Friday, July 3, 2026
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रूपईडीहा पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, दो घायल, दो गिरफ्तार

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिले के रूपईडीहा थाना क्षेत्र में गुरुवार की अल सुबह पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। इस मुठभेड़ में दो बदमाशों के पैर में गोली लग गई, जबकि दो अन्य को पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया। घायल बदमाशों को इलाज के लिए पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चर्दा ले जाया गया। जहाँ से डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज बहराइच रेफर कर दिया। दोनों घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार रूपईडीहा के प्रभारी निरीक्षक को ज़रिए मुखबिर सूचना मिली कि हाल ही में 2 नवम्बर को ग्राम कोदरैला और नौव्वागाँव में हुई चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले बदमाश पटना कॉलोनी की तरफ से चिकनिया रोड होते हुए ग्राम सहाबा के पास आने वाले हैं। सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी नानपारा के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक रूपईडीहा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और चिकनिया रोड पर घेराबंदी की।
कुछ देर बाद एक ईको वैन पटना कॉलोनी की दिशा से आती दिखाई दी। पुलिस टीम ने जब वाहन को रुकने का संकेत दिया तो उसमें सवार दो बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जबकि दो अन्य बदमाश मौके से भागने लगे। पुलिस ने भी आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें दो बदमाशों के पैरों में गोली लग गई और वे मौके पर ही गिर पड़े। वहीं भागने का प्रयास कर रहे दो अन्य बदमाशों को पुलिस टीम ने दौड़ाकर पकड़ लिया।
घायल बदमाशों की पहचान मुनौव्वर और जोखे के रूप में हुई है। उनके पास से एक-एक तमंचा 315 बोर नाजायज और नाल में फंसा एक-एक फायर किया गया कारतूस बरामद हुआ है। गिरफ्तार किए गए अन्य दो बदमाशों के नाम छोटे लाल और बबलू खान बताए गए हैं।
पुलिस के अनुसार चारों बदमाश जनपद लखीमपुर खीरी के निवासी हैं और इनमें से तीन पर पहले से इनाम घोषित है। दो बदमाशों पर ₹15,000/- ₹15,000/- तथा एक पर ₹10,000/- का इनाम घोषित था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये बदमाश रूपईडीहा क्षेत्र में सक्रिय गैंग के सदस्य हैं और कई आपराधिक घटनाओं में संलिप्त रहे हैं।
मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। क्षेत्राधिकारी नानपारा ने बताया कि गिरफ्तार बदमाशों से पूछताछ की जा रही है और उनसे चोरी की घटनाओं से संबंधित कई अहम जानकारियाँ मिलने की उम्मीद है। पुलिस ने घटना स्थल से कारतूस, तमंचे और ईको वैन को कब्जे में लेकर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

🌍 इतिहास के पन्नों में दर्ज 6 नवम्बर : संघर्ष, स्वतंत्रता और परिवर्तन का दिन

इतिहास के पन्ने जब भी 6 नवम्बर की तारीख पर खुलते हैं, तब यह दिन कई ऐसे निर्णायक मोड़ों की गवाही देता है जिन्होंने विश्व राजनीति, समाज, स्वतंत्रता आंदोलनों और मानवता की दिशा तय की। भारत, अमेरिका, अफ्रीका से लेकर यूरोप तक—इस तिथि ने अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को जन्म दिया, जिन्होंने सभ्यता के सफर को नया आयाम दिया। आइए जानते हैं, 6 नवम्बर के दिन घटित वे महत्वपूर्ण घटनाएँ जो आज भी इतिहास के आईने में चमकती हैं।
1763 – ब्रिटिश सेना का पटना पर कब्ज़ा: सत्ता की लड़ाई का निर्णायक अध्याय
6 नवम्बर 1763 को ब्रिटिश फौज ने मीरकासिम को परास्त करते हुए पटना पर कब्जा कर लिया। यह घटना भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। बंगाल की सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की ब्रिटिश रणनीति ने भारतीय राज्यों की राजनीतिक स्वायत्तता को खत्म कर दिया, जिससे आने वाले वर्षों में अंग्रेजों का प्रभुत्व और भी दृढ़ हो गया।

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1813 – मैक्सिको ने स्पेन की दासता से पाई स्वतंत्रता
6 नवम्बर 1813 को मैक्सिको ने स्पेन से स्वतंत्रता की घोषणा की। यह सिर्फ एक राजनीतिक परिवर्तन नहीं था, बल्कि उपनिवेशवाद के विरुद्ध लड़ी गई उस वैश्विक लड़ाई का हिस्सा था, जिसने दुनिया भर में स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरणा दी। इस दिन को आज भी मैक्सिको में गर्व और बलिदान के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
1844 – स्पेन ने डोमिनिकन गणराज्य को दी स्वतंत्रता
स्पेन द्वारा 1844 में डोमिनिकन गणराज्य की स्वतंत्रता की मान्यता देना कैरेबियन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। लंबे संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता के बाद यह राष्ट्र आजाद हुआ। इस घटना ने लैटिन अमेरिकी देशों के स्वतंत्रता संग्राम को और बल प्रदान किया।
1860 – अब्राहम लिंकन बने अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति
6 नवम्बर 1860 को अब्राहम लिंकन अमेरिका के सोलहवें राष्ट्रपति चुने गए। उनका कार्यकाल अमेरिकी इतिहास में एक निर्णायक अध्याय लेकर आया। उन्होंने दासता के उन्मूलन, नागरिक अधिकारों और मानव समानता के लिए जो संघर्ष किया, वह आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत है।

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1903 – पनामा की स्वतंत्रता को अमेरिका ने दी मान्यता
अमेरिका ने 6 नवम्बर 1903 को पनामा की स्वतंत्रता को मान्यता दी। इस मान्यता ने अमेरिका को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण “पनामा नहर” क्षेत्र पर प्रभावशाली नियंत्रण का अवसर दिया, जो आगे चलकर वैश्विक व्यापार का केंद्र बना।
1913 – गांधी जी की गिरफ्तारी: सत्याग्रह का इतिहास गवाह बना
दक्षिण अफ्रीका में भारतीय खनन मजदूरों की रैली का नेतृत्व करते हुए 6 नवम्बर 1913 को महात्मा गांधी को गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी गांधी जी के अहिंसक आंदोलन को और भी मजबूत करने का कारण बनी। इस दिन का उल्लेख भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में साहस और सत्य के प्रतीक के रूप में किया जाता है।
1943 – नेताजी को सौंपे गए अंडमान-निकोबार द्वीप समूह
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 6 नवम्बर 1943 को जापान ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सौंपे। नेताजी ने इन द्वीपों का नाम “शहीद” और “स्वराज द्वीप” रखा। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की वैश्विक मान्यता का प्रतीक बनी।

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1949 – यूनान में गृहयुद्ध का अंत
1949 में यूनान (ग्रीस) में लंबे समय से चल रहे गृहयुद्ध का अंत हुआ। इस युद्ध ने ग्रीस की राजनीतिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया था। शांति की इस बहाली ने यूरोप में लोकतंत्र की नींव को और मजबूत किया।
1962 – राष्ट्रीय रक्षा परिषद की स्थापना
भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 6 नवम्बर 1962 को राष्ट्रीय रक्षा परिषद (National Defence Council) की स्थापना की गई। चीन युद्ध के बाद यह कदम भारत की सामरिक तैयारी और रक्षा नीतियों में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम था।
1990 – नवाज शरीफ बने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री
6 नवम्बर 1990 को नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चुने गए। उनके कार्यकाल ने पाकिस्तान की राजनीति में आर्थिक सुधारों और सैन्य हस्तक्षेपों दोनों के दौर को देखा। यह दिन पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास का अहम अध्याय है।
1994 – अफगानिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र शांति योजना को दी मंजूरी
6 नवम्बर 1994 को बुरहानुद्दीन रब्बानी गुट ने संयुक्त राष्ट्र की अफगान शांति योजना को स्वीकृति दी। यह कदम अफगानिस्तान में दशकों से चल रही हिंसा को कम करने की दिशा में एक उम्मीद की किरण साबित हुआ।
1998 – सियाचिन युद्धविराम प्रस्ताव अस्वीकार
भारत ने सियाचिन क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए युद्धविराम का प्रस्ताव दिया, जिसे पाकिस्तान ने 6 नवम्बर 1998 को नामंजूर कर दिया। यह घटना भारत-पाक संबंधों में जारी तनाव का प्रतीक बनी रही।
2000 – ज्योति बसु ने छोड़ा मुख्यमंत्री पद
लगातार 23 वर्षों तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु ने 6 नवम्बर 2000 को अपने पद से इस्तीफा दिया। उनका कार्यकाल भारतीय राजनीति में स्थिरता, समाजवाद और जनसंपर्क की मिसाल बना रहा।
2004 – रूस ने क्योटो प्रोटोकॉल को दी स्वीकृति
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में 6 नवम्बर 2004 को रूस ने क्योटो करार को मंजूरी दी। यह विश्वव्यापी जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसने ग्लोबल वार्मिंग पर नियंत्रण के प्रयासों को नई गति दी।
2008 – भारतीय बैंकिंग सुधार की दिशा में कदम
6 नवम्बर 2008 को भारतीय स्टेट बैंक ने प्रधान ब्याज दर (जीएलआर) और जमा दरों में कटौती की घोषणा की। यह कदम वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए उठाया गया था।
2013 – सीरिया और इराक में हिंसक धमाके
6 नवम्बर 2013 को सीरिया की राजधानी दमिश्क में आत्मघाती हमले में आठ लोगों की मौत और 50 घायल हुए, वहीं इराक की राजधानी बगदाद में हुए धमाके में 15 लोगों की जान गई। इन घटनाओं ने मध्य पूर्व में फैली आतंकवादी अस्थिरता को फिर उजागर किया।
2013 – सचिन तेंदुलकर और प्रो. सी.एन.आर. राव को मिला ‘भारत रत्न’
इसी दिन 2013 में भारत सरकार ने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और विख्यात वैज्ञानिक प्रो. सी.एन.आर. राव को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” देने की घोषणा की। यह खेल और विज्ञान दोनों क्षेत्रों में भारत की वैश्विक पहचान का सम्मान था।
🌟 6 नवम्बर का दिन विश्व इतिहास में अनेक निर्णायक क्षणों का साक्षी रहा है। चाहे वह स्वतंत्रता संग्राम की मशाल रही हो, राजनीतिक परिवर्तन का मोड़ या मानवता की रक्षा का प्रयास — हर घटना ने समाज को नई दिशा दी। यह तारीख हमें बताती है कि संघर्ष और संकल्प के बीच ही इतिहास के सबसे उज्ज्वल अध्याय लिखे जाते हैं।

यंग डायबिटीज पेशेंट्स में सबसे पहले आंखों पर दिखता है असर, जानिए क्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी और कैसे करें बचाव

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत में डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और अब इसका असर युवाओं में भी दिखने लगा है। ICMR–India Diabetes 2024 की स्टडी के अनुसार, देश में हर छठा डायबिटीज पेशेंट 40 साल से कम उम्र का है। कम उम्र में डायबिटीज होना भविष्य में कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, जिनमें से एक है डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) — एक ऐसी स्थिति जो आंखों के रेटिना को नुकसान पहुंचाती है और अंधेपन का खतरा बढ़ा देती है।

क्या है डायबिटिक रेटिनोपैथी?

यह एक आंखों से जुड़ी जटिलता है, जो लंबे समय तक ब्लड शुगर के असंतुलन से होती है। जब ब्लड शुगर लगातार बढ़ा रहता है, तो रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाएं (blood vessels) कमजोर हो जाती हैं, जिससे सूजन, ब्लीडिंग या नई असामान्य सेल्स का निर्माण होने लगता है। इससे धीरे-धीरे दृष्टि पर असर पड़ता है और इलाज न होने पर अंधापन भी हो सकता है।

युवाओं में बढ़ रहा खतरा

ऑल इंडिया ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसायटी 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 40 साल से कम उम्र के 12–15% डायबिटीज पेशेंट्स में रेटिनोपैथी के शुरुआती लक्षण दिखने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रेटिना डायबिटीज का पहला टारगेट होता है और शुरुआत में कोई लक्षण न दिखने के कारण मरीज इसे अनदेखा कर देते हैं। इसलिए, हर साल आंखों की जांच और ब्लड शुगर कंट्रोल बेहद जरूरी है।

आधुनिक जीवनशैली से बढ़ रहा खतरा

लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर, तनाव, स्क्रीन टाइम, नींद की कमी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन इस समस्या को और बढ़ाते हैं। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और स्मोकिंग रेटिना की कोशिकाओं को कमजोर कर देते हैं।

आंखों की सुरक्षा कैसे करें?

ब्लड शुगर लेवल को नियमित रूप से मॉनिटर करें और कंट्रोल में रखें।

डाइट में हरी सब्जियां, फल, फाइबर, मछली, अलसी, अखरोट शामिल करें।

रिफाइंड फूड की जगह साबुत अनाज और मिलेट्स का सेवन करें।

रोजाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी करें।

पर्याप्त पानी पिएं और 7–8 घंटे की नींद लें।

Disclaimer: यह लेख विभिन्न शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी उपचार या व्यायाम की शुरुआत से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

दिल्ली से वाराणसी जा रही स्लीपर बस हादसे का शिकार, आगरा एक्सप्रेसवे पर पलटी – 40 यात्री गंभीर रूप से घायल

उन्नाव/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। दिल्ली से वाराणसी जा रही एक निजी एसी स्लीपर बस (नं. BR 28 P 9488) बुधवार देर रात भीषण हादसे का शिकार हो गई। यह दर्दनाक घटना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के मटरिया हसनगंज (उन्नाव) इलाके में रात करीब 2:30 बजे हुई, जब बस एक्सप्रेसवे से नीचे उतरकर पलट गई। हादसे में 40 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण ओवर स्पीडिंग और घने कोहरे को माना जा रहा है। सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम, पुलिस और एंबुलेंस टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

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प्रत्यक्षदर्शी विजय प्रकाश तिवारी, जो अपने परिवार के साथ बस में सवार थे, ने बताया कि बस शाम छह बजे दिल्ली से रवाना हुई थी और हादसे के वक्त अधिकांश यात्री सो रहे थे। अचानक बस अनियंत्रित होकर नीचे पलट गई, जिससे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत कंट्रोल रूम को सूचना दी, जिसके बाद घायलों को उन्नाव और लखनऊ के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। देर रात तक राहत कार्य जारी रहा।

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🌾 खरीफ के बाद अब रबी की तैयारी—जानिए कैसे करें सफल बुआई, जोताई, खाद व सिंचाई की पूरी जानकारी

लखनऊ (RkpNews डेस्क) खरीफ की फसल अब लगभग कट चुकी है। कहीं खेतों में धान की बालियाँ झूमकर किसानों को मुस्कान दे रही हैं तो कहीं बारिश और तूफान ने मेहनत की फसल को मिट्टी में मिला दिया। कई किसान अपनी लगन से फसल बचाने में सफल हुए हैं, जबकि कुछ किसान प्रकृति की मार से निराश हैं। परंतु यही तो खेती का धर्म है — उम्मीद और परिश्रम से अगली फसल की ओर बढ़ना।
अब रबी की फसल का मौसम दरवाज़े पर है। गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों, मटर जैसी फसलें इस मौसम में बोई जाती हैं। आइए जानते हैं कि किसान भाई रबी की बुआई कैसे करें ताकि इस बार उपज बेहतर हो और मेहनत का पूरा फल मिले।

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🌱 1. खेत की जोताई और तैयारी
रबी फसल के लिए खेत को अच्छी तरह दो से तीन बार जोतना आवश्यक है। पहली जोताई गहरी होनी चाहिए ताकि खरपतवार और कीटों के अंडे नष्ट हो जाएं। इसके बाद पाटा चलाकर मिट्टी को भुरभुरी बना लें।
यदि खरीफ की फसल के अवशेष खेत में हों तो उन्हें अच्छी तरह पलटकर मिट्टी में मिला दें — इससे जैविक खाद का काम मिलेगा।

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🌾 2. बीज का चयन और उपचार
अच्छे बीज ही अच्छी फसल की नींव हैं।
गेहूं: 40-45 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है।
चना/मटर: 25-30 किलोग्राम बीज प्रति एकड़।
सरसों: 2-2.5 किलोग्राम बीज प्रति एकड़।बीज बोने से पहले उन्हें थायरम या कार्बेन्डाजिम (2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचारित करें। इससे बीज जनित रोग नहीं लगते और अंकुरण बेहतर होता है।
💧 3. सिंचाई का प्रबंधन
रबी की फसल मुख्यतः सिंचाई पर निर्भर करती है।
गेहूं को कम से कम 4-5 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है — पहली सिंचाई अंकुरण के 20-25 दिन बाद करें।
सरसों में 2-3 सिंचाई पर्याप्त रहती है।
चना और मसूर जैसी दालों में केवल आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें ताकि पौधों में सड़न न हो।
🌿 4. खाद और उर्वरक का प्रयोग
फसल के अनुसार खाद की मात्रा अलग-अलग होती है, लेकिन सामान्य रूप से प्रति एकड़ खेत में:
डीएपी: 50 किलोग्राम
यूरिया: 25-30 किलोग्राम
पोटाश: 10-15 किलोग्राम
गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट: 2-3 ट्रॉली
खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच करवा लें ताकि पोषक तत्वों की कमी को सही मात्रा में पूरा किया जा सके।
🌻 5. खरपतवार और रोग नियंत्रण
रबी फसलों में शुरुआती 30 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए आईसोप्रोट्यूरॉन या पेंडीमेथालिन जैसे शाकनाशी का प्रयोग किया जा सकता है।
फसलों में कीट या रोग दिखते ही तुरंत कृषि विभाग या स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह लें।
🌤️ 6. मौसम पर निगरानी
रबी फसल ठंडे और शुष्क मौसम में पनपती है, लेकिन यदि मौसम असामान्य हो तो सिंचाई और छिड़काव का समय समायोजित करें।
वारिस या ओले से बचाव के लिए फसलों के किनारों पर पवनरोधी पेड़ लगाने की योजना भी भविष्य के लिए लाभकारी होगी।
🌾 कृषि सिर्फ श्रम नहीं, बल्कि विज्ञान और धैर्य का संगम है। खरीफ के बाद रबी का मौसम किसान को नई उम्मीद देता है। सही जोताई, उपयुक्त बीज, संतुलित खाद, समय पर सिंचाई और सतर्कता — यही सफल खेती के पाँच स्तंभ हैं।
अगर किसान इन बिंदुओं पर ध्यान दें तो न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि प्रकृति की चुनौती भी अवसर में बदलेगी।
आप के लिए प्रस्तुत जानकारी RKPnews के द्वारा इसकी पुष्टि नहीं की जाति की इस प्रकार उपज की निश्चित रहेगी। क्षेत्र के हिसाब से अच्छे कृषि जानकार से राय अवश्य ले।

विष्णु भगवान की उत्पत्ति: सृष्टि के संतुलन की अनंत कथा

सनातन धर्म के वेदों और पुराणों में विष्णु भगवान को सृष्टि के पालनहार के रूप में जाना गया है। विष्णु पुराण में उनकी उत्पत्ति का रहस्य अत्यंत गूढ़, आध्यात्मिक और ब्रह्मांडीय रहस्यों से भरा है। कहा गया है कि जब यह सम्पूर्ण सृष्टि अस्तित्व में नहीं थी — न आकाश था, न जल, न अग्नि, न वायु, न पृथ्वी — उस समय केवल एक विराट ब्रह्म स्वरूप विद्यमान था, जिसे “परब्रह्म” या “परमात्मा” कहा गया। उसी परम तत्व से भगवान विष्णु का प्राकट्य हुआ, जो सृष्टि के संरक्षण और संतुलन के लिए स्वयं अवतरित हुए।

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🌊 प्रलय काल में शेषनाग पर विश्रामरत विष्णु
विष्णु पुराण के अनुसार, जब संपूर्ण सृष्टि प्रलय के जल में विलीन हो गई थी, तब केवल विष्णु ही शेषनाग पर शयन करते हुए “क्षीरसागर” में विराजमान थे। उनके नाभि से एक कमल उत्पन्न हुआ, और उसी कमल पर ब्रह्मा जी का प्राकट्य हुआ। यही वह क्षण था जब सृष्टि की पुनः रचना आरंभ हुई।
विष्णु की नाभि से निकला कमल सृजन का प्रतीक है, और ब्रह्मा जी को ज्ञान व चेतना का आधार प्रदान करता है। इस प्रकार, विष्णु भगवान ही सृष्टि के मूल कारण, पालनकर्ता और अंतिम शरण हैं।

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🌞 विष्णु — त्रिमूर्ति का संतुलन केंद्र
विष्णु पुराण में वर्णित है कि सृष्टि के तीन रूप — ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता), विष्णु (पालनहार) और महेश (संहारक) — एक ही परम तत्व के भिन्न भिन्न स्वरूप हैं। इनमें विष्णु भगवान वह ऊर्जा हैं जो जीवन को गति और दिशा देते हैं।
वह केवल देवताओं के ही नहीं, अपितु हर जीव के रक्षक हैं। जब भी धर्म का ह्रास होता है और अधर्म बढ़ता है, तब विष्णु भगवान अपने अवतार लेकर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना करते हैं — जैसे राम, कृष्ण, नरसिंह, वामन, परशुराम आदि रूपों में।

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🌼 विष्णु का शांति और करुणा से जुड़ा स्वरूप
विष्णु भगवान का स्वरूप स्नेह, करुणा और संतुलन से परिपूर्ण है। उनका शयन, उनके चार भुजाओं में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करना, सब गूढ़ अर्थ लिए हुए है —
शंख – जीवन का आरंभ और ध्वनि का प्रतीक,
चक्र – समय और धर्म की रक्षा का प्रतीक,
गदा – अन्याय और अहंकार के दमन का संकेत,
पद्म – निर्मलता और ज्ञान का प्रतीक।
इन प्रतीकों के माध्यम से विष्णु भगवान यह संदेश देते हैं कि सच्चा धर्म वही है जो सबके हित में हो, जो संतुलन बनाए रखे और जीवन को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करे।

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🌺 भावनात्मक संदेश
विष्णु भगवान की कथा केवल एक धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि यह सिखाती है कि जब भी संसार में अंधकार बढ़ता है, तब कोई न कोई “विष्णु तत्व” अवश्य प्रकट होता है — जो संतुलन, करुणा और धर्म की रक्षा करता है।
विष्णु का अर्थ ही है — “जो सर्वत्र व्याप्त हो।” इसलिए वे केवल देवता नहीं, बल्कि हर जीव के भीतर विद्यमान करुणा, प्रेम और कर्तव्य का प्रतीक हैं।

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🕉️ विष्णु पुराण की यह प्रथम कथा हमें यह समझाती है कि सृष्टि का संचालन केवल शक्ति से नहीं, बल्कि संतुलन, करुणा और धर्म से होता है। भगवान विष्णु उस ब्रह्मांडीय संतुलन के प्रतीक हैं — जो अनादि भी हैं और अनंत भी। हम आगे जानेंगे कैसे विष्णु ने सृष्टि की रक्षा के लिए प्रथम अवतार धारण किया और धर्म की नींव रखी।

वन्दे मातरम्: राष्ट्रभावना का अमर जयघोष

150 वर्षों की प्रेरक यात्रा- मातृभूमि से राष्ट्रीय चेतना तक

• नवनीत मिश्र

भारत की स्वतंत्रता संग्राम यात्रा में “वन्दे मातरम्” वह अमर मंत्र है, जिसने समस्त देशवासियों के हृदय में देशभक्ति की ज्योति प्रज्वलित की। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा सन् 1875 में रचित यह गीत केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की आत्मा सिद्ध हुआ। 150 वर्षों की इस गौरवपूर्ण यात्रा में यह गीत राष्ट्रीय चेतना, एकता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का शाश्वत प्रतीक बन चुका है।
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में “वन्दे मातरम्” गीत की रचना की थी। संस्कृत और बांग्ला भाषा के समन्वय से रचित इस गीत में भारत माता की दिव्य और जीवनदायिनी छवि उकेरी गई हैl “सुजलाम् सुफलाम् मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलाम् मातरम्।” इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने मातृभूमि को जीवंत शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया, जो अपने संतानों को अन्न, जल और जीवन प्रदान करती है। यह गीत तत्कालीन परिस्थितियों में भारतीय समाज के स्वाभिमान और राष्ट्रीय गौरव की पुनर्स्थापना का माध्यम बना।
उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जब देश पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा था, तब “वन्दे मातरम्” स्वतंत्रता सेनानियों का प्रेरणास्रोत बना। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा इसका प्रथम गायन हुआ। इसके पश्चात 1905 के बंग-भंग आंदोलन में यह गीत राष्ट्रीय आंदोलन की आत्मा बन गया। स्वतंत्रता सेनानियों की सभाओं, जुलूसों और आंदोलनों में “वन्दे मातरम्” उद्घोष के रूप में गूंजता रहा। अंग्रेज़ी शासन ने इसे विद्रोह का प्रतीक मानकर प्रतिबंधित किया, परंतु राष्ट्रभक्तों ने इसे अपने जीवन का अंग बना लिया। अरविंद घोष ने कहा थाl “वन्दे मातरम् कोई गीत नहीं, यह वह मंत्र है जिसने भारत को एक राष्ट्र के रूप में जागृत किया।”
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को “वन्दे मातरम्” को राष्ट्रगीत का दर्जा प्रदान किया। यह निर्णय इस गीत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्ता का औपचारिक सम्मान था। यद्यपि “जन गण मन” को राष्ट्रगान घोषित किया गया, किंतु “वन्दे मातरम्” को समान आदर और सम्मान के साथ राष्ट्र की पहचान के रूप में स्वीकार किया गया।
“वन्दे मातरम्” का प्रभाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने साहित्य, संगीत, कला और जनजीवन के प्रत्येक क्षेत्र को स्पर्श किया। लता मंगेशकर, हेमंत कुमार और ए. आर. रहमान जैसे कलाकारों ने इसे अपने स्वरों में अमर कर दिया। जब यह गीत गूंजता है तो हर भारतीय का हृदय गर्व और श्रद्धा से भर उठता है। सिनेमा, रंगमंच और राष्ट्रीय आयोजनों में यह गीत आज भी भारतीय अस्मिता और एकता का प्रतीक बना हुआ है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जब भारत आत्मनिर्भरता, विज्ञान, संस्कृति और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है, तब “वन्दे मातरम्” का संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। यह गीत स्मरण कराता है कि राष्ट्रप्रेम केवल भावनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि कर्म, निष्ठा और उत्तरदायित्व का प्रतीक है। नई पीढ़ी के लिए यह गीत प्रेरणा का स्रोत है, जो उन्हें यह सिखाता है कि मातृभूमि की सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।
150 वर्षों की इस यात्रा में “वन्दे मातरम्” ने समय, सत्ता और पीढ़ियों की सीमाओं को पार कर लिया है। यह गीत भारतीय एकता, आत्मगौरव और मातृभक्ति की शाश्वत भावना का प्रतीक है। जब भी यह स्वर गूंजता है, तब भारत की आत्मा में वही चेतना जाग उठती है, जिसने कभी स्वतंत्रता संग्राम को जन्म दिया था।
वन्दे मातरम्, भारत की आत्मा की अनंत ध्वनि, जो युगों-युगों तक अमर रहेगी।

कार्तिक पूर्णिमा पर सरयू तट बिड़हर घाट पर आस्था का उमड़ा सैलाब, दीपोत्सव में हजारों दीपों से झिलमिलाया घाट

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली के पावन अवसर पर जिले के सरयू तट स्थित बिड़हर घाट पर बुधवार को भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया। तड़के से ही श्रद्धालु परिवार सहित स्नान, दान और पूजा-अर्चना के लिए घाट पर पहुंचने लगे। पूरे दिन सरयू तट आस्था, भक्ति और उत्साह का केंद्र बना रहा।
शाम होते ही बिड़हर घाट हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। दीपों की कतारों से सजा घाट दृश्य अत्यंत मनमोहक लग रहा था। श्रद्धालुओं ने “हर हर सरयू मईया” और “हर हर महादेव” के जयघोष के बीच माता सरयू की आरती में भाग लिया। आरती के दौरान वातावरण भक्ति-संगीत और घंटा-घड़ियालों की ध्वनि से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने दीपोत्सव में सहभागी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। सरयू तट पर दीप प्रवाहित कर लोगों ने अपने परिवारों की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और जीवन में उजियारे की कामना की। इस अवसर पर घाट पर पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हुए।
पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की दीपावली कहा जाता है। इस दिन भगवान हरि-हर के पूजन, स्नान और दान से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी भावना के साथ श्रद्धालु दिनभर सरयू तट पर डटे रहे।
प्रशासन एवं पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्थानीय प्रशासन, नगर पंचायत एवं सामाजिक संगठनों ने घाटों की साफ-सफाई, रोशनी और श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु विशेष व्यवस्था की थी।

बिहार चुनाव 2025: पहले चरण में 121 सीटों पर 1314 उम्मीदवार, दांव पर 16 मंत्रियों की साख

पटना (राष्ट की परम्परा)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान गुरुवार आज होगा। सुबह 7 बजे से वोटिंग शुरू होगी और इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पहले चरण में 3.75 करोड़ मतदाता 1,314 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। इस चरण में मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव, सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा समेत कुल 16 मंत्रियों की साख दांव पर है।

तेजस्वी यादव बनाम सतीश कुमार — राघोपुर सीट पर मुकाबला

राजद नेता तेजस्वी यादव राघोपुर सीट से लगातार तीसरी जीत दर्ज करने की कोशिश में हैं। उनका मुकाबला बीजेपी के सतीश कुमार से है, जिन्होंने 2010 में राबड़ी देवी को हराया था। जन सुराज पार्टी ने यहां से चंचल सिंह को उम्मीदवार बनाया है।

महुआ सीट पर तेज प्रताप यादव की परीक्षा

महुआ विधानसभा सीट पर तेज प्रताप यादव इस बार बहुकोणीय मुकाबले में हैं। आरजेडी के मुकेश रोशन, लोजपा (राम विलास) के संजय सिंह और निर्दलीय आसमा परवीन इस सीट पर मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं।

16 मंत्रियों की किस्मत दांव पर

पहले चरण में बीजेपी के 11 और जेडीयू के 5 मंत्री मैदान में हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं —

मंगल पांडेय (सीवान), नितिन नवीन (बांकीपुर), सम्राट चौधरी (तारापुर), विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय), जीवेश मिश्रा (जाले), संजय सरावगी (दरभंगा शहरी), विजय कुमार चौधरी (सराय रंजन), श्रवण कुमार (नालंदा)

बीजेपी नेता मंगल पांडेय पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं।

चर्चित उम्मीदवार और हॉट सीटें

सीवान की रघुनाथपुर सीट पर दिवंगत शाहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब मैदान में हैं।

अलीनगर से लोक गायिका मैथिली ठाकुर (भाजपा)

छपरा से भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव (राजद)

करगहर से रितेश पांडेय (जन सुराज)
भी चुनावी मैदान में हैं।
वहीं मोकामा सीट दो बाहुबलियों की वजह से सुर्खियों में है — अनंत सिंह (जेडीयू) बनाम वीणा देवी (राजद)।

121 सीटों पर मतदान, 45,341 बूथ बनाए गए

पहले चरण में कुल 121 सीटों पर मतदान होगा। दीघा (पटना) में सबसे अधिक 4.58 लाख मतदाता हैं, जबकि बरबीघा (शेखपुरा) में सबसे कम 2.32 लाख। इस चरण में कुढ़नी और मुजफ्फरपुर में सर्वाधिक 20-20 उम्मीदवार हैं।
कुल 3.75 करोड़ मतदाता, जिनमें 1.98 करोड़ पुरुष, 1.76 करोड़ महिलाएं और 758 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं, अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

निर्वाचन आयोग ने 121 सामान्य, 18 पुलिस और 33 व्यय पर्यवेक्षकों की तैनाती की है। मतदान मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सीवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर जिलों में होगा।

प्रदेश के समस्त जनपदों में स्थानीय नदियों में मत्स्य उत्पादन की वृद्धि-मत्स्य मंत्री

बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)l मत्स्य मंत्री उ0प्र0 संजय कुमार निषाद ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनान्तर्गत रीवर रैचिंग के तहत रोहू नैन, भाकुर मछली का 2 लाख बीज अमहट घाट नदी में डाला। उन्होंने कहा कि प्रदेश के समस्त जनपदों में स्थानीय नदियों में मत्स्य उत्पादन की वृद्धि एवं मत्स्य व्यवसाय में रोजगार हेतु यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मछलियां नदियों में बढ़ रहे जलीय प्रदूषण के रोकथाम में सहायक होती हैं। नदियों में कई प्रजाति की मछलियां विलुप्त हो रही हैं, उनका संरक्षण कर मत्स्य संपदा को बढ़ावा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि मछुआ समुदाय को नदियों में मत्स्य आखेट करके रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा आम जन को उच्चकोटि को प्रोटीनयुक्त आहार उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि मछुआ समुदाय के लोगों को 5 लाख रूपये निःशुल्क इलाज की सुविधा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत गोल्डन कार्ड उपलब्ध कराकर प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना, निषादराज बोट सब्सिडी, मत्स्य पालक कल्याण कोष, सामूहिक दुर्घटना बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड की योजनाएं विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। जनपद के पात्र आवेदक आवेदन करके इन सभी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर उन्होंने सर्किट हाउस में विभागीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभाग द्वारा संचालित समस्त योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति को शत प्रतिशत अवश्य मिले, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मत्स्य पालकों के हित में अनेक योजनाएं संचालित हैं। जिनके माध्यम से तालाब पट्टा, मत्स्य बीज वितरण, जैव फ्लॉक तकनीक, मत्स्य प्रशिक्षण योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों को दिया जाय।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी, विधायक प्रतिनिधि हर्रैया सरोज मिश्रा, जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्सना, मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल, अपर जिलाधिकारी प्रतिपाल सिंह चौहान, अपर पुलिस अधीक्षक, उप निदेशक मत्स्य डा0 महेश कुमार चौहान, सहायक निदेेशक मत्स्य सिद्धार्थनगर नन्दकिशोर निषाद, मुख्य कार्यकारी अधिकारी भूपेन्द्र सिंह, संदीप वर्मा, मत्स्य निरीक्षक प्रहलाद कुमार यादव, राहुल चौधरी, शशि प्रकाश, सहायक सांख्यिकीय अधिकारी सचिन गुप्ता सहित सम्बन्धित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

मिर्जापुर में कालका एक्सप्रेस से कटकर 6 महिलाओं की दर्दनाक मौत, कार्तिक पूर्णिमा पर मचा कोहराम

मिर्जापुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।बुधवार को मिर्जापुर जनपद उस वक्त दहल उठा जब चुनार रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं से भरी भीड़ के बीच एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। कालका एक्सप्रेस ट्रेन से कटकर 6 महिलाओं की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में मरने वालों में दो सगी बहनें भी शामिल हैं। यह भीषण दुर्घटना कार्तिक पूर्णिमा के पावन स्नान के दौरान हुई, जब हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए स्टेशन पहुंचे थे।

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💥 हादसे का मंजर: पलक झपकते ही बिछ गईं लाशें
जानकारी के अनुसार चुनार स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर चोपन पैसेंजर ट्रेन पहुंची थी। भीड़ इतनी अधिक थी कि कई श्रद्धालु प्लेटफॉर्म पर न उतरकर दूसरी ओर के ट्रैक से पार उतरने लगे।
उसी समय तेज रफ्तार से कालका एक्सप्रेस वहां से गुजरी — और एक पल में कई महिलाएं उसकी चपेट में आ गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुरुष तो किसी तरह प्लेटफॉर्म पर चढ़ गए, लेकिन महिलाएं नहीं चढ़ पाईं और पलभर में ट्रेन के नीचे आकर उनके शवों के टुकड़े 50 मीटर तक बिखर गए।रेलवे अधिकारियों ने बताया कि कालका एक्सप्रेस का चुनार स्टेशन पर कोई स्टॉपेज नहीं था, इसलिए ट्रेन पूरी स्पीड में थी। हादसा इतना भयावह था कि लोग संभलने तक नहीं पाए।

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😢 पहचान और गांव में मातम मृतकों में शामिल हैं —
सविता (28) और साधना (15) — सगी बहनें
शिवकुमारी (17) अंजू देवी (20) कलावती देवी (50), सोनभद्र निवासी एक अन्य महिला की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है।
सभी महिलाएं मिर्जापुर के खमरिया गांव से आई थीं। एक ही गांव की पांच महिलाओं के एक साथ मौत की खबर से पूरा इलाका मातम में डूब गया है।

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🙏 सुशीला देवी का चमत्कारिक बचाव
हादसे के बाद पहले सुशीला देवी (60) के मरने की खबर भी फैली, लेकिन जब लेखपाल जांच करने पहुंचे, तो वह जिंदा मिलीं।
सुशीला ने बताया — “भीड़ ज्यादा थी, मैं ट्रेन से उतर नहीं पाई… और इसी वजह से मेरी जान बच गई।”
उनकी जीवित मिलने की खबर ने गांव में थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन माहौल अब भी ग़मगीन है।

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🚔 प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
डीएम पवन गंगवार ने बताया कि भीड़ अधिक होने के कारण यात्री गलत दिशा में ट्रैक पार कर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ।
जीआरपी एसपी प्रशांत वर्मा ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा के इंतजाम थे, लेकिन श्रद्धालु दूसरी ओर उतर गए। लापरवाही की जांच की जा रही है।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक जताया और मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

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💬 प्रत्यक्षदर्शी बोले – “जैसे ही ट्रेन गुजरी, सब कुछ खत्म हो गया”प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब ट्रेन प्लेटफॉर्म से गुजरी तो कुछ ही सेकंड में सब खत्म हो गया। “ट्रेन गुजरने के बाद जब धुआं छटा, तो ट्रैक पर सिर्फ लाशें और बिखरे कपड़े नजर आ रहे थे।”हादसे की इस भयावह तस्वीर ने हर किसी का दिल झकझोर दिया।
🕯️ शोक और सवाल दोनों बाकी हैं
कार्तिक पूर्णिमा जैसे पुण्य पर्व पर हुई यह घटना न केवल पूरे मिर्जापुर बल्कि पूरे प्रदेश को हिला गई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि इतनी भीड़ के बावजूद ट्रेन को धीमी गति से क्यों नहीं गुजारा गया और भीड़ प्रबंधन में चूक क्यों हुई?

🚨 रील वाले सिपाही अब ड्यूटी से बाहर! CM योगी का सख्त आदेश – अनुशासन तोड़ा तो तैनाती रुकेगी

यूपी पुलिस अनुशासन और सेवा भावना की प्रतीक है, इसे सोशल मीडिया के दिखावे से धूमिल नहीं होने देंगे

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।उत्तर प्रदेश में अब रील बनाना पुलिसकर्मियों को भारी पड़ सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन पुलिसकर्मियों की सोशल मीडिया पर रील या वीडियो बनाने की आदत है, उन्हें संवेदनशील ड्यूटी पॉइंट्स से तुरंत हटाया जाए।

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मुख्यमंत्री ने हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि प्रदेश की पुलिस अनुशासन, सेवा भावना और जवाबदेही की मिसाल बने। उन्होंने चेतावनी दी कि “रील संस्कृति” में उलझे पुलिसकर्मियों की तैनाती अब किसी भी संवेदनशील क्षेत्र या वीआईपी ड्यूटी में नहीं की जाएगी।

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योगी सरकार ने साफ किया है कि वर्दी में रहते हुए किसी भी तरह का प्रमोशनल वीडियो, म्यूजिक रील या सोशल मीडिया एक्टिंग अनुशासनहीनता मानी जाएगी।
यह फैसला उन लगातार वायरल हो रहे वीडियो पर आया है जिनमें कई पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान रील बनाते दिखाई दिए थे।

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मुख्यमंत्री ने कहा —“पुलिस का काम जनता की सुरक्षा और सेवा करना है, सोशल मीडिया पर छवि बनाने का नहीं। अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी।”
सूत्रों के अनुसार, अब पुलिस मुख्यालय सभी जिलों से ऐसे मामलों की सूची तैयार कर रहा है और डीजीपी स्तर पर मॉनिटरिंग टीम बनाई जा रही है।

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📍मुख्य बिंदु:संवेदनशील ड्यूटी पॉइंट्स पर रील बनाने वाले पुलिसकर्मियों की तैनाती पर रोक मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में दिए कड़े निर्देश पुलिस की छवि को सोशल मीडिया से नहीं, सेवा और अनुशासन से बनाना होगा।रील बनाने वाले पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई संभव है।

घघरुआ खण्डेसर में नाबालिग को उल्टा लटकाकर पीटने वाले चार आरोपी गिरफ्तार

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधीक्षक सोमेन्द्र मीना के नेतृत्व में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत घुघली पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। घुघली थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत घघरुआ खण्डेसर में मोबाइल चोरी के शक में एक नाबालिग बालक को पेड़ से उल्टा लटका कर बेरहमी से पीटने की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आज चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

घटना के संबंध में 04 नवंबर 2025 को थाना घुघली में मु0अ0सं0 394/2025 धारा 115(2), 127(4), 190, 191(2), 351(3) BNS के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई नईम पुत्र हातिम, निवासी घघरुआ खण्डेसर उम्र लगभग 30 वर्ष, साहिल पुत्र सफीउल्लाह, निवासी घघरुआ खण्डेसर उम्र लगभग 20 वर्ष तथा दो बाल अपचारी।

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इस संबंध थानाध्यक्ष घुघली ने बताया कि सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर विधिक कार्रवाई की जा रही है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में जनाक्रोश शांत है,और पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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दोहरीघाट में विकास की नई इबारत: मंत्री ए.के. शर्मा ने 36 करोड़ की 79 परियोजनाओं का किया लोकार्पण और शिलान्यास

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मंगलवार को जनपद मऊ के आदर्श नगर पंचायत दोहरीघाट में सरयू नदी तट पर आयोजित एक भव्य जनसभा में 36 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 79 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में वंदन योजना, दीनदयाल नगर विकास योजना और अन्य नगर विकास योजनाओं के तहत पेयजल आपूर्ति नेटवर्क विस्तार, जल निकासी, नाली निर्माण, सड़क सुदृढ़ीकरण, ओपन जिम, पार्क निर्माण, सॉलिड वेस्ट प्रबंधन, स्ट्रीट लाइटिंग, सार्वजनिक शौचालय और नगर सौंदर्यीकरण जैसे कार्य शामिल हैं।

मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि विकास जनता की सेवा का माध्यम है और इसे रुकने नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रत्येक नगर और नागरिक के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार “स्वच्छ नगर – स्वस्थ नागरिक – सशक्त प्रदेश” के संकल्प के साथ तेजी से कार्य कर रही है, ताकि हर नागरिक को सुविधाजनक, सुरक्षित और सम्मानजनक शहरी जीवन मिल सके।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच “सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास” के अनुरूप प्रदेश में गांव से लेकर शहर तक विकास की गूंज सुनाई दे रही है। जनता की भागीदारी के बिना कोई योजना सफल नहीं हो सकती — इसलिए नागरिकों को भी नगर विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि दोहरीघाट के नागरिकों ने जिस समर्पण से स्वच्छता और विकास को आगे बढ़ाया है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक उपस्थित रहे। लोगों ने मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि इन परियोजनाओं से दोहरीघाट नगर का कायाकल्प होगा तथा नागरिकों को वर्षों पुरानी समस्याओं से राहत मिलेगी।

तेज रफ्तार ई-रिक्शा ने पूर्व सैनिक को रौंदा

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के बांसडीहरोड–सहतवार मार्ग पर मंगलवार की सुबह दर्दनाक हादसा हो गया। छाता गांव के समीप टहलने निकले 72 वर्षीय पूर्व सैनिक रामसुरेश सिंह को तेज रफ्तार ई-रिक्शा ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर कार्रवाई शुरू की।

रघुनाथपुर निवासी रामसुरेश सिंह सेना से सेवानिवृत्त होकर गांव में रह रहे थे। प्रतिदिन की तरह मंगलवार सुबह टहलने निकले थे कि तभी सहतवार की ओर से आ रहे अनियंत्रित ई-रिक्शा ने उन्हें रौंद दिया। हादसे के बाद ग्रामीणों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

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घटना की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी मधु देवी और परिजन रो-रोकर बेहाल हैं। स्थानीय लोगों ने ई-रिक्शा को पकड़ लिया है, जबकि चालक फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

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