लेखपालों की लापरवाही के आरोपों के बीच फार्मर रजिस्ट्री में फंसा पेंच, 15 गांवों के हजारों किसान परेशान

जौनपुर, (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जौनपुर में खतौनी में अंश निर्धारण की समस्या किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। आरोप है कि लेखपालों द्वारा खतौनी में किसानों का अंश निर्धारित नहीं किए जाने के कारण फार्मर रजिस्ट्री का काम अटक रहा है। इसका सीधा असर किसानों के सरकारी योजनाओं का लाभ पाने पर पड़ सकता है। खासकर उन किसानों की चिंता बढ़ गई है, जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेना चाहते हैं। स्थिति यह है कि सुजानगंज क्षेत्र के 15 गांवों में बड़ी संख्या में किसानों का अंश निर्धारण लंबित बताया जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री नहीं होने से नए किसानों के लिए कृषि विभाग में पंजीकरण कराना मुश्किल हो सकता है। वहीं, पहले से योजनाओं का लाभ ले रहे किसानों को भी भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
15 गांवों में अंश निर्धारण का पेंच, हजारों किसान प्रभावित
तकनीकी सहायक प्रबंधक, सुजानगंज युगल कुमार के मुताबिक, क्षेत्र के कई गांवों में किसानों की खतौनी में अंश निर्धारण नहीं हो सका है। इनमें कान्हापुर के 70, रामनगर के 60, चकनवाबाद के 60, बरहता के 40, राजगढ़ के 30, पराहित के 70, मथुरा के 150, चौबेपुर के 60, घघरिया के 90, थलोई के 200, अरुआ के 200, बराई के 50, गौहानी के 70, ऊंचगांव के 70 और विकैपुर के 50 किसान शामिल हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, संबंधित गांवों में कुल 1,270 किसानों का अंश निर्धारण लंबित बताया गया है। इससे साफ है कि जमीन के अभिलेखों से जुड़ी एक प्रशासनिक प्रक्रिया किसानों के लिए सरकारी योजनाओं तक पहुंचने में बाधा बन रही है।
फार्मर रजिस्ट्री नहीं तो नए पंजीकरण में परेशानी
फार्मर रजिस्ट्री किसानों की पहचान और कृषि संबंधी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में खतौनी में अंश निर्धारण नहीं होने पर रजिस्ट्री पूरी करने में बाधा आ सकती है। नए किसानों को कृषि विभाग में पंजीकरण कराने से पहले फार्मर रजिस्ट्री कराना जरूरी बताया जा रहा है। यदि अभिलेखों की समस्या दूर नहीं होती है, तो पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
उप कृषि निदेशक ने क्या कहा?
इस संबंध में उप कृषि निदेशक जौनपुर अश्वनी सिंह ने बताया कि पहले से पंजीकृत किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली छूट का लाभ मिल रहा है, लेकिन अब फार्मर रजिस्ट्री के बिना लाभ जारी रहने पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से इस संबंध में निर्देश मिले हैं। नए किसानों का पंजीकरण भी फार्मर रजिस्ट्री के बिना नहीं हो सकेगा।
किसानों की निगाहें अब प्रशासन पर
किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि खतौनी में अंश निर्धारण की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। यदि समय रहते राजस्व अभिलेखों की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो पात्र किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ पाने में कठिनाई हो सकती है। अब किसानों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी लंबित मामलों का जल्द निस्तारण कराएंगे, ताकि फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो सके और कृषि योजनाओं का लाभ लेने में अनावश्यक बाधा न आए। नोट: योजनाओं के लाभ पर वास्तविक असर संबंधित सरकारी नियमों और किसान की पात्रता पर निर्भर करेगा।