अब प्रदेश में ही होगी कृषि एवं खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता जांच, निर्यातकों का समय और लागत बचेगी : केशव प्रसाद मौर्य

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा) उत्तर प्रदेश के किसानों और खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों के लिए निर्यात की राह आसान होने जा रही है। प्रदेश के कृषि एवं खाद्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लखनऊ स्थित क्षेत्रीय खाद्य अनुसंधान एवं विश्लेषण केंद्र (RFRAC) को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की सूची में शामिल किया गया है। इससे अब निर्यातकों को गुणवत्ता परीक्षण और जरूरी जांच रिपोर्ट के लिए दूसरे राज्यों की प्रयोगशालाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। आधुनिक परीक्षण सुविधाओं के विस्तार से प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान मिलेगी।

उद्यान भवन परिसर में वर्ष 2001 में स्थापित RFRAC उत्तर प्रदेश सरकार का स्वायत्तशासी संस्थान है। यहां अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञों की मदद से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खाद्य पदार्थों की जांच की जाती है। केंद्र में कीटनाशक अवशेष, पोषण तत्व, प्रोटीन, अमीनो एसिड, एंटीबायोटिक अवशेष, ट्रांस फैट, भारी धातुओं और सूक्ष्म पोषक तत्वों सहित विभिन्न मानकों का परीक्षण किया जाता है। यहां FSSAI, BIS और AOAC मानकों के अनुरूप जांच की सुविधा उपलब्ध है।

केंद्र की इस उपलब्धि से प्रदेश के किसानों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, उद्यमियों और निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा। उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित होने से निर्यात संबंधी औपचारिकताएं पूरी करना आसान होगा और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में भी मदद मिलेगी।

अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा ने कहा कि प्रदेश में खाद्य गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं को मजबूत करने और कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने निर्यातकों से RFRAC की APEDA सूचीबद्ध प्रयोगशाला का लाभ उठाने की अपील की। साथ ही जिलाधिकारियों, मंडलायुक्तों और मुख्य विकास अधिकारियों के माध्यम से इस सुविधा का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं।

केंद्र की ओर से खाद्य परीक्षण, प्रसंस्करण तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और स्वरोजगार से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। विभिन्न सरकारी एवं कौशल विकास संस्थाओं के सहयोग से किसानों और युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।