हमें जीवन की अनिश्चितता का स्मरण कराती है और परिवार के प्रति प्रेम तथा जीवन की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है।
यमदीपदान की विधि
संध्याकाल में घर के मुख्य द्वार के बाहर सुरक्षित स्थान पर मिट्टी का दीपक रखें।
दीपक में तिल का तेल अथवा अपनी परंपरा के अनुसार तेल डालें और रुई की बत्ती लगाएं।
दीपक जलाकर दक्षिण दिशा की ओर रखते हुए यमराज का स्मरण करें।
परिवार के सभी सदस्यों की लंबी आयु, स्वास्थ्य और मंगल की प्रार्थना करें।
दीपक ऐसी जगह रखें जहां हवा से उसके बुझने या आग लगने का खतरा न हो। बच्चों और पालतू पशुओं की पहुंच से दूर रखें।
सरल प्रार्थना करें—“हे यमराज! हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें। सभी को स्वस्थ, सुरक्षित और दीर्घायु जीवन प्रदान करें।”
परंपरागत यमदीपदान का उद्देश्य मंगलकामना है; इसे चिकित्सा, सुरक्षा और आवश्यक सावधानियों का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं सुख-सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक बनती हैं। अपनी आवश्यकता और बजट के अनुसार निम्न वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं—
सोना-चांदी: सिक्के, आभूषण अथवा चांदी के छोटे पात्र खरीदना कई परिवारों में शुभ माना जाता है। खरीदारी अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार करें।
तांबे और पीतल के बर्तन: पूजा, रसोई और दैनिक उपयोग के लिए नए बर्तन खरीदे जाते हैं। इन्हें परंपरा और उपयोगिता दोनों के दृष्टिकोण से चुना जा सकता है।
झाड़ू: झाड़ू को स्वच्छता और लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक मानने की परंपरा है। इस दिन नई झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है।
साबुत धनिया: इसे पूजा में अर्पित करने और बाद में सुरक्षित रखने या बोने की परंपरा कुछ परिवारों में प्रचलित है।
शंख, दीपक और पूजा सामग्री: घर में पूजा-पाठ के लिए आवश्यक वस्तुएं खरीदना भी इस अवसर पर अच्छा माना जाता है।
गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा: दीपावली पूजन के लिए प्रतिमा खरीदने की परंपरा भी धनतेरस से जुड़ी हुई है।
ध्यान रखें: केवल शुभ मान्यता के कारण कर्ज लेकर या अपनी जरूरतों से अधिक खर्च करके खरीदारी न करें। धनतेरस का वास्तविक उद्देश्य आर्थिक विवेक, स्वच्छता और जीवन में समृद्धि का स्वागत करना है।
धनतेरस पर किन बातों का ध्यान रखें?
पूजा के लिए घर और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।
दीपदान और आरती श्रद्धा से करें।
परिवार के बुजुर्गों और जरूरतमंदों का सम्मान करें।
अपनी आय के अनुसार ही खरीदारी करें।
सोना-चांदी खरीदते समय बिल, शुद्धता और हॉलमार्क की जांच करें।
दीपक को पर्दे, कागज, कपड़े और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और किसी बीमारी की स्थिति में उचित चिकित्सकीय सलाह लें।
धनतेरस की पौराणिक कथा से जुड़ा माता लक्ष्मी का संदेश
एक अन्य प्रचलित कथा में भगवान विष्णु के निर्देश की अवहेलना करने पर माता लक्ष्मी को एक किसान के यहां बारह वर्ष तक रहने का प्रसंग मिलता है। कथा के अनुसार, माता लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर धन-धान्य से भर गया। बारह वर्ष बाद जब माता लक्ष्मी जाने लगीं तो किसान उन्हें रोकना चाहता था। तब माता लक्ष्मी ने उसे धनतेरस के दिन घर की सफाई करने, दीप जलाने और श्रद्धापूर्वक पूजन करने का विधान बताया।
इस कथा का मूल संदेश है कि स्वच्छता, श्रद्धा, परिश्रम और सदाचार जीवन को समृद्ध बनाते हैं। माता लक्ष्मी की कृपा की कामना के साथ हमें अपने कर्मों को भी श्रेष्ठ बनाना चाहिए।
धनतेरस का सबसे बड़ा धन क्या है?
आज के समय में धनतेरस को केवल बाजार, खरीदारी और चमक-दमक तक सीमित कर देना इसके व्यापक संदेश को छोटा कर देना है। भगवान धन्वंतरि हमें स्वास्थ्य का महत्व समझाते हैं। माता लक्ष्मी हमें समृद्धि के साथ उदारता का संदेश देती हैं। भगवान कुबेर धन के विवेकपूर्ण उपयोग की प्रेरणा देते हैं और यमदीपदान जीवन की रक्षा तथा दीर्घायु की मंगलकामना से जोड़ता है।
इसलिए इस धनतेरस पर नए बर्तन और आभूषण खरीदने के साथ अपने व्यवहार में प्रेम, विचारों में सकारात्मकता और जीवन में अनुशासन का भी संकल्प लें। घर के किसी जरूरतमंद सदस्य की सहायता करें, बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और स्वास्थ्य को अपनी सबसे बड़ी पूंजी समझें।
पंडित सुधीर मिश्र (अंतिम बाबा) की ओर से समस्त श्रद्धालुओं को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान धन्वंतरि सभी को आरोग्य प्रदान करें, माता महालक्ष्मी प्रत्येक घर में सुख-समृद्धि बनाए रखें और भगवान कुबेर सबको सद्बुद्धि के साथ धन का सदुपयोग करने की प्रेरणा दें।
शुभ धनतेरस! शुभ दीपावली!
धार्मिक सूचना: इस लेख में वर्णित कथाएं, पूजा-विधान और फल संबंधी विवरण पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा के स्थानीय मुहूर्त के लिए अपने क्षेत्र के प्रामाणिक पंचांग या योग्य पुरोहित से परामर्श करें।