मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में बड़ा बदलाव! अब बेटी के खाते में सीधे आएंगे 64 हजार रुपये, जानिए नया नियम

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के लिए संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि का बड़ा हिस्सा सीधे नवविवाहिता के बैंक खाते में भेजा जाएगा। नए प्रावधान के तहत विवाह के बाद कन्या के खाते में 64 हजार रुपये सीधे हस्तांतरित किए जाएंगे। इस बदलाव से लाभार्थियों को आर्थिक सहायता प्राप्त करने में सुविधा होगी और भुगतान प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी हो सकेगी।
योजना के तहत सरकार एक जोड़े पर कुल एक लाख रुपये तक खर्च करती है। हालांकि, अब समारोह के आयोजन और वर-वधू को दी जाने वाली उपहार सामग्री पर होने वाले खर्च को कम कर सहायता राशि का बड़ा हिस्सा सीधे कन्या के खाते में देने की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ पात्र एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को दिया जाता है। योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होता है। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग की ओर से पात्रता, दस्तावेजों और बैंक खाते समेत जरूरी जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन में पात्र पाए जाने वाले जोड़ों को आगामी सामूहिक विवाह समारोह में शामिल किया जाएगा।
इस वित्तीय वर्ष में जिले को 779 जोड़ों के सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य दिया गया है। लक्ष्य की तुलना में अब तक केवल 325 आवेदन प्राप्त हुए हैं। वित्तीय वर्ष के छह महीने बीत जाने के बाद भी आवेदन की संख्या कम होने से निर्धारित लक्ष्य हासिल करना विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों की ओर से पात्र परिवारों तक योजना की जानकारी पहुंचाने और अधिक से अधिक आवेदन कराने का प्रयास किया जा रहा है।
सामूहिक विवाह समारोह के आयोजन की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग को नोडल विभाग के रूप में दी गई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी अर्चना के मुताबिक, प्राप्त आवेदनों का सत्यापन पूरा होने के बाद सामूहिक विवाह समारोह अक्टूबर के अंत या नवंबर के पहले सप्ताह में आयोजित किए जाने की संभावना है। हालांकि, समारोह की अंतिम तारीख सत्यापन और अन्य तैयारियां पूरी होने के बाद ही निर्धारित की जाएगी।
नई व्यवस्था में सरकार का जोर पात्र लाभार्थियों तक योजना का सीधा लाभ पहुंचाने, भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने और पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने पर है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है।