Friday, July 3, 2026
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गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर जनपद के शिवपुर, सत्तीघाट, भुसौला, तिवारी घाट, गछिया बाबा और बहुआरा गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भोर होते ही श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए निकल पड़े। कोई पैदल तो कोई दोपहिया, चारपहिया वाहन या ई-रिक्शा से घाटों की ओर जाता दिखा।
श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद मां गंगा का पूजन-अर्चन कर दान-पुण्य किया और स्वयं को पुण्य का भागी माना। घाटों पर दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सभी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। शिवपुर घाट और सत्तीघाट पर पानी गहरा व खतरनाक होने के कारण पुलिस प्रशासन विशेष सतर्कता बरतता रहा। नायब तहसीलदार अनिल कुमार यादव ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।

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चौकी प्रभारी आशुतोष मद्धेशिया पुलिस बल के साथ लगातार घाटों पर निगरानी बनाए रखे हुए थे। पूरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और पवित्रता के वातावरण में गंगा स्नान का पुण्य अर्जित की l

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कर्मा देवी ग्रुप द्वारा “स्पर्धा 2025” खेल महोत्सव का भव्य शुभारंभ

संसारपुर/बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। कर्मा देवी ग्रुप द्वारा खेल महोत्सव का भव्य शुभारंभ किया गया यह खेल महोत्सव 05 नवम्बर से 09 नवम्बर तक आयोजित किया जा रहा है। पाँच दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं में खेल भावना, अनुशासन, सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहित करना है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत क्रिकेट, दौड़ प्रतियोगिता, कबड्डी, वॉलीबॉल, खो-खो, लांग जंप और रस्साकशी जैसी विभिन्न खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित की जा रही हैं। विजेता प्रतिभागियों को आकर्षक पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ बुधवार को किया गया। इस अवसर पर कर्मा देवी ग्रुप की मुख्य कार्यकारी निदेशक अंशु सिंह गौतम ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं में ऊर्जा, आत्मविश्वास और टीम भावना का विकास करना है।

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इस अवसर पर डीन अकादमिक आदित्य विक्रम सिंह, नीलेश गुप्ता, अनुराग पाण्डेय, शशांक मिश्रा, अस्मिता श्रीवास्तव , श्वेता सिंह, शालिनी सिंह, रचना सिन्हा, रघुनाथ पाल, रफी अहमद, वीर प्रताप सिंह, मुकेश मिश्रा, अज़रा सिद्दीकी, उमेश वर्मा, हृदेश पाण्डेय, कोच वंदना और पिंकी, निर्णायक विजय प्रकाश चौधरी व फैजान अहमद तथा सभी विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक व स्टाफ के सदस्य मौजूद रहे।

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सामाजिक समरसता के साथ गायघाट, पर जिला गंगा समिति द्वारा मनाया गया गंगा महोत्सव

नदियों की सुरक्षा के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय सहभागिता आवश्यक:सीडीओ

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। सामाजिक समरसता और समानता के संदेश के साथ जिला गंगा समिति, द्वारा गंगा महोत्सव 2025 का भव्य आयोजन गायघाट पर किया गया। इस कार्यक्रम ने समाज में एकता, भाईचारा और पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायक संदेश दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी प्रशांत नागर अपनी धर्मपत्नी सहित उपस्थित हुए और जनपद के किन्नर समाज (ट्रांसजेंडर समुदाय) के साथ मिलकर गंगा आरती की। इस अनोखे दृश्य ने सामाजिक समानता और समरसता की अद्भुत मिसाल पेश की। कार्यक्रम का शुभारंभ पंकज गुप्ता द्वारा भावपूर्ण गंगा वादन से हुआ, जिसके पश्चात सोनी धापा खंडेलवाल बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने अपने मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों से उपस्थित जनसमूह का हृदय जीत लिया। गंगा उत्सव के अंतर्गत आयोजित महा आरती में ट्रांसजेंडर समुदाय ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समाज में समानता का संदेश दिया। सांस्कृतिक संध्या के अंतर्गत अलंकार संगीत संस्थान के कलाकारों द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया गया। सुदामी देवी कान्वेंट स्कूल, भीटी के विद्यार्थियों ने “अपना देश, अपनी माटी” विषय पर आकर्षक प्रस्तुति दी। इसके साथ ही डी.सी.एस. के.पी.जी. कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) इकाई के स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने वालों में ए.के. उपाध्याय, रवि प्रकाश सिंह, डॉ. विशाल गुप्ता, जय प्रकाश मल्ल, रामआसरे यादव और सुधा कुमारी शामिल रहे।

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अलंकार संगीत संस्थान की ओर से तबले पर मदन श्रीवास्तव, हारमोनियम पर रोशन भारद्वाज, तथा गायन में पंकज गुप्ता, मीना साहनी, दीपक यादव और खुशबू किन्नर ने अपनी मधुर सुर और ताल से समां बाँधा।
कार्यक्रम में पी.के. पाण्डेय प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग, रामसूरत यादव एसडीओ, वन विभाग एवं दिनेश कुमार अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
पूरे आयोजन का सफल संयोजन एवं नेतृत्व डॉ. हेमंत यादव, जिला परियोजना अधिकारी, नमामि गंगे, मऊ द्वारा किया गया।

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कार्तिक पूर्णिमा पर दोहरीघाट सरयू तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, मेले में दिखी लोकसंस्कृति की झलक

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर बुधवार की भोर से ही मऊ जनपद के दोहरीघाट सरयू तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों श्रद्धालुओं ने मां सरयू में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। ऐतिहासिक रामघाट, लक्ष्मण घाट और मातेश्वरी घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। लोगों ने स्नान के बाद मंदिरों में पूजन-अर्चन, दान-पुण्य और गोदान कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। महिलाओं ने पारंपरिक रूप से पूरी-हलवा बनाकर कढ़ाई और सेहरा चढ़ाया।

विलुप्त हो रहे लोकनृत्यों की झलक ने मोहा मन
आस्था के इस महापर्व पर पारंपरिक लोकनृत्य जैसे मृंदगा, मयूरी, कहरहुवा, गोडउ आदि की मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। नर्तकियों ने पुरानी लोक परंपराओं को जीवंत कर दिया। आजमगढ़ के कलाकारों ने बताया कि वे वर्षों से कार्तिक पूर्णिमा पर लोकनृत्य कर माता सरयू से क्षेत्र की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।

मेले में जमकर हुई खरीदारी
स्नान व पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने दोहरीघाट के ऐतिहासिक मेले में जमकर खरीदारी की। महिलाओं ने गृहस्थी के सामान व सौंदर्य प्रसाधन खरीदे, जबकि पुरुषों ने खेती-बाड़ी के औजार लिए। बच्चों ने झूलों और व्यंजनों का लुत्फ उठाया।

मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
रामघाट स्थित हनुमान मंदिर, जानकी घाट, मातेश्वरी घाट और गौरी शंकर घाट पर भक्तों की भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर दान-पुण्य किया।

सुरक्षा व्यवस्था में प्रशासन रहा मुस्तैद
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए एसडीएम घोसी अशोक कुमार सिंह, सीओ जितेंद्र सिंह, ईओ मनोज कुमार यादव और चेयरमैन विनय जायसवाल पूरी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे। थाना प्रभारी आर.के. सिंह ने मेला स्थल का लगातार निरीक्षण किया।

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‘आदि कर्मयोगी योजना’ से बदलेगी वंचित बस्तियों की सूरत, सात जिलों में शुरू हुई विकास पहल

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आदि कर्मयोगी योजना’ के तहत उत्तर प्रदेश के सात जिलों में वंचित और आदिवासी बाहुल्य बस्तियों के विकास की दिशा में कार्य तेजी से शुरू हो गया है। योजना का उद्देश्य है—ग्रामीण, जनजातीय और पिछड़े समुदायों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाना।

समाज कल्याण अधिकारी रमेश कुमार ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकार की सभी विकास योजनाओं को एकीकृत कर 21 बिंदुओं पर विशेष सर्वेक्षण किया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर अतिरिक्त बजट जारी होगा।

किन जिलों में लागू हो रही है योजना

योजना के लिए बलिया, गाजीपुर, मऊ, सोनभद्र, ललितपुर, लखीमपुर खीरी और कुशीनगर जिलों का चयन किया गया है। इन जिलों की वंचित बस्तियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कैसे होगी योजना की निगरानी

राज्य मुख्यालय पर स्वास्थ्य, ग्राम्य विकास और समाज कल्याण विभाग के प्रतिनिधियों को थीम आधारित प्रशिक्षण दिया गया है। अब प्रशिक्षित अधिकारी ब्लॉक और पंचायत स्तर पर टीम बनाकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
जिला मास्टर ट्रेनर (DMT) के माध्यम से ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा कराया गया है।

मुख्य उद्देश्य

वंचित और जनजातीय क्षेत्रों का समग्र विकास, आत्मनिर्भरता और स्थानीय नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना, शिक्षा और स्वच्छता में सुधार, शासन और जनजातीय समाज के बीच संवाद को मजबूत करना

समाज कल्याण विभाग बनेगा नोडल एजेंसी

इस योजना का नोडल विभाग समाज कल्याण विभाग को बनाया गया है। सभी जिलों से प्राप्त रिपोर्टों को विभाग द्वारा संकलित कर शासन को भेजा जाएगा।
रिपोर्ट के आधार पर संबंधित गांवों के लिए विकास कार्यों का बजट स्वीकृत किया जाएगा, ताकि वंचित बस्तियों की सूरत बदली जा सके।

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गोरखपुर में पूर्व ब्लॉक प्रमुख पर छात्रा से छेड़छाड़ और दुष्कर्म की कोशिश का आरोप, FIR दर्ज

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। गोरखपुर में एक पूर्व ब्लॉक प्रमुख ईश्वर चंद जायसवाल के खिलाफ डीएलएड छात्रा से छेड़छाड़ और रेप की कोशिश के गंभीर आरोप लगे हैं। कैंट थाने में बुधवार को एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपी गोरखपुर के गोलघर स्थित बाल विहार तिराहे के निवासी हैं।

पीड़िता वाराणसी की रहने वाली 25 वर्षीय छात्रा है, जिसने आरोप लगाया है कि आरोपी रिश्ते में उसका दूर का नाना लगता है। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला

छात्रा ने बताया कि आरोपी ने उसे झांसा देकर अपने कॉलेज में डीएलएड कोर्स में दाखिला दिलाया और नौकरी लगवाने का वादा किया।
25 अक्टूबर को छात्रा परीक्षा देने के लिए गोरखपुर आई और अपने देवर-देवरानी के साथ एक होटल में ठहरी।

छात्रा के अनुसार, आरोपी ने उसका होटल बदलवाकर अपने होटल में रुकवाया और रात में कमरे में आकर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। इसके बाद उसने छात्रा के साथ जबरन कपड़े उतारने की कोशिश की और पिस्टल दिखाकर धमकाया।

छात्रा ने बताया—

“मैंने विरोध किया तो उसने कहा कि अगर नहीं मानी तो गोली मार दूंगा। तभी मैंने अपने देवर को इमरजेंसी मैसेज भेजा। वे दरवाजा पीटने लगे, तब मैंने किसी तरह खुद को छुड़ाया।”

पीड़िता ने बताया कि आरोपी अर्धनग्न अवस्था में भाग गया।

घटना के बाद FIR और जांच

यह घटना 28 अक्टूबर की बताई जा रही है। 3 नवंबर को पीड़िता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामला सार्वजनिक किया था। बुधवार को पुलिस ने कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कर ली है।

एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया,

“पीड़िता की तहरीर के आधार पर केस दर्ज किया गया है। पुलिस टीम जांच में जुटी है और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।”

आरोपी पर क्या आरोप

छात्रा को डीएलएड कोर्स और नौकरी का लालच दिया

होटल में बुलाकर जबरन कपड़े उतारने की कोशिश की

पिस्टल दिखाकर धमकी दी

विरोध करने पर मौके से फरार हुआ

पुलिस कार्रवाई जारी

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी ईश्वर चंद जायसवाल से जुड़े होटल और कॉलेज की जांच की जा रही है। पीड़िता के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी हो सकती है।

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“आख़िरी स्टेशन” – गाँव लौटे रघुवीर की जीवन यात्रा ने बदल दी माधवपुर की तस्वीर

माधवपुर/बिहार (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। यह कहानी है रघुवीर नाम के एक मजदूर की, जो ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव झेलकर अपने गाँव लौट आया। कभी दिल्ली की इमारतों में पसीना बहाने वाला रघुवीर, अब अपने गाँव माधवपुर में नई उम्मीदों की रोशनी जगा रहा है।

शाम के वक्त चलती ट्रेन में बैठा रघुवीर अपनी झोली कसकर पकड़े हुए था—पचपन की उम्र में टूटी उम्मीदों और अधूरी कहानियों के साथ। वहीं ट्रेन के दूसरे कोने में बैठी थी नेहा, दिल्ली विश्वविद्यालय की समाजशास्त्र की छात्रा, जो “ग्राम्य पलायन और सामाजिक विघटन” पर रिसर्च कर रही थी।

ट्रेन के सफर में दोनों की बातचीत ने कहानी का मोड़ बदल दिया। जब रघुवीर ने कहा—

“उस खबर में मेरा नाम नहीं था, इसलिए ज़िंदा हूँ,”
नेहा को एहसास हुआ कि आंकड़े सिर्फ़ नंबर नहीं होते, बल्कि किसी की सांसें और संघर्ष की गवाही होते हैं।

गाँव लौटा तो बदल चुका था सब कुछ

माधवपुर लौटने पर रघुवीर ने पाया कि गाँव अब पहले जैसा नहीं रहा—
कच्चे घरों की जगह पक्के मकान थे, मगर उनमें ताले ज़्यादा और लोग कम थे। खेत बटाईदारों के हवाले थे, बच्चे मोबाइल में गुम, और बूढ़े इंतज़ार में कि कोई लौट आए।

उधर नेहा अपने शोध के लिए माधवपुर पहुँची और रघुवीर से मिली। बातचीत में रघुवीर ने कहा—

“गाँव अब स्टेशन जैसा हो गया है—जहाँ से सब निकलते हैं, पर कोई लौटता नहीं।”

नेहा इस सच्चाई से गहराई तक प्रभावित हुई और तय किया कि वह सिर्फ़ शोध नहीं, परिवर्तन भी लाएगी।

नेहा और रघुवीर ने बदली गाँव की कहानी

नेहा ने रघुवीर की मदद से बच्चों के लिए “शाम का अध्ययन केंद्र” शुरू किया, जहाँ वह शिक्षा के साथ गाँव के इतिहास की कहानियाँ सुनाती।
रघुवीर बच्चों को जीवन के अनुभव साझा करता, शहर और गाँव दोनों की हकीकत बताता।

धीरे-धीरे गाँव में बदलाव आने लगा—
महिलाएँ “गाँव रोजगार समिति” के तहत बांस की टोकरियाँ बनाने लगीं, कुछ युवा खेती की ओर लौटे। माधवपुर में नई उम्मीद की फसल उगने लगी।

“आख़िरी स्टेशन” से नई शुरुआत तक

जब नेहा का शोध पूरा हुआ और जाने का वक्त आया, उसने रघुवीर से पूछा—

“काका, अब क्या सोचते हैं, माधवपुर आपका आख़िरी स्टेशन है?”

रघुवीर मुस्कुराया—

“हाँ बिटिया, आख़िरी स्टेशन तो यही है… पर अब यहाँ रुकने का मतलब अंत नहीं, नई शुरुआत है। जब तक आदमी दूसरों के लिए कुछ कर सकता है, तब तक उसकी यात्रा जारी रहती है।”

नेहा की आँखों में आँसू थे, मगर दिल में गर्व और मुस्कान थी। ट्रेन आगे बढ़ी, और रघुवीर अब अकेला नहीं रहा—पूरे गाँव का ‘रघु काका’ बन गया।

लेखक: सुनीता कुमारी, बिहार

Japan में भालुओं का आतंक: 6 महीने में 100 से ज्यादा हमले, 12 की मौत; हालात संभालने के लिए सेना तैनात

टोक्यो (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जापान के अकिता प्रांत में भालुओं का आतंक चरम पर है। पिछले छह महीनों में 100 से ज्यादा हमलों में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सरकार को सेल्फ-डिफेंस फोर्स (SDF) यानी सेना की तैनाती करनी पड़ी।

यह ऑपरेशन काजुनो शहर में शुरू किया गया है, जहां स्थानीय प्रशासन ने लोगों को जंगलों में न जाने, अंधेरा होने के बाद घर से बाहर न निकलने और भालुओं को भगाने के लिए घंटियां रखने की सलाह दी है।

भालुओं की संख्या और हमले बढ़े

पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक, अप्रैल से अब तक देशभर में भालुओं के 20,792 sightings दर्ज की गई हैं — जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। केवल अकिता और इवाते प्रांत में ही हमलों का दो-तिहाई हिस्सा हुआ है।

अकिता के अधिकारियों ने बताया कि भालू देखे जाने की घटनाएं छह गुना बढ़कर 8,000 से ज्यादा हो गई हैं। इसके बाद प्रांतीय गवर्नर ने SDF से मदद मांगी।

आर्मी और शिकारी मिलकर कर रहे नियंत्रण कार्य

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को करीब 30,000 की आबादी वाले काजुनो शहर में सेना के ट्रक, जीप और बुलेटप्रूफ जैकेट पहने सैनिक पहुंचे। सैनिक भालुओं को पकड़ने के लिए बॉक्स ट्रैप लगाने और जांच में मदद करेंगे, जबकि प्रशिक्षित शिकारी उन्हें मारने का काम करेंगे।

हमलों से दहशत में लोग

हाल के महीनों में भालुओं ने सुपरमार्केट, बस स्टॉप और रिजॉर्ट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी लोगों पर हमला किया है। माना जा रहा है कि जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण इलाकों से पलायन के कारण भालू भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों में आ रहे हैं।

भालुओं का वजन और प्रजाति

जापान के काले भालू का औसत वजन 130 किलो तक होता है, जबकि होक्काइडो के भूरे भालू का वजन 400 किलो तक पहुंच सकता है। इससे पहले भी जापान ने 10 साल पहले वाइल्डलाइफ कंट्रोल के लिए सेना को तैनात किया था।

📰 बरहज में बड़ा हादसा टला: सरयू नदी में श्रद्धालुओं से भरी नाव पलटी, प्रशासन की लापरवाही उजागर

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।देवरिया जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बरहज घाट पर सरयू नदी में आज बड़ा हादसा टल गया, जब श्रद्धालुओं से भरी एक नाव अचानक नदी के बीचोंबीच पलट गई। गनीमत रही कि आसपास मौजूद ग्रामीणों और अन्य स्नानार्थियों की सूझबूझ से सभी लोगों की जान बच गई, वरना हादसा गंभीर रूप ले सकता था।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन और पुलिस की लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने बड़े स्नान पर्व और धार्मिक आयोजन के दौरान भी प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा और निगरानी की उचित व्यवस्था नहीं की।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छोटी नाव में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को बैठा दिया गया, जिससे नाव असंतुलित होकर पलट गई। कई श्रद्धालु नदी में डूबने से बाल-बाल बचे।
स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की तत्परता से सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया।
लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा बल, गोताखोर दल और नावों की जांच व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की होती, तो ऐसी स्थिति ही न बनती।
घटना के बाद बरहज क्षेत्र में प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल उठने लगे हैं। श्रद्धालुओं ने मांग की है कि नाव संचालकों की जांच कर नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी अनहोनी से बचा जा सके।

🗳️ जनहित की पुकार: बागापार पंचायत के ग्रामीण बोले — शंकरपुर व पिपरा विद्यालयों में बने मतदान केन्द्र!

ग्रामीणों ने डीएम महराजगंज को सौंपा मांगपत्र, बोले— दूरी और कठिनाई के कारण मतदाताओं को झेलनी पड़ती है परेशानी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।ग्राम पंचायत बागापार के ग्रामीणों ने आगामी पंचायत, विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मतदान केन्द्रों की संख्या बढ़ाने की जनहितपूर्ण मांग की है। इस संबंध में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी महराजगंज को एक मांगपत्र सौंपकर शंकरपुर और पिपरा स्थित प्राइमरी विद्यालयों को नए मतदान केन्द्र के रूप में घोषित किए जाने की अपील की है।

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ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत बागापार विकासखंड और तहसील सदर की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में से एक है, जो लगभग 28 टोलों में बंटी हुई है। वर्तमान में अधिकांश मतदाताओं को मतदान के दिन काफी दूरी तय कर बागापार खास स्थित विद्यालयों में बने मतदान केन्द्रों तक पहुंचना पड़ता है।

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इससे विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग मतदाताओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।ग्रामीणों ने बताया कि किशोरपुर, करनहिया, बटौरा, शिवपुर और शंकरपुर टोले के लिए शंकरपुर में पहले से ही एक प्राइमरी विद्यालय संचालित है, जो मतदाताओं के लिए सबसे उपयुक्त स्थान हो सकता है।
इसी प्रकार अवधपुर, अमरुआं, रामनगर (बनहियां), लक्ष्मीपुर और पिपरा क्षेत्रों के लिए पिपरा का विद्यालय स्वाभाविक रूप से सुविधाजनक केन्द्र है।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि इन दोनों विद्यालयों को मतदान केन्द्र बनाया जाता है तो मतदान प्रतिशत में वृद्धि होगी, मतदाताओं को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी।
ग्रामीणों ने इसे सिर्फ एक मांग नहीं बल्कि जनहित की आवश्यकता बताया है, जिसे प्रशासन को गंभीरता से लेना चाहिए।

इस मांगपत्र पर उमेश चन्द मिश्र, राजू चौहान, समीम, सतीश शुक्ला, अजय यादव, शब्बीर अली, मजीद, रामकुमार, सुरेन्द्र पाण्डेय, कृष्णभूषण, सोमनाथ शुक्ला (पूर्व ग्राम प्रधान), रामकनल, अरविन्द, सुनील, अनिरुद्ध, रवि शंकर पटेल सहित अनेक ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।

ग्रामीणों ने जिला निर्वाचन अधिकारी से आग्रह किया है कि दोनों विद्यालयों का स्थल निरीक्षण (सर्वे) कर जल्द इन्हें मतदान केन्द्र के रूप में स्वीकृत किया जाए ताकि अधिकाधिक मतदाता सहजता से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

योगी आदित्यनाथ ने दी एक नई दिशा—माफिया के कब्ज़े से छुड़ाई गई ज़मीन पर अब बसेगा गरीबों का घर

योगी सरकार का बड़ा कदम, 72 फ्लैटों की चाबियाँ गरीबों को सौंपीं”

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने माफियाओं पर एक और बड़ा प्रहार किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (5 नवंबर) को राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके हज़रतगंज स्थित डालीबाग के पास माफिया मुख्तार अंसारी के कब्ज़े से मुक्त कराई गई ज़मीन पर बने 72 फ्लैटों की चाबियाँ गरीब परिवारों को सौंपीं।
यह ऐतिहासिक कदम न केवल अवैध कब्ज़ों के खिलाफ सरकार की “ज़ीरो टॉलरेंस नीति” को मज़बूती देता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अब उत्तर प्रदेश में “माफिया का साम्राज्य नहीं, गरीबों का हक़ चलेगा।”

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🏠 सरदार वल्लभभाई पटेल आवास योजना के तहत बना नया सपना
सरकार द्वारा इस ज़मीन पर सरदार वल्लभभाई पटेल आवासीय योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 72 आधुनिक फ्लैट तैयार किए गए हैं।
प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल: 36.65 वर्ग मीटर
संरचना: तीन ब्लॉक, भूतल और तीन मंजिलें
स्थान: मुख्य 20 मीटर चौड़ी बंधा रोड, बालू अड्डा, 1090 चौराहा, नरही, सिकंदरबाग और हज़रतगंज से बेहद नज़दीक।
यह आवासीय परियोजना गरीबों के लिए सम्मानजनक जीवन का प्रतीक बनकर उभरी है।
🎟️ लॉटरी से हुआ चयन, हज़ारों ने किया आवेदन इन फ्लैटों का आवंटन 4 नवंबर को लॉटरी प्रणाली से किया गया।
पंजीकरण की प्रक्रिया 4 अक्टूबर से 3 नवंबर 2025 तक चली, जिसमें करीब 8,000 आवेदकों ने हिस्सा लिया।यह आँकड़ा दर्शाता है कि राजधानी जैसे शहरों में किफायती और सुरक्षित आवास की मांग कितनी बढ़ रही है।
💰 कीमत में राहत, सुविधाओं में आधुनिकता हर फ्लैट की कीमत मात्र 10.70 लाख रुपये तय की गई है, जबकि आसपास के इलाके का बाजार मूल्य लगभग 1 करोड़ रुपये तक है।
परिसर में उपलब्ध सुविधाएँ —
स्वच्छ पेयजल और नियमित बिजली आपूर्ति
दोपहिया पार्किंग,सुरक्षित परिसर,विकसित सड़कें और हरित पार्क,योगी सरकार का यह कदम गरीब वर्ग को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दे रहा है।
💬 मुख्यमंत्री योगी का स्पष्ट संदेश — “माफिया का अंत तय है”
डीजीपी भवन के एकता वन के सामने आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा “माफिया को हटाया जाएगा और गरीबों के लिए घर बनाए जाएँगे।
माफिया किसी का नहीं होता, वह गरीबों का शोषण करता है।
अब उत्तर प्रदेश में गरीबों की ज़मीन पर किसी का कब्ज़ा नहीं चलेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि जैसे लखनऊ और प्रयागराज में कार्रवाई हुई, वैसे ही राज्यभर में भू-माफियाओं पर शिकंजा जारी रहेगा।
✊ सामाजिक न्याय और समान विकास की नई तस्वीर
यह कार्यक्रम सिर्फ़ फ्लैट बाँटने का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और प्रशासनिक प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।
यह दिखाता है कि योगी सरकार माफियाओं से ज़मीन वापस लेकर उसे जनता की भलाई के लिए उपयोग कर रही है।
यह भूमि हस्तांतरण न केवल कानूनी व्यवस्था की जीत है, बल्कि गरीबों के सपनों की पुनर्स्थापना भी है।
अब जहाँ कभी अपराधियों का कब्ज़ा था, वहीं अब गरीबों के बच्चे नए सपने बुनेंगे।
📰 यह कदम उत्तर प्रदेश में एक नए युग की शुरुआत है — जहाँ सरकार न केवल अपराध पर नियंत्रण कर रही है बल्कि न्यायसंगत पुनर्वितरण का उदाहरण भी पेश कर रही है।
योगी आदित्यनाथ का यह संदेश पूरे देश में एक प्रेरणा बन सकता है कि जब प्रशासन ईमानदार और दृढ़ हो, तो माफिया का साम्राज्य ढह सकता है और गरीबों का हक़ खिल सकता है।

मासूम पर बेरहमी: मोबाइल चोरी के शक में नाबालिग को उल्टा लटकाकर पीटा, पांच पर मुकदमा दर्ज – दो हिरासत में

🚨 महराजगंज से बड़ी खबर मानवता को झकझोर देने वाली घटना

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।थाना घुघली क्षेत्र के ग्राम घघरुआ खड़ेसर से एक दिल दहला देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक नाबालिग बच्चे को उल्टा लटकाकर कुछ लोग पूछताछ और मारपीट करते दिखे। इस अमानवीय कृत्य ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और संवेदना की लहर पैदा कर दी है।
पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मामले की जांच की। जांच में सामने आया कि यह घटना दिनांक 03 नवंबर 2025 की है, जब बालक पर मोबाइल चोरी का आरोप लगाते हुए गांव के कुछ लोगों ने उसकी पिटाई की थी।

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👮 पुलिस की तत्परता से कार्रवाई
पीड़ित बच्चे की मां द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर पांच व्यक्तियों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया गया है।
पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि शेष आरोपियों की तलाश की जा रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक महराजगंज ने बताया कि घटना की गहन जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण रखते हुए क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखी है।

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💔 समाज के लिए प्रश्न
एक मासूम पर इस तरह की हिंसा ने समाज के नैतिक मूल्यों पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
बच्चे की गलती सिद्ध किए बिना उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि मानवता के विरुद्ध क्रूरता भी है।

वादों का मेला, हकीकत से मुँह मोड़ती सियासत

✍️ नवनीत मिश्र
बिहार में विधानसभा चुनावों दिन प्रतिदिन राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। पटना से लेकर गाँव-गाँव तक सियासी हलचल तेज़ है, मंचों पर भाषणों की गूंज है, और जनता के बीच फिर वही पुराने वादों की फेहरिस्त दोहराई जा रही है। हर दल अपने घोषणापत्र में बिहार को नई दिशा देने, बेरोज़गारी मिटाने और विकास का नया अध्याय लिखने का दावा कर रहा है। परंतु सवाल यह है कि इन दावों में कितनी सच्चाई है और कितने वादे चुनावी हवा के साथ उड़ जाने वाले हैं।
बिहार की राजनीति में वादों की परंपरा कोई नई नहीं है। हर चुनाव में जनता को सुनने को मिलता है। “हर घर को नौकरी”, “हर गाँव को सड़क”, “हर हाथ को काम”। लेकिन जैसे ही चुनावी बयार थमती है, वही वादे सत्ता के गलियारों में खो जाते हैं। घोषणापत्रों में जो चमक दिखती है, वह अक्सर वास्तविकता की धूप में फीकी पड़ जाती है। यही कारण है कि जनता के मन में अब एक अनकहा अविश्वास घर कर गया है।
बिहार के युवा इस अविश्वास के सबसे बड़े शिकार हैं। बेरोज़गारी राज्य की सबसे गंभीर समस्या बनी हुई है। लाखों शिक्षित युवक रोज़गार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, सूरत या पंजाब जैसे राज्यों की ओर पलायन को मजबूर हैं। चुनावी मंचों पर हर पार्टी रोजगार के लाखों अवसर देने की घोषणा करती है, लेकिन न तो पर्याप्त उद्योग लग पाते हैं, न शिक्षा और कौशल विकास की योजनाओं को धरातल पर वह रूप मिलता है जिसकी उम्मीद की जाती है। रोजगार सृजन के बजाय सरकारी नौकरियों के खाली पद वर्षों तक भर्ती की प्रतीक्षा में पड़े रहते हैं।
विकास की बात करने वाले नेताओं के भाषणों में आंकड़ों की भरमार होती है, मगर ज़मीनी सच्चाई अक्सर इन आंकड़ों से मेल नहीं खाती। सड़कों, अस्पतालों और शिक्षा संस्थानों की हालत आज भी सुधार की प्रतीक्षा में है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएँ सीमित हैं, किसान बिचौलियों के बीच पिस रहे हैं, और शहरों में बढ़ते प्रदूषण और बेरोज़गारी ने जनजीवन को कठिन बना दिया है।
बिहार की राजनीति की सबसे बड़ी बाधा जातीय समीकरणों में उलझी सोच है। चुनाव आते ही उम्मीदवारों का चयन, नारों का निर्धारण, और गठबंधनों की दिशा, सब कुछ जातीय गणित से तय होता है। इस प्रवृत्ति ने विकास की राजनीति को पीछे धकेल दिया है। जब तक नीतियों का केंद्र समाज की समानता और आर्थिक सशक्तिकरण नहीं बनेगा, तब तक बिहार अपने वास्तविक विकास की राह पर नहीं बढ़ पाएगा।
लोकलुभावन वादे भी चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं। मुफ्त राशन, गैस सिलेंडर, लैपटॉप, साइकिल या छात्रवृत्ति, ये योजनाएँ सुनने में आकर्षक लगती हैं, परंतु इनकी वित्तीय स्थिरता पर बहुत कम विचार किया जाता है। जब सरकारें इन वादों को पूरा करने के लिए राजकोष पर अतिरिक्त भार डालती हैं, तो इसका असर दीर्घकालिक विकास योजनाओं पर पड़ता है। ऐसी राजनीति जनता को तात्कालिक राहत तो देती है, पर स्थायी समाधान नहीं।
अब वक्त आ गया है कि बिहार की जनता केवल वादों की चमक में न उलझे, बल्कि उनके पीछे छिपी नीयत और नीति की सच्चाई को परखे। लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति मतदाता के पास होती है, और जब वह जवाबदेही की मांग करता है, तभी राजनीति अपने असली मायने में जनता की सेवा का माध्यम बनती है। वोट अब केवल नारों पर नहीं, काम और निष्ठा पर पड़ने चाहिए।
बिहार को वादों की नहीं, नीतियों की राजनीति की ज़रूरत है। घोषणाओं से ज़्यादा महत्वपूर्ण उनका क्रियान्वयन है। हर दल को यह समझना होगा कि जनता अब भावनाओं से नहीं, तथ्यों से प्रभावित होती है। चुनावी मंचों पर गूंजने वाले वादों की परीक्षा अब जनता के विवेक से होगी, और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
बिहार के मतदाताओं के सामने अब दो रास्ते हैं। एक ओर वे वादों के आकर्षण में बह सकते हैं, और दूसरी ओर वे विवेकपूर्ण मतदान कर राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं। अगर जनता ने विकास, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी, तो आने वाले वर्षों में बिहार उस स्थिति में पहुंच सकता है, जिसकी कल्पना दशकों से की जा रही है।
हमारा मनना है कि लोकतंत्र में वादा तभी सार्थक है जब उसे नीति, नीयत और परिणाम से जोड़ा जाए। वादों की राजनीति नहीं, नीतियों की राजनीति ही बिहार के भविष्य का आधार बन सकती है।

लकीर का फ़क़ीर

लकीर का फ़क़ीर मतलब
रीति-रिवाजों- मान्यताओं
पर आँख बंद करके चलते
रहना बस चलते रहना है।

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कुरीतियों- परंपराओं का
अंधानुकरण और समय के
साथ हो रहे बदलावों को न
देखना न आत्मसात करना है।

लकीर का फ़क़ीर होना
कभी कभी अच्छा होता है,
छोटी लकीर से बड़ी दूसरी
लकीर बनाना गर्व होता है।

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लकीर का फ़क़ीर बनना,
भेंड़ चाल चलना जैसा भी है,
रीतियाँ कुरीतियाँ न बने,
लकीर से हट जाना भी है।

लकीर के समानांतर एक
और अन्य लकीर खींचना,
बुद्धिमानी भी दिखलाना है,
पर अनदेखी अवमानना है।

आदित्य लक्ष्मण रेखा पार
करना संकल्प प्रतिकार था,
सीता माता व रावण के लिये
अभिशाप सा बन गया था।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

8 से 11 नवम्बर तक नहीं होगी जमीनों की रजिस्ट्री

लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में आगामी 8 नवम्बर से 11 नवम्बर तक (चार दिन) जमीनों की रजिस्ट्री का कार्य पूरी तरह बंद रहेगा। इस अवधि में स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर कोई भी लेखपत्र पंजीकरण या आवेदन प्रक्रिया नहीं की जा सकेगी।

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उत्तर प्रदेश की महानिरीक्षक निबंधन आईएएस नेहा शर्मा ने इस संबंध में सभी सहायक महानिरीक्षकों निबंधन को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में बताया गया है कि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल को NIC द्वारा संचालित मेघराज क्लाउड सर्वर से *नेशनल गवर्नमेंट क्लाउड (NGC) पर स्थानांतरित किया जा रहा है।

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इस तकनीकी परिवर्तन के चलते 8 से 11 नवम्बर तक ऑनलाइन रजिस्ट्री का कार्य अस्थायी रूप से बाधित रहेगा। 12 नवम्बर से रजिस्ट्री का कार्य सामान्य रूप से प्रारंभ हो जाएगा।