CEC ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस का बड़ा हमला, जयराम रमेश ने कहा- ‘तुरंत इस्तीफा दें’

नई दिल्ली, (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को बड़ा राजनीतिक हमला बोला। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।
जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर न्यायमूर्ति भुइयां के संबोधन से संबंधित खबर साझा की। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति की टिप्पणी मतदान के अधिकार और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखती है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इन टिप्पणियों के बाद निर्वाचन आयोग के मौजूदा रुख, खासकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर, नए सवाल खड़े होते हैं।
रमेश ने आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति भुइयां ने निर्वाचन प्रक्रिया और नागरिकों के मताधिकार को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही हैं। कांग्रेस महासचिव ने इन्हीं टिप्पणियों को आधार बनाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और उनसे पद छोड़ने की मांग की।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संदर्भ में अपनी राजनीतिक टिप्पणियों में इस्तेमाल किए जाने वाले ‘जी-2’ शब्द का भी उल्लेख किया। रमेश का यह बयान ऐसे समय आया है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच राजनीतिक बहस लगातार तेज है।
दरअसल, न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने रविवार को हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में 19वीं न्यायमूर्ति बी.आर. साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने मतदान के अधिकार को लेकर संवैधानिक दृष्टिकोण सामने रखा।
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि ऐसी कोई प्रक्रिया, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अपने मताधिकार से वंचित हो जाएं, स्वाभाविक रूप से मनमानी के सवालों के घेरे में आ सकती है। उन्होंने इस तरह की स्थिति को संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान मतदान के अधिकार के आधार पर नागरिकों को दो अलग-अलग वर्गों में बांटने की अनुमति नहीं देता। उनके अनुसार ऐसी कोई प्रक्रिया, जिसमें बड़े पैमाने पर नागरिक मताधिकार से बाहर हो जाएं, संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 के अनुरूप होने पर सवाल खड़े कर सकती है।
न्यायमूर्ति भुइयां ने मतदान के अधिकार को नागरिक की संवैधानिक पहचान से जुड़े व्यापक संदर्भ में भी रेखांकित किया। उनकी यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस जारी है।
हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध विवरण के अनुसार न्यायमूर्ति भुइयां ने अपने संबोधन में निर्वाचन आयोग की SIR प्रक्रिया का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया था। कांग्रेस ने उनकी संवैधानिक टिप्पणियों को SIR और निर्वाचन आयोग से जुड़े अपने सवालों के समर्थन में पेश किया है।
ऐसे में जयराम रमेश की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को कांग्रेस का राजनीतिक रुख माना जा रहा है। न्यायमूर्ति भुइयां की टिप्पणी को सीधे तौर पर CEC के खिलाफ निष्कर्ष के रूप में पेश करना कांग्रेस की राजनीतिक व्याख्या है।
