Friday, July 3, 2026
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यूपी के मिर्जापुर में दर्दनाक ट्रेन हादसा: छह महिलाओं की मौत, शवों के हुए कई टुकड़े, पोस्टमार्टम में कांपे डॉक्टर

मिर्जापुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के चुनार रेलवे स्टेशन पर बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। कालका मेल (नेताजी एक्सप्रेस) की चपेट में आने से दो सगी बहनों समेत छह महिलाओं की मौके पर मौत हो गई। सभी महिलाएं कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने जा रही थीं। हादसे के बाद रेलवे ट्रैक पर क्षत-विक्षत शवों के कई टुकड़े बिखर गए, जिन्हें देख डॉक्टर और पोस्टमार्टम स्टाफ कांप उठे।

जानकारी के मुताबिक, सभी महिलाएं चोपन-प्रयागराज पैसेंजर ट्रेन से उतरी थीं। ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर चार पर रुकी थी। महिलाएं जल्दबाजी में रेलवे ट्रैक पार कर प्लेटफॉर्म नंबर तीन की तरफ जा रही थीं, तभी नेताजी एक्सप्रेस ट्रेन (12311) आ गई और छह महिलाएं उसकी चपेट में आ गईं। हादसा इतना भयावह था कि किसी शव के पूरे अंग नहीं बचे। पहचान केवल कपड़ों और गहनों से की गई।

हादसे की सूचना मिलते ही डीएम पवन गंगवार, राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल, जीआरपी व आरपीएफ के जवान मौके पर पहुंचे। सरकार ने पीड़ित परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। राज्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर शोक व्यक्त किया है।

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मृतकों में मिर्जापुर की चार महिलाएं और सोनभद्र की एक महिला कलावती (57) शामिल हैं। कलावती ने अपनी तीन पौत्रियों को बचा लिया, लेकिन खुद ट्रेन की चपेट में आ गईं। हादसे में छठवें शव की पहचान अब तक नहीं हो सकी है।

लोगों ने शवों को मालवाहक वाहन से भेजे जाने पर नाराजगी जताई और सवाल उठाया कि इतने बड़े हादसे के बाद भी एंबुलेंस क्यों नहीं भेजी गई। पोस्टमार्टम हाउस पर भारी भीड़ और फोर्स तैनात रही।

स्थानीय लोगों ने बताया कि फुट ओवरब्रिज (FOB) स्टेशन के दक्षिणी छोर पर होने के कारण लोग सीधा रास्ता अपनाते हुए रेलवे ट्रैक पार करते हैं, जिससे ऐसे हादसे आम हो गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए जल्द नया फुट ओवरब्रिज बीच में बनाने की मांग उठी है।

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश ने की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

गोरखपुर के एसआईआर कार्यों की समीक्षा, डीएम दीपक मीणा को दिए आवश्यक निर्देश

गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लखनऊ से बृहस्पतिवार को राज्यभर के जिलों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्वाचन कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान गोरखपुर जिले से जिला निर्वाचन अधिकारी एवं डीएम दीपक मीणा, सहायक निर्वाचन अधिकारी/एडीएम (वित्त) विनीत कुमार सिंह, तथा जनपद के सभी उप जिलाधिकारी ऑनलाइन जुड़कर उपस्थित रहे। बैठक में आगामी विधानसभा निर्वाचन से पूर्व चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने गोरखपुर जिले की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होना चाहिए और कोई भी पात्र मतदाता वंचित न रह जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जहां मतदाता स्थानांतरित हो चुके हैं या मृत्यु हो गई है, उन नामों को सूची से हटाने की प्रक्रिया भी पूरी सावधानी से की जाए।

बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विशेष रूप से कहा कि गणना प्रपत्रों (काउंटिंग फॉर्म) को प्रत्येक बीएलओ को समय से उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे घर-घर जाकर जानकारी एकत्र कर सकें। उन्होंने सभी बीएलओ को निर्देशित किया कि वे प्रत्येक मतदाता के घर पहुंचकर सत्यापन करें और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने का कार्य प्राथमिकता से करें।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में गोरखपुर से जुड़े अधिकारियों में एसडीएम सदर दीपक गुप्ता, एसडीएम चौरीचौरा कुंवर सचिन सिंह, एसडीएम कैंपियरगंज सिद्धार्थ पाठक, एसडीएम सहजनवा केशरी नंदन तिवारी, एसडीएम खजनी राजेश प्रताप सिंह, एसडीएम बांसगांव प्रदीप सिंह और एसडीएम गोला अमित जायसवाल मौजूद रहे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि प्रत्येक एसडीएम अपने-अपने क्षेत्र के सुपरवाइजरों और बीएलओ से सतत संपर्क बनाए रखें और प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजें। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य निष्पक्ष, पारदर्शी और सटीक मतदाता सूची तैयार करना है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही या त्रुटि स्वीकार्य नहीं होगी।

इस दौरान डीएम दीपक मीणा ने बताया कि जिले में एसआईआर कार्य तेजी से प्रगति पर है। सभी तहसीलों में सुपरवाइजरों और बीएलओ को आवश्यक प्रशिक्षण एवं सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन कर रहे हैं और फॉर्म-6, 7, 8 एवं 8ए के माध्यम से नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन का कार्य किया जा रहा है।
डीएम ने कहा कि गोरखपुर प्रशासन निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पूर्ण पालन कर रहा है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिले में मतदाता सूची शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित तैयार हो। उन्होंने सभी एसडीएम से कहा कि वे अपने क्षेत्र की लगातार समीक्षा करें और जहां भी कठिनाई आए, उसे तत्काल जिला निर्वाचन कार्यालय के माध्यम से समाधान कराया जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अंत में कहा कि लोकतंत्र की सशक्त नींव सही मतदाता सूची पर निर्भर करती है। इसलिए सभी अधिकारी मिशन मोड में काम करें ताकि आगामी निर्वाचन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से संपन्न हो सके।

कांग्रेस कार्यकर्ता बृजेश सिंह के आकस्मिक निधन पर शोक

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। मझौली राज नगर पंचायत के वार्ड नं 12 निवासी कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता बृजेश सिंह का आकस्मिक निधन वृहस्पतिवार को सुबह हो गया। इनके निधन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ब्लॉक कार्यालय पर बैठक कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस दौरान वक्ताओं ने इनके निधन को दल व समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया। शोक व्यक्त करने वालों में जिला उपाध्यक्ष डॉ धर्मेन्द्र पांडेय, ब्लॉक अध्यक्ष मनीष कुमार रजक, अखिलेश मिश्र,परमानन्द प्रसाद, सोनू कुमार, राजू खान,यूसुफ खान,सादिक अली, एम ए खान,पारस निषाद, सत्यवान पांडेय, अशोक कुमार,सुच्चन खान,डॉ याहिया अंजुम, मोहन प्रसाद, सुरेंद्र यादव, कौशलेंद्र वर्मा,विपिन पांडेय, भोला मिश्र, अवधेश यादव, अवधेश पांडेय, बब्लू पासवान, प्रभुनाथ शर्मा,डॉ नरेन्द्र यादव आदि प्रमुख रूप से शामिल हुए। अंत में मृतात्मा की शान्ति के लिए दो मिनट के लिए मौन धारण किया गया।

गो-तस्कर इनामी अपराधी पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार

तमंचा और कारतूस बरामद

गोरखपुर(राष्ट्र क़ी परम्परा)
खोराबार पुलिस ने गो-तस्करी में वांछित और 25,000 के इनामी अपराधी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। देर रात थाना खोराबार पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त पर थी, तभी उन्हें सूचना मिली कि गो-तस्करी से संबंधित मुकदमे का वांछित अभियुक्त मोटरसाइकिल से बनसप्ति माता मंदिर तिराहे की ओर आ रहा है।
सूचना पर पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की। कुछ देर बाद एक व्यक्ति बिना नंबर प्लेट की मोटरसाइकिल पर सवार आता दिखाई दिया। पुलिस ने जब उसे रुकने का संकेत दिया तो उसने अचानक पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी, पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी फायर किया। मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से आरोपी घायल हो गया, जिसे पुलिस ने मौके पर ही पकड़ लिया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान पप्पू शाह पुत्र मन्नू शाह निवासी अहिरौली दुबौली तकिया थाना गोपालपुर जिला गोपालगंज (बिहार) के रूप में हुई है। पप्पू शाह गो-तस्करी, पशु क्रूरता और उत्पाद अधिनियम से जुड़े कई गंभीर मामलों में वांछित चल रहा था। आरोपी के खिलाफ पहले से ही मु0अ0सं0 720/2024 धारा-5A/8 गो-हत्या निवारण अधिनियम व 11 पशु क्रूरता अधिनियम और मु0अ0सं0 20/2023 धारा 30(क) म0नि0 एवं उत्पाद अधिनियम 2018 व 11(D)(F) पशु क्रूरता अधिनियम जैसे मामले दर्ज हैं।
पुलिस ने मौके से एक देशी तमंचा .315 बोर, एक फायर हुआ खोखा कारतूस, एक जिंदा कारतूस तथा घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस ने पकड़े गए अपराधी के खिलाफ मु0अ0सं0 701/2025 धारा 109(1) बीएनएस व 3/25/27 आर्म्स एक्ट के तहत नया मुकदमा पंजीकृत किया है।
मुठभेड़ में घायल होने के बाद आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि पप्पू शाह लंबे समय से गो-तस्करी और अवैध पशु परिवहन में सक्रिय था। बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर वह कई बार अपने गिरोह के साथ गोवंश की तस्करी कर चुका है।
खोराबार थानाध्यक्ष इत्यानन्द पांडेय के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है। टीम ने न केवल इनामी अपराधी को पकड़ने में सफलता पाई, बल्कि अवैध हथियार और कारतूस भी बरामद किए। पुलिस अब उसके सहयोगियों और गो-तस्करी से जुड़े अन्य नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभियुक्त के खिलाफ साक्ष्य एकत्र कर उसे जल्द न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। गो-तस्करी रोकने के लिए क्षेत्र में पुलिस की विशेष निगरानी और गश्त तेज कर दी गई है।

बिहार चुनाव में बवाल: डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के काफिले पर चप्पलें फेंकीं, बोले– “राजद के गुंडों की छाती पर चलेगा बुलडोजर”

Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान लखीसराय में बड़ा बवाल देखने को मिला। बुधवार को भाजपा प्रत्याशी और राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के काफिले पर लोगों ने चप्पलें और गोबर फेंककर विरोध जताया। मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया। बताया जा रहा है कि यह घटना लखीसराय विधानसभा क्षेत्र के खुड़ियारी गांव की है, जहां बूथ संख्या 404 और 405 पर बूथ कैप्चरिंग की सूचना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमला पहुंचा था।

सूत्रों के अनुसार, जब डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा इलाके में पहुंचे, तो राजद समर्थकों ने ‘विजय कुमार सिन्हा मुर्दाबाद’ के नारे लगाए और उनकी गाड़ी को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इसी दौरान भीड़ ने जूते-चप्पल और गोबर फेंककर विरोध किया। घटना की जानकारी मिलते ही एसपी अजय कुमार दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और फ्लैग मार्च कर स्थिति को सामान्य किया।

विजय कुमार सिन्हा ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “राजद के गुंडे मुझे गांव में जाने नहीं दे रहे हैं, मेरे पोलिंग एजेंट को भगा दिया गया है। उन्हें पता है कि एनडीए सत्ता में आ रही है, इसलिए उनकी छाती पर बुलडोजर चलेगा।” पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

मैं मिट्टी का दिया हूँ…

फल-फूल, पान-सुपाड़ी, मिष्ठान,
मुद्रा गणेश-लक्ष्मी को अर्पण किये हैं,
कलश के जल,अच्छत,रोली आदि
माँ गौरी गणेश को समर्पित किये हैं।

इन सबको ससम्मान सहेज लिया है,
सम्मान सहित उपभोग भी किया है,
मैं मिट्टी का दिया हूँ, रातभर जला हूँ,
अंत में मिट्टी में ही मिलना चाहता हूँ।

दीपावली की अमावस्या बीत गई,
जलाये गये दीपक अब बुझ गये हैं,
दीपकों की बत्तियाँ अब अधजली हैं,
इन्हें सम्मान से विसर्जित करना है।

बुझे दीपकों को एकत्र करना है,
सम्मान के साथ सहेज रखना है,
अमावस्या के अंधेरे को इन्होंने,
टिमटिमाते हुये हमें रोशनी दी है।

आदित्य जग में औरों को जला
कर खुश होने वाले बहुत होते हैं,
पर मिट्टी के ये दीपक तो ख़ुद ही
जलकर जमाने को रोशनी देते हैं।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

तकनीकी खामियों, बहिष्कार और प्रशासनिक लापरवाही के बावजूद शांतिपूर्ण हो रहा मतदान

नाराज़गी दिव्यांग मतदाताओं को सुविधाओं की कमी, आयोग के आदेशों पर उठे सवाल

रोड नहीं तो वोट नहीं” – विकास की अनदेखी पर गांवों ने जताई

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग गुरुवार को 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर पूरी हुई। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें नजर आईं। महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर मतदान किया, जिससे लोकतंत्र की जड़ों की मजबूती एक बार फिर दिखी।
हालांकि, लोकतांत्रिक जोश के बीच कुछ इलाकों से मतदान बहिष्कार, EVM खराबी और दिव्यांग मतदाताओं को सुविधा न मिलने की शिकायतें भी सामने आईं। कुल मिलाकर चुनाव आयोग की सख्त निगरानी में मतदान शांतिपूर्ण माना गया, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाहियों ने आयोग की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।
विकास कार्यों की अनदेखी पर ग्रामीणों का गुस्सा पहले चरण में कई इलाकों में ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया।

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दरभंगा के कुशेश्वरस्थान में सुघराईन गांव के लोगों ने सड़क न बनने पर “रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा बुलंद किया।
पटना के फतुहा विधानसभा क्षेत्र में ज़मीन विवाद के कारण पूरा गांव मतदान से दूर रहा।
सोनवर्षा के जमालनगर में ग्रामीणों ने विकास कार्यों की अनदेखी पर विरोध दर्ज कराया।
मुजफ्फरपुर के गायघाट विधानसभा के तीन बूथों (161, 162, 170) पर पुल और सड़क निर्माण में देरी के कारण ग्रामीणों ने वोट डालने से इंकार किया।

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इन बहिष्कारों ने चुनावी प्रक्रिया में जनता की नाराज़गी और विकास की मांग को मुखर रूप में सामने रखा।
मतदान केंद्रों पर घटनाएं और लापरवाही
पटना के हाजीपुर गांव में बूथ नंबर 254 पर ड्यूटी के दौरान पीठासीन अधिकारी राजेश की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तत्काल स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनका ब्लड प्रेशर अधिक पाया गया।
बिहार शरीफ में बीजेपी के चार कार्यकर्ताओं को पर्चियां बांटने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया, जिससे RJD और BJP कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बनी।

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पटना साहिब सीट पर विधानसभा अध्यक्ष और बीजेपी विधायक नंदकिशोर यादव और मतदानकर्मियों के बीच वोटर कार्ड दिखाने को लेकर हुई नोकझोंक भी चर्चा का विषय रही।
दिव्यांग मतदाताओं की उपेक्षा
नालंदा जिले के हिलसा विधानसभा क्षेत्र में बूथ नंबर 297 और 298 पर दिव्यांग मतदाताओं को व्हीलचेयर जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिली। चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद ऐसी लापरवाही ने प्रशासनिक असंवेदनशीलता को उजागर किया। कई दिव्यांग मतदाताओं को लाइन में लगकर घंटों इंतजार करना पड़ा।

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लोकतंत्र में जनता का भरोसा कायम
इन सबके बीच सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि बिहार का मतदाता आज भी लोकतंत्र पर विश्वास रखता है। चुनौतियों, असुविधाओं और उपेक्षा के बावजूद मतदाता वोट डालने निकले। कई जिलों में मतदान का प्रतिशत 60 से अधिक रहा, जो लोकतांत्रिक चेतना की जीवंत मिसाल है।

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पहले चरण की वोटिंग ने यह दिखा दिया कि बिहार के मतदाता केवल वोट नहीं डालते — वे व्यवस्था को आईना भी दिखाते हैं। उन्हें चाहिए एक संवेदनशील प्रशासन, भरोसेमंद व्यवस्था और जवाबदेह नेतृत्व।

नल-जल योजना में लापरवाही से करंट लगने से युवक की मौत, सरपंच और नल चालक पर केस दर्ज

बालाघाट (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। ग्राम गुमतरा में सितंबर माह में हुए करंट हादसे में अब बड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि नल-जल योजना के तहत बोर तक जाने वाले बिजली के तार बिना सुरक्षा मानकों के खेतों से गुजारे गए थे, जिनकी चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई थी। जांच पूरी होने के बाद सरपंच विजनबाई धुर्वे और नल चालक विशाल डिमाक के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

ऐसे हुआ हादसा

गांव के वेदप्रकाश धराड़े (28) 12 सितंबर की सुबह खेत में घास काट रहे थे। खेत के बीच से गुजरा बिजली का तार जमीन पर गिरा हुआ था। घास काटते समय दरांती उस तार से छू गई, जिससे तेज करंट का झटका लगा और वेदप्रकाश मौके पर ही गिर पड़े। परिजन और ग्रामीण उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

जांच में उजागर हुई बड़ी लापरवाही

जांच में पाया गया कि नल-जल योजना के बोर पंप तक जाने वाले बिजली तारों को ठीक से पोल पर नहीं बांधा गया था, न ही उनमें इन्सुलेशन या पाइपिंग की गई थी। धीरे-धीरे तार ढीला होकर खेत में गिर गया और यही युवक की मौत का कारण बना। पुलिस ने इसे स्पष्ट लापरवाही का मामला मानते हुए कार्रवाई शुरू की है।

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परिजनों ने जताई नाराजगी

मृतक के पिता ने कहा कि उन्होंने कई बार अधिकारियों और पंचायत को नीचे लटकते तारों के बारे में बताया था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों में भी इस घटना के बाद पंचायत के खिलाफ गहरा रोष है।

पुलिस का बयान

एएसआई अजय सल्लाम ने बताया कि जांच में लापरवाही साबित हुई है। केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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मेरठ में फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन कर 37.88 लाख की टैक्स चोरी, सर्वश्री बालाजी ट्रेडर्स के संचालक पर केस दर्ज

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कर 37.88 लाख रुपये की टैक्स चोरी करने का मामला सामने आया है। मेडिकल थाना पुलिस ने राज्य कर विभाग की तहरीर पर सर्वश्री बालाजी ट्रेडर्स के संचालक ऋषभ कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सहायक आयुक्त राज्य कर राकेश कुमार के अनुसार, फर्म ने 17 मार्च 2025 को जीएसटी पोर्टल पर एक फर्जी पते का इस्तेमाल कर रजिस्ट्रेशन कराया था। जांच में पता चला कि बताए गए पते पर पिछले 35 वर्षों से रानी देवी अपने परिवार के साथ रह रही हैं, और उन्होंने किसी फर्म को जगह किराए पर नहीं दी थी।

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आरोप है कि फर्म ने जून 2025 तक फर्जी बिल जारी कर और गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) दिखाकर करीब ₹37.88 लाख का लाभ उठाया। फर्म ने यह फर्जी आईटीसी अन्य कंपनियों को भी ट्रांसफर किया था। विभागीय जांच के बाद 8 अगस्त 2025 को सर्वश्री बालाजी ट्रेडर्स का जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया।

एसपी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी संचालक को बयान व स्पष्टीकरण के लिए तलब किया जाएगा।

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इंस्टाग्राम दोस्ती… फिर दो दिन होटल में बंधक बनाकर नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म, दो आरोपी हिरासत में

लखनऊ/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। सरोजनीनगर इलाके की एक 15 वर्षीय नाबालिग दलित किशोरी को इंस्टाग्राम पर बने दोस्त ने मिलने के बहाने बुलाकर दो दिन तक बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। यह दिल दहला देने वाली घटना लखनऊ के मड़ियांव स्थित एक होटल में हुई। मंगलवार दोपहर आरोपी किशोरी को उसके घर के पास छोड़कर फरार हो गए।

इंस्टाग्राम से दोस्ती, फिर होटल में हैवानियत

​पीड़ित किशोरी की मां के अनुसार, उनकी बेटी एक निजी स्कूल में कक्षा 7 की छात्रा है। करीब डेढ़ माह पहले आगरा एक्सप्रेसवे के पास रहने वाले विमल नाम के युवक से उसकी इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई थी, जिसके बाद वे फोन पर भी बात करने लगे थे।

​बीती 2 नवंबर की रात करीब 10 बजे, विमल ने किशोरी को घर से कुछ दूरी पर मिलने के लिए बुलाया। किशोरी जब बताई गई जगह पर पहुंची, तो विमल के साथ उसके दो साथी, पीयूष और शुभम मिश्रा भी मौजूद थे। तीनों आरोपी किशोरी को बहला-फुसलाकर एक स्कॉर्पियो गाड़ी में बैठाकर मड़ियांव के आईआईएम रोड स्थित एक होटल में ले गए।

आरोप है कि होटल के कमरे में विमल और पीयूष ने किशोरी को दो दिन तक बंधक बनाकर रखा और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

विरोध करने पर मारपीट और वीडियो की धमकी

​किशोरी का आरोप है कि जब उसने विरोध किया, तो आरोपियों ने उसे जानवरों की तरह पीटा। उन्होंने उसका मोबाइल फोन छीन लिया और धमकी दी कि उन्होंने उसका आपत्तिजनक वीडियो बना लिया है। उन्होंने किशोरी को चेतावनी दी कि अगर उसने किसी से शिकायत की, तो वे वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे।

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घर के पास छोड़कर भागे, पुलिस ने दर्ज किया केस

​दो दिन तक होटल के कमरे में बंद रहने के बाद, किशोरी के बार-बार गिड़गिड़ाने पर आरोपी उसे मंगलवार दोपहर उसके घर से कुछ दूर छोड़कर भाग गए। घर पहुंचकर किशोरी ने आपबीती अपनी मां को बताई।

​बुधवार को मां-बेटी सरोजनीनगर थाने पहुंची और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। डीसीपी साउथ निपुण अग्रवाल ने बताया कि इस मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो अधिनियम और एससी/एसटी एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। किशोरी का मेडिकल परीक्षण कराया गया है।

पुलिस कार्रवाई: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों – पीयूष और शुभम को हिरासत में ले लिया है। मुख्य आरोपी विमल की तलाश में दबिश दी जा रही है।

युवक ने गमछे के सहारे दी जान, दीपावली में घर लौटा था — परिवार में मचा कोहराम

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के मुसहरी गांव में एक युवक ने गुरुवार की सुबह अपने ही कमरे में गमछे का फंदा बनाकर पंखे की कुंडी से लटककर आत्महत्या कर ली। घटना से पूरे परिवार में कोहराम मच गया।

मिली जानकारी के अनुसार, नागेंद्र राव (30) पुत्र स्वर्गीय कृपा राव, जो कुछ दिनों पहले दीपावली पर बाहर से कमाकर घर लौटा था, बुधवार की शाम किसी बात को लेकर परिजनों से कहासुनी कर बैठा। इसके बाद रात में खाना खाकर अपने कमरे में चला गया।

सुबह जब नागेंद्र दरवाजा नहीं खोला, तो परिजनों को आशंका हुई। खिड़की से झांककर देखने पर वह गमछे से बने फंदे के सहारे पंखे की कुंडी से लटका मिला। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग इकट्ठा हो गए। सूचना पर रामपुर कारखाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

मृतक की अभी शादी नहीं हुई थी। बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां निर्मला देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

ग्राम पंचायत सोनरा में शव दाह गृह निर्माण की उठी मांग

समाजसेवी बृजेश शर्मा ने प्रशासन को सौप पत्र कहा– मानव जीवन का अंतिम संस्कार सम्मान पूर्वक होना चाहिए।

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर ब्लाक के ग्राम पंचायत सोनरा एवं सिसवनिया के ग्रामीणों ने लंबे समय से लंबित शव दाह गृह निर्माण को लेकर अपनी मांग को एक बार फिर जोरदार तरीके से उठाया है। मंगलवार को क्षेत्र के समाजसेवी बृजेश कुमार शर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधि मंडल संबंधित अधिकारियों से मिला और शव दाह गृह निर्माण की दिशा में जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए पत्र सौंपा।
प्राप्त समाचार के अनुसार सोनरा एवं सिसवनिया में रहने वाले लोगों को शव दाह के लिए दूरदराज स्थित अन्य गांवों के घाटों का सहारा लेना पड़ता है।

बरसात के दिनों में मार्ग की दुर्दशा और नजदीकी श्मशान घाट के अभाव में परिजनों को मृतक का अंतिम संस्कार कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार शव को ले जाने में घंटों का समय लग जाता है, जिससे परिजनों के साथ ही ग्रामीणों को भी भावनात्मक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए सोनरा, सिसवनिया, सहित आस-पास की बस्तियों के ग्रामीणों ने समाजसेवी एवं ग्राम प्रधान प्रत्याशी बृजेश कुमार शर्मा को अपनी पीड़ा से अवगत कराया। ग्रामीणों की समस्या से सहानुभूति रखते हुए शर्मा ने इस मामले में पहल की और ग्राम पंचायत की जरूरत को प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखते हुए रेहाव नाले पर शव दाह गृह निर्माण को शीघ्र शुरू कराए जाने हेतु लिखित पत्र प्रेषित किया। समाजसेवी ने कहा कि मानव जीवन का अंतिम संस्कार सम्मान पूर्वक होना चाहिए।

शव दाह गृह न होने के कारण ग्रामीणों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को चाहिए कि इस मुद्दे को प्राथमिकता में लेकर जल्द से जल्द शव दाह गृह निर्माण कार्य शुरू कराएं। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से इस मांग को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल सोनरा ग्राम पंचायत के लिए, बल्कि आस-पास के कई गांवों के लोगों को राहत देगी।

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इस दौरान अमरजीत शर्मा, मयंक मणि, सुभाष गुप्ता, शिवम शर्मा , जयहिंद वर्मा, श्रवण अग्रहरि, अनिकेत,रामधनी वर्मा , शिवशंकर ,दीपक , लालजी, रोहित कुमार, विजय, अरविंद सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने बताया कि यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन अथवा धरना देने को बाध्य होंगे।

वही स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि प्रशासन उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए शव दाह गृह के निर्माण कार्य को जल्द स्वीकृति प्रदान करेगा, ताकि भविष्य में किसी परिजन को अंतिम संस्कार के दौरान असुविधा न झेलनी पड़े।

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6 नवंबर को खो गए वो सितारे जिन्होंने भारत के इतिहास और समाज को रोशन किया


भारत के इतिहास में 6 नवंबर का दिन केवल घटनाओं का साक्षी नहीं, बल्कि उन महान विभूतियों की याद दिलाता है जिन्होंने अपने जीवन से राष्ट्र की दिशा और दशा को प्रभावित किया। इस दिन तीन ऐसे महापुरुषों का निधन हुआ जिन्होंने राजनीति, न्याय और कला जगत में अपने अमिट योगदान से भारतीय मानस पटल पर अमर छाप छोड़ी — सिद्धार्थ शंकर राय, संजीव कुमार और एच. जे. कनिया।
सिद्धार्थ शंकर राय: राजनीति में विवेक और नेतृत्व का प्रतीक

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सिद्धार्थ शंकर राय का जन्म 20 अक्टूबर 1920 को बंगाल के कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्रेसिडेंसी कॉलेज से प्राप्त की और आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए जहाँ उन्होंने विधि (Law) की डिग्री हासिल की। वकालत से लेकर राजनीति तक, उनका जीवन समर्पण और सिद्धांतों की मिसाल रहा।
1972 से 1977 तक वे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे। आपातकाल के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राय अपने सशक्त प्रशासनिक कौशल और संवेदनशील निर्णयों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें कीं।
6 नवंबर 2010 को उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनकी नीतियाँ और विचार आज भी बंगाल की राजनीतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं।

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संजीव कुमार: अभिनय का वो शिल्पकार जिसने भावनाओं को जीवंत किया
हिंदी सिनेमा के इतिहास में अगर अभिनय की गहराई और सहजता का कोई नाम लिया जाए तो संजीव कुमार सर्वोपरि हैं। 9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत जिले में जन्मे हरिभाई जरीवाला (संजीव कुमार) ने अपनी शिक्षा मुंबई में पूरी की और नाट्य मंच से अभिनय की शुरुआत की।
उनकी अभिनय यात्रा फिल्मों “शोले”, “आंधी”, “कोशिश”, “त्रिशूल” और “दस्तक” जैसी क्लासिक कृतियों से जुड़ी रही। उन्होंने अपने किरदारों में ऐसी सच्चाई और संवेदना भरी कि दर्शक उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि भावनाओं का जीवंत रूप मानते थे।
संजीव कुमार ने यह साबित किया कि अभिनय केवल संवाद बोलने की कला नहीं, बल्कि आत्मा से जुड़ी अनुभूति है। 6 नवंबर 1985 को मात्र 47 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनका जाना हिंदी सिनेमा के लिए एक ऐसी क्षति थी जिसकी भरपाई आज तक संभव नहीं हो पाई।
एच. जे. कनिया: भारतीय न्यायपालिका के गौरव स्तंभ
हरिलाल जेकिसुंदरदास कनिया, जिन्हें एच. जे. कनिया के नाम से जाना जाता है, स्वतंत्र भारत के प्रथम मुख्य न्यायाधीश थे। उनका जन्म 3 नवंबर 1890 को गुजरात के सूरत जिले में हुआ था। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि ली और लंदन के लिंकन इन से विधि की पढ़ाई पूरी की।
उनकी ईमानदारी, न्यायप्रियता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति समर्पण ने भारत की न्यायपालिका की नींव को मजबूत किया। 1950 में जब भारत गणराज्य बना, तब उन्हें सुप्रीम कोर्ट का पहला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
उन्होंने संविधान के व्यावहारिक और नैतिक दोनों पक्षों को समान रूप से महत्व दिया। उनके निर्णयों ने भारतीय न्याय व्यवस्था को एक मजबूत पहचान दी। 6 नवंबर 1951 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका नाम भारतीय न्याय प्रणाली के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
6 नवंबर का दिन हमें यह याद दिलाता है कि महानता केवल जीवित रहते हुए किए गए कार्यों में नहीं, बल्कि उन प्रेरणाओं में बसती है जो वे पीढ़ियों के लिए छोड़ जाते हैं। सिद्धार्थ शंकर राय ने राजनीति में नीति का मार्ग दिखाया, संजीव कुमार ने भावनाओं को स्वर दिया और एच. जे. कनिया ने न्याय की नींव को स्थिर किया। इन तीनों विभूतियों का जीवन भारतीय समाज के लिए एक दीपस्तंभ की तरह है।

रूसी कच्चे तेल के आयात में कटौती करेगा भारत, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रिफाइनरियां रोकेंगी सीधी खरीद

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत जल्द ही रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) की सीधी खरीद में कटौती करने जा रहा है। यह कदम 21 नवंबर 2025 से लागू होने वाले अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनज़र उठाया गया है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे भारत के रूसी तेल आयात में नवंबर के अंत से गिरावट देखी जा सकती है।

अमेरिका ने रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों — रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) — पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इसके तहत इन कंपनियों की अमेरिकी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाई जाएगी। साथ ही, जो देश या कंपनियां इनके साथ बड़े लेनदेन करेंगी, उन पर द्वितीयक प्रतिबंध (Secondary Sanctions) भी लग सकते हैं।

भारतीय रिफाइनरियां घटाएंगी सीधी खरीद

भारत के कुल रूसी तेल आयात में आधे से अधिक हिस्सेदारी रखने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज, मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (MRPL) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी जैसी रिफाइनरियां अमेरिकी नियमों का पालन करते हुए रूसी तेल की सीधी खरीद घटा या अस्थायी रूप से रोक सकती हैं।

दिसंबर में दिखेगा असर, अन्य देशों से बढ़ेगी खरीद

केप्लर (Kpler) के प्रमुख शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि 21 नवंबर के बाद रूसी तेल की खेपों में तेजी से कमी आएगी। दिसंबर में रूस से आयात में भारी गिरावट की संभावना है, हालांकि 2026 की शुरुआत में वैकल्पिक मार्गों और नए व्यापारिक चैनलों के जरिये स्थिति सामान्य हो सकती है।

रूसी तेल की कमी को पूरा करने के लिए भारतीय रिफाइनरियां पश्चिम एशिया, लैटिन अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका, कनाडा और अमेरिका से आयात बढ़ा रही हैं। अक्टूबर 2025 में भारत ने अमेरिका से 5.68 लाख बैरल प्रतिदिन क्रूड आयात किया, जो मार्च 2021 के बाद सर्वाधिक है।

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रिलायंस समेत तीन कंपनियों ने की कटौती की घोषणा

रिलायंस इंडस्ट्रीज का रोसनेफ्ट के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौता है, लेकिन उसने भी खरीदी में कमी का संकेत दिया है। वहीं, MRPL और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी ने भविष्य की रूसी खेपों को रोकने की घोषणा की है। हालांकि, नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी (गुजरात) — जिसमें रोसनेफ्ट की आंशिक हिस्सेदारी है — फिलहाल अपने मौजूदा आयात ढांचे को बरकरार रखेगी।

2025 की पहली छमाही में भारत ने रूस से औसतन 18 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया था, लेकिन अब इसमें तेज गिरावट की संभावना है।

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जिनकी उपलब्धियों ने भारत का मान बढ़ाया”

भारत का इतिहास केवल तिथियों का संकलन नहीं, बल्कि उन महान आत्माओं की गाथा है जिन्होंने अपने कर्म, साहस और समर्पण से समाज में अमिट छाप छोड़ी। 6 नवंबर का दिन ऐसे ही प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों के जन्म का साक्षी है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया।

भाविना पटेल — सीमाओं को लांघती हिम्मत की मिसाल
जन्म: 6 नवंबर 1986, मेहसाणा, गुजरात
भारत की प्रसिद्ध पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी भाविना हसमुखभाई पटेल प्रेरणा का पर्याय हैं। उन्होंने बचपन में ही पोलियो जैसी चुनौती का सामना किया, लेकिन उसे अपने जीवन की बाधा नहीं बनने दिया। अहमदाबाद के ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने खेल को अपना जीवन बनाया।
भाविना ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। वह भारत की पहली महिला पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी बनीं जिन्होंने पैरालंपिक में पदक जीता। उनके संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास ने उन्हें उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बना दिया जो जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं।

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जितेन्द्र सिंह — राजनीति में सेवा और समर्पण का प्रतीक
जन्म: 6 नवंबर 1956, जम्मू-कश्मीर
डॉ. जितेन्द्र सिंह भारतीय जनता पार्टी के एक अनुभवी और कर्मठ नेता हैं। पेशे से डॉक्टर रहे जितेन्द्र सिंह ने राजनीति में आकर जनसेवा को अपना जीवन मंत्र बना लिया। वे वर्तमान में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री (MoS) हैं और विज्ञान, तकनीक एवं उत्तर-पूर्व क्षेत्र के विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
उनका कार्यशैली साफ-सुथरी, पारदर्शी और विकास उन्मुख रही है। जम्मू-कश्मीर से लेकर पूरे भारत में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक सुधारों को लेकर उनके योगदान को सराहा जाता है। उन्होंने नौजवानों को विज्ञान और अनुसंधान की दिशा में प्रेरित किया, जिससे देश की नई पीढ़ी में नवाचार की लहर फैली।

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विजय कुमार कार्णिक — आसमान के सच्चे वीर
जन्म: 6 नवंबर 1939, नागपुर, महाराष्ट्र
भारतीय वायुसेना के वीर स्क्वाड्रन लीडर विजय कुमार कार्णिक ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में वह करिश्मा कर दिखाया जिसे इतिहास कभी नहीं भूल सकता। भुज एयरबेस पर जब दुश्मन के हमले में रनवे नष्ट हो गया था, तब कार्णिक ने स्थानीय 300 महिलाओं की मदद से रनवे को दोबारा तैयार कराया, जिससे भारतीय वायुसेना को युद्ध में निर्णायक बढ़त मिली।
उनकी वीरता और नेतृत्व को फिल्म “भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया” में अमर कर दिया गया। कार्णिक का नाम न केवल साहस, बल्कि महिला सशक्तिकरण की मिसाल के रूप में भी लिया जाता है। उनका जीवन संदेश देता है कि देशभक्ति केवल शब्द नहीं, बल्कि कर्म से साबित होती है।

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यशवंत सिन्हा — प्रशासन से राजनीति तक का अद्भुत सफर
जन्म: 6 नवंबर 1937, पटना, बिहार
यशवंत सिन्हा एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक अपनी गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में शिक्षा प्राप्त की और 1960 में IAS अधिकारी बने।
बाद में राजनीति में कदम रखकर वे भारत सरकार में वित्त मंत्री और विदेश मंत्री रहे। उनकी नीतियाँ और निर्णय देश की आर्थिक दिशा को स्थिरता प्रदान करने वाले साबित हुए। यशवंत सिन्हा को एक ईमानदार, स्पष्टवादी और दूरदर्शी नेता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती और जनता की आवाज को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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6 नवंबर का दिन केवल तारीख नहीं, यह संघर्ष, समर्पण और सफलता का प्रतीक है। भाविना की हिम्मत, जितेन्द्र सिंह की सेवा भावना, कार्णिक का पराक्रम और यशवंत सिन्हा की दूरदर्शिता — ये सभी उस भारत का चेहरा हैं जो कभी हार नहीं मानता। ऐसे महान व्यक्तित्वों का जन्मदिन हमें याद दिलाता है कि सीमाएं शरीर की नहीं, सोच की होती हैं।