देवरिया कोतवाली में वकीलों का हल्लाबोल! अधिवक्ता पर हमले से उबाल, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल; ASP के आश्वासन पर थमा हंगामा

आरोपियों को छोड़ने के आरोप से भड़का आक्रोश, जिला बार संघ के अध्यक्ष वैभव कांत मिश्रा के नेतृत्व में जुटे सैकड़ों अधिवक्ता; निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया में अधिवक्ता पर कथित हमले का मामला मंगलवार को उस समय तूल पकड़ गया, जब कार्रवाई को लेकर उठे सवालों के बीच अधिवक्ताओं का गुस्सा कोतवाली परिसर में फूट पड़ा। साथी अधिवक्ता सुधाकर पाण्डेय के घायल होने और एक आरोपी को कथित तौर पर थाने से छोड़ दिए जाने की खबर ने वकीलों को आक्रोशित कर दिया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में अधिवक्ता कोतवाली पहुंच गए। पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, जवाबदेही की मांग हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। आखिरकार अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) को मौके पर पहुंचकर अधिवक्ताओं से बातचीत करनी पड़ी। उनके निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। गाने की आवाज को लेकर शुरू हुआ विवाद, मारपीट तक पहुंचा मामला प्राप्त जानकारी के अनुसार, दीवानी कचहरी देवरिया में विधि व्यवसाय करने वाले अधिवक्ता सुधाकर पाण्डेय का सुभाष चौक के समीप शहीद रामचंद्र विद्यार्थी स्मारक स्थल पर गाने की आवाज को लेकर कुछ लोगों से विवाद हो गया। आरोप है कि कहासुनी के बाद मामला मारपीट में बदल गया और सुधाकर पाण्डेय गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना में राम नगीना मिश्रा, पुत्र देवकीनंदन मिश्रा, तथा आलोक मिश्रा, पुत्र राम नगीना मिश्रा के नाम सामने आए हैं। मामले की पूरी परिस्थितियों और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। एक आरोपी को छोड़ने के आरोप ने बढ़ाई नाराजगी घटना के बाद अधिवक्ता सुधीर पाण्डेय की तहरीर पर पुलिस द्वारा दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर कोतवाली लाए जाने की बात सामने आई। हालांकि, अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि बाद में एक आरोपी को बिना उचित कार्रवाई के छोड़ दिया गया। इसी बात को लेकर पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे। नाराज अधिवक्ताओं ने कोतवाल और दीवान यादव की भूमिका पर आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की। बार संघ के नेतृत्व में प्रदर्शन, ASP ने दिया कार्रवाई का भरोसा जिला बार संघ के अध्यक्ष वैभव कांत मिश्रा के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी और सैकड़ों अधिवक्ता कोतवाली परिसर में एकत्र हुए। उन्होंने मांग की कि हमले के आरोपियों के विरुद्ध नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए और पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो। बढ़ते तनाव के बीच अपर पुलिस अधीक्षक कोतवाली पहुंचे। उन्होंने अधिवक्ताओं को बताया कि मामले की जांच एक सक्षम अधिकारी को सौंपी गई है। जांच के आधार पर मुकदमा दर्ज करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इसके बाद अधिवक्ताओं का आक्रोश शांत हुआ। कार्रवाई में देरी हुई तो आंदोलन की चेतावनी अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। अब पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। अधिवक्ता पर हमले के आरोप और पुलिस की भूमिका से जुड़े सवालों का निष्पक्ष समाधान ही मामले में भरोसा बहाल कर सकता है।