
सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार को झटका नहीं, लेकिन 14 SIR फैसलों पर मांगा पूरा रिकॉर्ड; चुनाव आयोग से पूछा- क्या अकेले लिए गए थे फैसले?
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार, 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने CEC को अंतरिम तौर पर उनके पद से निलंबित करने की मांग को फिलहाल स्वीकार नहीं किया। हालांकि अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
पीठ में CJI सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल रहे। सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग से SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े 14 विवादित निर्णयों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी और रिकॉर्ड पेश करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट यह जानना चाहता है कि इन फैसलों को किस प्रक्रिया के तहत लिया गया। अदालत ने विशेष रूप से पूछा कि क्या ये निर्णय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अकेले लिए थे या फिर चुनाव आयोग के अन्य दोनों निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की भागीदारी तथा सहमति भी इसमें थी।
अदालत ने यह भी स्पष्टता मांगी है कि विवादित निर्णय चुनाव आयोग के बहुसदस्यीय स्वरूप तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के अनुरूप लिए गए थे या नहीं। यदि किसी निर्णय पर सभी सदस्यों की सहमति नहीं थी, तो क्या उसे बहुमत के आधार पर पारित किया गया था, इसका रिकॉर्ड भी अदालत के सामने रखने को कहा गया है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि चुनाव आयोग के जवाब और प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद यह सामने आता है कि किसी निर्णय को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया या आवश्यक सहमति के बिना लिया गया था, तो अदालत उस निर्णय को रद्द करने या वापस लेने पर विचार कर सकती है।
CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान यह भी संकेत दिया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था से कानून के अनुरूप कार्य करने की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी निर्णय में वैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन पाया जाता है तो अदालत उचित कार्रवाई कर सकती है।
इस मामले में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी, डिप्टी चुनाव कमिश्नर मनीष गर्ग और डीजी (आईटी) सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया गया है।
मामले में पटना निवासी राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका में मुख्य सवाल यह उठाया गया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने ऐसे अधिकारों का इस्तेमाल अकेले किया, जिनका प्रयोग बहुसदस्यीय चुनाव आयोग को सामूहिक रूप से करना चाहिए था।
याचिका में ऐसे निर्णयों को अधिकार क्षेत्र के बाहर लिया गया निर्णय घोषित करने की मांग की गई है। साथ ही अंतिम निर्णय होने तक CEC ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज से अलग रखने की मांग भी की गई है।
याचिकाकर्ता ने अपने तर्क में संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके सामूहिक अधिकारों का इस्तेमाल किसी एक सदस्य द्वारा एकतरफा नहीं किया जा सकता।
वहीं अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर दूसरी याचिका में भी CEC द्वारा कथित तौर पर एकतरफा निर्णय लिए जाने का मुद्दा उठाया गया है। इसमें कथित वैधानिक उल्लंघनों को लेकर CEC और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है।
इस याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान Form 6 में कथित बदलाव का मुद्दा भी उठाया गया है। Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सॉफ्टवेयर में पूर्व SIR से जुड़े विवरण और वंश संबंधी जानकारी से संबंधित अतिरिक्त जरूरतें जोड़ी गईं, जबकि इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट की नजर चुनाव आयोग की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब और उन 14 विवादित फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड पर है। अदालत की अगली कार्रवाई इस बात पर महत्वपूर्ण रूप से निर्भर करेगी कि चुनाव आयोग इन निर्णयों की प्रक्रिया, अधिकार और बहुसदस्यीय व्यवस्था के तहत लिए जाने को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है।
