निर्विकार प्रेम कविता: भक्ति, धर्म और ईश्वर का सार
— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ प्रेम केवल भावना नहीं, यह भक्ति का स्वरूप है,प्रेम पूजा है, जहां न स्वार्थ है, न अहंकार का रूप है।जब प्रेम निस्वार्थ बन जाए,…
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— डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’ प्रेम केवल भावना नहीं, यह भक्ति का स्वरूप है,प्रेम पूजा है, जहां न स्वार्थ है, न अहंकार का रूप है।जब प्रेम निस्वार्थ बन जाए,…