
Form 6 में बदलाव पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- रिकॉर्ड से खुलेगा राज
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सोमवार को बड़ा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित तौर पर गैरकानूनी और एकतरफा बदलाव किया गया है। राहुल गांधी ने इसे चुनाव आयोग के पद के कथित दुरुपयोग और भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंचाने से जोड़ते हुए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की बात कही।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पोस्ट में दावा किया कि Form 6 में किया गया कथित बदलाव मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और इस मामले में जिम्मेदार लोगों को भविष्य में जवाबदेह ठहराया जाएगा। अपने पोस्ट के साथ उन्होंने चुनाव आयोग की 26 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति का स्क्रीनशॉट भी साझा किया।
यह पूरा विवाद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान Form 6 के इस्तेमाल को लेकर सामने आया है। Form 6 उन पात्र नागरिकों के लिए निर्धारित है, जो पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करते हैं। विवाद का केंद्र SIR प्रक्रिया के दौरान Form 6 के साथ जोड़े गए कथित अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इसी मुद्दे से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने Form 6 के किसी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने संकेत दिया कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह देखा जाएगा कि Form 6 में बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल CEC को अंतरिम रूप से निलंबित करने या उनके निर्णय लेने पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि पहले चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को सुनना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि रिकॉर्ड की जांच के बाद यदि किसी निर्णय में कानून का उल्लंघन पाया जाता है, तो उस निर्णय को चुनौती दी जा सकती है और आवश्यक कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान CEC को निलंबित करने की व्यावहारिकता पर भी अदालत ने सवाल उठाया। पीठ ने पूछा कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित कर दिया जाता है तो चुनाव आयोग का कामकाज कौन संभालेगा। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ऐसी स्थिति में दोनों अन्य चुनाव आयुक्त आयोग का काम संभाल सकते हैं। हालांकि, अदालत ने संकेत दिया कि इस स्तर पर आरोपों के बजाय प्रमाणित रिकॉर्ड के आधार पर आगे बढ़ना जरूरी है।
विवाद की एक अहम कड़ी चुनाव आयोग की 26 सितंबर की प्रेस विज्ञप्ति भी है। आयोग की ओर से कहा गया था कि SIR के दौरान Form 6 के साथ लगाए गए घोषणा-पत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कार्यवाही में स्थिति स्पष्ट हुई थी, जबकि SIR के बाहर Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित प्रपत्रों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक आरोप और न्यायिक सवाल आमने-सामने आ गए हैं।
याचिका में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई अन्य आरोप भी लगाए गए हैं। इनमें SIR से संबंधित कुछ निर्णयों को दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की कथित सहमति के बिना लिए जाने का दावा भी शामिल है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है और सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
फिलहाल राहुल गांधी के आरोप राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं, जबकि Form 6 में कथित बदलाव किसने किया, किस प्रक्रिया के तहत किया गया और इसके लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है, इसका अंतिम उत्तर न्यायिक प्रक्रिया में सामने आएगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिकॉर्ड तलब किए जाने के बाद अब चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के जवाब पर पूरे मामले की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।
