अस्सी का वह दौर
था, रिश्तों में था प्यार।अब रिश्ते हैं फोन में, सूना है घर-द्वार॥थोड़ा था पर बाँटकर, खाते थे परिवार।अब थाली भरपूर है, फिर भी मन बीमार॥कच्चे घर में प्रेम था, पक्के…
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था, रिश्तों में था प्यार।अब रिश्ते हैं फोन में, सूना है घर-द्वार॥थोड़ा था पर बाँटकर, खाते थे परिवार।अब थाली भरपूर है, फिर भी मन बीमार॥कच्चे घर में प्रेम था, पक्के…